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बच्चे को क्यों मारना है? इसे गोद लें: दिल्ली हाईकोर्ट ने अविवाहित महिला की 24 सप्ताह की गर्भ को समाप्त करने की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा
'बच्चे को क्यों मारना है? इसे गोद लें': दिल्ली हाईकोर्ट ने अविवाहित महिला की 24 सप्ताह की गर्भ को समाप्त करने की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने 20 साल की एक अविवाहित महिला द्वारा दायर याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है, जिसमें अपने पार्टनर से अलग होने के बाद लगभग 24 सप्ताह की गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति मांगी गई थी।याचिकाकर्ता की गर्भ इस महीने की 18 तारीख को 24 सप्ताह पूरे करेगी।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने आदेश को सुरक्षित रखते हुए सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता ने गर्भ की महत्वपूर्ण अवधि पार कर ली है और उसे बच्चे को जन्म देने और उसे गोद लेने...

दिल्ली हाईकोर्ट
आदेश XII नियम 6 सीपीसी | स्वीकारोक्ति पर निर्णय के लिए आवेदन का निस्तारण संक्षिप्त तरीके से नहीं किया जा सकता, आदेश में तर्क जरूर होना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा, "आदेश XII नियम 6 के तहत एक आवेदन को इस प्रकार संक्षिप्त तरीके से निस्तारित नहीं जा सकता। आदेश में कुछ तर्क होना चाहिए, जो आवेदन में आधार को पूरा करता हो।"सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश XII नियम 6 में कहा गया है कि जहां तथ्य की स्वीकारोक्ति या तो मौखिक रूप से या लिखित रूप में की गई है, न्यायालय वाद के किसी भी चरण में, या तो किसी भी पक्ष के आवेदन पर या अपने स्वयं के प्रस्ताव और पार्टियों के बीच किसी अन्य प्रश्न के निर्धारण की प्रतीक्षा किए बिना, इस तरह के...

मलाली मस्जिद विवाद : कर्नाटक हाईकोर्ट ने मस्जिद सर्वेक्षण का आदेश देने से पहले मुकदमे की स्थिरता तय करने के सिविल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
मलाली मस्जिद विवाद : कर्नाटक हाईकोर्ट ने मस्जिद सर्वेक्षण का आदेश देने से पहले मुकदमे की स्थिरता तय करने के सिविल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मैंगलोर में अतिरिक्त सिटी सिविल कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए दायर एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें कोई निषेधाज्ञा जारी करने से पहले मुकदमे के सुनवाई योग्य होने के पहलू पर विचार करने का फैसला किया गया था। इसमें मलाली जुम्मा मस्जिद के प्रतिनिधियों को मस्जिद के पुराने टाइटल वाले ढांचे की मरम्मत से रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की गई थी, जब तक कि कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करके मस्जिद का सर्वे न करवा लिया जाए। बताया जाता है कि मस्जिद की मरम्मत के...

स्वस्थ लोकतंत्र के लिए असहमति की आवाज जरूरी है, सिर्फ राजनीतिक दलों की आलोचना आईपीसी की धारा 153ए और 295ए लागू करने का कोई आधार नहीं हो सकती: जुबैर की जमानत पर दिल्ली कोर्ट
स्वस्थ लोकतंत्र के लिए असहमति की आवाज जरूरी है, सिर्फ राजनीतिक दलों की आलोचना आईपीसी की धारा 153ए और 295ए लागू करने का कोई आधार नहीं हो सकती: जुबैर की जमानत पर दिल्ली कोर्ट

दिल्ली की एक अदालत ने ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को जमानत देते हुए कहा,"स्वस्थ लोकतंत्र के लिए असहमति की आवाज जरूरी है। इसलिए, किसी भी राजनीतिक दल की आलोचना के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए और 295 ए को लागू करना उचित नहीं है।"हाल ही में 2018 में किए गए अपने ट्वीट से धार्मिक भावनाओं को आहत करने और दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में दिल्ली पुलिस द्वारा जुबैर के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर सुनवाई के दैरान यह घटनाक्रम सामने आया।यह टिप्पणी इस आरोप के संदर्भ में की गई कि जुबैर ने...

जस्टिस एचपी संदेश के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए वकील ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया
जस्टिस एचपी संदेश के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए वकील ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया

कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख करते हुए एडवोकेट ने राज्य सरकार को जस्टिस एच.पी. संदेश को सुरक्षा दिए जाने की मांग की है। जस्टिस संदेश ने हाल ही में उपायुक्त, बेंगलुरु (शहरी) से जुड़े मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा की गई जांच की आलोचना करने के लिए "स्थानांतरण की धमकी" के बारे में सनसनीखेज खुलासे किए हैं।जस्टिस संदेश ने 11 जुलाई को अपने आदेश में दर्ज किया कि एक जुलाई को फॉर्मर चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी को विदाई देने के लिए हाईकोर्ट द्वारा आयोजित विदाई रात्रिभोज समारोह के दौरान मौजूदा...

मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने जानवरों के अवैध परिवहन और वध रोकने के लिए निर्देश जारी किए, कहा- पुलिस चूककर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रही

मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य में गायों और अन्य जानवरों के अवैध परिवहन और उन्हें खुले स्थानों पर वध करने पर चिंता व्यक्त की।चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी और जस्टिस एन माला की खंडपीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति तभी उत्पन्न हो सकती है जब प्रशासन कानून के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने में विफल रहता है और चूककर्ताओं के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती है।अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दावा किया गया था कि जानवरों के प्रति क्रूरता की रोकथाम के प्रावधान जैसे तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम,...

दिल्ली हाईकोर्ट
आरटीआई एक्ट| धारा 2(j) के तहत किसी सार्वजनिक प्राधिकरण के 'कार्य के निरीक्षण' में 'संपत्ति का निरीक्षण' शामिल नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 की धारा 2 (जे) के तहत "कार्य का निरीक्षण" शब्दों के दायरे में "संपत्ति का निरीक्षण" शामिल नहीं है।धारा 2(जे) में कहा गया है कि सूचना के अधिकार का अर्थ अधिनियम के तहत सुलभ सूचना का अधिकार है, जो किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण के पास या उसके नियंत्रण में है और इसमें निम्नलिखित अधिकार शामिल हैं- (i) कार्य, दस्तावेजों, रिकॉर्ड्स का निरीक्षण; (ii) दस्तावेजों या रिकॉर्ड्स के नोट्स, उद्धरण या प्रमाणित प्रतियां लेना; आदि।जस्टिस यशवंत...

प्रयागराज में नालों की सफाई के लिए मशीनों, सुरक्षात्मक गियर का उपयोग नहीं किया जा रहा है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम को तलब किया
"प्रयागराज में नालों की सफाई के लिए मशीनों, सुरक्षात्मक गियर का उपयोग नहीं किया जा रहा है": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम को तलब किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने प्रयागराज शहर में नालों की सफाई के लिए वर्कर्स को कोई सुरक्षात्मक गियर प्रदान नहीं किए जाने पर जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त, प्रयागराज को तलब किया।कोर्ट ने तस्वीरों में देखा कि वर्कर्स सफाई के लिए नाले के अंदर गहरे पानी में थे।चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जे जे मुनीर की खंडपीठ एक स्वत:संज्ञान जनहित याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें अदालत ने एक न्यूज पर ध्यान दिया था जिसमें दिखाया गया था कि नगर निगम या जिले में ठेकेदारों के माध्यम से बिना किसी...

प्ले स्टोर पेमेंट पॉलिसी: कर्नाटक हाईकोर्ट ने सीसीआई को निजी जानकारी उजागर करने से रोकने के लिए Google India की याचिका की सुनवाई योग्यता बरकरार रखी
प्ले स्टोर पेमेंट पॉलिसी: कर्नाटक हाईकोर्ट ने सीसीआई को निजी जानकारी उजागर करने से रोकने के लिए Google India की याचिका की सुनवाई योग्यता बरकरार रखी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एलायंस ऑफ डिजिटल इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को कंपनी की निजी जानकारी शिकायतकर्ता (एलायंस) को प्रकट करने से रोकने के लिए गूगल इंडिया की याचिका की स्थिरता को चुनौती दी गई थी।जस्टिस एसजी पंडित की एकल पीठ ने आयोग को अपने पास उपलब्ध कंपनी की जानकारी का खुलासा करने से रोकने के लिए पहले पारित अंतरिम आदेश को आगे बढ़ा दिया और प्रतिवादी को दो सप्ताह के भीतर याचिका पर अपनी आपत्तियां दर्ज करने का निर्देश...

[भ्रामक विज्ञापन] महाराष्ट्र उपभोक्ता आयोग ने मेटा को फेसबुक उपयोगकर्ता को 25 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया
[भ्रामक विज्ञापन] महाराष्ट्र उपभोक्ता आयोग ने मेटा को फेसबुक उपयोगकर्ता को 25 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया

महाराष्ट्र के एक उपभोक्ता आयोग ने हाल ही में फेसबुक इंडिया ऑनलाइन सर्विसेज प्रा लिमिटेड और मेटा प्लेटफॉर्म को एक फेसबुक उपयोगकर्ता को मुआवजे के रूप में 25,000/ रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है, जिसने फेसबुक पर 599/ में एक जोड़ी जूते खरीदे थे, लेकिन उसे वह जूता डीलिवर नहीं किया गया था।अपने आदेश में, गोंदिया जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (महाराष्ट्र) [जिसकी अध्यक्षता भास्कर बी योगी ने की और सरिता बी रायपुर सदस्य थीं ] ने देखा कि भ्रामक विज्ञापन के कारण शिकायतकर्ता को वित्तीय नुकसान हुआ था और...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
संज्ञेय अपराधों के लिए एफआईआर जांच/छापे से पहले दर्ज होनी चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट ने डांस बार के खिलाफ मामला खारिज किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि डांस बार पर छापेमारी करने के बाद संज्ञेय अपराधों को शामिल करते हुए एफआईआर दर्ज करने की कानूनन अनुमति नहीं है।जस्टिस हेमंत चंदनगौदर की एकल पीठ ने ब्रिगेड ब्लूज़ बार एंड रेस्टोरेंट के पार्टनर पी.एन.चंद्रशेखर और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को रद्द कर दिया।बेंच ने ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य (2014) 2 SCC 1 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया और कहा,"संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के अधिकार की रक्षा की जाती है, अगर...

केरल हाईकोर्ट
कर्मचारी को ऊंची ग्रेच्युटी पाने का प्रावधान उस प्रावधान पर प्रभावी होगा, जो ग्रेच्युटी राशि को सीमित करता हो: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को दोहराया कि पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट के प्रावधान, जो एक कर्मचारी को ग्रेच्युटी की बेहतर शर्तों का विकल्प चुनने में सक्षम बनाता है, केरल राज्य सहकारी समिति अधिनियम में प्रावधान पर लागू होगा, जो ग्रेच्युटी के रूप में देय राशि को सीमित करता है।जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार और जस्टिस मोहम्मद नियास सीपी की खंडपीठ ने कहा कि जब दो विकल्प उपलब्ध हैं, तो कर्मचारी को उन उच्च लाभों को प्राप्त करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।कोर्ट ने कहा, "इस प्रकार, जब दो विकल्प...

केरल हाईकोर्ट ने पोक्सो मामले में अभिनेता श्रीजीत रवि को शर्तों के साथ जमानत दी
केरल हाईकोर्ट ने पोक्सो मामले में अभिनेता श्रीजीत रवि को शर्तों के साथ जमानत दी

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मलयालम अभिनेता श्रीजीत रवि को बच्चों के सामने कथित रूप से नग्नता दिखाने के लिए उसके खिलाफ दर्ज पोक्सो मामले में जमानत दे दी।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने जमानत अर्जी को यह कहते हुए स्वीकार कर लिया कि उसकी निरंतर हिरासत में रहना उचित नहीं है। कोर्ट ने फैसला रिकॉर्ड और मेडिकल सर्टिफिकेट देखने के बाद इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए लिया कि वह पिछले सप्ताह से हिरासत में है। हालांकि, जस्टिस ने पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा किए गए कृत्य की प्रकृति ने उन पर शर्तों को लागू करने...

यदि निविदा की शर्तें/अनुबंध का अवार्ड जनहित में है तो अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती, भले ही प्रक्रियात्मक मूल्यांकन में त्रुटि हुई हो: दिल्ली हाईकोर्ट
यदि निविदा की शर्तें/अनुबंध का अवार्ड जनहित में है तो अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती, भले ही प्रक्रियात्मक मूल्यांकन में त्रुटि हुई हो: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दोहराया कि निविदा शर्तों या अनुबंधों के अवार्ड से संबंधित मामलों में न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करते समय न्यायालयों को निर्णयों में हस्तक्षेप करने में धैर्य दिखाना चाहिए, जब तक कि वे विकृत न हों।चीफ जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा,"यदि अनुबंध की शर्तों या अवार्ड से संबंधित निर्णय वास्तविक और जनहित में है तो अदालतें हस्तक्षेप करने के लिए न्यायिक समीक्षा की अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं करेंगी, भले ही प्रक्रियात्मक...

[ज्ञानवापी] कोर्ट ऐतिहासिक गलती का निर्णय मौजूदा शासन में कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट में भगवान विश्वेश्वर की ओर से पेश वकील का तर्क
[ज्ञानवापी] कोर्ट ऐतिहासिक गलती का निर्णय मौजूदा शासन में कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट में भगवान विश्वेश्वर की ओर से पेश वकील का तर्क

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद (Vishwanath temple-Gyanvapi Mosque) के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के समक्ष चल रही सुनवाई में, भगवान विश्वेश्वर की ओऱ से पेश वकील (नेक्स्ट फ्रेंड) और मामले में प्रतिवादी में से एक ने बुधवार को तर्क दिया कि यदि पूर्व में संप्रभु शासन द्वारा ऐतिहासिक गलती की गई तो इस मामले का निर्णय वर्तमान संप्रभु शासन में मुंसिपल कोर्ट द्वारा किया जा सकता है।जस्टिस प्रकाश पाडिया की पीठ के समक्ष आगे यह तर्क दिया गया कि वारेन हेस्टिंग्स [1772-1785...

केरल हाईकोर्ट
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले रिटायर्ड पुलिस सुपरिटेंडेंट को आईपीएस कैडर देने के खिलाफ सीनियर जर्नालिस्ट ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

सीनियर जर्नालिस्ट जी. विपिनन ने केरल कैडर के रिटायर्ड पुलिस सुपरिटेंडेंट अब्दुल रशीद को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), केरल कैडर प्रदान करने के लिए उठाए गए कदमों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।सीनियर जर्नालिस्ट ने अपनी याचिका में कहा कि रिटायर्ड पुलिस सुपरिटेंडेंट की आपराधिक पृष्ठभूमि पर विचार किए बिना उन्हें आईपीएस कैडर दिया जाना म.प्र. राज्य और अन्य बनाम प्रवेश खान मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।एडवोकेट सी. उन्नीकृष्णन के माध्यम से दायर याचिका के अनुसार, 2008 में...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
क्या राज्य के मुख्यमंत्री की ओर से जनता को किए गए वादे को लागू किया जा सकता है या नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट फैसला करेगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) इस पर फैसला करेगा कि क्या राज्य के मुख्यमंत्री (Chief Minister) की ओर से जनता को किए गए वादे को लागू किया जा सकता है या नहीं।जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ सूरज सिंह और अन्य द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के आधार पर 5 लाख मुआवजे की मांग करने वाली याचिका पर विचार कर रही थी।यूपी सीएम की ओर से जुलाई 2019 में लखनऊ से दिल्ली की बस में यात्रा करते समय कुछ लोगों के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद घोषणा की गई थी।...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
[वैवाहिक अपराध] पहली शादी को साबित करने और दूसरी शादी की वैधता साबित करने के लिए सबूत का बोझ अभियोजन पक्ष पर होता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर खंडपीठ) ने कहा कि वैवाहिक अपराध (Matrimonial Offence) के मामले में पहली शादी साबित करने और दूसरी शादी की वैधता साबित करने के लिए सबूत का बोझ अभियोजन पक्ष पर होता है।इसके साथ ही जस्टिस अनिल वर्मा की खंडपीठ ने कैलाश नाम के एक व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता की धारा 494 और 143 के तहत आरोपों से बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।पूरा मामलायाचिकाकर्ता-कैलाश का मामला है कि उसने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार एक जानी बाई (प्रतिवादी संख्या 2) के साथ विवाह किया था...

यूपी पुलिस की छह एफआईआर रद्द करने की मांग लेकर मोहम्मद जुबैर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
यूपी पुलिस की छह एफआईआर रद्द करने की मांग लेकर मोहम्मद जुबैर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सहसंस्थापक मोहम्मद जुबैर ने अपने ट्वीट पर यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की गई छह एफआईआर को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में सीतापुर, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और दो हाथरस में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई है। याचिका में यूपी पुलिस द्वारा एसआईटी के गठन को भी चुनौती दी गई है।जुबैर को पहली बार 27 जून को उनके द्वारा 2018 में पोस्ट किए गए एक ट्वीट पर दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की गई अन्य...