मुख्य सुर्खियां
एक टेस्टिकल वाला व्यक्ति भारतीय नौसेना की सेवा के लिए अयोग्य नहीं : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना है कि एक टेस्टिकल होना कोई विकलांगता नहीं है, जिसके एकमात्र आधार पर किसी उम्मीदवार को भारतीय नौसेना की सेवा के लिए अयोग्य घोषित किया जा सके। केंद्र द्वारा पारित एक आदेश में प्रतिवादी को नौसेना में नामांकन के लिए अयोग्य घोषित किया गया था, क्योंकि उसके पास एक ही टेस्टिकल है।जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस विकास सूरी की पीठ ने इस आदेश के संदर्भ में कहा, " यह दिखाने के लिए रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है कि यह विकलांगता उस तरह की है जो भारतीय नौसेना की सेवा के लिए...
विवाह समाप्त होने पर पति का परिवार स्त्रीधन नहीं रख सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह समाप्त करने का मतलब यह नहीं हो सकता कि महिला द्वारा वैवाहिक घर में ले जाने वाली सभी वस्तुओं को पति के परिवार द्वारा रख लिया जाए।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने पूर्व पत्नी द्वारा अपने पूर्व पति और ससुराल वालों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406 के तहत शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया।पीठ ने कहा,"निर्विवाद तथ्य यह है कि स्त्रीधन नौ लाख रुपये का भुगतान याचिकाकर्ता और उसके परिवार को किया गया है और वह राशि जो उनके पास रखी गई...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई को राज्य के प्राथमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा कथित 'अवैध' नियुक्तियों की जांच करने का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को राज्य के प्राथमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती की जांच करने का आदेश दिया।जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने सीबीआई को 2014 में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा के आधार पर बोर्ड द्वारा शिक्षकों की कथित अवैध भर्ती की जांच शुरू करने के लिए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव रत्न चक्रवर्ती बागची और अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य को भी सोमवार शाम 5 बजे बाद में सीबीआई के सामने पेश होने...
नाना-नानी के साथ नाबालिग की कस्टडी अवैध नहीं, खासकर जब पति ने पहली शादी के होते हुए ही पुनर्विवाह किया हो: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस राजेंद्र एम सरीन शामिल हैं, ने माना है कि नाबालिग के अपने नाना-नानी के साथ कस्टडी को अवैध कस्टडी या अवैध कंन्फाइनमेंट नहीं माना जा सकता है, यह देखते हुए कि नाबालिग के पति / पिता ने अपनी पहली पत्नी के साथ विवाह के निर्वाह के दरमियान ही पुनर्विवाह किया था। पहली पत्नी ही उक्त नाबालिग की मां थी।यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई थी, जिसमें पुलिस प्राधिकरण को कॉर्पस (9 साल की उम्र के नाबालिग समीर) को पेश करने और...
मध्यस्थता समझौते की गैर-मौजूदगी में भी, मामले को MSMED अधिनियम की धारा 18 के तहत मध्यस्थता के लिए संदर्भित किया जा सकता है: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि पार्टियों के बीच मध्यस्थता समझौते के अभाव में मामले को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 (MSMED अधिनियम) की धारा 18 के तहत मध्यस्थता के लिए भेजा जा सकता है।जस्टिस लिसा गिल की एकल पीठ ने दोहराया कि एमएसएमईडी अधिनियम एक विशेष अधिनियम होने के कारण मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 (ए एंड सी एक्ट) पर प्रभावी होगा। कोर्ट ने कहा कि भले ही मध्यस्थता द्वारा विवादों के समाधान के लिए पार्टियों के बीच एक समझौता हुआ हो, अगर एक विक्रेता को MSMED...
पितृत्व का निर्धारण विवादास्पद मुद्दा नहीं है जब विवाह का तथ्य ही विवादित हो: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भरण-पोषण की याचिका में डीएनए टेस्ट कराने का आदेश रद्द किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भरण-पोषण की मांग करने वाले एक मामले में फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर रिविजन याचिका पर विचार करते हुए कहा है कि चूंकि प्रतिवादी द्वारा विवाह को ही विवादित बताया गया है तो ऐसे में पितृत्व निर्धारित करने के लिए डीएनए टेस्ट कराने के आदेश की आवश्यकता नहीं है। फैमिली कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता ने एक याचिका दायर भरण-पोषण दिलाए जाने की मांग की थी, इसी याचिका के जवाब में प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता के बच्चे के पितृत्व का निर्धारण कराने के लिए डीएनए टेस्ट कराने की मांग की...
एनआई एक्ट की धारा 147- 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत हर अपराध कंपाउंडेबल है': कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने हाल ही में कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (Negotiable Instruments Act) की धारा 147 के तहत हर अपराध को कंपाउंडेबल बनाती है और पक्षकारों पर अपराध को कम करने के लिए कोई रोक नहीं है।जस्टिस एच.बी. प्रभाकर शास्त्री ने आरोपी अरुण विंसेंट राजकुमार और शिकायतकर्ता एस माला द्वारा दायर संयुक्त आवेदनों को स्वीकार कर लिया, जिसमें अपराध को कम करने की मांग की गई थी और निचली अदालत द्वारा अधिनियम की धारा 138 के तहत अभियुक्त को दी गई सजा को रद्द करने के लिए सहमति...
कई वर्षों के अंतराल के बाद सेटल्ड सीनियारिटी को अनसेटल्ड नहीं किया जा सकता हैः मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्वव्यापी पदोन्नति के लिए निरीक्षक की याचिका खारिज की
मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्वव्यापी पदोन्नति के लिए एक पुलिस निरीक्षक की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के विलंबित दावों की सुनवाई करने से सेटल्ड स्थिति अस्थिर हो जाएगी। अदालत ने दोहराया कि कई वर्षों के अंतराल के बाद सेटल्ड पोजीशंस को अनसेटल नहीं किया जा सकता है।याचिका को किसी भी योग्यता से रहित पाते हुए जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, "कर्मचारी, जो अपने अधिकारों को लेकर सोए रहे, अपनी शिकायतों के निवारण के लिए किसी सुबह उठकर अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकते हैं...।"वर्तमान मामले में,...
नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता और उसकी मां ने बदली 'परिस्थितियों' में बयान बदला: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में सुनवाई के दौरान नाबालिग यौन उत्पीड़न पीड़िता और उसकी मां के मुकर जाने के बाद नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न करने और उससे शादी करने के आरोपी को जमानत दे दी।जस्टिस के नटराजन की एकल पीठ ने आरोपी हनुमंथप्पा द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और उसे दो लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदारों के निष्पादन पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।आरोपी को दो अक्टूबर, 2020 को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धारा 376, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण...
स्मार्त ब्राह्मण नहीं एक धार्मिक संप्रदाय: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि स्मार्त ब्राह्मण केवल एक जाति/समुदाय थे, यह बिना किसी ऐसी विशेषता के है, जो उन्हें तमिलनाडु राज्य के अन्य ब्राह्मणों से अलग करता था। इस प्रकार, उन्हें एक धार्मिक संप्रदाय के रूप में पहचाना नहीं जा सकता और वे संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत लाभ के हकदार नहीं हैं।मदुरै खंडपीठ के जस्टिस आर विजयकुमार स्मार्त ब्राह्मण समुदाय के कुछ सदस्यों द्वारा संचालित एक संस्था के लिए अल्पसंख्यक दर्जा का दावा करने वाले एक आवेदन पर विचार कर रहे थे। यह देखते हुए कि अपीलकर्ता यह...
मध्यस्थता के लिए भेजे जाने के बावजूद विवाद का समाधान नहीं होने पर पक्षकार अदालत शुल्क की वापसी का दावा नहीं कर सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में यह व्यवस्था दी है कि सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 89 के तहत समझौते के लिए केवल एक पक्ष का संदर्भ केरल कोर्ट शुल्क और सूट मूल्यांकन अधिनियम की धारा 69 ए के तहत प्रदान किए गए अदालत शुल्क की वापसी का तब तक हकदार नहीं होगा, जब तक कि समझौता संबद्ध पक्षों के बीच नहीं किया गया हो।न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने कहा कि हालांकि सीपीसी की धारा 89 के तहत वर्णित विवादों के निपटारे में 'मध्यस्थता' भी शामिल है, लेकिन एक पक्ष अदालत शुल्क की वापसी का हकदार नहीं है, क्योंकि...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए निचली अदालत की अनुमति के एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगाई
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एकल न्यायाधीश की पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें कहा गया था कि जब हाईकोर्ट द्वारा आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है तो पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए निचली अदालत की अनुमति आवश्यक नहीं होती।चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस अशोक एस किनागी की खंडपीठ ने 17 मार्च के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके द्वारा अदालत ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया था कि वह संबंधित से सुविधाजनक आदेश पर जोर दिए बिना अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए महिला के आवेदन पर विचार करे।खंडपीठ...
पीड़िता पुनर्विचार आवेदन दायर करके आरोपी की सजा बढ़ाने की मांग कर सकती है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता केवल पुनर्विचार आवेदन दायर अपराधी की सजा बढ़ाने की मांग कर सकती है, न कि निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करके।जस्टिस साधना एस. जाधव और जस्टिस मिलिंद एन. जाधव की खंडपीठ ने कहा कि पीड़िता सीआरपीसी की धारा 372 के प्रावधान के तहत केवल तीन परिस्थितियों में अपील दायर कर सकती है-1. आरोपी को बरी करने के खिलाफ अपील दायर करके।2.जब आरोपी को कम अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है, या3. पीड़ित को अपर्याप्त मुआवजा दिया जाता है।पीठ ने कहा कि सजा के खिलाफ पीड़िता की अपील...
'इंटरसेप्शन ऑर्डर' पारित करने के विस्तृत कारणों का खुलासा करने से खुफिया जानकारी प्रभावित हो सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अवरोधन आदेशों (Interception Orders) के विस्तृत कारणों का खुलासा प्रक्रियात्मक निष्पक्षता (Procedural Fairness) की संशोधित प्रकटीकरण आवश्यकताओं के विरुद्ध होगा।जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कहा,"अवरोधन आदेशों के विस्तृत कारणों का खुलासा प्रक्रियात्मक निष्पक्षता की संशोधित प्रकटीकरण आवश्यकताओं के विरुद्ध होगा, जिसे सार्वजनिक रूप से अन्य पहलुओं की सुरक्षा के लिए स्वीकार्य माना गया है। इसमें सरकार के उद्देश्य या कुछ सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन के लिए गोपनीय रूप से दी गई सूचना...
"ऐसे मुन्नाभाई भारत के भविष्य के लिए हानिकारक हैं": यूपी कोर्ट ने आईबीपीएस परीक्षा में आपराधिक साजिश के लिए 3 लोगों को दोषी ठहराया
गाजियाबाद की स्थानीय अदालत ने पिछले हफ्ते 2014 के आईबीपीएस परीक्षा में आपराधिक साजिश, प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी के लिए 3 लोगों को दोषी ठहराया।गाजियाबाद के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) शिवांक सिंह ने दोषियों को 3 साल की कैद की सजा सुनाते हुए कहा कि युवाओं की भूमिका भारत के भविष्य का निर्धारण करेगी और ऐसे मुन्नाभाई भारत के भविष्य के लिए हानिकारक हैं।महत्वपूर्ण रूप से, इस बात पर जोर देते हुए कि सार्वजनिक क्षेत्र में भर्ती के लिए जनता का विश्वास होना चाहिए, कोर्ट ने कहा कि जब इस तरह की गड़बड़ी...
लेटर्स पेटेंट के तहत हाईकोर्ट की शक्तियां विधायी अधिनियमों के अधीन हैं: एएसजी ने चाइल्ड कस्टडी के मामलों में समवर्ती क्षेत्राधिकार का विरोध किया
फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 के आगमन के कारण चाइल्ड कस्टडी और गार्डियनशिप एक्ट मामलों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के मूल अधिकार क्षेत्र से संबंधित सुनवाई के दूसरे दिन, मद्रास हाईकोर्ट के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आर शंकरनारायणन ने हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र के निष्कासन के पक्ष में अपनी दलीलें दीं।जस्टिस पीएन प्रकाश, जस्टिस आर महादेवन, जस्टिस एम सुंदर, जस्टिस एन आनंद वेंकटेश और जस्टिस एए नक्किरन की पूर्ण पीठ इस संदर्भ पर सुनवाई कर रही है।शुरुआत में, एएसजी ने कहा कि वह सरकार की ओर से नहीं बल्कि अपनी...
अयोध्या केस के मीडिएटर श्रीराम पंचू ने Z कैटेगरी सिक्योरिटी की बहाली के लिए मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया
अयोध्या मामले के मीडिएटर श्रीराम पंचू ने Z कैटेगरी सिक्योरिटी की बहाली के लिए मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया है।श्रीराम पंचू को 2019 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद Z कैटेगरी सिक्योरिटी की सुरक्षा दी गई थी। हालांकि, सुरक्षा पुनर्व्यवस्था समिति ने हाल ही में इस सुरक्षा को वापस ले लिया था।कल जब यह मामला जस्टिस एन. सतीश कुमार के सामने आया तो पंचू की ओर से सीनियर एडवोकेट एस प्रभाकरण ने दलील दी कि सिक्योरिटी वापस लेना देश में हाल की किसी भी घटना को ध्यान में रखे बिना है।उन्होंने कहा कि हाल ही में...
सेशन कोर्ट अपनी पुनरीक्षण शक्ति का प्रयोग करते हुए मजिस्ट्रेट के संज्ञान और समन आदेश को रद्द नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुनरीक्षण शक्ति का प्रयोग करते हुए मजिस्ट्रेट द्वारा पारित संज्ञान और समन आदेश को सेशन कोर्ट रद्द नहीं कर सकता, क्योंकि इसका पुनरीक्षण क्षेत्राधिकार बहुत सीमित है।जस्टिस शमीम अहमद की खंडपीठ ने आगे कहा कि यदि सेशन कोर्ट को पुनरीक्षण न्यायालय के रूप में कार्य करते समय कोई अवैधता, अनियमितता, या क्षेत्राधिकार त्रुटि मिलती है तो कार्यवाही को रद्द करने के बजाय उसे केवल मजिस्ट्रेट के आदेश में त्रुटि को इंगित करके निर्देश जारी करने की शक्ति थीसंक्षेप में मामलाशिकायतकर्ता ने...
शरद पवार के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक पोस्ट करने का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने फार्मेसी छात्र की गिरफ्तारी पर राज्य की खिंचाई की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को एनसीपी (NCP) अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक पोस्ट करने के लिए 21 वर्षीय एक छात्र की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की और राज्य से पूछा कि क्या वह उसकी रिहाई के लिए "नो ऑब्जेक्शन" देगी।जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एमएन जाधव की पीठ ने अभियोजक से इस मामले के संबंध में गृह विभाग से निर्देश लेने को कहा। और कहा कि अगर वे स्वेच्छा से उसकी रिहाई का विरोध नहीं करने का फैसला करते हैं तो राज्य की कृपा बच जाएगी।कोर्ट एक फार्मेसी छात्र निखिल...
सीआरपीसी की धारा 319 लागू करने का उद्देश्य किसी ऐसे व्यक्ति को बच निकलने से रोकना है, जो वांछित है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 319 के तहत दायरे और शक्ति की व्याख्या करते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि यह प्रावधान कोर्ट को उन व्यक्तियों को तलब करने और (कुछ परिस्थितियों में) मुकदमे का सामना करने की अनुमति देता है, जिनका नाम चार्जशीट में नहीं है। जस्टिस विकास बुधवार की खंडपीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 319 को लागू करने का मूल उद्देश्य है किसी ऐसे व्यक्ति को बच निकलने से रोकना है, जो मुकदमे की सुनवाई का सामना करने लायक है।गौरतलब है कि सीआरपीसी की धारा 319 के तहत, न्यायालय को किसी भी जांच,...


















