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फ्लिपकार्ट और उसके विक्रेता संयुक्त रूप से एमआरपी से अधिक शुल्क लेने के लिए उत्तरदायी: जिला उपभोक्ता फोरम
फ्लिपकार्ट और उसके विक्रेता संयुक्त रूप से एमआरपी से अधिक शुल्क लेने के लिए उत्तरदायी: जिला उपभोक्ता फोरम

तेलंगाना के नलगोंडा में एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने माना है कि फ्लिपकार्ट अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री के उत्तरदायित्‍व से बच नहीं सकता है।इसने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और विक्रेता दोनों को इस तरह के "अनुचित व्यापार व्यवहार" के लिए संयुक्त रूप से और गंभीर रूप से उत्तरदायी ठहराया और उपभोक्ता को मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया। आयोग ने माना कि उपभोक्ता, विक्रेता और सेवा प्रदाता (फ्लिपकार्ट और इसके विक्रेता होने के नाते) के बीच एक...

रिक्ति के अभाव में स्थानांतरण आदेश पारित नहीं किए जा सकते, नई पोस्टिंग का स्थान दिखाना होगा: कर्नाटक हाईकोर्ट
रिक्ति के अभाव में स्थानांतरण आदेश पारित नहीं किए जा सकते, नई पोस्टिंग का स्थान दिखाना होगा: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि यदि ट्रांसफर सामान्य ट्रांसफर अवधि के बाद किया जाता है, तब, ट्रांसफर के किसी भी अनुरोध पर तब तक विचार नहीं किया जाना चाहिए या आदेश नहीं दिया जाना चाहिए जब तक कि कोई स्थान खाली न हो।जस्टिस एस सुनील दत्त यादव की एकल पीठ ने मूर्ति नामक एक व्यक्ति द्वारा दायर एक याचिका को स्वीकार कर लिया और उन्हें जारी किए गए 23.12.2021 को जारी किए गए ट्रांसफर आदेश को रद्द कर दिया। इसने याचिकाकर्ता को ट्रांसफर के आक्षेपित आदेश से पहले की...

हैदरपुरा मुठभेड़ : जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मुठभेड़ में मारे गए लोगों के शव परिवारों को सौंपे जाने को लेकर कानून-व्यवस्था  का हवाला दिया, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
हैदरपुरा मुठभेड़ : जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मुठभेड़ में मारे गए लोगों के शव परिवारों को सौंपे जाने को लेकर कानून-व्यवस्था का हवाला दिया, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आतंकवाद विरोधी मुठभेड़ में मारे गए लोगों के शव परिवारों को सौंपे जाने से कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। इसने आगे कहा कि इस तरह के शवों को मुद्दे की "संवेदनशीलता" को देखते हुए पैतृक शहर या गांव के अलावा किसी अन्य स्थान पर दफनाया जाता है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ मोहम्मद लतीफ माग्रे द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उनके बेटे आमिर माग्रे के शव की मांग की गई थी, जो नवंबर 2021 में श्रीनगर...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा कोर्ट को शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण की मांग वाले आवेदन पर चार महीने के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा कोर्ट को शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण की मांग वाले आवेदन पर चार महीने के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा कोर्ट को श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद के संबंध में दायर दो आवेदनों पर चार महीने के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया है। आवेदन में विवादित स्थल के सर्वेक्षण और सर्वेक्षण के उद्देश्य के लिए कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की मांग की गई है। जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने भगवान श्री कृष्ण विराजमान और एक अन्य की याचिका पर यह आदेश जारी करते हुए कहा :" मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मुद्दे के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना, वर्तमान याचिका को अंतिम रूप से...

मद्रास हाईकोर्ट
अपील का अधिकार वाद की स्थापना की तारीख पर अर्जित होता है: मद्रास हाईकोर्ट ने मोटर वाहन संशोधन अधिनियम से पहले दायर दावे से पैदा अपील स्वीकार की

जस्टिस पीटी आशा ने मद्रास हाईकोर्ट की रजिस्ट्री की ओर से एक पेश एक प्रश्न की कि क्या मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के मद्देनजर जिन अपीलों का मूल्य एक लाख रुपये से कम है, उन पर विचार किया जा सकता है, ने कहा कि अपील करने का अधिकार दावा याचिका दायर करने की तारीख पर दिया जाता है, इसलिए संशोधन से पहले दायर दावों पर संशोधन लागू नहीं होगा।अपीलकर्ता-बीमा कंपनी को ट्रिब्यूनल के समक्ष दावा याचिका दायर करने की तारीख पर ही अपील का अधिकार प्राप्त हो गया था। इसलिए, इस संबंध में एक अप्रैल 2022 से पहले दायर...

वह अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्म्स लाइसेंस मामले में विधायक अब्बास अंसारी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
"वह अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्म्स लाइसेंस मामले में विधायक अब्बास अंसारी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने पिछले हफ्ते आर्म्स लाइसेंस मामले में जेल में बंद राजनेता मुख्तार अंसारी के बेटे मऊ सदर विधायक अब्बास अंसारी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया।जमानत देने से इनकार करते हुए जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने इस तथ्य को ध्यान में रखा कि अंसारी अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं, जिसके खिलाफ अदालत ने उद्घोषणा जारी की थी।कोर्ट ने कहा,"गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए कि आरोपी-आवेदक ने अपने आर्म लाइसेंस को धोखाधड़ी से पंजीकृत किया और शूटिंग के आधार पर बड़ी संख्या में...

दिल्ली हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 197 के तहत अभियोजन की मंजूरी को बाद के चरण के लिए स्थगित किया जा सकता है यदि शिकायत का संबंध आधिकारिक कार्यों से न हो : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायत का संबंध आधिकारिक कार्यों से न होने पर सीआरपीसी की धारा 197 के तहत अभियोजन की मंजूरी को बाद के चरण के लिए स्थगित किया जा सकता है। यदि शिकायत किए गए कृत्यों का आधिकारिक कर्तव्य से संबंध है तो संज्ञान लेने के समय तुरंत मंजूरी प्राप्त करने के लिए सीआरपीसी की धारा 197 का प्रावधान आकर्षित होता है।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा:"इसमें कोई संदेह नहीं कि कार्यवाही के किसी भी चरण में मंजूरी का सवाल उठ सकता है, लेकिन अगर मामले के तथ्य या आरोपी के कार्य उसके साथ इतने...

गुजरात हाईकोर्ट
व्यवस्थित तरीके से नहीं किया गया कानून का उल्लंघन निवारक नजरबंदी के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने माना है कि संगठित या व्यवस्थित तरीके से नहीं किया गया कानून के उल्लंघन, हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी के लिए उचित रूप से इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है कि आरोपी को हिरासत में लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।जस्टिस एसएच वोरा और जस्टिस राजेंद्र सरीन की बेंच ने कहा,"इसमें कोई संदेह नहीं कि न तो आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की संभावना और न ही किसी आपराधिक कार्यवाही के लंबित रहने की संभावना निवारक निरोध के आदेश के लिए पूर्ण रोक है। लेकिन, आपराधिक कार्यवाही...

एनडीपीएस अधिनियम के तहत भांग प्रतिबंधित नहीं, पीड़ित पक्ष को यह दिखाना होगा कि यह चरस/गांजा से तैयार किया गया है: कर्नाटक हाईकोर्ट
एनडीपीएस अधिनियम के तहत भांग प्रतिबंधित नहीं, पीड़ित पक्ष को यह दिखाना होगा कि यह चरस/गांजा से तैयार किया गया है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने भांग रखने के आरोपी व्यक्ति को यह कहते हुए जमानत दे दी कि भांग नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस) के तहत नहीं आता।जस्टिस के नटराजन की एकल पीठ ने आरोपी रोशन कुमार मिश्रा द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने उसे दो लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदारों के निष्पादन पर जमानत दे दी।बेंच ने मुख्य रूप से मधुखर बनाम महाराष्ट्र राज्य 2002, एससीसी ऑनलाइन, बॉम्बे 1271 के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले और अर्जुन सिंह बनाम हरियाणा...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
सेक्‍शन 32A ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट | ट्रायल शुरू होने और सबूत सामने आने के बाद ही निर्माता को मामले में शामिल किया जा सकता है: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 की धारा 32-ए के तहत ट्रायल शुरू होने और सबूत सामने आने के बाद ही निर्माता या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ, जो अपराध में शामिल प्रतीत होता है, अभियोग की शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है, और इससे पहले ऐसी किसी भी शक्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।जस्टिस संजय धर की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके तहत याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी ड्रग्स इंस्पेक्टर द्वारा दायर शिकायत को चुनौती दी थी, जिसने ड्रग एंड...

तेलंगाना हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगन रेड्डी को सीबीआई कोर्ट के समक्ष भ्रष्टाचार मामले में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी
तेलंगाना हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगन रेड्डी को सीबीआई कोर्ट के समक्ष भ्रष्टाचार मामले में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी

तेलंगाना हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी को राहत देते हुए उन्हें वर्ष 2013 में सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ दायर भ्रष्टाचार के मामलों की श्रृंखला में अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी।हालांकि, उन्हें सुनवाई की ऐसी तारीखों पर अदालत के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया जहां सीबीआई अदालत फैसला करती है कि सीआरपीसी की धारा 205 की उपधारा (2) के अनुसार उनकी उपस्थिति आवश्यक है।चीफ जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इसके साथ ही 2019 में पारित सीबीआई कोर्ट के...

अभद्र भाषा के साथ सीन क्रिएट करने के लिए पति के ऑफिस में बार-बार जाना क्रूरता की श्रेणी में आएगा: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक की डिग्री बरकरार रखी
अभद्र भाषा के साथ सीन क्रिएट करने के लिए पति के ऑफिस में बार-बार जाना क्रूरता की श्रेणी में आएगा: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक की डिग्री बरकरार रखी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति के पक्ष में दी गई तलाक की डिक्री को बरकरार रखते हुए हाल ही में कहा कि पत्नी का पति के ऑफिस में जाना और अपमानजनक भाषा के साथ सीन क्रिएट क्रूरता की श्रेणी में गिना जाएगा।जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की खंडपीठ ने अवलोकन किया,"जब पत्नी पति के ऑफिस में जाती है, उसे गाली देती है और उस पर अवैध संबंध रखने का आरोप लगाती है तो स्वाभाविक रूप से इससे सहकर्मियों के सामने पति की छवि खराब हो जाएगी। ऑफिस में उसका कद निश्चित रूप से नीचे चला जाएगा।"कोर्ट का यह भी विचार...

दिल्ली हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 227 | डिस्चार्ज आवेदन पर फैसला करते समय जज अभियोजन के मुखपत्र के रूप में कार्य नहीं कर सकते, मामले की व्यापक संभावनाओं पर विचार करना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि न्यायाधीश को सीआरपीसी की धारा 227 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए केवल पोस्ट ऑफिस या पीड़ित पक्ष के मुखपत्र के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए, बल्कि मामले की व्यापक संभावनाओं, साक्ष्य के कुल प्रभाव और उसके सामने पेश किए गए दस्तावेज पर विचार करना होगा।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि न्यायाधीश को मामले के पक्ष-विपक्ष की गहन जांच नहीं करनी चाहिए और न ही सबूतों को ऐसे तौलना चाहिए जैसे कि वह मुकदमा चला रहे हों।आरपीसी की की धारा 227 में आरोपी को बरी करने का...

गुजरात हाईकोर्ट
[हत्या] यह अस्वाभाविक है कि शिकायतकर्ता ने आरोपी से मृतक को बचाने के लिए कुछ नहीं किया, दुश्मनी के कारण झूठा मामला प्रतीत होता है: गुजरात हाईकोर्ट हत्या के आरोपियों को बरी करने का निर्णय बरकरार रखा

गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में चार आरोपियों को इस आधार पर बरी करने के निर्णय को बरकरार रखा कि मुख्य गवाहों द्वारा पेश किए गए गवाहों में कई भौतिक विरोधाभास हैं और बरामद हथियार में अपराध को स्थापित करने के लिए खून के धब्बे नहीं हैं।जस्टिस एसएच वोरा और जस्टिस राजेंद्र सरीन की पीठ ने आगे कहा कि सभी गवाह एक-दूसरे से संबंधित हैं और उन्हें 'स्वतंत्र गवाह' नहीं माना जा सकता। आरोपियों के साथ उनकी पहले से दुश्मनी हैं और वे उन्हें सजा दिलाने में रुचि रखते हैं।इस प्रकार, यह निष्कर्ष निकाला गया:सभी...

वादी अधिकार क्षेत्र के उद्देश्य और कोर्ट फीस के भुगतान के लिए अलग-अलग मूल्य नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
वादी अधिकार क्षेत्र के उद्देश्य और कोर्ट फीस के भुगतान के लिए अलग-अलग मूल्य नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वादी अधिकार क्षेत्र के उद्देश्य और कोर्ट फीस के भुगतान के लिए निश्चित मूल्य पर मुकदमे के मूल्यांकन की दोहरी नीति नहीं अपना सकता।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने आगे कहा कि हालांकि यह वादी के विवेक पर निर्भर करता है कि वह अपने वास्तविक विश्वास और विवेक के अनुसार अपने मुकदमे का मूल्यांकन करे, लेकिन एक बार सूट का मूल्य सेक के संदर्भ में किया गया तो वाद मूल्यांकन अधिनियम की धारा 8 के अनुसार कोर्ट फीस उसी राशि पर कोर्ट फीस एक्ट की धारा 7 के अनुसार देय होगा।कोर्ट ने यह टिप्पणी...

भवन के निर्माण में मामूली उल्लंघन जो बड़े पैमाने पर जनता को प्रभावित नहीं करते हैं, उन्हें नियमित करने पर विचार किया जा सकता है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
भवन के निर्माण में मामूली उल्लंघन जो बड़े पैमाने पर जनता को प्रभावित नहीं करते हैं, उन्हें नियमित करने पर विचार किया जा सकता है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक रिट याचिका को अनुमति दी, जिसमें निगम को मालिक/याचिकाकर्ता की इमारत को तब तक नहीं गिराने का निर्देश दिया गया था, जब तक कि नोटिस के बारे में उसका स्पष्टीकरण और नियमितीकरण के अनुरोध पर कारणों के साथ विचार नहीं किया जाता।कोर्ट ने अवैध निर्माणों से संबंधित निर्णयों पर भरोसा करते हुए कहा कि बदलाव को नियमित किया जा सकता है यदि यह मामूली है और बड़े पैमाने पर जनता को प्रभावित नहीं करता है। इसके अतिरिक्त, क्रांति एसोसिएट्स (पी) लिमिटेड बनाम मसूद अहमद खान (2010) में...

दिल्ली हाईकोर्ट
केवल तहबाजारी के अधिकार पर कब्जा करने से सरकारी जमीन पर कब्जा करने का अधिकार नहीं मिल जाता : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल तहबाजारी के अधिकार पर कब्जा करने वाले को सरकारी जमीन पर कब्जा करने या उस पर 'पक्का' निर्माण करने का अधिकार नहीं है।जस्टिस गौरांग कांत वेद प्रकाश मनचंदा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें अधिकारियों को शहर के मदनगीर में संपत्ति के परिसर के संबंध में लीज डीड या अन्य दस्तावेज निष्पादित करके लंबे और निरंतर कब्जे को नियमित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई।याचिकाकर्ता का मामला यह है कि 1990-91 से वह तहबाजारी साइट के रूप में इस साइट का उपयोग कर रहा है और...

संदेह और स्वीकारोक्ति पर आधारित मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने यूएपीए के तहत आरोपी व्यक्ति को जमानत दी
संदेह और स्वीकारोक्ति पर आधारित मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने यूएपीए के तहत आरोपी व्यक्ति को जमानत दी

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में व्यक्ति को यह देखते हुए जमानत दी कि उसके खिलाफ पूरा मामला संदेह पर आधारित है और मामला स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर बनाया गया है।जस्टिस एस वैद्यनाथन और जस्टिस एडी जगदीश चंडीरा ने भी कहा कि आरोपी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की गई।इस मामले में किसी व्यक्ति की ओर से कोई शिकायत नहीं की गई और न ही कोई घायल हुआ। अत: इस न्यायालय की राय में गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों को केवल अपीलकर्ता को न्यायालय से जमानत मिलने से इनकार करने/देरी करने के लिए शामिल किया...

सीआरपीसी की धारा 389 और एनआई अधिनियम की धारा 148 एक-दूसरे से स्वतंत्र, एनआई अधिनियम की धारा 148 का अनुपालन न करने से अपील लंबित रहने के दौरान सजा के निलंबन को खतरा नहीं : पंजाब एंंड हरियाणा हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 389 और एनआई अधिनियम की धारा 148 एक-दूसरे से स्वतंत्र, एनआई अधिनियम की धारा 148 का अनुपालन न करने से अपील लंबित रहने के दौरान सजा के निलंबन को खतरा नहीं : पंजाब एंंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में व्यवस्था दी है कि सीआरपीसी की धारा 389 और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 148 एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं। जहां सीआरपीसी की धारा 389 दोषी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा से जुड़ी है, वहीं एनआई अधिनियम की धारा 148 दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 389 में किए गए जनादेश के लिए सहायक या पूरक है।सीआरपीसी की धारा 389 में अपील के लंबित रहने/ जमानत पर अपीलकर्ता की रिहा होने पर साज के निलंबन का प्रावधान है। एनआई अधिनियम की धारा 148 दोषसिद्धि के खिलाफ...

दिल्ली हाईकोर्ट
सहमति से शारीरिक संबंध रखने वाले व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की जन्म तिथि की न्यायिक जांच करने की आवश्यकता नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा,"जो व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के साथ सहमति से शारीरिक संबंध रखता है, उसे दूसरे व्यक्ति की जन्मतिथि की न्यायिक जांच करने की आवश्यकता नहीं है।"जस्टिस जसमीत सिंह ने बलात्कार के एक मामले में आरोपी व्यक्ति को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की।शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि दोस्त बनने के बाद सितंबर 2019 में याचिकाकर्ता ने उसे एक होटल में बुलाया और उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए और उसका वीडियो भी बनाया, जिससे उसे ब्लैकमेल किया गया।शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया...