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मोदी-चोर टिप्पणी : झारखंड हाईकोर्ट ने मानहानि का मामला रद्द करने की मांग वाली राहुल गांधी की याचिका खारिज की
'मोदी-चोर' टिप्पणी : झारखंड हाईकोर्ट ने मानहानि का मामला रद्द करने की मांग वाली राहुल गांधी की याचिका खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उनके कथित बयान " सभी चोर मोदी उपनाम वाले क्यों हैं "के लिए दायर मानहानि के मामले को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि न्यायिक व्याख्या के अनुसार 'प्रतिष्ठा का अधिकार' जीवन के अधिकार का आयाम है और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के दायरे में भी आता है।उल्लेखनीय है कि 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार करते समय, राहुल गांधी ने कथित तौर पर बयान [" सभी चोर मोदी उपनाम...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
[आदेश XXII नियम 3 सीपीसी] कानूनी उत्तराधिकारियों के प्रतिस्थापन के लिए आवेदन दाखिल करने में देरी को पर्याप्त रूप से समझाया जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि कानूनी उत्तराधिकारियों के प्रतिस्थापन के लिए सीपीसी के आदेश XXII नियम 3 के तहत, या कार्यवाही के उन्मूलन के लिए संहिता के आदेश XXII नियम 9 के तहत आवेदनों पर उदारतापूर्वक विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, ऐसे आवेदनों को स्थानांतरित करने में देरी को पर्याप्त रूप से उचित ठहराया जाना चाहिए।जस्टिस सी हरि शंकर की एकल पीठ ने आगे कहा कि इस तरह की किसी भी देरी को सीमा की आवश्यकता को पूरा करना चाहिए, जिसे पूरा करने के लिए देरी की माफी मांगने वाले आवेदन की आवश्यकता होती...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
अलग रहने वाली पत्नी ने माता-पिता के घर में आत्महत्या कीः कर्नाटक हाईकोर्ट ने विवादित तथ्यों का हवाला देते हुए पति के खिलाफ दहेज हत्या का मामला रद्द करने से इनकार किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक पति की तरफ से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 बी और 498 ए के तहत दर्ज दहेज हत्या के मामले को रद्द करने की मांग की थी। उसकी पत्नी दो साल से अधिक समय से अलग रह रही थी और उसने अपने पैतृक घर में आत्महत्या कर ली थी। जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने निरंजन हेगड़े की तरफ से दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले में गंभीर रूप से विवादित तथ्य मौजूद होने के कारण ''फुल ब्लोन ट्रायल'' की आवश्यकता है और इसलिए, इस...

मद्रास हाईकोर्ट
[बेनामी लेनदेन अधिनियम का निषेध] कारण बताओ नोटिस के चरण में जिरह का अवसर प्रदान करने की आवश्यकता नहीं: मद्रास हाइकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम, 1988 के निषेध के तहत अनंतिम कुर्की की चुनौती को खारिज करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश की पुष्टि करते हुए माना कि गवाहों से जिरह करने का अवसर प्रदान करने का कोई प्रावधान नहीं है, जिनसे उन्होंने बेनामी संपत्ति के संबंध में प्रारंभिक चरण में सूचना एकत्र की है, और इसलिए प्रारंभिक चरण में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का प्रश्न ही नहीं उठता। यह केवल न्यायिक कार्यवाही के दौरान लागू होता है।जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस सत्य नारायण प्रसाद की...

दिल्ली कोर्ट 2018 ट्वीट केस में मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका पर शुक्रवार को आदेश सुनाएगा
दिल्ली कोर्ट 2018 ट्वीट केस में मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका पर शुक्रवार को आदेश सुनाएगा

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा दायर याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उनके खिलाफ हाल ही में धार्मिक भावनाओं को आहत करने और 2018 में किए गए अपने ट्वीट के माध्यम से दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में दर्ज एफआईआर में जमानत की मांग की गई थी। जुबैर को मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट स्निग्धा सरवरिया ने 2 जुलाई को जमानत देने से इनकार कर दिया था। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जांगला शुक्रवार को दोपहर 2 बजे आदेश...

मद्रास हाईकोर्ट
NEET: मद्रास हाईकोर्ट ने अपने गांव में खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण काउंसलिंग रजिस्ट्रेशन से चूकने वाले उम्मीदवार को 1 लाख रुपए का मुआवजा दिया

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने हाल ही में चिकित्सा शिक्षा निदेशक और इसकी चयन समिति को एक छात्र को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया, जो अपने गांव में तकनीकी गड़बड़ियों और खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण NEET काउंसलिंग रजिस्ट्रेशन के लिए खुद को पंजीकृत करने में विफल रहा, जिससे एडमिशन की संभावनाएं खत्म हो गईं।कोट ने कहा कि डिजिटलीकरण से सशक्तिकरण होना चाहिए और वंचित नहीं होना चाहिए।जस्टिस जीआर स्वामीनाथन की मदुरै खंडपीठ ने कहा कि राज्य का दायित्व है कि एक छात्र को मुआवजा दिया जाए...

दिल्ली हाईकोर्ट
धारा 7 फैमिली कोर्ट्स एक्ट| वैवाहिक संबंधों से उत्पन्न परिस्थितियों में पति और पत्नी ही नहीं माता-पिता भी शामिल हो सकते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि फैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 की धारा 7 (1) के स्पष्टीकरण के खंड (डी) के तहत निषेधाज्ञा के लिए मुकदमा दायर करने के संदर्भ में इस्तेमाल किए गए शब्द "वैवाहिक संबंधों से उत्पन्न परिस्थितियां" में केवल पति और पत्नी ही शामिल नहीं होंगे, बल्‍कि इसमें सास-ससुर भी शामिल हो सकते हैं।ज‌स्टिस सी हरि शंकर की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि जो देखा जाना है वह पार्टियों के बीच संबंध नहीं है, बल्‍कि यह है कि जिन परिस्थितियों में मुकदमा दायर किया गया है, क्या वे वैवाहिक संबंधों से उत्पन्न...

दिल्ली हाईकोर्ट
जिरह के दौरान गवाह द्वारा स्वीकार या अस्वीकार किए गए दस्तावेज वापस नहीं किए जा सकते, अदालत की फाइल पर अनिवार्य रूप से रखा जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी गवाह से जिरह के दौरान पेश किए गए दस्तावेज को उक्त गवाह द्वारा स्वीकार या अस्वीकार कर दिया जाता है, तो ऐसे दस्तावेज को वापस नहीं किया जा सकता है और इसे अदालत की फाइल पर अनिवार्य रूप से रखा जाना चाहिए।जस्टिस मिनी पुष्कर्ण सीपीसी की धारा 151 के तहत दीवानी वाद में वादी की ओर से दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थीं, जिसमें उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड में रखने की अनुमति दी गई थी।वादी का मामला था कि प्रतिवादी गवाह के साक्ष्य की रिकॉर्डिंग के दौरान, वादी ने उन...

सीपीसी आदेश 6 नियम 17 | पार्टी को साबित करना होगा कि उचित प्रयास के बावजूद प्रस्तावित संशोधन पहले नहीं लाया जा सका था: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
सीपीसी आदेश 6 नियम 17 | पार्टी को साबित करना होगा कि उचित प्रयास के बावजूद प्रस्तावित संशोधन पहले नहीं लाया जा सका था: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए लिखित बयान में संशोधन के लिए सीपीसी के आदेश 6 नियम 17 के तहत दायर एक आवेदन को देरी के आधार पर खारिज कर दिया और कहा कि संशोधन की मांग करने वाले पक्षों को यह साबित करना होगा कि उचित प्रयास के बावजूद, प्रस्तावित संशोधन बहुत पहले या ट्रायल शुरू होने से पहले नहीं लाया जा सका।जिजस्टिस मंजरी नेहरू कौल की खंडपीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता है कि कोर्ट को इस तरह के संशोधनों की अनुमति देने में उदार दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जो...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
सजा की अपर्याप्तता के आधार पर सीआरपीसी के तहत 'पीड़ित' कोई अपील नहीं दायर कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया है कि सजा की अपर्याप्तता के आधार पर सीआरपीसी की धारा 372 के तहत पीड़ित की ओर से दायर कोई अपील बरकरार नहीं रखी जा सकती है। इसलिए, अपराध के 'पीड़ित' [जैसा कि सीआरपीसी की धारा 2 डब्ल्यू (डब्ल्यूए) के तहत परिभाषित है] की ओर से सजा की अपर्याप्तता के खिलाफ की गई अपील सुनवाई योग्य नहीं है।जस्टिस मो फैज आलम खान ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि धारा 372 सीआरपीसी के तहत अपील [जब तक अन्यथा प्रावधान नहीं है, दायर नहीं की जा सकती] केवल तीन स्थितियों में ही दायर की जा सकती है-(i)...

गुजरात हाईकोर्ट
कर्मचारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है यदि नियोक्ता उनको पात्रता से अधिक टर्मिनल लाभ प्रदान करता हैः गुजरात हाईकोर्ट ने वसूली आदेश को रद्द किया

गुजरात हाईकोर्ट ने अहमदाबाद नगर निगम के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें निगम ने अपने पूर्व कर्मचारी से 63,878 रुपये की वसूली करने का निर्देश दिया था। निगम का कहना था कि इस कर्मचारी को टर्मिनल लाभ (सेवांत हितलाभ) गलत तरीके से उच्च वेतनमान पर दे दिए गए थे। जस्टिस बीरेन वैष्णव ने हाईकोर्ट के कई फैसलों पर भरोसा किया, जहां यह माना गया है कि जब कर्मचारियों की ओर से कोई मिथ्या प्रस्तुति या धोखाधड़ी नहीं की जाती है और उसके बावजूद भी उनको अधिक राशि का भुगतान किया जाता है और यदि ऐसे कर्मचारियों को इस...

 दिल्ली पुलिस ने उसे लापरवाह तरीके से चार्जशीट किया: कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में साक्ष्य के अभाव में व्यक्ति को बरी किया
" दिल्ली पुलिस ने उसे लापरवाह तरीके से चार्जशीट किया": कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में साक्ष्य के अभाव में व्यक्ति को बरी किया

दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के दंगों के संबंध में दर्ज एक मामले में रोहित नाम के एक व्यक्ति को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने देखा कि शहर की पुलिस ने उसे लापरवाह तरीके' से चार्जशीट किया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमचला ने रोहित को बरी कर दिया। उसके खिलाफ पिछले साल अगस्त में भारतीय दंड संहिता की धारा 143, 147, 148, 427, 454, 380, 435, 436 और धारा 149 के तहत आरोप तय किए गए थे।एक शिकायतकर्ता उस्मान अली के आरोप के आधार पर मामला दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने जिला समिति को दो सप्ताह में कथित अनधिकृत मस्जिद के निर्माण पर निर्णय लेने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने जिला समिति को दो सप्ताह में कथित अनधिकृत मस्जिद के निर्माण पर निर्णय लेने का निर्देश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) की औरंगाबाद बेंच ने जिला समिति को दो सप्ताह के भीतर जालना में एक कथित अनधिकृत मस्जिद (Mosque) के निर्माण पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस रवींद्र वी. घुगे की खंडपीठ ने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से जालना के आर्य समाज नामक संगठन द्वारा दायर 2018 जनहित याचिका में यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट आशीष टी जाधवर ने कहा कि जिला वक्फ अधिकारी, वक्फ बोर्ड कार्यालय, जालना के कहने पर अधिकारियों की अनुमति के बिना एक...

पत्रकार ने डोनाल्ड ट्रम्प, अमिताभ बच्चन के नाम पर COVID ई-पास खरीदकर रियलिटी चेक किया: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द की
पत्रकार ने डोनाल्ड ट्रम्प, अमिताभ बच्चन के नाम पर COVID ई-पास खरीदकर 'रियलिटी चेक' किया: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (Himachal Pradesh High Court) ने एक जी न्यूज (Zee News) के पत्रकार के खिलाफ आईपीसी और आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एक आपराधिक मामले को रद्द किया।दरअसल, पत्रकार ने डोनाल्ड ट्रंप और अमिताभ बच्चन के नाम से COVID ई-पास खरीदकर अंतर-राज्यीय परिवहन के लिए ई-पास पंजीकरण पर 'रियलिटी चेक' किया था।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने कहा कि पत्रकार अमन कुमार भारद्वाज (याचिकाकर्ता) को राज्य की सत्यापन प्रणाली के उचित कामकाज (राज्य में प्रवेश के लिए ई-पास बनाने के लिए...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
मां को बच्चे और करियर के बीच चयन करने के लिए नहीं कहा जा सकताः बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला को बेटी के साथ विदेश जाने की अनुमति दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि एक महिला को अपने करियर और बच्चे के बीच चयन करने के लिए नहीं कहा जा सकता है,उसके पति को निर्देश दिया है कि वह बेटी के साथ महिला को पोलैंड की यात्रा करने के लिए अपनी अनापत्ति दे दे। जस्टिस भारती डांगरे ने कहा कि महिला को अपना विकास करने का अधिकार है और पुणे फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी को अपनी बेटी के साथ क्राको,पोलैंड में दो साल रहने के लिए जाने की अनुमति नहीं दी थी। ''... आक्षेपित आदेश विकास के अधिकार के महत्वपूर्ण पहलू पर विचार...

मद्रास हाईकोर्ट
पत्नी का पति के चरित्र पर शक करना और सहकर्मियों के सामने एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के आरोप लगाना क्रूरता के समान : मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा की गई क्रूरता के आधार पर एक पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी करते हुए हाल ही में कहा कि पत्नी का अपने पति के चरित्र पर संदेह करना और उसके सहयोगियों की उपस्थिति में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के आरोप लगाना मानसिक क्रूरता के समान है।जस्टिस वीएम वेलुमणि और जस्टिस एस सौंथर की पीठ ने कहा किः ''प्रतिवादी/पत्नी उस कॉलेज में गई जिसमें अपीलकर्ता/पति काम करता है और उसने अन्य स्टाफ सदस्यों और छात्रों की उपस्थिति में अपीलकर्ता का नाम एक अन्य महिला शिक्षिका के साथ जोड़कर वहां...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
कोर्ट्स को कोर्ट की कार्यवाही लंबित रहने के दौरान समाप्ति और बर्खास्तगी के आदेश पर रोक नहीं लगानी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि कोर्ट्स को कोर्ट में लंबित कार्यवाही के दौरान निलंबन समाप्ति, बर्खास्तगी और ट्रांसफर आदि के आदेश पर नहीं लगानी चाहिए।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव और जस्टिस प्रितिंकर दिवाकर की खंडपीठ अनिवार्य रूप से मार्च 2022 में पारित इंटरलोक्यूटरी आदेश पर सवाल उठाते हुए बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देने वाला कर्मचारी के एक इंट्रा कोर्ट अपील से निपट रही थी, जिसमें एब्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एक कर्मचारी के खिलाफ बर्खास्तगी के आदेश को रिट याचिका के लंबित रहने के...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
"पति-पत्नी को समायोजन की भावना के साथ रहने की उम्मीद": एमपी हाईकोर्ट ने पति के साथ पत्नी के सुलह के रूप में आरसीआर ड‌िक्री को बरकरार रखा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा, "इस बात का उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं है कि विवाह संस्था एक पवित्र संस्था है, जिसके साथ गंभीरता जुड़ी हुई है। पति और पत्नी दोनों से समायोजन और सह-अस्तित्व की भावना के साथ रहने की उम्मीद की जाती है। विवाह के आधार पर, विवाह के बाद दो व्यक्ति एक मान्यता प्राप्त स्थिति प्राप्त करते हैं। आपसी विश्वास की भावना के साथ उस स्थिति को बनाए रखना दंपति का कर्तव्य है।"जस्टिस रोहित आर्य और जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने यह टिप्पणी पत्नी द्वारा पति के पक्ष में दिए गए...