मुख्य सुर्खियां

दिल्ली हाईकोर्ट
सरकारी अनुबंधों की न्यायिक समीक्षा की अनुमति केवल तभी दी जाती है जब निर्णय लेने की प्रक्रिया अवैध हो: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी अनुबंधों के मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित है और इसका प्रयोग केवल तभी किया जा सकता है जब प्राधिकरण की निर्णय लेने की प्रक्रिया में पेटेंट अनुचितता, अनियमितता, तर्कहीनता या अवैधता हो, जो सार्वजनिक हित को बड़े पैमाने पर जोखिम पर रखता है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि उक्त परिस्थितियों की अनुपस्थिति में न्यायालयों को संविदात्मक मामलों पर विचार-विमर्श करते समय सामान्य रूप से न्यायिक संयम का प्रयोग करना चाहिए...

विवादित बकाया की वसूली के लिए आपराधिक कार्यवाही नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द करने से इनकार किया
विवादित बकाया की वसूली के लिए आपराधिक कार्यवाही नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत रद्द करने से इनकार किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहराया कि आपराधिक कार्यवाही विवादित बकाया की वसूली के लिए नहीं है। इस प्रकार, कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 439 (2) के तहत दायर याचिका खारिज कर दी। उक्त याचिका में साझेदारी विवाद और पैसे की कथित वसूली के संबंध में आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई थी।यह पुराना कानून है कि हिरासत में पूछताछ के तहत पैसे की वसूली के कारण जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता है।जस्टिस पंकज जैन की खंडपीठ ने आगे कहा कि जमानत रद्द करने के संबंध में मानदंड अब पुन: एकीकृत नहीं हैं...

उड़ीसा हाईकोर्ट ने मुख्य वन संरक्षक को हाथियों की अप्राकृतिक मौत को नियंत्रित करने के लिए व्यापक कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने मुख्य वन संरक्षक को हाथियों की अप्राकृतिक मौत को नियंत्रित करने के लिए 'व्यापक कार्य योजना' प्रस्तुत करने का निर्देश दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक ('पीसीसीएफ') को राज्य भर में सामान्य रूप से जंगली जानवरों और विशेष रूप से हाथियों की बढ़ती अप्राकृतिक मौतों को नियंत्रित करने और कम करने के लिए 'व्यापक कार्य योजना' प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर और जस्टिस चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने कहा,"हाथियों के अवैध शिकार और अप्राकृतिक मौतों के मुद्दे के अलावा, जेटीएफ (संयुक्त कार्य बल) बाघों, तेंदुओं के अवैध शिकार और पैंगोलिन के अवैध व्यापार के मामलों को देखना है। इन मामलों को प्रत्येक...

एग्जाम आंसर शीट का प्रकाशन उम्मीदवारों की निजता में दखल देगा: एमपी हाईकोर्ट ने सिविल जज चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
एग्जाम आंसर शीट का प्रकाशन उम्मीदवारों की निजता में दखल देगा: एमपी हाईकोर्ट ने सिविल जज चयन प्रक्रिया में "पारदर्शिता" की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में जनहित याचिका के रूप में दायर वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें राज्य में निचली अदालत परीक्षा की मुख्य लिखित परीक्षा के लिए उपस्थित होने वाले सभी उम्मीदवारों की आंसर शीट उपलब्ध कराने के निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस शील नागू और जस्टिस डी.डी. बंसल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि किसी उम्मीदवार की आंसर शीट को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराना उसके निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा और जनहित के खिलाफ भी होगा।खंडपीठ ने...

उपभोक्ता न्यायालय ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम को 2006 से सेवा का इंतजार कर रहे भक्त को टिकट आवंटित करने या 45 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया
उपभोक्ता न्यायालय ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम को 2006 से सेवा का इंतजार कर रहे भक्त को टिकट आवंटित करने या 45 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, सलेम ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के खिलाफ एक व्यक्ति की याचिका पर संस्‍थान को एक साल के भीतर मेलचट वस्त्रम सेवा के लिए टिकट आवंटित करने का निर्देश दिया है।आयोग ने कहा कि जब जनता को दर्शन/सेवा की अनुमति दी जाती है, उसके एक साल के भीतर टिकट दिया जाए या विकल्प के रूप में सेवा में कमी और मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे के रूप में 45,00,000 रुपये की राशि प्रदान की जाए।शिकायतकर्ता केआर हरि भास्कर ने वर्ष 2006 में 12,250 रुपये की राशि का भुगतान करके "मेलचट...

जहां मां को नाबालिग की एक्सक्लूसिव कस्टडी सौंपी जा चुकी है, वहां पासपोर्ट अधिकारी पिता की सहमति पर जोर नहीं दे सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
जहां मां को नाबालिग की एक्सक्लूसिव कस्टडी सौंपी जा चुकी है, वहां पासपोर्ट अधिकारी पिता की सहमति पर जोर नहीं दे सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि फैमिली कोर्ट जब एक बार बच्चे की एक्सक्लुसिव कस्टडी मां को सौंप चुका हो तो रीजनल पासपोर्ट ऑफिसर द्वारा पासपोर्ट जारी करने के लिए बच्चे के पिता की मौजूदगी पर या उसकी सहमति पर जोर देना उचित नहीं है।जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की सिंगल जज बेंच ने एक महिला की याचिका को अनुमति देते हुए उक्त टिप्पणी की।याचिका में मांग की गई थी कि पासपोर्ट प्राधिकरण को महिला के नाबालिग बच्चे का पासपोर्ट जारी करने के आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया जाए, जिसकी एक्सक्लूसिव कस्टडी फैमिली कोर्ट...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया, पुलिस जांच प्रणाली में सुधार के लिए कई निर्णय लिए; 2 महीने में उन्हें लागू करने का आश्वासन दिया

उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस जांच प्रणाली में सुधार के लिए लिए गए ‌निर्णयों की जानकारी इलाहाबाद हाईकोर्ट को दी है। हाईकोर्ट को बताया गया है कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की अध्यक्षता में 26 अगस्त, 2022 को आयोजित बैठक में सुधार संबंधी निर्णय लिए गए हैं।सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार निर्णयों दो महीने के भीतर प्रभावी ढंग से लागू करेगी, साथ ही निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यक कुछ अन्य कदम भी उठाए जाएंगे।उल्लेखनीय है कि सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया था कि सीआरपीसी की धारा 161 के...

हाईकोर्ट ने अल्पसंख्यक समुदायों के स्कूली छात्रों को ट्यूशन फीस की अदायगी के लिए दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया
हाईकोर्ट ने अल्पसंख्यक समुदायों के स्कूली छात्रों को ट्यूशन फीस की अदायगी के लिए दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर के मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूलों में कक्षा एक से बारहवीं के बीच पढ़ने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को ट्यूशन फीस और अन्य अनिवार्य शुल्क की अदायगी (Reimbursement) के लिए दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित योजना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार, उसके शिक्षा निदेशालय और दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग से जवाब मांगा।जनहित याचिका चार्टर्ड एकाउंटेंट अविनाश मल्होत्रा ​​​​द्वारा दायर की...

सीपीसी का आदेश 16 नियम 1 | अदालत को गवाहों की सूची उपलब्ध कराने के लिए 15 दिनों की अवधि प्रकृति में निर्देश: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
सीपीसी का आदेश 16 नियम 1 | अदालत को गवाहों की सूची उपलब्ध कराने के लिए 15 दिनों की अवधि प्रकृति में निर्देश: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अदालत को गवाहों की सूची उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सीपीसी के आदेश 16 नियम 1 के तहत निर्धारित 15 दिनों की अवधि नियम 16 ​​(3) के मद्देनजर प्रकृति में निर्देश है, जो किसी भी पक्षकार को सूची में नामित गवाहों के अलावा किसी अन्य गवाह को बुलाने की अनुमति देती है।हालांकि, अदालत को गवाहों की सूची उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सीपीसी के आदेश 16 नियम 1 के तहत 15 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है। हालांकि, एक बार अदालत को किसी भी पक्षकार को अनुमति देने के लिए...

मद्रास हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री के लिए एएसजी के पेश होने पर टीएन एजी की आपत्ति खारिज की
मद्रास हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री के लिए एएसजी के पेश होने पर टीएन एजी की आपत्ति खारिज की

कॉरपोरेट ठेके देने में कथित अनियमितताओं के लिए पूर्व मंत्री एसपी वेलुमणि के खिलाफ दर्ज दो एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल आर शुनमुगसुंदरम ने वर्तमान एएसजी और मंत्री के लिए सीनियर एडवोकेट एसवी राजू के पेश होने पर कड़ी आपत्ति जताई।उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि आयकर विभाग ने हाल ही में पूर्व मंत्री पर छापा मारा गया। ऐसी परिस्थितियों में वर्तमान में एक भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री का प्रतिनिधित्व करने के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजू...

धारा 125 सीआरपीसी के तहत मजिस्ट्रेट अपनी शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए किसी वयस्क बेटे या बेटी को भरण-पोषण का अधिकार नहीं दे सकताः जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
धारा 125 सीआरपीसी के तहत मजिस्ट्रेट अपनी शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए किसी वयस्क बेटे या बेटी को भरण-पोषण का अधिकार नहीं दे सकताः जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा एक मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए एक वयस्क बेटा या बेटी के पक्ष में भरण-पोषण का फैसला नहीं दे सकता, जबकि एक उपयुक्त मामले में फैमिली कोर्ट के पास सीआरपीसी की धारा 125 और हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 20(3) के संयुक्त पठन के आधार पर एक वयस्क हिंदू बेटी के पक्ष में भरण-पोषण का फैसला देने का अधिकार क्षेत्र है।जस्टिस संजय धर ने यह टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए की।...

मद्रास हाईकोर्ट
ऑडिट की आपत्ति मूल्यांकन अधिकारी के 'विश्वास करने के कारणों' का आधार नहीं हो सकती, वह भी 6 साल बीत जाने के बाद: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही को रद्द कर दिया है और कहा कि एक ऑडिट आपत्ति मूल्यांकन अधिकारी की आवश्यकता को पूरा नहीं करती है, जिसके पास एक स्वतंत्र "विश्वास करने का कारण" है कि आय मूल्यांकन से बच गई है, वह भी लगभग छह साल बीत जाने के बाद।जस्टिस अनीता सुमंत की एकल पीठ ने देखा कि मैट के प्रावधानों के तहत कर की गणना के संबंध में सभी सामग्री मूल मूल्यांकन कार्यवाही के दौरान निर्धारण प्राधिकारी के समक्ष उपलब्ध है।याचिकाकर्ता/निर्धारिती आयकर अधिनियम, 1961 के...

राष्ट्रपति ने जस्टिस एम. दुरईस्वामी को मद्रास हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया
राष्ट्रपति ने जस्टिस एम. दुरईस्वामी को मद्रास हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया

राष्ट्रपति ने मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी की सेवानिवृत्ति के मद्देनज़र मुख्य न्यायाधीश के रूप में मद्रास हाईकोर्ट के सबसे सीनियर जज जस्टिस एम दुरईस्वामी को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 13 सितंबर, 2022 से प्रभावी होगी। इस संबंध में जारी अधिसूचना इस प्रकार है, " भारत के संविधान के अनुच्छेद 223 द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति ने मद्रास हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश श्री जस्टिस एम. दुरईस्वामी को मुख्य न्यायाधीश के...

आर्य समाज द्वारा जारी प्रमाण पत्र के एकमात्र आधार पर विवाह साबित नहीं होता : इलाहाबाद हाईकोर्ट
आर्य समाज द्वारा जारी प्रमाण पत्र के एकमात्र आधार पर विवाह साबित नहीं होता : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में आर्य समाज द्वारा विवाह आयोजित करने के तरीके के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 'समाज' ने दस्तावेजों की वास्तविकता पर विचार किए बिना विवाह आयोजित करने में अपने विश्वासों का दुरुपयोग किया है। जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने आगे कहा कि आर्य समाज द्वारा जारी किया गया केवल प्रमाण पत्र विवाह की वैधता को साबित नहीं करता। इसके साथ ही कोर्ट ने पति द्वारा अपनी पत्नी को वापस पाने के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया।संक्षेप में मामलापति ने...

गुजरात हाईकोर्ट
"किसी भी राष्ट्र विरोधी गतिविधि में शामिल होने का सुझाव देने वाली कोई सामग्री नहीं": गुजरात हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जब्त करने का आदेश रद्द किया

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में गुलामहुसेन दादामिया पीर नामक एक व्यक्ति के पासपोर्ट को जब्त करने आदेश को रद्द कर दिया। पासपोर्ट अधिकारियों ने उसका पासपोर्ट इस आधार पर रद्द किया था कि वह कुछ राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त है।मामले में यह ध्यान देना दिलचस्प है कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 10(3)(सी) के प्रावधानों को लागू करके याचिकाकर्ता का पासपोर्ट जब्त नहीं किया गया था। उक्त प्रावधान के तहत किसी भी पासपोर्ट धारक का पासपोर्ट जब्‍त किया जा सकता है यदि वह किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल पाया...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच से छूट के कारणों के अभाव में बर्खास्तगी का आदेश खारिज किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच से छूट के कारणों के अभाव में बर्खास्तगी का आदेश खारिज किया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात को रेखांकित किया कि संघ या राज्य के तहत नागरिक क्षमता में नियोजित व्यक्ति के पद में बर्खास्तगी या निष्कासन उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन में नहीं की जानी चाहिए।जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी की खंडपीठ ने इस प्रकार केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के साथ-साथ अपीलीय प्राधिकरण के आक्षेपित आदेशों को रद्द करने के लिए आगे बढ़े और प्रतिवादी अधिकारियों को 6 सप्ताह की अवधि के भीतर याचिकाकर्ता को पेंशन...

याचिका दायर करने का अधिकार आपके रिज्यूम के लिए टूल नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर हुए हानिकारक प्रभाव के लिए मुआवजे की मांग वाली लॉ स्टूडेंट की याचिका खारिज की
"याचिका दायर करने का अधिकार आपके रिज्यूम के लिए टूल नहीं": दिल्ली हाईकोर्ट ने वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर हुए हानिकारक प्रभाव के लिए मुआवजे की मांग वाली लॉ स्टूडेंट की याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर्स करने रहे लॉ स्टूडेंट शिवम पांडे द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें शहर में वायु प्रदूषण के कारण उनके स्वास्थ्य पर हुए हानिकारक प्रभाव के लिए 15 लाख रूपए मुआवजे की मांग की गई थी। इसके साथ ही याचिका में 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा भी मांगा गया था।जस्टिस यशवंत वर्मा की एकल न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि कानून का छात्र किसी भी भौतिक साक्ष्य को रिकॉर्ड में रखने में विफल रहा, जो वायु प्रदूषण के कारण उसे हुई किसी भी व्यक्तिगत नुकसान...

उपहार अग्निकांड: साक्ष्य छेड़छाड़ मामले में अंसल बंधुओं की जल्द रिहाई के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
उपहार अग्निकांड: साक्ष्य छेड़छाड़ मामले में अंसल बंधुओं की जल्द रिहाई के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उपहार त्रासदी के पीड़ितों के संघ (एवीयूटी) द्वारा दायर उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश में रियल एस्टेट बैरन सुशील अंसल और गोपाल अंसल को वर्ष 1997 में हुई उपहार अग्निकांड के संबंध में मामला में समय पहले से ही जेल की सजा के खिलाफ रिहा किया गया।जस्टिस आशा मेनन की एकल न्यायाधीश की पीठ ने मामले को 11 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए राज्य के साथ-साथ अंसल बंधुओं से जवाब मांगा।राज्य की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट...

ऑर्डर 6 रूल 17 सीपीसी | सीमा अवधि की समा‌प्‍ति के बाद अंतर्निहित दोष को ठीक करने के लिए चुनाव याचिका में संशोधन की अनुमति नहीं दी जा सकती: उड़ीसा हाईकोर्ट
ऑर्डर 6 रूल 17 सीपीसी | सीमा अवधि की समा‌प्‍ति के बाद 'अंतर्निहित दोष' को ठीक करने के लिए चुनाव याचिका में संशोधन की अनुमति नहीं दी जा सकती: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट ने माना कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 6, नियम 17 के तहत एक संशोधन आवेदन को निर्धारित सीमा अवधि की समाप्ति के बाद चुनाव याचिका में शामिल कुछ अंतर्निहित दोषों को ठीक करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।जस्टिस विश्वनाथ रथ की एकल पीठ ने कहा,"इस कोर्ट की राय में, चुनाव विवाद अवधि समाप्त होने के बाद गांवों के नामों में परिवर्तन की अनुमति देना एक अंतर्निहित गलती प्रतीत होती है( यह ग्राम पंचायत चुनाव नियमावली में निर्धारित समय सीमा से परे चुनाव विवादों को दाखिल करने की अवधि...