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पार्टनर के चयन पर किसी व्यक्ति के निर्णय में राज्य या समाज दखल नहीं दे सकताः कर्नाटक हाईकोर्ट
पार्टनर के चयन पर किसी व्यक्ति के निर्णय में राज्य या समाज दखल नहीं दे सकताः कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक बंधन के लिए एक पार्टनर या जीवनसाथी की उपयुक्तता का निर्णय विशेष रूप से स्वयं व्यक्तियों के पास होता है। उनके इस क्षेत्र में न तो राज्य और न ही समाज दखल दे सकता है। जस्टिस बी वीरप्पा और जस्टिस के.एस. हेमलेखा की खंडपीठ ने एक 19 वर्षीय लड़की (जिसके बारे में बताया गया कि वह माता-पिता को बताए बिना भाग गई और उसने शादी कर ली) के पिता द्वारा दायर एक हैबियस कार्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को खारिज करते हुए कहा, ''न्यायालयों को, संवैधानिक स्वतंत्रता के समर्थक के...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने निजी फर्म को कांजुरमार्ग गांव में छह हजार एकड़ भूमि के लिए डेवलेपमेंट राइट देने की सहमति डिक्री रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार को राहत देते हुए उस सहमति डिक्री को रद्द कर दिया, जिसके द्वारा निजी फर्म ने अक्टूबर, 2020 में कांजुरमार्ग गांव में 6,000 एकड़ से अधिक भूमि के लिए डेवलेपमेंट राइट प्राप्त किया था। इस भूमि में मेट्रो कार शेड के लिए नामित 102 एकड़ भूमि भी शामिल है।इस साल की शुरुआत में दायर अंतरिम आवेदन में राज्य ने दावा किया कि निजी फर्म, आदर्श वाटर पार्क्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य निजी व्यक्तियों ने सहमति शर्तों में प्रवेश किया और धोखाधड़ी और गलत बयानी...

मोटर दुर्घटना में मौत | केरल हाईकोर्ट ने ड्राइवर की लापरवाही का आरोप लगाने वाली याचिका में मुआवजे का दावा करने के लिए दोहरी शर्तें रखीं
मोटर दुर्घटना में मौत | केरल हाईकोर्ट ने ड्राइवर की लापरवाही का आरोप लगाने वाली याचिका में मुआवजे का दावा करने के लिए 'दोहरी शर्तें' रखीं

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत किए गए दावे में याचिकाकर्ताओं को न केवल ड्राइवर या सवार की ओर से लापरवाही साबित करनी होगी, बल्कि मोटर दुर्घटना में घायल होने और बाद में मर जाने वाले व्यक्ति को लगी चोट को भी साबित करना होगा।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि यह याचिकाकर्ताओं का भार है कि वह अपने द्वारा लगाए गए आरोपों को संतुष्ट करने के लिए सबूत पेश करें, क्योंकि इसमें मुआवजा देना 'गलती' दायित्व के सिद्धांत पर आधारित है।पीठ ने कहा,"मुख्य प्रश्न बताता है कि मोटर वाहन अधिनियम...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
आंसर शीट के पुनर्मूल्यांकन के लिए निर्देश देने या न देने के मामले में सहानुभूति की कोई भूमिका नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आंसर शीट के पुनर्मूल्यांकन को निर्देशित करने या निर्देशित नहीं करने के मामले में सहानुभूति कोई भूमिका नहीं निभाती है।जस्टिस मंजू रानी चौहान की खंडपीठ ने आगे कहा कि आंसर शीट के पुनर्मूल्यांकन को निर्देशित करने या निर्देशित नहीं करने के मामले में सहानुभूति कोई भूमिका नहीं निभाती है।संक्षेप में मामलाउत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा आयोग ने विभिन्न विषयों में सहायक प्रोफेसर के रिक्त पदों को भरने के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया था। याचिकाकर्ताओं ने भूगोल विषय में सहायक प्रोफेसर...

God Does Not Recognize Any Community, Temple Shall Not Be A Place For Perpetuating Communal Separation Leading To Discrimination
मद्रास हाईकोर्ट में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि की प्रतिमा की स्थापना को चुनौती देने वाली याचिका वापस ली गई

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की प्रतिमा की स्थापना के खिलाफ हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट के समक्ष दायर जनहित याचिका मंगलवार को वापस ले ली गई।याचिकाकर्ता जी. कार्तिक ने तर्क दिया कि प्रतिवादियों में से एक ए राजेंद्रन ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत से दिए गए सर्वेक्षण संख्या में उनके स्वामित्व वाली भूमि के ऊपर पट्टा हासिल किया और अब भूमि पर निर्माण करने का प्रयास कर रहा था। उन्होंने आगे तर्क दिया कि यह संपत्ति अब जीवा एजुकेशनल ट्रस्ट (14 वें प्रतिवादी) द्वारा पूर्व सीएम की मूर्ति...

कलकत्ता हाईकोर्ट
पैगंबर पर टिप्पणी का मामला | 'सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखें': कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्रीय बलों की तैनाती, हिंसक विरोध प्रदर्शनों में एनआईए जांच की मांग पर आदेश सुरक्षित रखा

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को पूर्व भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच पश्चिम बंगाल में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग वाली जनहित याचिकाओं के एक बैच पर आदेश सुरक्षित रख लिया।मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से भी हिंसा की घटनाओं की इस आधार पर जांच कराने की मांग की गई थी कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन कथित तौर पर 'पूर्व नियोजित' प्रकृति के थे।सुनवाई की अंतिम तारीख पर चीफ जस्टिस प्रकाश...

एनआईए कोर्ट सीआरपीसी की धारा 306 के तहत जांच के चरण में क्षमादान के आवेदन पर विचार कर सकती है: केरल हाईकोर्ट
एनआईए कोर्ट सीआरपीसी की धारा 306 के तहत जांच के चरण में क्षमादान के आवेदन पर विचार कर सकती है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालत किसी आरोपी को संज्ञान के बाद क्षमादान देने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 306 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है।जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस सी. जयचंद्रन की खंडपीठ ने यह भी राय दी कि विशेष न्यायालय के लिए हमेशा यह सलाह दी जाती है कि यदि सीधे तौर पर संज्ञान लिया जाता है तो क्षमादान के लिए आवेदन पर विचार करें। हालांकि इसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजा जा सकता है।खंडपीठ ने कहा,"मूल...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
जब तक असाधारण परिस्थितियां न हों, सत्र न्यायालय के समक्ष मौजूद उपाय समाप्त हुए बिना धारा 438 सीआरपीसी के तहत सीधे हाईकोर्ट से संपर्क करने से बचा जाना चाहिए: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि सीआरपीसी की धारा 438 हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट को एक आरोपी के अग्रिम जमानत आवेदन पर विचार करने के लिए समवर्ती क्षेत्राधिकार देती है, लेकिन सामान्य अभ्यास के रूप में हाईकोर्ट इस तरह के मामले पर विचार नहीं करता है। जब तक गिरफ्तारी की आशंका वाले व्यक्ति ने सेशन कोर्ट के समक्ष उपचार समाप्त नहीं कर दिया है या असाधारण परिस्थितियां मौजूद है।मौजूदा मामले में जस्टिस संजय धर एक अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें रिकॉर्ड के...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
[नो फॉल्ट प्रिंसिपल] कर्मचारी मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 140 और वर्कमेन्स कंपेंसेशन एक्ट की धारा 3 के तहत मुआवजे का दावा कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे मामले की सुनवाई की, जिसमें एक ट्रक ड्राइवर, जो ट्रक मालिक का कर्मचारी था, एक वाहन दुर्घटना का शिकार हो गया। उसने बाद में मोटर वाहन अधिनियम 1988 ("एमवी एक्ट") की धारा 140 के तहत मुआवजे की कार्यवाही शुरू की। हालांकि कामगार मुआवजा अधिनियम 1923 (अब कर्मचारी मुआवजा अधिनियम 1923) के तहत आयुक्त ने उसके मुआवजे के दावे पर विचार नहीं किया था।जस्टिस एसजी मेहरे की पीठ ने कहा कि अदालत के समक्ष सवाल था, "क्या एमवी अधिनियम के अध्याय X के तहत दिया गया मुआवजा कर्मचारी को 1923...

बेईमान वादियों ने याचिका रद्द होने से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका वापस ली, और कुछ समय बाद फिर दायर की; न्यायिक समय बर्बाद किया: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
बेईमान वादियों ने याचिका रद्द होने से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका वापस ली, और कुछ समय बाद फिर दायर की; न्यायिक समय बर्बाद किया: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में बिना किसी पर्याप्त आधार/परिस्थितियों में बदलाव के, लगातार जमानत आवेदन दाखिल करने की प्रैक्टिस का विरोध किया।कोर्ट ने "बेईमान वादियों" द्वारा अपनाई जा रही दुर्भाग्यपूर्ण प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की, जिसमें अग्रिम जमानत का तर्क दिया जाता है और जब अदालत याचिका को खारिज करने वाली होती है तो विस्तृत प्रतिकूल आदेश से बचने के लिए, वकील याचिका वापस लेने का प्रयास करता है और उसके कुछ दिन बाद बिना किसी औचित्य के दूसरी अग्रिम जमानत याचिका दायर करता है।जस्टिस...

P&H High Court Dismisses Protection Plea Of Married Woman Residing With Another Man
O7 R11 सीपीसी | वाद को खारिज करने की शक्ति का प्रयोग तभी किया जाना चाहिए जब न्यायालय इस "निश्चित निष्कर्ष" पर पहुंचता है कि मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है या कानून के तहत वर्जित है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत वाद को खारिज करने की शक्ति का प्रयोग तभी किया जाना चाहिए जब न्यायालय इस "निश्चित निष्कर्ष" पर पहुंचता है कि मुकदमा या तो सुनवाई योग्य नहीं है या कानून के तहत वर्जित है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की पीठ ने कहा कि आदेश 7 नियम 11 सीपीसी विभिन्न आधारों को सूचीबद्ध करता है जिन पर वाद को खारिज किया जा सकता है।पीठ ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त अवलोकन किया गया, जिसमें याचिकाकर्ता के आवेदन (मूल प्रतिवादी) को आदेश 7 नियम 11...

राजस्थान हाईकोर्ट ने बाल विवाह के साथी के साथ रहने के लिए माता-पिता के दबाव से सुरक्षा के लिए महिला को पुलिस से संपर्क करने के लिए कहा
राजस्थान हाईकोर्ट ने बाल विवाह के साथी के साथ रहने के लिए माता-पिता के दबाव से सुरक्षा के लिए महिला को पुलिस से संपर्क करने के लिए कहा

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐसी महिला की याचिका पर सुनवाई की, जिसका बाल विवाह किया गया और उसके माता पिता उसके बाल विवाह के साथी के साथ रहने के लिए महिला पर दबाव डाल रहे हैंं। महिला ने अब अलग रहने की इच्छा जताई और अदालत से गुहार लगाई कि उसके माता पिता को उक्त दबाव बनाने से रोका जाए और उसे सुरक्षा दी जाए। अदालत ने महिला को उचित सुरक्षा के लिए पुलिस अधीक्षक, जोधपुर (ग्रामीण) के समक्ष अभ्यावेदन दायर करने का निर्देश दिया।महिला ने इस शिकायत के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाया कि उसके माता-पिता उस व्यक्ति के...

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पति की दुर्घटना में मृत्यु के बाद पुनर्विवाह करने वाली पत्नी को कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत दिए जाने वाले मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि मृतक की पत्नी का पुनर्विवाह उसे कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 के तहत पति की मृत्यु की एवज में मुआवजे का दावा करने से वंचित नहीं करता है। अदालत ने कहा कि निचली अदालत द्वारा दी गई मुआवजे की राशि मृतक की कम उम्र और दावेदारों की संख्या को देखते हुए अनुचित नहीं कहा जा सकता।जस्टिस अरुण भंसाली ने बीमा कंपनी की पहली अपील को खारिज करते हुए कहा,"जहां तक मृतक की पत्नी के पुनर्विवाह पर विवाद का संबंध है, वह उसे पति की मृत्यु के कारण मुआवजे का दावा करने से वंचित नहीं करता है।...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
"बताएं ऐसा क्यों किया": MMRDA द्वारा कथित अवैध स्ट्रक्चर को अदालत की सुनवाई से 15-30 मिनट पहले ध्वस्त किए जाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट स्तब्ध

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) की "जल्दबाजी" में कथित अनधिकृत स्ट्रक्चर को खंडपीठ द्वारा मामले की सुनवाई से आधा घंटा पहले से भी कम समय में ध्वस्त करने पर कड़ी आपत्ति जताई।याचिकाकर्ता कंपनी ने दावा किया कि MMRDA द्वारा 1879 वर्ग फुट की स्ट्रक्चर को 2007 में ऋण वसूली न्यायाधिकरण द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक नीलामी में खरीदे जाने के बाद 'अवैध' रूप में ब्रांडेड किया जा रहा था, जबकि उक्त स्ट्रक्चर कम से कम 15 वर्षों से अस्तित्व में थी।जस्टिस एए सैयद और जस्टिस अभय...

बहस का एक एजेंडा था: एनबीएसए ने जी न्यूज को मुस्लिम आबादी पर बहस के वीडियो को हटाने का आदेश दिया
"बहस का एक एजेंडा था": एनबीएसए ने 'जी न्यूज' को मुस्लिम आबादी पर बहस के वीडियो को हटाने का आदेश दिया

न्यूज ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीडीएसए) ने सोमवार को जी न्यूज को एक शो को हटाने का निर्देश दिया, जिसे पिछले साल मुस्लिम आबादी के मुद्दे पर "कुदरत बहाना है, मुस्लिम आबादी बढ़ाना है?" शीर्षक से प्रसारित किया गया था। उपरोक्त कार्यक्रम के प्रसारण के कारण जी न्यूज के खिलाफ की गई शिकायतों का निस्तारण करते हुए एनबीडीएसए चेयरपर्सन जस्टिस एके सीकरी ने कहा,"हालांकि प्राधिकरण का मानना ​​​​है कि मीडिया किसी भी विषय पर बहस करने और अपनी पसंद के किसी भी पैनलिस्ट को आमंत्रित करने के लिए...

घरेलू स्तर पर कपड़े सिलने वाली पत्नी भरण-पोषण की हकदार; वेल्डर-पति पर्याप्त आय वाले कुशल कामगार की तरह : राजस्थान हाईकोर्ट
घरेलू स्तर पर कपड़े सिलने वाली पत्नी भरण-पोषण की हकदार; वेल्डर-पति पर्याप्त आय वाले कुशल कामगार की तरह : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने भरण पोषण (Maintenance) से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पति, जो एक वेल्डर है, लगभग एक कुशल कामगार की तरह है और इस प्रकार यह नहीं माना जा सकता कि वह याचिकाकर्ता-पत्नी को भरण पोषण देने के लिए पर्याप्त कमाई नहीं कर रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि भले ही याचिकाकर्ता-पत्नी घरेलू रूप से कपड़े सिल रही हो और उसके पास कुछ आय का स्रोत हो तो भी पति अपने दो बच्चों के साथ पत्नी को भरण-पोषण का भुगतान करने के लिए ज़िम्मेदार है।डॉ.जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने आपराधिक पुनरीक्षण...

राजस्थान हाईकोर्ट ने गरीबी रेखा से नीचे के परिवार से संबंधित अपराधी को 7 दिन की पैरोल के लिए 2 लाख रुपए का निजी बॉन्ड भरने, 1 लाख रुपए की राशि का जमानतदार पेश करने के लिए कहा
राजस्थान हाईकोर्ट ने गरीबी रेखा से नीचे के परिवार से संबंधित अपराधी को 7 दिन की पैरोल के लिए 2 लाख रुपए का निजी बॉन्ड भरने, 1 लाख रुपए की राशि का जमानतदार पेश करने के लिए कहा

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य को गरीबी रेखा से नीचे (बी.पी.एल.) परिवार से संबंधित एक दोषी को 7 दिन की पैरोल के लिए 2 लाख रुपए का निजी बॉन्ड, 1 लाख रुपए का जमानतदार पेश करने के लिए कहा है।हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के भाई की जमानत बॉन्ड भरने की आवश्यकता को माफ कर दिया।याचिकाकर्ता को 29.09.2021 को राजस्थान कैदी रिहाई पर पैरोल नियम, 1958 के नियम 18 के तहत 7 दिनों की पैरोल प्रदान की गई थी, जिसमें 2,00,000 रुपये की राशि के रूप में निजी बॉन्ड भरने और 1,00,000/- रुपये की राशि का दो...

पति की क्रूरता के कारण वैवाहिक घर छोड़ना परित्याग नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व पत्नी को भरण-पोषण की मंजूरी दी
पति की क्रूरता के कारण वैवाहिक घर छोड़ना परित्याग नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व पत्नी को भरण-पोषण की मंजूरी दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि अपने पति के आचरण के कारण क्रूरता से पीड़ित महिला को यह नहीं कहा जा सकता कि उसने उसे छोड़ दिया है या स्वेच्छा से दूर रह रही है। अदालत ने कहा कि पति द्वारा बनाई गई परिस्थितियां यदि अनुकूल नहीं हैं तो पत्नी को दूर करने के लिए बाध्य हैं।याचिकाकर्ता-पत्नी का मामला यह है कि प्रतिवादी-पति बैंक ऑफ बड़ौदा में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं और प्रति माह रु.90,000/- की आय कर रहा है। उसने प्रस्तुत किया कि ट्रायल कोर्ट ने उसे मासिक भरण पोषण से केवल इस आधार पर इनकार कर दिया कि...

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आईएएफ सार्जेंट का पत्नी और बेटी को भरण-पोषण देने से इनकार करना उचित नहीं; प्रतिदिन के खर्च और शिक्षा बहुत महंगी है : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान समय में जबकि शिक्षा बहुत महंगी हो गई है और जीवन में प्रतिदिन के खर्च के लिए भी उचित राशि की आवश्यकता होती है, ऐसे में पत्नी और बेटी को भरण-पोषण से वंचित करना उचित नहीं है।कोर्ट ने याचिकाकर्ता, जो भारतीय वायु सेना में एक सार्जेंट है, को निर्देश दिया है कि वह अपनी पत्नी व बेटी को भरण-पोषण के तौर पर प्रतिमाह 15,000 रुपये की राशि का भुगतान करे। याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 19(4) रिड विद सीआरपीसी की धारा 397 और 401 के तहत वर्तमान आपराधिक...