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व्यक्तिगत हित के लिए दायर याचिकाओं पर विचार नहीं किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ एसआईटी जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
"व्यक्तिगत हित के लिए दायर याचिकाओं पर विचार नहीं किया जाना चाहिए": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ एसआईटी जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में लोक निर्माण विभाग के दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच और एसआईटी जांच की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करके करोड़ों रुपए कमाए हैं।जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी साख का खुलासा नहीं किया और ऐसा प्रतीत होता है कि वह किसी और के कहने पर काम कर रहा है।इसके अलावा, उत्तरांचल राज्य बनाम...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानूनी सहायता के आभाव में 11 साल जेल में बिताने वाले हत्या के आरोपी को जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानूनी सहायता के आभाव में 11 साल जेल में बिताने वाले हत्या के आरोपी को जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या के एक आरोपी को जमानत दे दी, जो 11 साल से अधिक समय से जेल में था, क्योंकि उसे अदालत के समक्ष अपनी जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए कोई कानूनी सहायता नहीं मिली। जस्टिस अजय भनोट की पीठ ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा:" यह पहला जमानत आवेदन है जो इस न्यायालय के समक्ष आवेदक द्वारा प्रस्तुत किया गया है। आवेदक मानवता दुर्भाग्य से भूले हुए नागरिकों के वर्ग से संबंधित है। उसके पास एक वकील नियुक्त करने के लिए संसाधन नहीं थे और न ही उसे इतने लंबे समय में कानूनी सहायता तक...

मारे गए आतंकवादी के अंतिम संस्कार पर प्रार्थना करना राष्ट्र-विरोधी गतिविधि नहीं मानी जा सकती : जे एंड के एंड एल हाईकोर्ट
मारे गए आतंकवादी के अंतिम संस्कार पर प्रार्थना करना राष्ट्र-विरोधी गतिविधि नहीं मानी जा सकती : जे एंड के एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि मारे गए किसी आतंकवादी के अंतिम संस्कार पर बड़े पैमाने पर जनता द्वारा प्रार्थना करना को उस मात्रा की राष्ट्र-विरोधी गतिविधि नहीं माना जा सकता जिससे उन्हें भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दी गई गारंटी के अनुसार उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित किया जा सके। जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे और जस्टिस एमडी अकरम चौधरी की पीठ विशेष न्यायाधीश अनंतनाग (गैरकानूनी गतिविधिया (रोकथाम) अधिनियम के लिए नामित न्यायालय) द्वारा 11 फरवरी,...

[ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट] निर्माता को 28 दिनों के भीतर सरकारी एनालिस्ट रिपोर्ट की शुद्धता पर विवाद करने का अधिकार: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
[ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट] निर्माता को 28 दिनों के भीतर सरकारी एनालिस्ट रिपोर्ट की शुद्धता पर विवाद करने का अधिकार: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि एक दवा निर्माता को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट,1940 की धारा 25 (3) के अनुसार रिपोर्ट प्राप्त होने की तारीख से 28 दिनों की वैधानिक अवधि के भीतर सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट की शुद्धता पर विवाद करने का अधिकार है। जस्टिस रजनीश ओसवाल की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसके संदर्भ में याचिकाकर्ताओं ने जम्मू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में इसके खिलाफ लंबित कार्यवाही को चुनौती दी थी।याचिकाकर्ताओं ने...

पतंजलि ने एलोपैथी, आयुर्वेद के तहत एकीकृत औषधीय प्रणाली, समग्र उपचार की मांग वाली जनहित याचिका के समर्थन में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
पतंजलि ने एलोपैथी, आयुर्वेद के तहत एकीकृत औषधीय प्रणाली, समग्र उपचार की मांग वाली जनहित याचिका के समर्थन में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया

योग गुरु बाबा रामदेव के पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने भारत में "समग्र एकीकृत औषधीय प्रणाली" (Holistic Integrated Medicinal System" in India) को अपनाने की मांग करते हुए एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका का समर्थन करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ को पतंजलि के वकील ने सूचित किया कि जनहित याचिका में की गई प्रार्थना के समर्थन में हस्तक्षेप आवेदन दिया गया।यह देखते हुए कि उक्त हस्तक्षेप आवेदन रिकॉर्ड में नहीं है, बेंच ने...

दिल्ली हाईकोर्ट ने SOCIAL रेस्टोरेंट चेन को अंतरिम राहत दी, झारखंड स्थित रेस्टोरेंट SOCIAL 75 को इसके ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करने से रोका
दिल्ली हाईकोर्ट ने 'SOCIAL' रेस्टोरेंट चेन को अंतरिम राहत दी, झारखंड स्थित रेस्टोरेंट 'SOCIAL 75' को इसके ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करने से रोका

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने मशहूर रेस्टोरेंट और बार चेन 'SOCIAL' के पक्ष में एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा देते हुए झारखंड स्थित रेस्टोरेंट 'SOCIAL 75' को पंजीकृत ट्रेडमार्क 'SOCIAL' का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।जस्टिस ज्योति सिंह ने SOCIAL 75 को तीसरे पक्ष की वेबसाइटों से सभी संदर्भों को हटाने का भी निर्देश दिया, जहां इसकी सेवाएं बेची जाती हैं, पेशकश की जाती हैं या विज्ञापित की जाती हैं।कोर्ट ने कहा कि SOCIAL ने एक पक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा देने के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनाया है,...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व सीएम येदियुरप्पा के खिलाफ रिश्वत की शिकायत बहाल की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व सीएम येदियुरप्पा के खिलाफ रिश्वत की शिकायत बहाल की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, उनके बेटे बी.वाई. विजयेंद्र और अन्य पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध के आरोप को बहाल कर दिया।जस्टिस एस सुनील दत्त यादव की एकल पीठ ने शिकायतकर्ता अब्राहम टीजे की याचिका को अनुमति दी और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत द्वारा पारित 8 जुलाई, 2021 के आदेश को रद्द कर दिया।पीठ ने कहा कि अभियोजन की मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास जाने वाले शिकायतकर्ता का कोई कानूनी महत्व नहीं है, क्योंकि वह मंजूरी लेने के लिए...

मद्रास हाईकोर्ट ने 2016 में नोटबंदी के फैसले पर पीएम के खिलाफ कथित तौर पर नारे लगाने वालों के खिलाफ मामला खारिज किया
मद्रास हाईकोर्ट ने 2016 में नोटबंदी के फैसले पर पीएम के खिलाफ कथित तौर पर नारे लगाने वालों के खिलाफ मामला खारिज किया

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पांच व्यक्तियों के खिलाफ दायर वह मामला खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने विमुद्रीकरण (नोटबंदी) की घोषणा के बाद कथित तौर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए थे।जस्टिस एन. सतीश कुमार की पीठ ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 143, 188 @ 143, 149, 353 के तहत आरोप नहीं लगाए गए हैं।17 संगठन के सदस्य, इसके नेता और 100 प्रतिभागियों के साथ नवंबर, 2016 में वल्लुवर कोट्टम, नुंगमबक्कम के पास विरोध/आंदोलन में शामिल...

दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व सीबीआई प्रमुख एम नागेश्वर राव पर लगाया जुर्माना माफ किया, ट्विटर वेरिफिकेशन टैग हटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व सीबीआई प्रमुख एम नागेश्वर राव पर लगाया जुर्माना माफ किया, ट्विटर वेरिफिकेशन टैग हटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व प्रमुख और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव पर लगाया गया 25,000 रुपये का जुर्माना माफ कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट नेमाइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर उनके वेरिफाइड अकाउंट सत्यापन टैग हटाने के फैसले के खिलाफ दायर उनकी याचिका खारिज कर दी।जस्टिस यशवंत वर्मा ने राव की ओर से दी गई बिना शर्त माफी को देखते हुए 17 मई को लगाया गया जुर्माना हटा दिया।अदालत ने आदेश दिया,"याचिकाकर्ता की ओर से दी गई बिना शर्त माफी को ध्यान में...

सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामले | भारी जुर्माना लगाया जाएगा: हाईकोर्रट ने पंजाब और हरियाणा सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का अंतिम मौका दिया
सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामले | "भारी जुर्माना लगाया जाएगा": हाईकोर्रट ने पंजाब और हरियाणा सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का अंतिम मौका दिया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा में राज्य सरकारों को सांसद/विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट दर्ज करने का अंतिम अवसर प्रदान किया।जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह और जस्टिस आलोक जैन की पीठ ने दोनों सरकारों को सप्ताह का समय दिया और निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी।अदालत ने टिप्पणी की,"यह उपयुक्त मामला है जहां प्रतिवादियों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए, लेकिन इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अंतिम अवसर के लिए...

मद्रास हाईकोर्ट
एक ही घटना के संबंध में एक और एफआईआर दर्ज करके पुलिस को खुद से आरोपी का री-एग्जामिशन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने हाल ही में कहा कि एक ही घटना के संबंध में एक और एफआईआर दर्ज करके पुलिस को आरोपी का री-एग्जामिशन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।जस्टिस जी.के. इलांथिरैयान ने आगे टिप्पणी की,"यदि किसी संदिग्ध को इस तरह की सुरक्षा नहीं दी जाती है, तो पुलिस द्वारा जांच शक्तियों के दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप कार्यवाही की बहुलता होगी और अभियुक्तों को अनावश्यक उत्पीड़न झेलना पड़ेगा और एक ही घटना पर कई प्राथमिकी दर्ज होंगे। समानता के...

दिल्ली हाईकोर्ट
रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग तभी किया जा सकता है जब या तो वह व्यक्ति या प्राधिकरण जिसे रिट जारी किया गया हो, या कार्रवाई उसके क्षेत्र के भीतर हो: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग तब कर सकता है जब रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग तभी किया जा सकता है जब या तो वह व्यक्ति या प्राधिकरण जिसे रिट जारी किया गया हो, या कार्रवाई उसके क्षेत्र के भीतर हो।जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने एचएस राय, प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (पीडीआईएल) के पीड़ित कर्मचारी, जिसने कथित तौर पर कंपनी के फंड के दुरुपयोग के लिए अनुशासनात्मक जांच के दौरान उन पर लगाए गए दंड को रद्द करने के लिए अदालत का रुख...

न्याय की गर्भपात को रोकने के लिए अदालत को अक्षम गवाह की जांच करने में अपनी शक्ति का प्रयोग करना चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट
न्याय की गर्भपात को रोकने के लिए अदालत को अक्षम गवाह की जांच करने में अपनी शक्ति का प्रयोग करना चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कमीशन पर गवाह की जांच करने के सवाल से जुड़े मामलों में, जिसमें ऐसा गवाह अक्षम है या अन्यथा अदालत में उपस्थित होने की स्थिति में नहीं है, अदालत को गवाह की जांच करने की अपनी शक्ति का प्रयोग करना है ताकि यह देखा जा सके कि कोई न्याय का गर्भपात नहीं हुआ है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा,"कमीशन पर गवाह की जांच का सवाल उस मामले में उठता है, जहां ऐसी गवाह वृद्धावस्था या उसके स्वास्थ्य की खतरनाक स्थिति के कारण अदालत में उपस्थित होने के लिए अक्षम है। ऐसे मामलों में न्यायालय को...

जेजे एक्ट | जघन्य अपराध वह है जहां 7 साल या उससे अधिक तक की सजा का प्रावधान हो: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
जेजे एक्ट | "जघन्य अपराध" वह है जहां 7 साल या उससे अधिक तक की सजा का प्रावधान हो: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जब आरोपी ने रात में घर में घुसकर या रात में घर का ताला तोड़ने का अपराध करते हुए स्वेच्छा से मौत का कारण बना या मौत का प्रयास किया तो अदालत पूरी तरह से कानून का उल्लंघन करने वाले दोषी किशोर को आजीवन कारावास की सजा दे सकती है।जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर की पीठ ने आगे कहा कि रात में घर में घुसकर या घर का ताला तोड़ने के सरल अपराध के लिए सजा सात साल से कम हो सकती है, जबकि "अपराध" "जघन्य अपराध" है, ऐसे में केवल तभी दोषी पर अनिवार्य रूप से 7 साल या उससे अधिक की...

दिल्ली हाईकोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर DAMEPL को शेष पंचाट अवार्ड का भुगतान नहीं करने पर DMRC के मैनेजिंग डायरेक्ट को तलब किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर DAMEPL को शेष पंचाट अवार्ड का भुगतान नहीं करने पर DMRC के मैनेजिंग डायरेक्ट को तलब किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा प्रवर्तित दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (DAMEPL) को 2017 के ऑर्बिटल अवॉर्ड (Arbitral Award) के संदर्भ में चार सप्ताह की अवधि के भीतर शेष राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।जस्टिस वी कामेश्वर राव की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया जाता तो अदालत को DMRC के प्रबंध निदेशक की व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए कहने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।यह घटनाक्रम DAMEPL...

मद्रास हाईकोर्ट
प्रौद्योगिकी से प्रभावित किशोर, यौन अपराधों में लिप्त: मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य को युवा कैदियों के लिए काउंसलिंग मैकेनिज्म तैयार करने का सुझाव दिया

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी आज उन किशोरों की परवरिश में एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है, जिनका दिमाग अक्सर आसानी से उपलब्ध पोर्नोग्राफी से प्रभावित होता है, उन्हें गुमराह करता है और इसके परिणामों को समझे बिना उन्हें यौन अपराधों में लिप्त करता है।जस्टिस जे निशा बानो और जस्टिस एन आनंद वेंकटेश की मदुरै पीठ ने जोर देकर कहा कि जब भी इन किशोरों को गिरफ्तार किया जाता है, तो उनकी मानसिक विकृति को दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए।अदालत ने इस प्रकार निम्नानुसार...

भारतीय-अमेरिकी अटॉर्नी अरुण सुब्रमण्यम को राष्ट्रपति जो बिडेन ने न्यूयॉर्क में यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट जज के रूप में नामित किया
भारतीय-अमेरिकी अटॉर्नी अरुण सुब्रमण्यम को राष्ट्रपति जो बिडेन ने न्यूयॉर्क में यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट जज के रूप में नामित किया

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने भारतीय-अमेरिकी अटॉर्नी अरुण सुब्रमण्यम को न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के लिए यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट जज के रूप में नामित किया है।व्हाइट हाउस द्वारा 6 सितंबर को अन्य न्यायिक नामांकनों के साथ इस आशय का एक संचार सीनेट को भेजा गया था।व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, अगर पुष्टि की जाती है, तो सुब्रमण्यम न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के लिए यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सेवा देने वाले पहले दक्षिण एशियाई न्यायाधीश होंगे।वर्तमान में न्यूयॉर्क में सुस्मान...

मद्रास हाईकोर्ट ने मंत्री पीटीआर की कार पर चप्पल फेंकने के आरोप में भाजपा कार्यकर्ताओं को अग्रिम जमानत दी
मद्रास हाईकोर्ट ने मंत्री पीटीआर की कार पर चप्पल फेंकने के आरोप में भाजपा कार्यकर्ताओं को अग्रिम जमानत दी

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में तीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं को अग्रिम जमानत दे दी, जिन पर राज्य के वित्त मंत्री की कार को कथित रूप से रोकने, गाली देने और उनका अपमान करने का आरोप है। 13 अगस्त, 2022 को हुई इस घटना के दौरान उन्होंने मंत्री की कार की ओर चप्पल भी फेंकी।जस्टिस जी. इलंगोवन की पीठ ने टिप्पणी की,"जो महत्वपूर्ण है वह मानवीय मूल्य है, कानून से बहुत ऊपर, राजनीति से ऊपर, धर्म आदिसे ऊपर । इसे याचिकाकर्ताओं जैसे लोगों द्वारा कायम रखा जाना चाहिए, जो राजनीतिक दल से...

बेंगलुरू बारिश : कर्नाटक हाईकोर्ट ने बीबीएमपी को रहवासियों की शिकायतों को दूर करने के लिए शिकायत सेल स्थापित करने का निर्देश दिया
बेंगलुरू बारिश : कर्नाटक हाईकोर्ट ने बीबीएमपी को रहवासियों की शिकायतों को दूर करने के लिए शिकायत सेल स्थापित करने का निर्देश दिया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) को निर्देश दिया कि वह शहर में अभूतपूर्व बारिश के कारण कठिनाइयों का सामना कर रहे रहवासियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए वार्डवार शिकायत प्रकोष्ठ (grievance cell) स्थापित करे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की खंडपीठ ने कहा," इस तरह के उद्देश्य के लिए प्रत्येक वार्ड में वार्ड इंजीनियर को वार्ड के रहवासियों की शिकायत से निपटने के लिए अधिसूचित किया जाएगा। "अदालत को यह भी बताया गया कि भारी...

जब सीपीसी के तहत स्पष्ट प्रावधान दिया गया है तो सीपीसी की धारा 151 के तहत यथास्थिति आदेश टिकाऊ नहीं : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
जब सीपीसी के तहत स्पष्ट प्रावधान दिया गया है तो सीपीसी की धारा 151 के तहत यथास्थिति आदेश टिकाऊ नहीं : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि सीपीसी की धारा 151 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए अदालत द्वारा पारित यथास्थिति का आदेश टिकाऊ नहीं है, क्योंकि नागरिक प्रक्रिया संहिता के तहत इसके लिए स्पष्ट प्रावधान प्रदान किया गया है।जस्टिस एस ए धर्माधिकारी की पीठ ने कहा,बेशक निचली अदालत ने आयुक्त की नियुक्ति में गलती की, क्योंकि संहिता के आदेश 39 नियम 1 और नियम 2 के तहत आवेदन का फैसला करते समय साक्ष्य के संग्रह की अनुमति नहीं दी जा सकती। आवेदन पर प्रथम दृष्टया कानून के तीन ठोस सिद्धांतों पर...