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कर्नाटक हाईकोर्ट ने ईडी जब्ती आदेश पर रोक की अवधि बढ़ाई, शाओमी इंडिया को रॉयल्टी छोड़कर भुगतान के लिए ओवरड्राफ्ट सुविधा प्राप्त करने की अनुमति दी

Shahadat
12 May 2022 9:46 AM GMT
कर्नाटक हाईकोर्ट ने ईडी जब्ती आदेश पर रोक की अवधि बढ़ाई, शाओमी इंडिया को रॉयल्टी छोड़कर भुगतान के लिए ओवरड्राफ्ट सुविधा प्राप्त करने की अनुमति दी
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 29 अप्रैल को जारी आदेश पर रोक लगाते हुए अपने पहले के अंतरिम आदेश को बढ़ा दिया। इस आदेश के द्वारा उसने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के प्रावधानों के तहत मेसर्स शाओमी इंडिया (Xiaomi India) प्राइवेट लिमिटेड से 5551.27 करोड़ रुपये जब्त किए थे। ।

जस्टिस एस सुनील दत्त यादव की एकल न्यायाधीश पीठ ने स्पष्ट किया कि इस बीच शाओमी इंडिया को बैंक ओवरड्राफ्ट के माध्यम से रॉयल्टी छोड़कर स्मार्टफोन के निर्माण और बिक्री के लिए आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए विदेशी संस्थाओं को भुगतान करने की अनुमति दी गई है।

कोर्ट ने कहा,

"पहले दिए गए अंतरिम आदेश को अगली तारीख तक बढ़ा दिया गया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एम बी नरगुंड का कहना है कि दिन के दौरान स्थगन आदेश को वेकेटिंग करने के लिए आवेदन दायर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां तक ​​​​याचिकाकर्ता द्वारा आगे के अंतरिम आदेश की मांग की गई है, मामले में सुनवाई की आवश्यकता है। समय की कमी के कारण 23 मई तक के लिए स्थगित मामले की सुनवाई नहीं हो सकती। यह स्पष्ट किया जाता है कि याचिकाकर्ता ओवरड्राफ्ट लेने और रॉयल्टी छोड़कर ऐसे ओवरड्राफ्ट से भुगतान करने के लिए स्वतंत्र है। यह उसके और बैंक के बीच का मामला है। मामले को अगली सुनवाई के लिए 23 मई को सूचीबद्ध करें।"

सीनियर एडवोकेट एस गणेश ने पहले के आदेश पर अदालत से स्पष्टीकरण मांगा, क्योंकि बैंकों ने कंपनी से अनुरोध किया कि वह रॉयल्टी के अलावा विदेशी भुगतान के भुगतान पर अदालत से स्पष्टीकरण मांगे।

यह प्रस्तुत किया गया,

"मुझे दैनिक आधार पर पेटेंट बनाने की आवश्यकता है। प्राधिकरण का आक्षेपित आदेश रॉयल्टी तक ही सीमित है।"

एएसजी नरगुंड ने प्रस्तुत किया,

"याचिकाकर्ता को जब्त राशि को बैंक में रखने दें और बाकी चीजें उन्हें संचालित करने दें।"

उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि याचिका पर आपत्तियों के बयान दाखिल किए गए हैं।

पांच मई को अदालत ने कंपनी द्वारा दायर याचिका पर प्रतिवादी को आकस्मिक नोटिस जारी किया था।

कोर्ट ने तब कहा था,

"उत्तरदाताओं को एक से पांच तक उत्तरदाताओं को आकस्मिक नोटिस जारी किया जाए। प्रतिवादी नंबर तीन द्वारा पारित आदेश दिनांक 29/04/2022 के संचालन पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, इस शर्त के अधीन रोक दिया गया कि याचिकाकर्ता बैंक अकाउंट को संचालित करता है, जो कंपनी की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को करने के उद्देश्य से आक्षेपित आदेश के तहत जब्त किया गया है।"

कंपनी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एस गणेश और एडवोकेट साजन पूवैया ने प्रस्तुत किया कि भारत के बाहर स्थित तीन कंपनियों को भुगतान की गई टेक्नोलॉजी रॉयल्टी का भुगतान फेमा अधिनियम की धारा चार के उल्लंघन में नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे भुगतान आयकर विभाग द्वारा वैध माने गए हैं। इसे कटौती के रूप में अनुमति दी गई है और यह भी माना कि यह मूल्य वर्धित गतिविधि है, जो केंद्र सरकार के विवाद समाधान पैनल द्वारा पारित आदेश से स्पष्ट है, जिसमें तीन वरिष्ठ आयुक्त शामिल हैं।

इसके अलावा, उन्होंने प्रस्तुत किया कि फेमा की धारा 37 ए को लागू करने के लिए शर्त यह है कि राशि विदेशी स्थान पर अकाउंट में पड़ी होगी और किसी भी आरोप के अभाव में इसे भारत वापस लाने के लिए उपलब्ध होनी चाहिए। याचिकाकर्ता द्वारा निर्धारित विदेशी मुद्रा दूसरे देश में स्थित अकाउंट में पड़ी है, अधिनियम की धारा 37ए के तहत जब्ती का आक्षेपित आदेश कानून में टिकाऊ नहीं है।

यह भी तर्क दिया गया कि प्रौद्योगिकी रॉयल्टी का भुगतान 2016 से अब तक की अवधि के दौरान और अधिकृत डीलरों के माध्यम से किया गया है। ऐसी राशि की सामग्री के अभाव में भारत के बाहर अधिनियम की धारा चार के उल्लंघन में जब्ती का आदेश आयोजित किया गया है। यह कानून की नज़रों में टिकाऊ नहीं है। इसके अलावा उन्होंने प्रस्तुत किया कि भारत में मोबाइल फोन के अन्य निर्माताओं/डीलरों द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका में एक ही कंपनी को समान तकनीक के लिए किए गए भुगतान पर सवाल नहीं उठाया गया है और उक्त कंपनियों के खिलाफ अधिनियम की धारा चार के उल्लंघन में विदेशी मुद्रा रखने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि रिट याचिका सुनवाई योग्य है। हालांकि अपील का वैकल्पिक उपाय प्रदान किया गया है, क्योंकि फेमा अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन नहीं किया गया है। उत्तरदाताओं के लिए कोई उपस्थित नहीं हुआ। जिसके बाद कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 12 मई की तारीख तय की।

ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज में कहा गया,

"शाओमी इंडिया चीन स्थित शाओमी ग्रुप की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। कंपनी के बैंक अकाउंट्स में पड़ी 5551.27 करोड़ रुपये की राशि को ईडी ने जब्त कर लिया है। ईडी ने इस वर्ष फरवरी माह में कंपनी द्वारा किए गए अवैध धन प्रेषण के संबंध में जांच शुरू की थी।

इसके अलावा, इसने कहा,

"कंपनी ने वर्ष 2014 में भारत में अपना कामकाज शुरू किया और वर्ष 2015 से पैसा भेजना शुरू कर दिया। कंपनी ने तीन विदेशी आधारित संस्थाओं को रॉयल्टी की आड़ में INR 5551.27 करोड़ के बराबर विदेशी मुद्रा भेजी है, जिसमें एक शाओमी समूह इकाई शामिल है। रॉयल्टी के नाम पर इतनी बड़ी राशि उनके चीनी मूल समूह संस्थाओं के निर्देशों पर प्रेषित की गई थी। अन्य दो यूएस-आधारित असंबंधित संस्थाओं को प्रेषित राशि भी शाओमी समूह की संस्थाओं के अंतिम लाभ के लिए थी।"

शाओमी इंडिया ब्रांड नाम एमआई (MI) के तहत भारत में मोबाइल फोन का एक व्यापारी और वितरक है। शाओमी इंडिया भारत में निर्माताओं से पूरी तरह से निर्मित मोबाइल सेट और अन्य उत्पाद खरीदता है। शाओमी इंडिया ने उन तीन विदेशी-आधारित संस्थाओं से किसी भी सेवा का लाभ नहीं उठाया है, जिन्हें इस तरह की राशि हस्तांतरित की गई है। समूह संस्थाओं के बीच बनाए गए विभिन्न असंबंधित दस्तावेजी अग्रभागों की आड़ में कंपनी ने विदेश में रॉयल्टी की आड़ में इस राशि को प्रेषित किया जो फेमा की धारा 4 का उल्लंघन है। कंपनी ने विदेशों में पैसा भेजते समय बैंकों को भ्रामक जानकारी भी दी।

सीनियर एडवोकेट एस गणेश, एडोवेकट साजन पूवैया और एडवोकेट आदित्य विक्रम भट, दीपक चोपड़ा, हरप्रीत अजमानी, श्रवणथ आर्य तंद्रा, अमोघ आनंद, प्रतिभाभानु और मिथेल आर रेड्डी ने शाओमी का प्रतिनिधित्व किया।

केस शीर्षक: Xiaomi Technology India Private Limited बनाम Union of India

केस नंबर: WP 9182/2022

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