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जिस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में दूसरी शादी की जाती है, केवल उसे ही आईपीसी की धारा 494 के तहत अपराध पर सुनवाई करने का अधिकार हैः जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि पहली वैध शादी के निर्वाह के दौरान दूसरी शादी करने /अनुबंध करने के कारण भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत किए गए अपराध के मामले में सिर्फ उसी न्यायालय के पास आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 177 के तहत मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र है,जिस न्यायालय के अधिकार में दूसरी शादी की गई है। जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी,जिसमें याचिकाकर्ताओं ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रियासी के समक्ष लंबित...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने भाजपा राष्ट्रीय महासचिव पर पार्टी कार्यकर्ता के यौन उत्पीड़न के आरोप में कार्यवाही पर रोक लगाई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव संगठन शिव प्रकाश के खिलाफ दर्ज मामले की आगे की सभी कार्यवाही पर रोक लगा दी। शिव प्रकाश पर पार्टी कार्यकर्ता का यौन उत्पीड़न/अपमान करने का आरोप लगाया गया है।जस्टिस कौशिक चंदा की पीठ ने कहा कि पीड़िता ने बाद में कई शिकायतें दीं, जिसमें उक्त राजनीतिक दल के विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य के नेताओं पर बलात्कार के बार-बार आरोप लगाए गए, जिसने उसकी विश्वसनीयता को काफी हद तक कम कर दिया, जिससे आरोपों की सच्चाई के बारे में...
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने अलगाववाद को बढ़ावा देने, लोगों को सुरक्षा बलों के खिलाफ भड़काने के आरोप में प्रोफेसर के खिलाफ यूएपीए मामला खारिज करने से इनकार किया
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में सरकारी कॉलेज में काम करने वाले सहायक प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। उक्त आरोपी पर सेना और पुलिस जैसे संस्थानों के खिलाफ आम लोगों को बल प्रयोग या हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया।जस्टिस संजय धर की पीठ ने सहायक प्रोफेसर की विशेषता वाली पुलिस द्वारा प्रस्तुत वीडियो क्लिप को देखा, यह ध्यान देने के लिए कि प्रथम दृष्टया वह कश्मीर में रहने वाले लोगों और देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा...
एनडीपीएस अधिनियम की धारा 67 का भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 25 या धारा 27 के साथ कोई विरोधाभास नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने हाल ही में माना कि एनडीपीएस अधिनियम (NDPS Act) की धारा 67, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) की धारा 27 के प्रभाव को स्पष्ट रूप से बाहर नहीं करती। इस तरह यह धारा एनडीपीएस अधिनियम के तहत गठित अपराध के लिए इसके संचालन का बचाव करती है।इसके अलावा, एनडीपीएस अधिनियम की धारा 67 भी जब गैर-अवरोधक खंड के माध्यम से नहीं होती है तो उसमें होने वाली भारतीय साक्ष्य अधिनियम (सुप्रा) की धारा 27 की व्यावहारिकता या प्रभाव को स्पष्ट रूप से बाहर कर...
एनडीपीएस अधिनियम | एफएसएल को भेजे गए सैंपल पार्सल को जांच के बाद सील करना और कोर्ट में वापस पेश करना जरूरी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में व्यवस्था दी है कि फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला को भेजा गया कथित प्रतिबंधित पदार्थ के सैम्पल का पार्सल "केस प्रॉपर्टी" है और फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद, उसे एफएसएल की सील के साथ ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर की पीठ ने कहा,"मादक पदार्थों के नमूने का कपड़ा पार्सल, जिसे लेकर संबंधित एफएसएल द्वारा दोषी के खिलाफ प्रतिकूल राय बनाई जाती है, वह कभी भी संबंधित एफएसएल की संपत्ति नहीं बन सकता है, "बल्कि केस प्रॉपर्टी है" और,...
आपराधिक न्यायशास्त्र के बुनियादी सिद्धांतों की अनदेखी करके जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि आरोपी को पहले अक्षम अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को अपनी पत्नी का गला घोंटने और बिजली के करंट देकर मारने के आरोपी व्यक्ति को इस टिप्पणी के साथ जमानत दे दी कि केवल इसलिए कि उसे पहले अक्षम अधिकार क्षेत्र की अदालत द्वारा जमानत पर रिहा कर दिया गया, उसे हिरासत में रखने का कारण नहीं होगा। आपराधिक न्यायशास्त्र के मूल सिद्धांत हैं कि आरोपी को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा,"प्रक्रिया और निश्चित रूप से विकृत और कानून के खिलाफ जिस तरीके से याचिकाकर्ता को शुरू में जमानत दी गई, उसमें आपराधिक...
यात्रियों के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस की मनमानी पर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हैरानी जताई; सभी कांस्टेबलों के लिए ट्रेनिंग कैंप आयोजित करने का निर्देश दिया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 'छोटी गलती' के रूप में यात्री के खिलाफ यातायात कर्मियों द्वारा अधिकार और बल के कथित दुरुपयोग से जुड़ी घटना पर अपनी गंभीर नाराजगी व्यक्त की।चीफ जस्टिस आर.एम. छाया और जस्टिस सौमित्र सैकिया ने कहा,"इसमें कोई संदेह नहीं है कि अधिकारियों ने दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी है और पीड़ित की पत्नी द्वारा दर्ज एफआईआर की भी जांच कर रहे हैं। हालांकि, जैसा कि याचिका के मुख्य भाग में व्यक्त किया गया कि तुच्छ यातायात अपराध के लिए पुलिस कर्मियों को कानून अपने हाथ...
यदि जांच अधिकारी मृतक के राइटिंग सोर्स के बारे में नहीं बताता है तो सुसाइड नोट के बारे में हैंड राइटिंग एक्सपर्ट की राय संदिग्ध हो जाती है : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हरियाणा ने माना कि मृतक द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट के संबंध में हैंंड राइटिंग एक्सपर्ट की राय निर्णायक प्रमाण नहीं हो सकती है यदि वह व्यक्ति (पुलिस), जिसने जांच के लिए मृतक की हैंंड राइटिंग को स्वीकार किया और सौंप दिया, लेकिन अपने साक्ष्य में इस तरह के तथ्य का खुलासा करने में विफल रहता है।ऐसे मामले में जहां एएसआई हैंंड राइटिंग एक्सपर्ट को मृतक की हैंंड राइटिंग भेजने के बारे में बयान देने में विफल रहा, जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर की पीठ ने कहा,"केवल अगर मृतक सतबीर सिंह की...
स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान न करना/अपर्याप्तता मध्यस्थता अनुबंध को अमान्य नहीं कर सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि अंतर्निहित समझौते पर स्टांप ड्यूटी का भुगतान न करने या अपर्याप्तता मध्यस्थता खंड (Arbitration Clause) को अमान्य नहीं बना सकती।जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की खंडपीठ ने एन.एन. ग्लोबल मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड बनाम इंडो यूनिक फ्लेम लिमिटेड और इंटरकांटिनेंटल होटल्स ग्रुप (इंडिया) प्रा. लिमिटेड और एक अन्य बनाम वाटरलाइन होटल प्रा. लिमिटेड को यह मानने के लिए कि अदालत को ए एंड सी (The Drugs and Cosmetics (Amendment) Act) की धारा 11 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए बिना...
हिंदू देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट: ट्विटर ने दिल्ली हाईकोट को बताया- वह यह तय नहीं कर सकता कि उसके प्लेटफॉर्म पर कौन-से कंटेंट गैर-कानूनी है जब तक कि उसे वास्तविक जानकारी नहीं दी जाती
माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर (Twitter) ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) को सूचित किया कि एक इंटरमीडियरी होने के नाते, वह यह तय नहीं कर सकता कि उसके प्लेटफॉर्म पर कंटेंट कानूनी हैं या नहीं, जब तक कि उसे इस तरह की "वास्तविक जानकारी" नहीं दी जाती है।ट्विटर ने कोर्ट को आगे सूचित किया है कि वह अदालत के आदेश के माध्यम से या उपयुक्त एजेंसी द्वारा अधिसूचना द्वारा इसके बारे में अधिसूचित होने पर प्लेटफॉर्म से सामग्री को हटा सकता है।ट्विटर ने आगे कहा,"सूचना पर कार्रवाई करने की आवश्यकता होती है, जब...
उड़ीसा हाईकोर्ट ने 'बाल गवाह' की गवाही के आधार पर हत्या के दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी
उड़ीसा हाईकोर्ट ने बाल गवाह (Child Witness) की गवाही पर भरोसा करते हुए हत्या के दो दोषियों के आजीवन कारावास को बरकरार रखा।चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर और जस्टिस चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने कहा,"मौजूदा मामले में अदालत इस बात से संतुष्ट है कि पीडब्लू-14 (पीड़ित पक्ष का गवाह) बाल गवाह बिना किसी विरोधाभास के स्पष्ट और ठोस है और मेडिकल साक्ष्य द्वारा पूरी तरह से पुष्टि की गई है। उससे क्रॉस एग्जामिनेशन किया गया। तथाकथित विसंगतियों को बचाव पक्ष द्वारा सामने लाया जा सकता था। न्यायालय ने शेष साक्ष्यों का भी...
जाति प्रमाण पत्र- आवेदक का सामान्य निवास एक संक्षिप्त पूछताछ में निर्धारित नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) की नागपुर पीठ ने हाल ही में कहा कि जाति प्रमाण पत्र के सत्यापन के उद्देश्य से किसी व्यक्ति के सामान्य निवास का प्रश्न सतर्कता सेल की जांच के बिना और व्यक्ति को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किए बिना निर्धारित नहीं किया जा सकता है।अदालत ने कहा,"एक निष्कर्ष यह है कि आवेदक एक सामान्य निवासी नहीं है, एक संक्षिप्त पूछताछ करके दर्ज नहीं किया जा सकता है।"जस्टिस एएस चंदुरकर और जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता के...
नाबालिग की मॉब लिंचिंग मामला - "भीड़ की हिंसा अपराध का सबसे खराब रूप, पुलिस कुछ छिपा रही है": झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया
झारखंड हाईकोर्ट ने 2022 में रूपेश पांडे नामक एक नाबालिग की मॉब लिंचिंग मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करते हुए कहा, " मॉब लिंचिंग या भीड़ की हिंसा किसी इलाके में लोगों के समूह द्वारा किए गए अपराध के सबसे खराब रूपों में से एक है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने प्रथम दृष्टया पाया कि राज्य पुलिस मामले के बारे में कुछ छिपा रही है और इसलिए जांच को सीबीआई को स्थानांतरित करना उचित लगा।संक्षेप में मामला6 फरवरी, 2022 को रूपेश पांडे अपने चाचा के साथ सरस्वती पूजा के...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भाभी से अवैध संबंधों के कारण अपनी पत्नी और बच्चों सहित छह हत्या करने के दोषी की मौत की सजा बरकरार रखी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को वर्ष 2009 में अपनी भाभी के साथ अवैध संबंधों के कारण अपनी पत्नी और बच्चों की हत्या करने वाले व्यक्ति को दी गई मौत की सजा की पुष्टि की। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सरोज यादव की पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि अपराध करने के तरीके और अपराध की भयावहता को देखते हुए इसे असामाजिक या सामाजिक रूप से घृणित अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है।कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के इस निष्कर्ष से सहमति जताई कि दोषी ने सबसे क्रूर, विचित्र, शैतानी और नृशंस तरीके से छह लोगों की हत्या कर दी थी,...
उच्च पद का संपूर्ण वेतन अंतर केवल इसलिए नहीं दिया जा सकता क्योंकि निचले पद के कर्मचारी ने अतिरिक्त कर्तव्यों का पालन किया थाः गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने माना है कि केवल इसलिए कि चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्त एक कर्मचारी को अस्थायी अवधि के लिए एक उच्च पद से संबंधित अतिरिक्त कर्तव्य सौंप दिए गए थे (हो सकता है वास्तविक कर्मचारी के पद के खाली रहने की अवधि में), वह संपूर्ण वेतन अंतर की मांग नहीं कर सकता है।न्यायालय ने चतुर्थ श्रेणी और तृतीय श्रेणी में नियुक्ति के अंतर पहलू को ध्यान में रखा और निष्कर्ष निकाला कि केवल इसलिए कि याचिकाकर्ता (चतुर्थ श्रेणी का एक कर्मचारी ) तृतीय श्रेणी का अतिरिक्त कार्य कर रहा था, इसका अर्थ यह नहीं ...
जब तक अनुच्छेद 226 के तहत मूल अधिकार क्षेत्र का प्रयोग शामिल नहीं है, तब तक अनुच्छेद 227 के तहत आदेश के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट अपील सुनवाई योग्य नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने संविधान के अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 227 के तहत 'इंट्रा-कोर्ट अपील' के अधिकार के बीच अंतर बताया और कहा है कि एक इंट्रा-कोर्ट अपील एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ नहीं होती है जब अधीक्षण की शक्ति अधीनस्थ न्यायालय के आदेश का परीक्षण कर रहा हो।दूसरे शब्दों में, लेटर्स पेटेंट एक्ट का क्लॉज 15, कोर्ट के सिंगल जज द्वारा अनुच्छेद 227 के तहत याचिका में पारित आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति नहीं देता है।चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष जोशी ने कहा,"जहां भारत के...
सगाई और शादी के बीच की अवधि के दौरान मंगेतर की सहमति के बिना उसका यौन शोषण करने का कोई अधिकार नहींः पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इसलिए कि पक्षकारों की सगाई हो गई है और वह एक-दूसरे से मिल रहे हैं, यह तथ्य भावी (होने वाले)दूल्हे को उसकी मंगेतर की सहमति के बिना उसका यौन शोषण करने का कोई अधिकार या स्वतंत्रता नहीं देता है। जस्टिस विवेक पुरी की खंडपीठ ने उस व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया,जिसके खिलाफ उसकी मंगेतर ने बलात्कार का केस दर्ज करवाया है। पीठ ने कहा कि, ''याचिकाकर्ता को सगाई और शादी के बीच की अवधि के दौरान अपनी मंगेतर की सहमति के बिना उसका शारीरिक शोषण करने...
परोपकारी कानूनों के मामले में साक्ष्यों का मूल्यांकन उदार तरीके से किया जाना चाहिएः केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मोटर वाहन अधिनियम जैसे परोपकारी कानूनों के मामले में 'संभावनाओं और अनुमानों की प्रबलता' के चरम रूप पर जोर दिए बिना सबूतों का मूल्यांकन उदार तरीके से किया जाना चाहिए।कोर्ट ने कहा,"'संभावनाओं और अनुमानों की प्रबलता' दीवानी मामलों में आरोप संबंधी सबूतों की पूछताछ के लिए लागू साक्ष्य का नियम है। जब उदार कानूनों की बात आती है तो साक्ष्य का नियम कुछ और नहीं बल्कि 'संभावनाओं और अनुमानों की प्रबलता' है और ऐसे मामलों में, 'संभावनाओं और अनुमानों की प्रबलता' के चरम रूप पर...
जवाब में इनकार ना होने पर मध्यस्थता समझौते के अस्तित्व का अनुमान लगाया जा सकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि ए एंड सी एक्ट की धारा 7(4)(सी) के तहत "दावा और बचाव का बयान" शब्दों की व्यापक व्याख्या की जा सकती है और मध्यस्थता के नोटिस का जवाब इसी धारा के अंतर्गत आता है।जस्टिस एसआर कृष्ण कुमार ने कहा कि धारा 7(4)(सी) के अनुसार एक मध्यस्थता समझौता मौजूद होगा यदि याचिकाकर्ता ने मध्यस्थता के अपने नोटिस में इसके अस्तित्व का दावा किया है और प्रतिवादी ने नोटिस के जवाब में इसके अस्तित्व से इनकार नहीं किया है।कोर्ट ने कहा कि यदि दो समझौते आंतरिक रूप से परस्पर जुड़े हैं और एक ही परियोजना...
जब कोई आरोपी चार्जशीट दाखिल करने के लिए पुलिस स्टेशन से नोटिस प्राप्त करने के बाद ट्रायल के समक्ष पेश होता है, तो सीआरपीसी की धारा 439 के तहत उसकी जमानत याचिका सुनवाई योग्य : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में दोहराया कि जब कोई आरोपी चार्जशीट दाखिल करने के लिए पुलिस स्टेशन से नोटिस प्राप्त करने के बाद निचली अदालत के समक्ष पेश होता है, तो उसकी उपस्थिति पर ऐसे आरोपी व्यक्ति को न्यायालय की हिरासत में माना जाता है और धारा 439 सीआरपीसी के तहत उसका आवेदन सुनवाई योग्य है और इसे इस तकनीकी पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए कि उसे पुलिस द्वारा कभी गिरफ्तार नहीं किया गया था।जस्टिस विशाल धगत की खंडपीठ ने आगे कहा कि उपरोक्त परिस्थितियों में आरोपी द्वारा...




















