मुख्य सुर्खियां

दिल्ली हाईकोर्ट ने केरल हवाई अड्डे से निर्वासन के खिलाफ ब्रिटेन के मानवविज्ञानी फिलिपो ओसेला की याचिका पर केंद्र का जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने केरल हवाई अड्डे से निर्वासन के खिलाफ ब्रिटेन के मानवविज्ञानी फिलिपो ओसेला की याचिका पर केंद्र का जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 मार्च को केरल के तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे से उनके हालिया निर्वासन को चुनौती देने वाली ब्रिटेन के प्रसिद्ध मानवविज्ञानी और सामाजिक वैज्ञानिक फिलिपो ओसेला द्वारा दायर याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा।ओसेला ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स में मानव विज्ञान विभाग, स्कूल ऑफ ग्लोबल स्टडीज में नृविज्ञान और दक्षिण एशियाई अध्ययन के प्रोफेसर हैं।जस्टिस यशवंत वर्मा ने केंद्र की ओर से पेश वकील को मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया। इसके साथ ही मामले को 12...

Gujarat High Court
'सामान्य आरोप': गुजरात हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता को दहेज नहीं लाने पर ताना मारने वाले पति के दूर के रिश्तेदार के खिलाफ एफआईआर रद्द की

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में शिकायतकर्ता के पति के एक दूर के रिश्तेदार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के अपराध के लिए कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने देखा कि पूरी एफआईआर में कोई विशेष घटना का आरोप नहीं लगाया गया है और उसके खिलाफ आरोप पूरी तरह से "सामान्य प्रकृति" के आरोप हैं।जस्टिस निरजार देसाई ने कहा," इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आवेदक शिकायतकर्ता के पति का दूर का रिश्तेदार है, ऐसा लगता है कि आक्षेपित आदेश आवेदक को परेशान करने की दृष्टि से आवेदक को झूठा मामले में आरोपी के रूप में फंसाने के प्रयास...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट | अदालतें समाज की रक्षा के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर हिरासत में लेने के प्राधिकरण के फैसले की जगह नहीं ले सकतीं: हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (J&K Public Safety Act) के तहत हिरासत प्राधिकरण (Detaining Authority) के आदेश की जांच करते समय हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी के निर्णय को न्यायालय द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है।जस्टिस सिंधु शर्मा ने कहा:"निरोध आदेश की जांच करते समय हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी के निर्णय को न्यायालय द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता। चूंकि निवारक निरोध समाज को गतिविधियों से बचाने के लिए एहतियाती...

सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार व्याप्त, रिश्वत के बिना कोई फाइल नहीं चलती : कर्नाटक हाईकोर्ट
सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार व्याप्त, रिश्वत के बिना कोई फाइल नहीं चलती : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि आजकल सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया है और कोई भी फाइल बिना 'रिश्वत' के स्थानांतरित नहीं होती।जस्टिस के नटराजन की एकल पीठ ने बैंगलोर विकास प्राधिकरण (बीडीए) में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में कार्यरत बीटी राजू को जमानत देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने राजू को पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।कोर्ट ने कहा,"आजकल सरकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया है और बिना रिश्वत के...

सीआरपीसी | पीड़ित को बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं: पटना हाईकोर्ट
सीआरपीसी | पीड़ित को बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में पाया कि अपराधी को बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील करने का पूर्ण अधिकार है और शिकायतकर्ता की तरह अपील करने के लिए अनुमति लेने की भी आवश्यकता नहीं है।जस्टिस खातिम रजा और जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की:"पीड़ित को आपराधी को बरी करने के आदेश के खिलाफ अपील करने का पूर्ण अधिकार है, इसलिए उसे आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 378(4) के तहत अपील करते समय "शिकायतकर्ता" के मामले में आवश्यक अपील करने के लिए अनुमति लेने की भी आवश्यकता नहीं है। हमने इस अपील पर...

P&H High Court Dismisses Protection Plea Of Married Woman Residing With Another Man
धारा 437(6) सीआरपीसी | यदि अभियोजन साक्ष्य शुरू होने के 60 दिनों में मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय मामला समाप्त नहीं होता है तो जमानत दी जा सकती है: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहराया कि सीआरपीसी की धारा 437 (6) के संदर्भ में, जहां मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय मामले में मुकदमा अभियोजन के लिए तय की गई पहली तारीख के बाद 60 दिनों की अवधि के भीतर समाप्त नहीं होता है, वहां जमानत दी जानी चाहिए।जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने यह टिप्पणी याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 420, 409, 120-बी आईपीसी के तहत दर्ज प्राथमिकी में सीआरपीसी की धारा 439 के तहत एक याचिका पर विचार करते हुए की, जिसमें कथित तौर पर आरडी, एफडीआर खोलने के बहाने 1,01,32,600 रुपये तक कई लोगों के साथ...

मजिस्ट्रेट पोस्ट ऑफिस के रूप में कार्य नहीं कर सकता, यदि वह यांत्रिक रूप से एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देता है तो यह व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित करता है: मद्रास हाईकोर्ट
मजिस्ट्रेट "पोस्ट ऑफिस" के रूप में कार्य नहीं कर सकता, यदि वह यांत्रिक रूप से एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देता है तो यह व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित करता है: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि एफआईआर सामान्य बात नहीं है और व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है, मजिस्ट्रेट के आदेश की कड़ी आलोचना की। उक्त मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में आरोपी के खिलाफ बिना दिमाग का इस्तेमाल किए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।जस्टिस एन सतीश कुमार पुलिस निरीक्षक, वडापलानी पुलिस स्टेशन द्वारा सैदापेट मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहे थे। इसमें एसएचओ, विरुगमबक्कम पुलिस स्टेशन को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।अदालत...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
किशोर न्याय | धारा 94 के तहत किशोर की उम्र निर्धारित करने की शक्ति केवल जेजेबी के पास, न कि ट्रायल कोर्ट के पास: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में कहा कि किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 94 के तहत ट्रायल कोर्ट के पास आरोपी की उम्र निर्धारित करने की शक्ति नहीं है, जिसे उसने चुनौती दी है और किशोर न्याय बोर्ड ही इस शक्ति का प्रयोग कर सकता है।निचली अदालत द्वारा पारित उस आदेश को रद्द करते हुए, जिसमें उसने याचिकाकर्ता/आरोपी द्वारा अपने मामले को किशोर न्याय बोर्ड को संदर्भित करने के लिए दायर आवेदन को खारिज कर दिया था, जस्टिस एस सिंह ने देखा-'ट्रायल कोर्ट के पास आवेदक की उम्र...

गुजरात हाईकोर्ट ने दो साल की बच्ची की कस्टडी मां को देने से इनकार किया, मां का स्वैच्छिक परित्याग और व्यस्तता, पिता से बच्चे का लगाव माना आधार
गुजरात हाईकोर्ट ने दो साल की बच्ची की कस्टडी मां को देने से इनकार किया, मां का स्वैच्छिक परित्याग और व्यस्तता, पिता से बच्चे का लगाव माना आधार

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में नाबालिग बेटे की मां को इस आधार पर बच्चे की कस्टडी देने से इनकार कर दिया कि उसका दिनचर्या बच्चे कि पिता से ज्यादा व्यस्त रहती है। अपनी व्यस्त दिनचर्या में मां बच्चे की सही से देखभाल नहीं कर पाएगी, इसलिए बच्ची की कस्टडी पिता को दे दी गई।जस्टिस उमेश त्रिवेदी ने बच्चे के सर्वोपरि हित के सिद्धांत को लागू करते हुए कहा कि अपीलकर्ता-मां सौतेली मां है और यह संदिग्ध है कि वह नाबालिग बेटे की देखभाल करेगी।इस प्रकार, फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ मां की अपील को खारिज करते हुए...

वेट लूज प्रोग्राम के बारे में भ्रामक विज्ञापन अनुचित व्यापार व्यवहार का कृत्य है: चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग
"वेट लूज" प्रोग्राम के बारे में भ्रामक विज्ञापन अनुचित व्यापार व्यवहार का कृत्य है: चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग

चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने माना कि वजन घटाने के कार्यक्रमों (Weight Loss Programme) के बारे में भ्रामक विज्ञापन अनुचित व्यापार व्यवहार का कार्य है।प्रोग्राम से शिकायकर्ता को हुई मानसिक पीड़ा के लिए जुर्माना के साथ पूरी प्रोग्राम फीस वापस करने के जिला आयोग के आदेश के खिलाफ वीएलसीसी की अपील को खारिज करते हुए राज्य आयोग ने कहा,"अपीलकर्ताओं का एक तरफ भ्रामक विज्ञापनों से झूठे आश्वासन देना और दूसरी ओर उपभोक्ताओं से घोषणा प्राप्त करना और कार्यक्रम के परिणाम के बारे में कोई...

एडवोकेटे जनरल के कार्यालय में लगी आग में जले केस रिकॉर्ड के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार सभी खर्च वहन करेगी: यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया
'एडवोकेटे जनरल के कार्यालय में लगी आग में जले केस रिकॉर्ड के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार सभी खर्च वहन करेगी': यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया

उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad high Court) को सूचित किया कि उसने 17 जुलाई को स्टेट एडवोकेट जनरल कार्यालय की छठी, सातवीं, आठवीं और नौवीं मंजिल पर लगी आग में जलकर खाक हुए केस रिकॉर्ड के पुनर्निर्माण के संबंध में सभी खर्चों को वहन करने का निर्णय लिया है।राज्य सरकार ने कोर्ट को यह भी सूचित किया कि उसने मनीष गोयल, अतिरिक्त महाधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी, अतिरिक्त महाधिवक्ता, शिव कुमार पाल, सरकारी अधिवक्ता, और के.आर. सिंह मुख्य सरकारी वकील को यह सुनिश्चित करने के लिए...

एनडीपीएस एक्ट की धारा 43- गजेटेड पुलिस ऑफिसर दिन हो या रात संलग्न स्थानों की वैध सर्च कर सकता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
एनडीपीएस एक्ट की धारा 43- 'गजेटेड पुलिस ऑफिसर 'दिन हो या रात' संलग्न स्थानों की वैध सर्च कर सकता है': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने एनडीपीएस अधिनियम (NDPS Act) के प्रावधानों के तहत दर्ज एफआईआर में नियमित जमानत की मांग वाली याचिका पर विचार करते हुए कहा कि अधिनियम की धारा 42 के प्रावधान सर्च के संबंध में जांच अधिकारी द्वारा पूर्व सूचना प्राप्त होने पर इमारतों, वाहन और संलग्न स्थान की तलाशी पर लागू होते हैं और तलाशी, परस्पर सूर्यास्त, और सूर्योदय के बीच की जाती है।संक्षेप में (I) अधिनियम की धारा 42 के प्रावधान भवनों, वाहन और संलग्न स्थान की तलाशी पर लागू होते हैं,...

मद्रास हाईकोर्ट
हाईकोर्ट में रविवार को हुई सुनवाई : मद्रास हाईकोर्ट ने पिता के निधन के बाद क्रिया कर्म करने के लिए आरोपी को अंतरिम जमानत दी

मद्रास हाईकोर्ट ने रविवार को एक मामले की विशेष सुनवाई आयोजित की, जब एक जेल में बंद आरोपी को इस आधार पर जमानत की एक अर्जेंट याचिका दायर की जिसमें उसने उसके पिता का अंतिम संस्कार करने की अनुमति देने की प्रार्थना की। याचिकाकर्ता के पिता की मृत्यु हो गई थी और वह एकमात्र पुत्र होने के नाते अदालत से अंतिम संस्कार करने की अनुमति मांग रहा था। याचिकाकर्ता के वकील ने मामले की तत्काल सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष याचिका दायर की। तदनुसार, इस मामले की सुनवाई रविवार को जस्टिस जी जयचंद्रन की पीठ ने...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टेट हाईवे को चौड़ा करने के लिए सैदाबाद शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में राज्य राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना के लिए जी.टी. रोड, सैदाबाद (कथित रूप से 100 वर्ष से अधिक पुराना) स्थित शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज किया।जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस साधना रानी (ठाकुर) की खंडपीठ ने आधिकारिक अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत इस बात को ध्यान में रखते हुए कि मस्जिद सरकारी भूमि पर एक अतिक्रमण है, इंतेजामिया समिति शाही मस्जिद की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।पीठ ने कहा,"आज दिए गए लिखित निर्देश और उसमें...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अर्नेश कुमार मामले के दिशानिर्देशों के उल्लंघन के लिए पुलिस अधिकारी को अवमानना ​​​​का दोषी ठहराया, 14 दिन के कारावास की सजा दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'अर्नेश कुमार मामले के दिशानिर्देशों' के उल्लंघन के लिए पुलिस अधिकारी को अवमानना ​​​​का दोषी ठहराया, 14 दिन के कारावास की सजा दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एक पुलिस अधिकारी को अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य के मामले में जारी सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को जानबूझकर दरकिनार करने के लिए अवमानना ​​​​का दोषी ठहराते हुए 14 दिनों के साधारण कारावास की सजा सुनाई।अर्नेश कुमार मामले के फैसले के अनुसार, जहां अपराध में सात साल से कम की सज़ा का प्रावधान हो, वहां गिरफ्तारी अपवाद होनी चाहिए और ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के बजाय सीआरपीसी की धारा 41 ए के तहत पेश होने के लिए नोटिस दिया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में असाधारण परिस्थितियों...

अधिकांश गरीब लोग प्रायवेट वकील नियुक्त करने के लिए मजबूर हुए : जस्टिस यू यू ललित ने एलएडीसी प्रणाली के शुभारंभ पर कहा
अधिकांश गरीब लोग प्रायवेट वकील नियुक्त करने के लिए मजबूर हुए : जस्टिस यू यू ललित ने एलएडीसी प्रणाली के शुभारंभ पर कहा

राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों में लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) प्रणाली के शुभारंभ पर राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष और भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित ने रविवार को कहा कि हाशिए की आबादी को कानूनी सहायता देने के लिए देश पूरे में 365 एलएडीसी कार्यालय स्थापित किए गए हैं।एलएडीसी नालसा द्वारा वित्त पोषित परियोजना है जो अभियुक्त व्यक्तियों को आपराधिक मुकदमों में अपना बचाव करने के लिए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करती है।जस्टिस ललित ने अपनी अध्यक्षता में...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
बलात्कार के दोषी की उम्र और अदालत में नियमित उपस्थिति कानून के तहत न्यूनतम सजा से कम सजा देने का आधार नहीं हो सकती : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2005 में अपनी बहरी और मूक भाभी से बलात्कार करने के आरोपी एक व्यक्ति की जेल की सजा को बढ़ाते हुए कहा कि एक बलात्कार के दोषी की अधिक उम्र और अदालत की सुनवाई में नियमित उपस्थिति कानून के तहत न्यूनतम सजा से कम सजा देने कारण/आधार नहीं बन सकती। आरोपी ने पीड़िता के साथ उस समय बलात्कार किया, जब परिवार के अन्य सदस्य बाहर गए हुए थे और उसने पीड़िता के अंधे पति (दोषी के भाई) को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी। कोर्ट ने कहा, ''एक बार जब निचली अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंच गई कि अभियोजन...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
सत्येंद्र जैन को रिट क्षेत्राधिकार के तहत विकृत दिमाग वाला व्यक्ति या दिल्ली विधानसभा से अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी नेता सत्येंद्र जैन को 'अस्वस्थ दिमाग' का व्यक्ति घोषित करने की मांग वाली एक जनहित याचिका खारिज कर दी, जिससे उन्हें दिल्ली विधानसभा से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। जैन वर्तमान में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ का विचार था कि अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए न्यायालय जैन को विकृत दिमाग वाले व्यक्ति के...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
'उत्तर प्रदेश मृतक आश्रित भर्ती नियमावली' के तहत पत्नी की मौजूदगी में अनुकंपा नियुक्ति लाभ का दावा बहन नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृतक सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली 1974 (UP Recruitment of Dependents of Government Servants Dying in Harness Rules, 1974) के तहत सेवा के दौरान मृत सरकारी कर्मचारी की पत्नी की मौजूदगी में उसकी बहन को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।जस्टिस नीरज तिवारी की पीठ ने कहा कि यूपी डाइंग इन हार्नेस नियम 1974 के अंतर्गत 2021 के नियमों में संशोधन के तहत, एक पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति का पहला अधिकार है, और उसकी उपस्थिति...