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केरल हाईकोर्ट ने एनडीएमए को COVID-19 टीकाकरण के बाद होने वाली मौतों से संबंधित पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने को कहा
केरल हाईकोर्ट ने एनडीएमए को COVID-19 टीकाकरण के बाद होने वाली मौतों से संबंधित पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने को कहा

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने गुरुवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को COVID-19 टीकाकरण के बाद के प्रभाव के कारण मृत्यु के मामलों की पहचान करने और पीड़ितों के आश्रितों को तीन महीने के भीतर मुआवजा देने के लिए नीति या दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया।जस्टिस वी. जी. अरुण ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जहां टीकाकरण के बाद के प्रभावों के कारण व्यक्तियों के मरने का संदेह है, ऐसी परिस्थितियों में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ऐसे मामलों की पहचान...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने देर रात सुनवाई की, कथित अवैध निर्माण के विध्वंस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कथित अतिक्रमण से संबंधित एक मामले की सुनवाई के लिए शनिवार को रात 9:10 बजे कार्यवाही की। हाईकोर्ट ने यह देखा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता को उसके कथित अतिक्रमण को हटाने के लिए उचित नोटिस नहीं दिया गया है, इसलिए अदालत ने इसके विध्वंस के खिलाफ अंतरिम राहत दी।जस्टिस सुबोध अभयंकर की पीठ ने प्रतिवादी अधिकारियों को सुनवाई की अगली तारीख तक याचिकाकर्ता का मकान तोड़ने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई।प्रतिद्वंदी की दलीलों पर उचित विचार करने और...

दिल्ली हाईकोर्ट
एकपक्षीय नियुक्त आर्बिट्रेटर द्वारा पारित अवॉर्ड नॉन-एस्ट, यह एएंडसी एक्ट की धारा 11 के तहत याचिका की सुनवाई के लिए बाधा नहीं हो सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि एकतरफा नियुक्त मध्यस्थ द्वारा पारित अवॉर्ड नॉन-एस्ट (non-est) है, इसलिए यह एएंडसी एक्‍ट की धारा 11 के तहत याचिका की सुनवाई के लिए बाधा नहीं हो सकता।जस्टिस संजीव नरूला की पीठ ने कहा कि अवॉर्ड पारित करने से नॉन-एस्ट कार्यवाही पवित्र नहीं हो जाती और केवल यह तथ्य कि याचिकाकर्ता ने अधिनियम की धारा 14 के तहत एकतरफा नियुक्ति को चुनौती नहीं दी थी, यह उसे स्वतंत्र मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए कोर्ट से अपील करने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता है।तथ्यपार्टियों ने छह सितंबर, 2014...

केरल हाईकोर्ट
एससी/एसटी एक्ट | अग्रिम जमानत आवेदन केवल स्पेशल कोर्ट के समक्ष दायर किया जा सकता है, हाईकोर्ट के समक्ष नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत कथित अपराधों के मामलों में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन केवल स्पेशल कोर्ट या एक्ट के तहत गठित एक्सक्लूसिव स्पेशल कोर्ट के समक्ष दायर किया जा सकता है न कि हाईकोर्ट के समक्ष।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत अपराधों के लिए जमानत देने के लिए हाईकोर्ट का न तो धारा 438 सीआरपीसी के तहत समवर्ती क्षेत्राधिकार है और न ही धारा 482 सीआरपीसी के तहत मूल क्षेत्राधिकार है और केवल...

जनता में बेबुनियाद आरोपों के आधार पर जजों की शिकायत करने और उन्हें बदनाम करके उन पर हावी होने की मानसिकता विकसित हो गई हैः इलाहाबाद हाईकोर्ट
जनता में बेबुनियाद आरोपों के आधार पर जजों की शिकायत करने और उन्हें बदनाम करके उन पर हावी होने की मानसिकता विकसित हो गई हैः इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सिविल केस को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आम जनता में जजों की शिकायत करने और निराधार आरोपों पर उन्हें बदनाम करने की मानसिकता विकसित हो गई है।याचिकाकर्ता मोहम्मद सरफराज ने पीठासीन अधिकारी, सिविल जज (जूनियर ‌डिवीजन) के खिलाफ आरोप लगाकर मामले को सिविल जज (जूनियर डिवीजन), नगीना, जिला-बिजनौर की अदालत से बिजनौर की जजशिप में किसी अन्य सक्षम न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी।जिला जज ने इस संबंध में याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
गणेश चतुर्थी| अधिकारियों को शांति बनाए रखनी चाहिए ताकि धार्मिक उत्सवों का स्वतंत्र रूप से आयोजन हो सकेः इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अवलोकन में कहा है कि प्रशासनिक अधिकारी कानून-व्यवस्‍था और शांति बनाने रखने की जिम्मेदारी से खुद को मुक्त नहीं कर सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि धार्मिक प्रथाओं और उत्सवों का स्वतंत्र रूप से आयोजन हो सके और यह सार्वजनिक शांति में बिना किसी हस्तक्षेप के हो सके।जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को लोगों की आस्था के प्रति उदासीन नहीं होना चाहिए, उन्हें अपने निर्णयों में मेलजोल दिखाने की आवश्यकता है।इसके...

लखीमपुर खीरी हिंसा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी अंकित दास को मेडिकल ग्राउंड पर 15 दिनों की अंतरिम जमानत दी
लखीमपुर खीरी हिंसा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी अंकित दास को मेडिकल ग्राउंड पर 15 दिनों की अंतरिम जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा के आरोपी अंकित दास को मेडिकल ग्राउंड पर अल्पकालिक जमानत (Short-term bail) दी है। जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की बेंच ने संबंधित अदालत/मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के लिए एक व्यक्तिगत बांड और समान राशि में प्रत्येक में दो जमानत दाखिल करने पर 15 दिनों के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।दास उन 13 लोगों में शामिल हैं, जिन पर 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में चार किसानों और एक पत्रकार की हत्या का आरोप है। दास पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश दास के भतीजे हैं।माना जा...

स्पेशल जज (पोक्सो) कटक में अपने सरकारी आवास में मृत पाए गए, परिवार को हत्या का संदेह
स्पेशल जज (पोक्सो) कटक में अपने सरकारी आवास में मृत पाए गए, परिवार को हत्या का संदेह

एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) कटक श्री सुभाष कुमार बिहारी शुक्रवार को सीडीए के सेक्टर-9, कटक में अपने सरकारी आवास में मृत पाए गए।न्यायाधीश पिछले दो दिनों से छुट्टी पर थे और शुक्रवार को उन्हें अपनी ड्यूटी पर वापस आना था। कथित तौर पर वह अदालत नहीं आए, बल्कि अपनी छुट्टी बढ़ाने की मांग की।इसके बाद उन्हें उनके आवास में लटका पाया गया, जिसके बाद उन्हें कटक के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। हालांकि डॉक्टर ने उन्हें 'मृत लाया' घोषित कर दिया। पुलिस को शक...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
आरोपी ट्रायल कोर्ट से अभियोजन एजेंसी को यह निर्देश देने के लिए नहीं कह सकता है कि विशेष साक्ष्य का एक हिस्सा जुटाया जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक आरोपी ट्रायल कोर्ट से अभियोजन एजेंसी को यह निर्देश देने के लिए नहीं कह सकता है कि विशेष साक्ष्य का एक हिस्सा जुटाया जाए, जो उसके पक्ष में हो सकता है।जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, डीजीपी, एडीजी महिला प्रकोष्ठ, पुलिस आयुक्त लखनऊ सहित अन्य पुलिस अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के संरक्षण की मांग की गई थी।दरअसल, ठाकुर के खिलाफ धारा 120 बी, 167, 195...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
केवल संसद ही एससी लिस्ट में किसी जाति को शामिल कर सकती है: 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित करने के यूपी सरकार के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग की 17 उप-जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता देने या स्वीकार करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा केवल संसदीय कानून के जरिए ही किया जा सकता है।चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस जेजे मुनीर ने कहा है,"संविधान के अनुच्छेद 341 के प्रावधान संसद द्वारा बनाए गए कानून को छोड़कर संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 द्वारा प्रदान की गई राज्य में अनुसूचित जाति की सूची में किसी भी जाति या समूह को...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
निवारक निरोध आदेश के खिलाफ बंदी के प्रतिनिधित्व पर विचार न करना संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत दिए गए अधिकारों का उल्लंघन: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि निवारक निरोध आदेश के खिलाफ एक बंदी के प्रतिनिधित्व हिरासतकर्ता प्राधिकारी द्वारा विचार नहीं करना, संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत ऐसे बंदी के अधिकारों का उल्लंघन है।जस्टिस संजीव कुमार ने कहा,"मेरा सुविचारित मत है कि निरोध का आक्षेपित आदेश कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है, इसमें उसकी मां द्वारा उसकी ओर से किए गए अभ्यावेदन पर प्रतिवादियों द्वारा विचार नहीं किया गया है। प्रतिवेदन करने के लिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति का अधिकार और सक्षम...

नार्को एनालिसिस: राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को दहेज हत्या के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को अपने बचाव के समर्थन में स्वेच्छा से नार्को टेस्ट से गुजरने की अनुमति देने का निर्देश दिया
नार्को एनालिसिस: राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को दहेज हत्या के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को अपने बचाव के समर्थन में स्वेच्छा से नार्को टेस्ट से गुजरने की अनुमति देने का निर्देश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह पत्नी की दहेज हत्या के आरोपी पति-याचिकाकर्ता को अपने बचाव के समर्थन में स्वेच्छा से नार्को एनालिसिस टेस्ट कराने की अनुमति दे और इस तरह उसे साक्ष्य में दर्ज करे।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने कहा,"भले ही नार्को एनालिसिस टेस्ट परिणाम पर पूर्ण बाध्यकारी प्रभाव न हो, यह निश्चित रूप से कानून द्वारा मान्यता प्राप्त वैज्ञानिक तकनीक है। इसका उपयोग अभियोजन एजेंसियों के साथ-साथ न्यायालयों द्वारा जांच के दौरान मुख्य साक्ष्य का समर्थन और...

केरल हाईकोर्ट
लोकायुक्त शिकायत में शामिल परेशानी पर सुनवाई कर सकते हैं या नहीं, यह केस-दर-केस तय होगा, कोर्ट इस पर कोई कानून नहीं बना सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा था कि लोकायुक्त या उप लोकायुक्त किसी भी कष्ट या आरोप के संबंध में किसी भी शिकायत पर विचार कर सकते हैं और यह तथ्यात्मक परिस्थितियों के अनुसार और मामले के आधार पर पता लगाया जाना चाहिए, न्यायालय इस संबंध में किसी कानून का निर्धारण नहीं कर सकता है।जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी चाली की खंडपीठ ने प्राधिकरणों जैसे कि उप लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग, किशोर न्याय बोर्ड, सिविल कोर्ट आदि को निर्देश दिया कि विभिन्न कानूनों के तहत इसी अदालत द्वारा एक अन्य मामले में...

धारा 319 सीआरपीसी | जांच या परीक्षण के दरमियान अदालत द्वारा एकत्र की गई सामग्री का ही उपयोग अतिरिक्त आरोपी को दोषारोपित करने के लिए किया जा सकता है: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
धारा 319 सीआरपीसी | जांच या परीक्षण के दरमियान अदालत द्वारा एकत्र की गई सामग्री का ही उपयोग अतिरिक्त आरोपी को दोषारोपित करने के लिए किया जा सकता है: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि जांच या परीक्षण के दरमियान अदालत द्वारा एकत्र की गई सामग्री का उपयोग ही केवल धारा 319 सीआरपीसी के तहत अतिरिक्त आरोपी के दोषारोपण के लिए किया जा सकता है, न कि मामले की जांच के दरमियान जांच एजेंसी द्वारा एकत्र की गई सामग्री का उपयोग...।जस्टिस संजय धर की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके संदर्भ में मेसर्स जेके स्टेशनर्स ने विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत आरोप पत्र में धारा 5 (1) (डी) सहपठित...

[मेडिकल लापरवाही] मेडिकल पेशेवरों के खिलाफ आपराधिक कानून लागू करने से पहले विशेषज्ञ की राय लेना आवश्यक: जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
[मेडिकल लापरवाही] मेडिकल पेशेवरों के खिलाफ आपराधिक कानून लागू करने से पहले विशेषज्ञ की राय लेना आवश्यक: जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि आपराधिक लापरवाही के अपराध के लिए मेडिकल पेशेवरों पर मुकदमा चलाने से पहले आपराधिक अदालत को मेडिकल एक्सपर्ट की राय लेनी चाहिए। यदि इस तरह की राय से मेडिकल पेशेवर के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो तभी आपराधिक कानून की मशीनरी को चालू किया जाना चाहिए।जस्टिस संजय धर की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके माध्यम से याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पुलवामा द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी। इसमें...

ऐसा प्रतीत होता है कि कोई भी भूमि के किसी भी हिस्से पर अतिक्रमण कर सकता है: उत्तराखंड एचसी ने देहरादून के नदी तल पर अतिक्रमण को तत्काल हटाने का निर्देश दिया
"ऐसा प्रतीत होता है कि कोई भी भूमि के किसी भी हिस्से पर अतिक्रमण कर सकता है": उत्तराखंड एचसी ने देहरादून के नदी तल पर अतिक्रमण को तत्काल हटाने का निर्देश दिया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून में नदी तलों के निरंतर अतिक्रमण और संबंधित अधिकारियों की मौन भागीदारी और समर्थन पर गंभीर निराशा व्यक्त की।चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने अतिक्रमण को तत्काल हटाने का आदेश पारित करते हुए कहा,"हम वन भूमि, जलमार्ग और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में राज्य में प्रचलित वर्तमान स्थिति को देखकर निराश हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह सभी के लिए नि: शुल्क है और कोई भी भूमि के किसी भी हिस्से पर अतिक्रमण कर सकता है।"तथ्यात्मक...

उड़ीसा हाईकोर्ट ने पुलिस को बार के सदस्यों द्वारा आरोपी के जमानत बांड जमा करने से रोके गए वकील को एस्कॉर्ट करने का निर्देश दिया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने पुलिस को बार के सदस्यों द्वारा आरोपी के जमानत बांड जमा करने से रोके गए वकील को एस्कॉर्ट करने का निर्देश दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खुर्दा के पुलिस अधीक्षक को वकील को आवश्यक सुरक्षा/एस्कॉर्ट प्रदान करने का निर्देश दिया, जिसे कथित रूप से टांगी के बार सदस्यों ने अपने मुवक्किलों के जमानत बांड जमा करने के लिए मजिस्ट्रेट के पास जाने से रोका था।इस मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए जस्टिस एस. तलापात्रा और जस्टिस एम.एस. साहू ने कहा,"कोई भी सही सोच वाला व्यक्ति ऐसी स्थिति के संबंध में गंभीर चिंता व्यक्त नहीं कर सकता है, चाहे इस तरह की कार्रवाई के पीछे कोई भी कारण हो। स्वतंत्रता हमारे संवैधानिक ढांचे के तहत...