मुख्य सुर्खियां
सीआरपीसी | पीड़ित को बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में पाया कि अपराधी को बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील करने का पूर्ण अधिकार है और शिकायतकर्ता की तरह अपील करने के लिए अनुमति लेने की भी आवश्यकता नहीं है।जस्टिस खातिम रजा और जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की:"पीड़ित को आपराधी को बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील करने का पूर्ण अधिकार है, इसलिए उसे आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 378(4) के तहत अपील करते समय "शिकायतकर्ता" के मामले में आवश्यक अपील करने के लिए अनुमति लेने की भी आवश्यकता नहीं है। हमने इस अपील पर...
धारा 437(6) सीआरपीसी | यदि अभियोजन साक्ष्य शुरू होने के 60 दिनों में मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय मामला समाप्त नहीं होता है तो जमानत दी जा सकती है: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहराया कि सीआरपीसी की धारा 437 (6) के संदर्भ में, जहां मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय मामले में मुकदमा अभियोजन के लिए तय की गई पहली तारीख के बाद 60 दिनों की अवधि के भीतर समाप्त नहीं होता है, वहां जमानत दी जानी चाहिए।जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने यह टिप्पणी याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 420, 409, 120-बी आईपीसी के तहत दर्ज प्राथमिकी में सीआरपीसी की धारा 439 के तहत एक याचिका पर विचार करते हुए की, जिसमें कथित तौर पर आरडी, एफडीआर खोलने के बहाने 1,01,32,600 रुपये तक कई लोगों के साथ...
मजिस्ट्रेट "पोस्ट ऑफिस" के रूप में कार्य नहीं कर सकता, यदि वह यांत्रिक रूप से एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देता है तो यह व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित करता है: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि एफआईआर सामान्य बात नहीं है और व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है, मजिस्ट्रेट के आदेश की कड़ी आलोचना की। उक्त मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में आरोपी के खिलाफ बिना दिमाग का इस्तेमाल किए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।जस्टिस एन सतीश कुमार पुलिस निरीक्षक, वडापलानी पुलिस स्टेशन द्वारा सैदापेट मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहे थे। इसमें एसएचओ, विरुगमबक्कम पुलिस स्टेशन को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।अदालत...
किशोर न्याय | धारा 94 के तहत किशोर की उम्र निर्धारित करने की शक्ति केवल जेजेबी के पास, न कि ट्रायल कोर्ट के पास: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में कहा कि किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 94 के तहत ट्रायल कोर्ट के पास आरोपी की उम्र निर्धारित करने की शक्ति नहीं है, जिसे उसने चुनौती दी है और किशोर न्याय बोर्ड ही इस शक्ति का प्रयोग कर सकता है।निचली अदालत द्वारा पारित उस आदेश को रद्द करते हुए, जिसमें उसने याचिकाकर्ता/आरोपी द्वारा अपने मामले को किशोर न्याय बोर्ड को संदर्भित करने के लिए दायर आवेदन को खारिज कर दिया था, जस्टिस एस सिंह ने देखा-'ट्रायल कोर्ट के पास आवेदक की उम्र...
गुजरात हाईकोर्ट ने दो साल की बच्ची की कस्टडी मां को देने से इनकार किया, मां का स्वैच्छिक परित्याग और व्यस्तता, पिता से बच्चे का लगाव माना आधार
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में नाबालिग बेटे की मां को इस आधार पर बच्चे की कस्टडी देने से इनकार कर दिया कि उसका दिनचर्या बच्चे कि पिता से ज्यादा व्यस्त रहती है। अपनी व्यस्त दिनचर्या में मां बच्चे की सही से देखभाल नहीं कर पाएगी, इसलिए बच्ची की कस्टडी पिता को दे दी गई।जस्टिस उमेश त्रिवेदी ने बच्चे के सर्वोपरि हित के सिद्धांत को लागू करते हुए कहा कि अपीलकर्ता-मां सौतेली मां है और यह संदिग्ध है कि वह नाबालिग बेटे की देखभाल करेगी।इस प्रकार, फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ मां की अपील को खारिज करते हुए...
"वेट लूज" प्रोग्राम के बारे में भ्रामक विज्ञापन अनुचित व्यापार व्यवहार का कृत्य है: चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग
चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने माना कि वजन घटाने के कार्यक्रमों (Weight Loss Programme) के बारे में भ्रामक विज्ञापन अनुचित व्यापार व्यवहार का कार्य है।प्रोग्राम से शिकायकर्ता को हुई मानसिक पीड़ा के लिए जुर्माना के साथ पूरी प्रोग्राम फीस वापस करने के जिला आयोग के आदेश के खिलाफ वीएलसीसी की अपील को खारिज करते हुए राज्य आयोग ने कहा,"अपीलकर्ताओं का एक तरफ भ्रामक विज्ञापनों से झूठे आश्वासन देना और दूसरी ओर उपभोक्ताओं से घोषणा प्राप्त करना और कार्यक्रम के परिणाम के बारे में कोई...
'एडवोकेटे जनरल के कार्यालय में लगी आग में जले केस रिकॉर्ड के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार सभी खर्च वहन करेगी': यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया
उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad high Court) को सूचित किया कि उसने 17 जुलाई को स्टेट एडवोकेट जनरल कार्यालय की छठी, सातवीं, आठवीं और नौवीं मंजिल पर लगी आग में जलकर खाक हुए केस रिकॉर्ड के पुनर्निर्माण के संबंध में सभी खर्चों को वहन करने का निर्णय लिया है।राज्य सरकार ने कोर्ट को यह भी सूचित किया कि उसने मनीष गोयल, अतिरिक्त महाधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी, अतिरिक्त महाधिवक्ता, शिव कुमार पाल, सरकारी अधिवक्ता, और के.आर. सिंह मुख्य सरकारी वकील को यह सुनिश्चित करने के लिए...
एनडीपीएस एक्ट की धारा 43- 'गजेटेड पुलिस ऑफिसर 'दिन हो या रात' संलग्न स्थानों की वैध सर्च कर सकता है': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने एनडीपीएस अधिनियम (NDPS Act) के प्रावधानों के तहत दर्ज एफआईआर में नियमित जमानत की मांग वाली याचिका पर विचार करते हुए कहा कि अधिनियम की धारा 42 के प्रावधान सर्च के संबंध में जांच अधिकारी द्वारा पूर्व सूचना प्राप्त होने पर इमारतों, वाहन और संलग्न स्थान की तलाशी पर लागू होते हैं और तलाशी, परस्पर सूर्यास्त, और सूर्योदय के बीच की जाती है।संक्षेप में (I) अधिनियम की धारा 42 के प्रावधान भवनों, वाहन और संलग्न स्थान की तलाशी पर लागू होते हैं,...
हाईकोर्ट में रविवार को हुई सुनवाई : मद्रास हाईकोर्ट ने पिता के निधन के बाद क्रिया कर्म करने के लिए आरोपी को अंतरिम जमानत दी
मद्रास हाईकोर्ट ने रविवार को एक मामले की विशेष सुनवाई आयोजित की, जब एक जेल में बंद आरोपी को इस आधार पर जमानत की एक अर्जेंट याचिका दायर की जिसमें उसने उसके पिता का अंतिम संस्कार करने की अनुमति देने की प्रार्थना की। याचिकाकर्ता के पिता की मृत्यु हो गई थी और वह एकमात्र पुत्र होने के नाते अदालत से अंतिम संस्कार करने की अनुमति मांग रहा था। याचिकाकर्ता के वकील ने मामले की तत्काल सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष याचिका दायर की। तदनुसार, इस मामले की सुनवाई रविवार को जस्टिस जी जयचंद्रन की पीठ ने...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टेट हाईवे को चौड़ा करने के लिए सैदाबाद शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में राज्य राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना के लिए जी.टी. रोड, सैदाबाद (कथित रूप से 100 वर्ष से अधिक पुराना) स्थित शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज किया।जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस साधना रानी (ठाकुर) की खंडपीठ ने आधिकारिक अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत इस बात को ध्यान में रखते हुए कि मस्जिद सरकारी भूमि पर एक अतिक्रमण है, इंतेजामिया समिति शाही मस्जिद की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।पीठ ने कहा,"आज दिए गए लिखित निर्देश और उसमें...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'अर्नेश कुमार मामले के दिशानिर्देशों' के उल्लंघन के लिए पुलिस अधिकारी को अवमानना का दोषी ठहराया, 14 दिन के कारावास की सजा दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एक पुलिस अधिकारी को अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य के मामले में जारी सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को जानबूझकर दरकिनार करने के लिए अवमानना का दोषी ठहराते हुए 14 दिनों के साधारण कारावास की सजा सुनाई।अर्नेश कुमार मामले के फैसले के अनुसार, जहां अपराध में सात साल से कम की सज़ा का प्रावधान हो, वहां गिरफ्तारी अपवाद होनी चाहिए और ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के बजाय सीआरपीसी की धारा 41 ए के तहत पेश होने के लिए नोटिस दिया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में असाधारण परिस्थितियों...
अधिकांश गरीब लोग प्रायवेट वकील नियुक्त करने के लिए मजबूर हुए : जस्टिस यू यू ललित ने एलएडीसी प्रणाली के शुभारंभ पर कहा
राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों में लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) प्रणाली के शुभारंभ पर राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष और भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित ने रविवार को कहा कि हाशिए की आबादी को कानूनी सहायता देने के लिए देश पूरे में 365 एलएडीसी कार्यालय स्थापित किए गए हैं।एलएडीसी नालसा द्वारा वित्त पोषित परियोजना है जो अभियुक्त व्यक्तियों को आपराधिक मुकदमों में अपना बचाव करने के लिए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करती है।जस्टिस ललित ने अपनी अध्यक्षता में...
बलात्कार के दोषी की उम्र और अदालत में नियमित उपस्थिति कानून के तहत न्यूनतम सजा से कम सजा देने का आधार नहीं हो सकती : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2005 में अपनी बहरी और मूक भाभी से बलात्कार करने के आरोपी एक व्यक्ति की जेल की सजा को बढ़ाते हुए कहा कि एक बलात्कार के दोषी की अधिक उम्र और अदालत की सुनवाई में नियमित उपस्थिति कानून के तहत न्यूनतम सजा से कम सजा देने कारण/आधार नहीं बन सकती। आरोपी ने पीड़िता के साथ उस समय बलात्कार किया, जब परिवार के अन्य सदस्य बाहर गए हुए थे और उसने पीड़िता के अंधे पति (दोषी के भाई) को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी। कोर्ट ने कहा, ''एक बार जब निचली अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंच गई कि अभियोजन...
सत्येंद्र जैन को रिट क्षेत्राधिकार के तहत विकृत दिमाग वाला व्यक्ति या दिल्ली विधानसभा से अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी नेता सत्येंद्र जैन को 'अस्वस्थ दिमाग' का व्यक्ति घोषित करने की मांग वाली एक जनहित याचिका खारिज कर दी, जिससे उन्हें दिल्ली विधानसभा से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। जैन वर्तमान में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ का विचार था कि अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए न्यायालय जैन को विकृत दिमाग वाले व्यक्ति के...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 174 और धारा 157 के तहत की गई जांच और अन्वेषण के बीच अंतर स्पष्ट किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में सीआरपीसी की धारा 174 [आत्महत्या आदि पर पुलिस का जांच करना और रिपोर्ट देना] और धारा 157 [प्रारंभिक अन्वेषण की प्रक्रिया] के बीच अंतर समझाया है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सीआरपीसी की धारा 174 के तहत कानूनी जांच (Inquiry) की तैयारी वास्तव में जांच की प्रकृति में है और इसकी तुलना सीआरपीसी की धारा 157 के तहत अन्वेषण (Investigation) के साथ नहीं की जा सकती, जो सीआरपीसी की धारा 154 के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद शुरू होती है।कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 174 का एक अलग...
'उत्तर प्रदेश मृतक आश्रित भर्ती नियमावली' के तहत पत्नी की मौजूदगी में अनुकंपा नियुक्ति लाभ का दावा बहन नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृतक सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली 1974 (UP Recruitment of Dependents of Government Servants Dying in Harness Rules, 1974) के तहत सेवा के दौरान मृत सरकारी कर्मचारी की पत्नी की मौजूदगी में उसकी बहन को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।जस्टिस नीरज तिवारी की पीठ ने कहा कि यूपी डाइंग इन हार्नेस नियम 1974 के अंतर्गत 2021 के नियमों में संशोधन के तहत, एक पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति का पहला अधिकार है, और उसकी उपस्थिति...
हर गर्भवती महिला सम्मान की हकदार, कस्टडी में जन्म देना मां और बच्चे दोनों के लिए आघात होगा : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक गर्भवती विचाराधीन कैदी को तीन महीने की अंतरिम जमानत देते हुए कहा है कि हर गर्भवती महिला मातृत्व के दौरान गरिमा की हकदार है और जल्द ही यह महिला अपने बच्चे को जन्म देने वाली है। जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता की पीठ ने यह भी कहा कि एक महिला की गर्भावस्था एक विशेष परिस्थिति है जिसकी हिरासत में बच्चे को जन्म देने के रूप में सराहना की जानी चाहिए, क्योंकि यह न केवल मां के लिए एक आघात होगा बल्कि बच्चे पर भी हमेशा के लिए प्रतिकूल प्रभाव पैदा करेगा,जब भी उससे उसके जन्म के बारे...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (15 अगस्त, 2022 से 19 अगस्त, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।पक्षकारों को जब मध्यस्थता के लिए भेजा जाता है तो सिविल कोर्ट आदेश पारित करने से पहले मध्यस्थता रिपोर्ट का इंतजार करने के लिए बाध्य: केरल हाईकोर्टकेरल हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि जब दीवानी अदालत ने सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 के तहत मध्यस्थता (Mediation) के लिए दीवानी मुकदमे के पक्षकारों को...
बिलकिस बानो मामला| सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को छूट का फैसला करने का अधिकार देने में गलती की: सीनियर एडवोकेट रेबेका जॉन
क्रिमिनल लॉ एक्सपर्ट सीनियर एडवोकेट रेबेका एम जॉन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह मानते हुए गलती की कि गुजरात राज्य के पास बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की सजा की छूट का फैसला करने का अधिकार क्षेत्र है।लाइव लॉ के साथ एक साक्षात्कार में जॉन ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 (7) के अनुसार, यह वह राज्य होगा, जहां मुकदमा चलाया गया हो और जहां सजा पारित की गई हो, जिसके पास छूट के लिए आवेदनों पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र हो।उन्होंने समझाया कि इस स्थिति को यूनियन ऑफ इंडिया बनाम वी श्रीहरन @...
सड़क के गड्ढों से हुई हादसों के लिए जिला कलेक्टर होंगे जवाबदेह, संवैधाननिक अपकृत्य के सिद्धांत लागू होंगे: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि भविष्य में गड्ढों के कारण होने वाली हर सड़क दुर्घटना के बारे में जिला कलेक्टरों को बताना होगा।कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधक प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में विभिन्न जिला कलेक्टरों के अधीन अधिकारियों को हर सड़क का दौरा करने और देखने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाना चाहिए कि उन सभी को आपदा से मुक्त रखा जाए, ऐसा न हो कि कोई अन्य दुर्घटना घटित हुई।ऐसा कहते हुए जस्टिस देवन रामचंद्रन ने पहले जारी किए गए आदेश के बारे में याद दिलाया, जिसमें...



















