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इलाहाबाद हाईकोर्ट
शारीरिक रूप से सक्षम पति यह तर्क नहीं दे सकता कि वह अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने की स्थिति में नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सक्षम पति यह तर्क नहीं दे सकता कि वह अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने की स्थिति में नहीं है।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति द्वारा शुरू की गई तलाक की कार्यवाही में हिंदू विवाह अधिनियम [भरण पोषण और पेडेंट लाइट और कार्यवाही के खर्च] की धारा 24 के तहत पारिवारिक अदालत द्वारा पारित आदेश के खिलाफ पति द्वारा दायर एक अपील को खारिज करते हुए यह अवलोकन किया।हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 में भरण पोषण पेंडेंट लाइट में प्रावधान है, जहां अदालत प्रतिवादी को कार्यवाही के खर्च का...

धारा 482 सीआरपीसी | हाईकोर्ट सजा के बाद के सेटलमेंट को स्वीकार कर सकते हैं और गैर-जघन्य अपराधों में शामिल आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर सकते हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट
धारा 482 सीआरपीसी | हाईकोर्ट सजा के बाद के सेटलमेंट को स्वीकार कर सकते हैं और गैर-जघन्य अपराधों में शामिल आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर सकते हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि के एक के आदेश को तब रद्द कर दिया जब कार्यवाही के पक्षकारों ने दोषसिद्धि के आदेश के बाद समझौता किया और याचिकाकर्ता के खिलाफ किए गए अपराधों के कंपाउंडिंग की मांग की।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की सिंगल जज बेंच ने लक्ष्मीबाई नामक महिला द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसे निचली अदालत ने आईपीसी की धारा 326 (खतरनाक हथियारों या साधनों से स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना) और 448 (घर में घुसना) के लिए दंडनीय अपराधों के लिए 2011 में दोषी ठहराया था।सत्र अदालत ने जून 2012 में...

गुजरात हाईकोर्ट
जब धारा 25 (एफ) आईडी एक्ट का उल्लंघन किया जाता है, बहाली एक नॉर्मल कोर्स, न कि मुआवजा: गुजरात हाईकोर्ट ने स्वीपर को राहत दी

गुजरात हाईकोर्ट हाल के एक आदेश में माना कि औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत धारा 25 (एफ) का उल्लंघन होने पर बहाली का लाभ एक 'सामान्य पाठ्यक्रम' होगा, जिसका पालन करना चाहिए।इस सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के अधीन 6 साल तक 'स्वीपर' के रूप में काम करने वाले याचिकाकर्ता को बिना किसी बकाया वेतन के बहाल कर दिया। श्रम न्यायालय के अवॉर्ड, जिसमें 54,000 रुपये का का एकमुश्त मुआवजा प्रदान किया, उस सीमा तक संशोधित किया गया।जस्टिस बीरेन वैष्णव ने कहा,"इसलिए पाया गया कि श्रम न्यायालय ने...

हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को जमीन हथियाने के लिए गुरु ग्रंथ साहिब के कथित दुरुपयोग के खिलाफ प्रतिनिधित्व पर फैसला करने का निर्देश दिया
हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को जमीन हथियाने के लिए 'गुरु ग्रंथ साहिब' के कथित दुरुपयोग के खिलाफ प्रतिनिधित्व पर फैसला करने का निर्देश दिया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करने से आरोपी को तत्काल प्रभाव से रोकने के लिए एक अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ एक याचिका पर विचार कर रही थी जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि प्रतिवादी अनाधिकृत रूप से याचिकाकर्ता के स्थान में प्रवेश कर गए और याचिकाकर्ता की जमीन हड़पने के मकसद से याचिकाकर्ता के शेड के अंदर अवैध रूप से पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को खाद और कृषि...

बीमाकर्ता को मोटर वाहन अधिनियम के तहत अपनी देयता से बचने के लिए लापरवाही और उचित देखभाल का अभाव दिखाना चाहिए: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
बीमाकर्ता को मोटर वाहन अधिनियम के तहत अपनी देयता से बचने के लिए लापरवाही और उचित देखभाल का अभाव दिखाना चाहिए: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मौजूद ना होना, नकली या अमान्य ड्राइविंग लाइसेंस या प्रासंगिक समय पर चालक की अयोग्यता बीमित व्यक्ति या तीसरे पक्ष के खिलाफ बीमाकर्ता के लिए उपलब्ध बचाव नहीं हो सकता।बीमित व्यक्ति के प्रति दायित्व से बचने के लिए, बीमाकर्ता को यह साबित करना होगा कि बीमित व्यक्ति लापरवाही का दोषी था और उचित देखभाल करने में विफल रहा।जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की पीठ एक अपील में न्यायालय की समन्वय पीठ द्वारा पारित निर्णय के...

[उत्तर प्रदेश गौ हत्या अधिनियम] यूपी के भीतर गाय, गौवंश के परिवहन के लिए किसी परमिट की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
[उत्तर प्रदेश गौ हत्या अधिनियम] यूपी के भीतर गाय, गौवंश के परिवहन के लिए किसी परमिट की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा है कि उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर गाय या गौवंश का परिवहन यूपी गौ हत्या अधिनियम (UP Cow Slaughter Act) के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं है।जस्टिस मो. असलम ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर गाय और उसके वंश को ले जाने के लिए किसी परमिट की आवश्यकता नहीं है।इसके साथ, अदालत ने वाराणसी के जिलाधिकारी द्वारा पारित एक आदेश को रद्द कर दिया। इसमें जिलाधिकारी ने बिना वैध अनुमति के कथित गौ हत्या के उद्देश्य से जानवरों को ले जा रहे वाहन को जब्त करने क...

मध्यस्थों के संकीर्ण पैनल का एकतरफा गठन निष्पक्षता का उल्लंघन करता है: दिल्ली हाईकोर्ट
मध्यस्थों के संकीर्ण पैनल का एकतरफा गठन निष्पक्षता का उल्लंघन करता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि पक्षकार को मध्यस्थों (Arbitrator) के पैनल से एकतरफा नाम चुनने और दूसरे पक्ष को उन नामों में से अपने मध्यस्थ का चयन करने के लिए अग्रेषित करने की शक्ति मध्यस्थता में निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने कहा कि सत्ता के इस तरह के एकतरफा प्रयोग से चयनित मध्यस्थों की योग्यता की परवाह किए बिना संदेह के लिए जगह पैदा होती है, जो सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश होते हैं।कोर्ट ने आईवर्ल्ड बिजनेस सॉल्यूशंस बनाम डीएमआरसी में अपने फैसले का अलग...

यौन इरादे से बच्चे के निजी अंगों को छूना POCSO एक्ट आकर्षित करने के लिए पर्याप्त, चोट की अनुपस्थिति प्रासंगिक नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट
यौन इरादे से बच्चे के निजी अंगों को छूना POCSO एक्ट आकर्षित करने के लिए पर्याप्त, चोट की अनुपस्थिति प्रासंगिक नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि केवल यौन इरादे से बच्चे के निजी अंगों को छूना POCSO एक्ट (The Protection of Children from Sexual Offences Act) की धारा 7 के तहत यौन उत्पीड़न के रूप में माना जाने के लिए पर्याप्त है। इसके साथ ही चोट का प्रदर्शन करने वाला मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य नहीं है।कोर्ट ने कहा,"मेडिकल सर्टिफिकेट में उल्लिखित चोट की अनुपस्थिति से उसके मामले में कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि POCSO एक्ट की धारा 7 के तहत परिभाषित यौन उत्पीड़न के अपराध की प्रकृति में POCSO एक्ट की धारा 8 के साथ पठित...

बार काउंसिल द्वारा अनुशासनात्मक कार्यवाही में कानूनी कार्रवाई के खिलाफ वैधानिक क्षतिपूर्ति है: मद्रास हाईकोर्ट
बार काउंसिल द्वारा अनुशासनात्मक कार्यवाही में कानूनी कार्रवाई के खिलाफ वैधानिक क्षतिपूर्ति है: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में वकीलों के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही के संबंध में बार काउंसिल को उपलब्ध "वैधानिक क्षतिपूर्ति" पर जोर दिया।अदालत बार काउंसिल ऑफ तमिलनाडु और पुडुचेरी द्वारा निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बार काउंसिल से नुकसान की मांग करने वाले वकील द्वारा दायर याचिका खारिज करने के लिए बार काउंसिल के आवेदन को खारिज कर दिया गया।जस्टिस आरएन मंजुला की पीठ ने निम्नानुसार देखा:राज्य बार काउंसिल से यह अपेक्षा की जाती है...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
"जांच अधिकारी सचमुच फोरेंसिक रिपोर्ट पर ही सो गया": एमपी हाईकोर्ट ने 10 साल बाद बलात्कार और हत्या की सजा का फैसला पलट दिया, दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने हाल ही में जांच एजेंसी को उसके पास उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य का उपयोग नहीं करने के लिए फटकार लगाई, ताकि हत्या और बलात्कार के मामले में आरोपी के खिलाफ निर्विवाद मामला बनाया जा सके। इससे अदालत के पास उसे बरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस एस.के. सिंह ने आगे कहा कि (जांच अधिकारी) आईओ द्वारा लिया गया लापरवाह रवैया न्यायालय को स्वीकार्य नहीं है।कोर्ट ने कहा,यह अकल्पनीय है कि मृतक के हाथ से आरोपी के बाल बरामद करने के बाद और...

केरल हाईकोर्ट
तलाक/द्व‌िव‌िवाह| पार्टियों को पर्सनल लॉ में उपलब्ध उपचारों का उपयोग करने से रोकने में कोर्ट की कोई भूमिका नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में दो आदेशों को रद्द करते हुए, जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति को अपरिवर्तनीय तलाक का प्रयोग करने और दूसरी शादी करने से रोक दिया गया था, कहा कि अदालतें पार्टियों को व्यक्तिगत कानूनों में उपलब्ध उपचारों का उपयोग करने से रोक नहीं सकती हैं, यह संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत उपलब्ध अधिकारों का उल्‍लंघन होगा।जस्टिस ए मोहम्मद मुस्ताक और जस्टिस सोफी थॉमस की खंडपीठ ने कहा,"व्यक्तिगत कानून में उपलब्ध उपायों का उपयोग करने से पार्टियों को रोकने में न्यायालय की कोई भूमिका नहीं है।...

धार्मिक टैटू के साथ एसएसबी परीक्षा के उम्मीदवारों की नियुक्ति | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र को 2 महीने में आदेश का पालन करने का निर्देश दिया
धार्मिक टैटू के साथ एसएसबी परीक्षा के उम्मीदवारों की नियुक्ति | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र को 2 महीने में आदेश का पालन करने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को अपने 7 मार्च, 2022 के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया, जिसमें उसने यूनियन ऑफ इंडिया और एसएसबी को तीन एसएसबी एग्जाम उम्मीदवारों की उम्मीदवारी पर विचार करने का निर्देश दिया था। उक्त उम्मीदवारों के हाथ के निश्चित हिस्से पर कुछ टैटू के कारण रोजगार से वंचित कर दिया गया था।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने 7 मार्च, 2022 को केंद्र और एसएसबी को निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ताओं के टैटू हटा दिए जाते हैं तो उस पोस्ट पर चयन के लिए बाधा नहीं माना जा सकता है जिसके लिए...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में 100 साल पुराने जीर्ण-शीर्ण हॉस्टल बिल्डिंग को गिराने का निर्देश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में 100 साल से अधिक पुरानी जीर्ण-शीर्ण सी -1 श्रेणी की इमारत को गिराने के आदेश को बरकरार रखा, जो पारसी समुदाय की विधवाओं का घर थी।अदालत ने फैसला सुनाया कि बीएमसी के 2018 दिशानिर्देशों के तहत भवन की मजबूती की जांच के लिए सेवन टेस्ट संरचनाओं के लिए अनिवार्य नहीं है। उक्त दिशानिर्देश केवल सीमेंट कंक्रीट (आरसीसी) संरचनाओं पर लागू होंगे।कोर्ट ने कहा,".. टीएसी (तकनीकी सलाहकार समिति) ने इस प्रकार सही राय बनाई कि इमारत को भार वहन करने वाली इमारत के मद्देनजर गैर-विनाशकारी परीक्षण...

दिल्ली हाईकोर्ट ने अग्निपथ योजना के संबंध में याचिकाओं के बैच पर केंद्र से जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने अग्निपथ योजना के संबंध में याचिकाओं के बैच पर केंद्र से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से अपनी अग्निपथ योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब मांगा। उक्त याचिकाओं में रक्षा सेवाओं में पिछली भर्ती योजना के अनुसार बहाली और नामांकन की मांग की गई है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने मामले को 19 अक्टूबर को सुनवाई के लिए पोस्ट करते हुए याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र को चार सप्ताह का समय दिया।पीठ ने हालांकि मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह इस मामले में सुनवाई...

Gujarat High Court
न्यायालय को अवमानना ​​क्षेत्राधिकार में खुद को उस आदेश तक सीमित रखना चाहिए जिसकी कथित रूप से अवज्ञा की गई है : गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि न्यायालय को अवमानना ​​क्षेत्राधिकार में खुद को उस आदेश तक सीमित रखना चाहिए जिसकी कथित रूप से अवज्ञा की गई है। कोर्ट कथित रूप से उल्लंघन किए गए आदेश से आगे नहीं बढ़ सकता।इसके अलावा, यह निर्धारित करने के लिए कि क्या कोई कार्य दूषित है, न्यायालय 'यांत्रिक' दिमाग को लागू नहीं कर सकते। यह निर्धारित करना चाहिए कि क्या न्यायिक आदेश की जानबूझकर अवज्ञा दिखाने के लिए 'सकारात्मक' कदम उठाए गए हैं।चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष शास्त्री ने कहा:"... अवमानना...

अनुच्छेद 19(1)(जी) | शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के नागरिकों के अधिकार को केवल विधायी अधिनियम द्वारा प्रतिबंधित किया जा सकता है, न कि केवल सर्कुलर द्वारा: दिल्ली हाईकोर्ट
अनुच्छेद 19(1)(जी) | शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के नागरिकों के अधिकार को केवल विधायी अधिनियम द्वारा प्रतिबंधित किया जा सकता है, न कि केवल सर्कुलर द्वारा: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया कि नागरिक को शैक्षणिक संस्थान की स्थापना और प्रशासन के अधिकार से तब तक वंचित नहीं किया जा सकता है, जब तक कि विधायिका अपने विवेक से इस मौलिक अधिकार के प्रयोग पर आम जनता के हित में उचित प्रतिबंध लगाने का फैसला नहीं करती।जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (जी) के तहत अधिकार के प्रयोग पर कोई प्रतिबंध केवल कानून द्वारा हो सकता है। इससे अनुच्छेद 19 (6) के तहत प्रदत्त शक्ति का उल्लंघन होगा।न्यायालय इस प्रकार इस तर्क से सहमत था कि...

गुजरात हाईकोर्ट
हाईकोर्ट एफआईआर के अभाव में भी गिरफ्तारी की आशंका वाले व्यक्ति को ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे सकता है: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने कहा कि गिरफ्तारी की आशंका रखने वाला व्यक्ति ट्रांजिट अग्रिम जमानत मांग सकता है ताकि मामले में क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र वाले सक्षम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए समय मिल सके, यहां तक कि एफआईआर दर्ज न होने पर भी।ट्रांज़िट ज़मानत एक ऐसी ज़मानत होती है, जो किसी ऐसे न्यायालय द्वारा दी जाती है, जिसका उस स्थान पर अधिकार क्षेत्र नहीं होता, जहां अपराध किया गया है। इसलिए एक "ट्रांजिट अग्रिम जमानत" तब होती है जब कोई व्यक्ति उस राज्य के अलावा किसी अन्य राज्य की पुलिस...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
'स्टेट लॉ ऑफिसर के चयन और नियुक्ति के लिए सिस्टम में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करें': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से हलफनामा मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने स्टेट लॉ ऑफिसर की हालिया नियुक्तियों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर कहा कि चयन और नियुक्ति की प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी।पंजाब राज्य बनाम बृजेश्वर सिंह चहल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस प्रकाश सिंह की पीठ ने आगे कहा कि यूपी राज्य ने राज्य के लॉ ऑफिसर के चयन और...

यदि विवाद को तय करने के लिए गवाही आवश्यक है तो सीआरपीसी की धारा 311 गवाह को वापस बुलाने के लिए ट्रायल कोर्ट को बाध्य करती है : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
यदि विवाद को तय करने के लिए गवाही आवश्यक है तो सीआरपीसी की धारा 311 गवाह को वापस बुलाने के लिए ट्रायल कोर्ट को बाध्य करती है : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से संबंधित एक मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा (एक आपराधिक याचिका में )पारित एक आदेश को रद्द करते हुए दोहराया है कि सीआरपीसी की धारा 311 के तहत दायर आवेदनों से निपटने के दौरान, न्यायालय को मनमौजी या मनमाने ढंग की बजाय विवेकपूर्ण ढंग से अपने अधिकार का प्रयोग करने की आवश्यकता है। याचिकाकर्ताओं पर भारतीय दंड संहिता की धारा 147 और 148 रिड विद धारा 149 और 324 के तहत अपराध करने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने जिरह के...