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राजस्थान हाईकोर्ट में पति-पत्नी ने जज के रूप शपथ ली
राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव ने दो नए जजों जस्टिस शुभा मेहता और जस्टिस कुलदीप माथुर को शपथ दिलाई।यह शपथ ग्रहण समारोह उल्लेखनीय रहा, क्योंकि राजस्थान हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार पति-पत्नी की जोड़ी एक ही समय में हाईकोर्ट में बैठेगी।जस्टिस शुभा मेहता की शादी जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल से हुई है। उन्हें 6 नवंबर, 2019 को बेंच में पदोन्नत किया गया था और तब से वह राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।राजस्थान हाईकोर्ट में कुल 50 न्यायाधीशों की...
सीआरपीसी की धारा 102(3)- 'मजिस्ट्रेट को बैंक अकाउंट की जब्ती की सूचना न देना जब्ती को अवैध नहीं बनाता': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया कि मजिस्ट्रेट को बैंक अकाउंट की जब्ती (सीआरपीसी की धारा 102 के तहत पुलिस द्वारा जब्त) की सूचना न देना जब्ती को अवैध नहीं बनाता है।जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सरोज यादव की खंडपीठ ने इस प्रकार देखा क्योंकि यह अमित सिंह बनाम यूपी राज्य और 3 अन्य 2022 लाइव लॉ (एबी) 207 के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर भरोसा जताया और सहमत था।मामले में शामिल प्रावधानों के बारे मेंयह ध्यान दिया जा सकता है कि सीआरपीसी की धारा 102 कुछ संपत्ति को जब्त करने के लिए पुलिस अधिकारियों की...
एनसीडीआरसी ने मेडिकल लापरवाही मामले में अस्पताल और डॉक्टरों को जिम्मेदार पाया
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (National Consumer Disputes Redressal Commission-NCDRC) की जस्टिस आर.के. अग्रवाल, अध्यक्ष और डॉ. एस.एम. कांतिकर, सदस्य वाली बेंच ने देखा कि रोगी की देखभाल का कर्तव्य एडमिशन के समय से शुरू होता है। देखभाल की जिम्मेदारी मरीज के अस्पताल से छुट्टी मिलने तक इलाज करने वाले डॉक्टर और अस्पताल पर होती है।पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि केरल के तिरुवनंतपुरम में एसपी फोर्ट अस्पताल में डॉक्टर सर्जन, जूनियर डॉक्टर और एनेस्थेसियोलॉजिस्ट के बीच अपने कर्तव्य से बच...
कोर्ट के समक्ष पत्नी की उपस्थिति सुनिश्चित करने और उसे स्वतंत्र करने का निर्देश देने की मांग: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतर-धार्मिक विवाह में पति की हैबियस कॉर्पस याचिका को अनुमति दी
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में याचिकाकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका को अनुमति दी थी जिसमें पुलिस अधिकारियों को अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता की पत्नी की उपस्थिति सुनिश्चित करने और उसे स्वतंत्र करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।मामले के तथ्य यह थे कि याचिकाकर्ता और कॉर्पस के बीच ईसाई धर्म के रीति-रिवाजों के अनुसार माता-पिता और कॉर्पस के अन्य रिश्तेदारों की इच्छा के विरुद्ध अंतर-धार्मिक विवाह किया गया था। उनकी शादी के अनुष्ठापन के कारण, कॉर्पस के माता-पिता और रिश्तेदार उनके खिलाफ थे और पुलिस...
एससी/एसटी एक्ट सिर्फ इसलिए नहीं लगाया जा सकता क्योंकि पीड़िता की मां अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखती है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि एक व्यक्ति, जिसके माता या पिता में से एक अनुसूचित जाति से हैं और अन्य अगड़ी जाति के हैं, उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपनी शिकायत में विशेष रूप से दर्ज कराना होगा की वह अनुसूचित जाति का है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की सिंगल जज पीठ ने कहा, "हालांकि मां शादी के बाद अनुसूचित जाति की स्थिति नहीं खोती, शिकायत में शामिल बेटे स्थिति कि वह अनुसूचित जाति से है और आरोपी अधिनियम के तहत सजा के लिए उत्तरदायी हैं, यह स्वयंसिद्ध नहीं...
पत्नी को भरण-पोषण देते समय पति द्वारा तलाकशुदा बहन की सहायता के लिए खर्च की गई राशि को ध्यान में रखा जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि भारत में एक भाई अपनी तलाकशुदा बहन को नहीं छोड़ता है और उसी के अनुसार, पत्नी के पक्ष में भरण-पोषण का आदेश पारित करते समय बहन पर उसके खर्च को ध्यान में रखा जाना चाहिए।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कहा,इस बात में कोई संदेह नहीं है कि बहन को अपने पति से भरण-पोषण मिलता है, लेकिन जब भी उसे उसकी मदद की आवश्यकता हो, भाई उसके दुखों का मूक दर्शक नहीं बन सकता। भाई-बहन की मदद के लिए भाई के खर्च की सूची में कुछ प्रावधान करने की आवश्यकता है ...हालांकि प्रतिवादी की आय को बांटते समय एक...
ट्रायल कोर्ट को केवल पक्षकारों के मौलिक अधिकारों को स्वीकार करने वाले वकील द्वारा दायर मेमो पर डिक्री/आदेश पारित नहीं करना चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि निचली अदालतों को पार्टी के वकील की ओर से दायर मेमो पर कार्रवाई करने से बचना चाहिए। जस्टिस एन शेषसायी ने कहा कि हालांकि पक्षकारों के वकील की ओर से दायर मेमो पर विचार करने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि मेमो और परिणामी आदेश का पक्षकारों के अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।अदालत ने यह भी कहा कि यद्यपि वकील वकालतनामा के माध्यम से अपने मुवक्किल की ओर से कार्य करने के लिए अधिकृत है, उसे समझौता करने के लिए एक स्पष्ट अधिकार दिया...
धारा 498-ए आईपीसी के तहत आरोपी को तेलंगाना हाईकोर्ट ने 6 महीने के लिए विदेश यात्रा की अनुमति दी
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में आईपीसी की धारा 498-ए के तहत आरोपी एक याचिकाकर्ता को रोजगार के लिए विदेश यात्रा करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने उसके समक्ष शर्त रखी कि यात्रा के लिए वह ट्रायल कोर्ट के समक्ष एक लाख रुपये की राशि के लिए एक व्यक्तिगत बांड निष्पादित करे और प्रस्थान से पहले उसी राशि के लिए बैंक गारंटी की पेशकश करे।"यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि याचिकाकर्ता निर्धारित समय के भीतर भारत लौटने में विफल रहता है, तो याचिकाकर्ता द्वारा पेश किया गया व्यक्तिगत बांड और बैंक गारंटी / एफडीआर बिना...
दुष्कर्मः पीड़िता आरोपों से पलटी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत दी, पीड़िता को दिए मुआवजे की वापसी का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में बलात्कार के एक आरोपी को इस तथ्य के मद्देनजर जमानत दी थी कि पीड़िता ने मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया था और उसे पक्षद्रोही घोषित कर दिया गया था।जस्टिस संजय कुमार सिंह की खंडपीठ ने निचली अदालत को उसे भुगतान किए गए मुआवजे की वापसी के लिए कदम उठाने और मामले में धारा 344 सीआरपीसी [झूठे सबूत देने के लिए ट्रायल के लिए समरी प्रोसीजर] का अनुपालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश जारी किया।कोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा, "सामाजिक हित को ध्यान में...
वैवाहिक विवादों में एफआईआर रद्द करना स्वागत योग्य : दिल्ली हाईकोर्ट ने ससुर के खिलाफ बलात्कार की एफआईआर रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक अपराधों में एफआईआर रद्द करना स्वागत योग्य है, क्योंकि इससे पता चलता है कि पक्षकारों ने उनके बीच लंबित वैवाहिक मामले के कारण उनके दुख समाप्त करने का फैसला किया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने कहा," तथ्य यह है कि अब आईपीसी की धारा 376 और धारा 354 का उपयोग आईपीसी की धारा 498-ए के साथ किया गया, जिसमें बाद में समझौता हुआ और शिकायत रद्द करने के लिए इस न्यायालय में लाया गया। इसे रोकने की जरूरत है।"अदालत ने भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 376, 377, और धारा...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (30 मई, 2022 से 3 जून, 2022 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।सीपीसी का आदेश XXI नियम 26 | कोर्ट पहले ही दिन निष्पादन पर रोक की अर्जी पर फैसला करने के लिए बाध्य नहीं, डिक्री धारक का जवाब मांगने का हकदार: दिल्ली हाईकोर्टदिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि निष्पादन अदालत को दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश XXI नियम 26 के तहत निष्पादन कार्यवाही पर रोक लगाने की अर्जी पर पहले ही...
हिंदू धर्म में द्विविवाह की कोई अवधारणा नहीं, दूसरी पत्नी को पहली पत्नी के होते हुए पारिवारिक पेंशन का अधिकार नहीं : गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने माना कि हिंदू धर्म में द्विविवाह की कोई अवधारणा नहीं है और इसलिए पहली पत्नी के होते हुए, दूसरी पत्नी पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं है। जस्टिस संजय कुमार मेधी की पीठ ने इस प्रकार एक मामले में देखा जिसमें याचिकाकर्ता ( प्रतिमा डेका ) ने पारिवारिक पेंशन की मांग करते हुए खुद को बीरेन डेका की पत्नी होने का दावा करते हुए अदालत का रुख किया था।याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि उसका पति सिंचाई विभाग में एक अप्रेंटिस के रूप में काम करता था और अगस्त 2016 में उसका निधन हो गया था, इसलिए...
केवल कम दूरी वैवाहिक मामले को ट्रांसफर करने का आधार नहीं, पत्नी की जब उपस्थिति आवश्यक न हो, वह अपने वकील को निर्देश दे सकती है : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक मामले में पत्नी की तरफ दायर एक ट्रांसफर याचिका पर विचार करते हुए कहा कि बठिंडा और फरीदकोट के बीच मात्र साठ किलोमीटर की दूरी है, इसलिए यह दूरी इस न्यायालय के लिए मामले को ट्रांसफर करने का आदेश देने के लिए कोई बड़ा कारण नहीं है। इस मामले में पत्नी ने सीआरपीसी की धारा 24 को लागू करने की मांग करते हुए एक याचिका दायर कर हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत दायर वैवाहिक याचिका को ट्रांसफर करने के लिए प्रार्थना की थी।कोर्ट ने कहा कि जब भी याचिकाकर्ता पत्नी की...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क पर पड़े लाइव वायर से करंट लगने से घायल हुए नाबालिग को ₹95 लाख का मुआवजा दिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को नाबालिग याचिकाकर्ता को 95 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। उक्त नाबालिग याचिकाकर्ता लड़की सड़क पर पड़े टूटे बिजली के खंभे से जुड़ी हुई बिजली के तारों की चपेट में आई गई थी, जिसके परिणामस्वरूप दोनों हाथ कट गए।जस्टिस जयश्री ठाकुर की पीठ ने कहा कि मामले के तथ्य "कठोर दायित्व" के सिद्धांत को लागू करने की ओर ले जाते हैं। इस प्रकार की घटना में यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि इस मामले में बिजली बोर्ड आपूर्ति लाइन को...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद में उर्दू स्कॉलर पर पासपोर्ट सरेंडर करने की 'कठिन' जमानत शर्त हटाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एक उर्दू विद्वान मिर्जा शफीक हुसैन शफाक पर एसएसपी / एसपी के समक्ष एक वैवाहिक विवाद के संबंध में उनका पासपोर्ट जमा करवाने की अंतरिम जमानत की शर्त हटाने का आदेश दिया। जस्टिस सिद्धार्थ की पीठ ने जमानत की शर्त को 'कठिन' बताते हुए विदेश यात्रा के मौलिक अधिकार पर जोर दिया और कैप्टन अनिला भाटिया बनाम हरियाणा राज्य के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया। इसके अलावा, कोर्ट ने आदेश दिया कि पासपोर्ट के सरेंडर करने की शर्त हटा दी जाए।गौरतलब है कि...
'एनडीपीएस आरोपी 2 साल से अधिक समय से हिरासत में, आठ गवाहों में से केवल तीन का ही परीक्षण किया गया': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत दी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत कथित अपराधों के सिलसिले में दो साल से अधिक समय से जेल में बंद एक आरोपी को जमानत दे दी है।जस्टिस अलका सरीन ने कहा,"इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता 02 साल, 09 महीने और 14 दिनों की अवधि के लिए हिरासत में है और मुकदमे में समय लगने की संभावना है, याचिकाकर्ता को अब और हिरासत में रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा।"पीठ सीआरपीसी की धारा 439 के तहत एक याचिका पर विचार कर रही थी। ...
आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल ने सेवानिवृत्त सेना अधिकारी द्वारा विमुद्रीकरण के दौरान जमा की गई नकदी को हटा दिया
आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) की बेंगलुरू खंडपीठ जिसमें बी.आर. भास्करन (लेखाकार सदस्य) ने विमुद्रीकरण (Demonetisation) के दौरान नकद जमा राशि को इस आधार पर हटा दिया कि सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी ने चिकित्सा आपात स्थिति को पूरा करने के लिए नकदी वापस ले ली थी।निर्धारिती एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी है और पेंशन प्राप्त कर रहा है। विमुद्रीकरण अवधि के दौरान, निर्धारिती ने दो बैंक खातों में कुल मिलाकर 7,01,000 रुपये की राशि जमा की। सूत्रों के बारे में पूछे जाने पर, निर्धारिती ने प्रस्तुत किया कि उसने...
प्राकृतिक न्याय: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन आदेश को खारिज किया कहा, कारण का जवाब देने के लिए समय दिया जाना चाहिए
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि जब निर्धारिती (Assessee) को मसौदा मूल्यांकन आदेश/कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है तो नोटिस का जवाब देने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए, ताकि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जा सके।जस्टिस तेजिंदर सिंह ढींडसा और जस्टिस पंकज जैन की पीठ ने अगले ही दिन आयकर अधिनियम 1961 की धारा 144-बी सपठित धारा 147 के तहत प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा पारित पुनर्मूल्यांकन आदेश को रद्द कर दिया।गौरतलब है कि ड्राफ्ट असेसमेंट ऑर्डर/कारण बताओ नोटिस 30 मार्च को रात 8 बजे...
सीपीसी का आदेश XXI नियम 26 | कोर्ट पहले ही दिन निष्पादन पर रोक की अर्जी पर फैसला करने के लिए बाध्य नहीं, डिक्री धारक का जवाब मांगने का हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि निष्पादन अदालत को दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश XXI नियम 26 के तहत निष्पादन कार्यवाही पर रोक लगाने की अर्जी पर पहले ही दिन निर्णय लेने का कानून या अन्य प्रकार से कोई जनादेश नहीं है।जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा कि निष्पादन कोर्ट अर्जी पर निर्णय लेने से पहले डिक्री धारक को उस पर जवाब दाखिल करने को कहने का हकदार है।कोर्ट ने एक निष्पादन याचिका पर जिला न्यायाधीश (वाणिज्यिक न्यायालय) द्वारा दिनांक 24 मार्च, 2022 को पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए उक्त...
जजों का आचरण नोट किया जाता है, उन्हें कुछ भी ऐसा प्रदर्शित नहीं करना चाहिए जिससे वकील और वादी को ज़रा भी शंका हो : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जज को किसी भी तरह से कार्य नहीं करना चाहिए जिससे वकीलों और वादियों के मन में थोड़ी सी भी शंका पैदा हो, क्योंकि उनके आचरण को वादियों द्वारा नोट किया जाता है और उनका पालन किया जाता है।जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने फैमिली कोर्ट जज के आचरण पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उक्त अवलोकन किया। इस जज ने दोनों पक्षों के साथ अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर साझा किया था और एक पक्ष से चैंबर में मुलाकात की थी, जिसने अनावश्यक रूप से पूर्वाग्रह की उचित आशंका का कारण दिया था।कोर्ट अभिभावक याचिका में...


















