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केरल हाईकोर्ट
'रिपोर्टिंग पर लगाम नहीं लगाई जा सकती, मुद्दा पहचान छिपाने का है': केरल हाईकोर्ट ने 'राइट टू बी फॉरगॉटन' याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को 'याचिकाकर्ता से सम्बंधित निजी जानकारी हटाने की मांग करने का अधिकार' (Right To Be Forgotten) को लागू करने और विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों से फैसले की प्रति और उससे संबंधित जानकारी को हटाने की मांग वाली याचिकाओं के बैच पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।जस्टिस ए. मोहम्मद मुश्ताक और जस्टिस शोबा अन्नाम्मा ईपेन की खंडपीठ ने गूगल एलएलसी की ओर से सीनियर एडवोकेट साजन पूवैया की दलीलें सुनने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया।मौखिक बहस के दौरान, एडवोकेट पूवैया द्वारा प्रस्तुत किया...

आरपी एक्ट की धारा 123 के तहत शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
आरपी एक्ट की धारा 123 के तहत शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी देना 'भ्रष्ट आचरण' नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक चुनावी उम्मीदवार की शिक्षा के बारे में गलत जानकारी को धारा 123 आरपी एक्ट की उपधारा (2) या (4) के अर्थ के तहत 'भ्रष्ट आचरण' नहीं कहा जा सकता है।जस्टिस राज बीर सिंह की पीठ ने कहा कि उम्मीदवार की शैक्षिक योग्यता के बारे में जानकारी मतदाता के लिए महत्वपूर्ण और उपयोगी जानकारी नहीं है और इस प्रकार, यह नहीं कहा जा सकता है कि उम्मीदवार के हलफनामे में उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता में कोई विसंगति या त्रुटि भ्रष्ट आचरण के समान होगी।कोर्ट ने यह भी कहा कि एक उम्मीदवार...

पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने बिहार नगर निकाय चुनावों में ओबीसी/ ईबीसी कोटे को अवैध करार दिया, चुनाव आयोग को ओबीसी/ईबीसी सीटों को सामान्य श्रेणी के रूप में अधिसूचित करने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण अवैध करार दिया। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना कि विकास किशनराव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य LL 2021 SC 13 मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समूहों के राजनीतिक पिछड़ेपन को निर्धारित करने के लिए "तीन में से दो परीक्षणों" में आरक्षण देने की प्रक्रिया विफल हो चुकी है।इसके अलावा चीफ ज‌स्टिस संजय करोल और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने राज्य चुनाव आयोग को...

Xiaomi India Case: कर्नाटक हाईकोर्ट ने 5551.27 करोड़ रुपये की जब्ती पर फेमा प्राधिकरण के पुष्टि आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया
Xiaomi India Case: कर्नाटक हाईकोर्ट ने 5551.27 करोड़ रुपये की जब्ती पर फेमा प्राधिकरण के पुष्टि आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को शाओमी टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Xiaomi India) द्वारा दायर याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कंपनी के 5551.27 करोड़ रुपये जब्त करने के आदेश की पुष्टि करते हुए विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के तहत नियुक्त सक्षम प्राधिकारी द्वारा पारित 19 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई।जस्टिस एन एस संजय गौड़ा की अवकाशकालीन पीठ ने कंपनी द्वारा मांगी गई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सीनियर एडवोकेट उदय होला ने...

यूजीसी रेगुलेशन 2010 | एक वर्ष से अधिक की शिक्षक की एडहॉक सर्विस को सीधी भर्ती या पदोन्नति के लिए गिना जाएगा: जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
यूजीसी रेगुलेशन 2010 | एक वर्ष से अधिक की शिक्षक की एडहॉक सर्विस को सीधी भर्ती या पदोन्नति के लिए गिना जाएगा: जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि एक वर्ष से अधिक की एडहॉक या अस्थायी सेवाओं की अवधि को शिक्षक की कैरियर उन्नति योजना के तहत सीधी भर्ती या पदोन्नति के लिए गिना जाएगा, जो कि यूजीसी रेगुलेशन 2010 के क्लॉज 10.1 में निर्धारित शर्तों के अधीन है।जस्टिस संजीव कुमार ने याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें याचिकाकर्ता कश्मीर यूनिवर्सिटी के मीडिया शिक्षा और अनुसंधान केंद्र में एसोसिएट प्रोफेसर ने यूनिवर्सिटी द्वारा जारी संचार को रद्द करने के लिए प्रमाण पत्र जारी...

मद्रास हाईकोर्ट
वैवाहिक विवाद| महिला के परिजनों के साक्ष्य को केवल इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि वे इच्छुक पक्ष हैं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों पर निर्णय लेते समय, अदालतों को महिला के परिवार के सदस्यों के साक्ष्य को केवल इसलिए खारिज नहीं करना चाहिए क्योंकि वे इच्छुक पक्ष हैं।जस्टिस पी वेलमुरुगन ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में, परिवार के सदस्य ही घटनाओं को नोटिस कर सकते हैं और सबूत देने के लिए आगे आ सकते हैं क्योंकि कोई तीसरा पक्ष ऐसे मामलों में यह सोचकर हस्तक्षेप नहीं कर सकता है कि यह एक पारिवारिक विवाद है।मामले में अदालत पति द्वारा दायर एक अपील पर विचार कर रही थी,...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 173 के तहत तैयार अंतिम रिपोर्ट में किसी को 'संदिग्ध' के रूप में संदर्भित नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (Himachal Pradesh High Court) ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 173 के तहत तैयार अंतिम रिपोर्ट में किसी को 'संदिग्ध' के रूप में संदर्भित नहीं किया जा सकता है।जस्टिस अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने कहा कि जब जांच के दौरान जांच अधिकारी को किसी के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला है, तो उसे जांच रिपोर्ट में 'संदिग्ध' के रूप में दर्शाना कानून में स्वीकार्य नहीं है।कोर्ट ने कहा,"इस न्यायालय का सुविचारित विचार है कि क़ानून की योजना के संदर्भ में, जांच अधिकारी को उन व्यक्तियों के नाम, जो...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
पुलिस सर्विस की प्रकृति की तुलना किसी अन्य सर्विस से नहीं की जा सकती; दोषी व्यक्ति पुलिस में सेवा करने के योग्य नहीं: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक पुलिस अधिकारी की सेवा की प्रकृति की तुलना किसी अन्य सेवा की प्रकृति के साथ नहीं की जा सकती है और एक व्यक्ति जिसे आपराधिक आरोप में दोषी ठहराया गया है, वह निश्चित रूप से पुलिस अधिकारी के रूप में सेवा करने के लिए उपयुक्त नहीं है।जस्टिस संजय धर ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत याचिकाकर्ता को जिला रामबन के विशेष पुलिस अधिकारियों...

35 साल बीत गए: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से इनकार किया, कहा- संकट खत्म होने के बाद कोई दावा नहीं
35 साल बीत गए: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से इनकार किया, कहा- संकट खत्म होने के बाद कोई दावा नहीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में किसी व्यक्ति को 35 वर्ष बीत जाने के बाद अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति नहीं देने के अपने फैसले को बरकरार रखा, भले ही उसे देरी के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना है।चीफ जस्टिस रवि मलीमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य शोक संतप्त परिवार को वित्तीय संकट से बचाने में सहायता करना है। हालांकि, अपीलकर्ता के मामले में वह चरण पहले ही बीत चुका है।खंडपीठ ने कहा,हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता को देरी की लंबी अवधि के लिए दोषी...

दिल्ली हाईकोर्ट
[मैनुअल स्कैवेंजिंग] 'सीवर में मरने वाले दो लोगों के परिजनों को 10 लाख रुपए का भुगतान करें': हाईकोर्ट ने दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी को निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने गुरुवार को दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) को शहर के मुंडका इलाके में एक सीवर के अंदर जहरीली गैसों के अंदर जाने से मरने वाले दो लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने प्राधिकरण को सफाई कर्मचारी आंदोलन और अन्य बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2014 के फैसले के संदर्भ में आश्रितों के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर भी विचार करने के लिए कहा है।डीडीए को नियुक्ति...

दिल्ली हाईकोर्ट
केवल सगाई किसी व्यक्ति को मंगेतर का यौन उत्पीड़न करने की अनुमति नहीं देती, दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत से इनकार करते हुए कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगेतर से शादी के बहाने कई बार बलात्कार करने के आरोपी युवक को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि सगाई होने का मतलब यह नहीं कि आरोपी मंगेतर का यौन उत्पीड़न, मारपीट या धमकी दे सकता है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आरोपी की ओर से दिए गए तर्क को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की कि चूंकि दोनों पक्षों की सगाई हुई थी, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि शादी का झूठा वादा किया गया था।अदालत ने 22 सितंबर को एक आदेश में कहा, "हालांकि, इस अदालत की राय है कि इस तर्क में कोई बल नहीं है, क्योंकि केवल...

UAPA की धारा 43-डी (2)(बी) के तहत हिरासत बढ़ाने से इनकार करने का आदेश एक अंतिम आदेश है और यह NIA Act की धारा 21 के तहत अपील योग्य है: गुवाहाटी हाईकोर्ट
UAPA की धारा 43-डी (2)(बी) के तहत हिरासत बढ़ाने से इनकार करने का आदेश एक 'अंतिम आदेश' है और यह NIA Act की धारा 21 के तहत अपील योग्य है: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गौहाटी हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश में माना है कि यूएपीए-1967 की धारा 43डी के तहत किसी आरोपी की हिरासत की अवधि 90 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करने से इनकार करने वाला आदेश प्रकृति में अंतिम आदेश होगा, इस प्रकार यह एनआईए अधिनियम, 2008 की धारा 21 के तहत अपील योग्य है।संदर्भ के लिए, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम, 2008 की धारा 21 अपीलों से संबंधित है, और इसकी धारा 21 (1) में कहा गया है कि तथ्यों और कानून दोनों के आधार पर हाईकोर्ट में अपील एक स्पेशल कोर्ट के किसी भी निर्णय, सजा या...

पीठासीन जज को सीआरपीसी धारा 432(2) के तहत सजा से माफी पर अपनी राय में पर्याप्त कारण बताना आवश्यक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
पीठासीन जज को सीआरपीसी धारा 432(2) के तहत सजा से माफी पर अपनी राय में पर्याप्त कारण बताना आवश्यक: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि सजा देने वाली अदालत के पीठासीन अधिकारी को माफी के आवेदन पर राय देते समय पर्याप्त कारण बताना चाहिए। जस्टिस संजय के अग्रवाल की पीठ ने कहा कि सजा देने वाली अदालत के पीठासीन अधिकारी की राय में अपर्याप्त कारण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 (2) की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करेंगे।अदालत ने कहा कि धारा 432 (2) सीआरपीसी का उद्देश्य कार्यकारी को सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए एक सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।उल्लेखनीय है कि सीआरपीसी की धारा 432...

एएंडसी एक्ट की धारा 11 के तहत पारित निर्णय/आदेश पर पुनर्विचार की अनुमति नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
एएंडसी एक्ट की धारा 11 के तहत पारित निर्णय/आदेश पर पुनर्विचार की अनुमति नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि ए एंड सी एक्ट की धारा 11 के तहत पारित आदेश/निर्णय पर पुनर्विचार की अनुमति नहीं है। जस्टिस आर रघुनंदन राव की खंडपीठ ने कहा कि पुनर्विचार की शक्ति कानून का विषय है, और किसी कानून में इस प्रकार के प्रावधान के अभाव में किसी आदेश/निर्णय पर पुनर्विचार उसके गुणदोष के आधार पर नहीं की जा सकता है, जब तक कि यह कुछ प्रक्रियात्मक अनियमितता के लिए न हो।कोर्ट ने माना कि ए एंड सी एक्ट स्पष्ट रूप से या निहितार्थ में, धारा 11 के तहत पारित किसी आदेश पर पुनर्विचार की...

भारतीय बैंकिंग संस्थाएं अपनी विदेशी ब्रांच की चिंताओं के लिए बकाया राशि की वसूली के लिए लुक आउट सर्कुलर का अनुरोध नहीं कर सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
भारतीय बैंकिंग संस्थाएं अपनी विदेशी ब्रांच की चिंताओं के लिए बकाया राशि की वसूली के लिए "लुक आउट सर्कुलर" का अनुरोध नहीं कर सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लुक आउट सर्कुलर जारी करने पर हाल ही में कहा कि भारतीय बैंकों द्वारा अपनी विदेशी सहयोगी कंपनियों के बकाया की वसूली के लिए लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) का अनुरोध नहीं किया जा सकता।जस्टिस रामचंद्र राव और जस्टिस हरकेश मनुजा की खंडपीठ ने इस तर्क को खारिज करते हुए कि ये गतिविधियां भारत के आर्थिक हितों को प्रभावित करती हैं, कहा कि मौजूदा मामले में भारत के आर्थिक हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है।खंडपीठ ने कहा,"ऐसी बात कैसे हो सकती है अगर विदेशी निगमित कंपनी मेसर्स...

केवल केस हारने पर वादी अपने वकील पर धोखाधड़ी के लिए मुकदमा नहीं कर सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
केवल केस हारने पर वादी अपने वकील पर धोखाधड़ी के लिए मुकदमा नहीं कर सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ उसके मुवक्किल द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406 और धारा 420 के तहत दायर शिकायत यह कहकर खारिज कर दी कि वकील के खिलाफ सिर्फ इसलिए मामला नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि उसने केस में सुप्रीम कोर्ट से अनुकूल आदेश प्राप्त नहीं किया।जस्टिस सूरज गोविंदराज की सिंगल जज बेंच ने के एस महादेवन की याचिका को मंजूर करते हुए कहा,"वकील केवल पेश हो सकता है और मामले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर सकता है। कोई भी वकील न तो यह कह सकता है या न ही यह कह सकता है कि उसे अनुकूल...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच का गठन किया, सीनियर सिटीजन को राहत दी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत (Transit Anticipatory Bail) की मांग वाली सीनियर सिटीजन कपल की याचिका पर सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच पीठ का गठन किया।आवेदक अपने विरुद्ध जिला ललितपुर (यू.पी.) में दर्ज एक शिकायत मामले के संबंध में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अपनी गिरफ्तारी की आशंका जता रहा थे।यह देखते हुए कि आवेदक वरिष्ठ नागरिक और सम्मानित डॉक्टर हैं, जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने उनके मामले को ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त पाया, जिससे उन्हें अग्रिम जमानत देने के लिए...