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ईद-ए-मिलाद जुलूस
ईद-ए-मिलाद जुलूस को मंजूरी देने में राज्य पुलिस की कथित निष्क्रियता को चुनौती देते हुए मिलाद कमेटी के अध्यक्ष ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया

अहमदाबाद की ईद मिलादुन्नबी (केंद्रीय) कमेटी के अध्यक्ष ने 9/10 अक्टूबर को प्रस्तावित ईद-ए-मिलाद जुलूस को मंजूरी देने में राज्य पुलिस की कथित निष्क्रियता को चुनौती देते हुए गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) का रुख किया है।अपनी याचिका में, याचिकाकर्ता [ईद मिलादुन्नबी (केंद्रीय) समिति के अध्यक्ष परवेज] ने कहा है कि जुलूस निकालने के लिए समिति का प्रतिनिधित्व स्थानीय पुलिस अधिकारियों के समक्ष लंबित है, और जूलूस को मंजूरी देने में उनकी निष्क्रियता भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 28 का उल्लंघन...

बीसीआई ने एक बार, एक वोट नीति को लागू करने की मांग पर राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जयपुर) के चुनाव पर रोक लगाई
बीसीआई ने "एक बार, एक वोट" नीति को लागू करने की मांग पर राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जयपुर) के चुनाव पर रोक लगाई

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने राजस्थान राज्य में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आगामी चुनावों में "एक बार, एक वोट" के सिद्धांत को लागू करने की मांग पर हुए सचिव, बार काउंसिल ऑफ राजस्थान, सचिव, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है। बार काउंसिल ने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जयपुर बेंच के हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आगामी चुनावों और किसी भी अन्य बार एसोसिएशन के चुनावों पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया।बार काउंसिल ने देखा कि, "चुनाव के दौरान अनियंत्रित, अभद्र...

कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को औद्योगिक प्रोत्साहन प्रदान करने वाली योजना को जीएसटी के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को औद्योगिक प्रोत्साहन प्रदान करने वाली योजना को जीएसटी के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया है।जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य की एकल पीठ ने कहा कि मामले में वैध अपेक्षा का मुद्दा शामिल है और इसलिए, न्यायालय ने उद्योग, वाणिज्य और उद्यम विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार और वित्त विभाग को उद्योगों के लिए जीएसटी के अनुरूप प्रोत्साहन प्रदान करने वाली योजना बनाने का निर्देश दिया।2010 तक संशोधित 'पश्चिम बंगाल राज्य उद्योग सहायता योजना, 2008' कुछ औद्योगिक इकाइयों को औद्योगिक प्रोत्साहन...

दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली सरकार को मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 के तहत राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का गठन करना है, मौजूदा पैनल जारी नहीं रखा जा सकता: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस रुख को खारिज करते हुए कि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 के तहत गठित राज्य मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्राधिकरण मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 के तहत काम करना जारी रख सकता है, कहा कि नए अधिनियम की धारा 45 संबंधित आवश्यक है। राज्य सरकारें नौ महीने की अवधि के भीतर नए निकाय - राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण [SMHA] का गठन करेंगी।जस्टिस यशवंत वर्मा ने 23 सितंबर के आदेश में कहा कि अधिनियम, 2017 के अनुसार दिल्ली सरकार द्वारा एसएमएचए का गठन किया जाना बाकी है। अदालत से यह...

यदि गुमशुदा व्यक्ति रिपोर्ट में अवैध कस्टडी का आरोप नहीं है तो हैबियस कार्पस याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
यदि गुमशुदा व्यक्ति रिपोर्ट में अवैध कस्टडी का आरोप नहीं है तो हैबियस कार्पस याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने हाल ही में ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Plea) का निपटारा करते हुए कहा कि उन मामलों में जहां 'अवैध कस्टडी' के आरोप के अभाव में 'गुमशुदा व्यक्ति की रिपोर्ट' पहले ही दायर की जा चुकी है तो संबंधित मजिस्ट्रेट से संपर्क करना उचित विकल्प होगा।याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपनी बड़ी बेटी को अदालत में पेश करने की मांग की थी।याचिका की सामग्री से पता चलता है कि याचिकाकर्ता द्वारा...

आयुर्वेदिक डॉक्टर
एलोपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित करना भेदभावपूर्ण, असंवैधानिक: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने राजस्थान सरकार की एक अधिसूचना को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि एलोपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित करना भेदभावपूर्ण, असंवैधानिक है।अधिसूचना ने केवल चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के डॉक्टरों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी और आयुर्वेदिक, चिकित्सा विभाग, यूनानी, होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा डॉक्टरों को इसके अधिदेश से बाहर कर दिया था।अधिसूचना और उसके लाभों से वंचित होने से...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
एक राज्य का हाईकोर्ट दूसरे हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में दर्ज मामले में ट्रांजिट जमानत दे सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि एक राज्य का हाईकोर्ट दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 के तहत शक्ति के प्रयोग में दूसरे हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में दर्ज मामले के संबंध में ट्रांजिट जमानत दे सकता है।कोर्ट ने कहा,"हाईकोर्ट की ओर से ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने में कोई बंधन नहीं है ताकि आवेदक उच्च न्यायालयों सहित न्यायालयों का दरवाजा खटखटा सकें जहां अपराध का आरोप लगाया गया है और मामला दर्ज किया गया है।"इसके साथ ही जस्टिस राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने महाराष्ट्र में दर्ज एक मामले...

नियोक्ता काम नहीं तो वेतन के सिद्धांत पर किसी कर्मचारी के बरी होने के खिलाफ आपराधिक अपील की लंबितता का हवाला देते हुए वेतन से इनकार नहीं कर सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
नियोक्ता 'काम नहीं तो वेतन' के सिद्धांत पर किसी कर्मचारी के बरी होने के खिलाफ आपराधिक अपील की लंबितता का हवाला देते हुए वेतन से इनकार नहीं कर सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने हाल ही में कहा कि नियोक्ता 'काम नहीं तो वेतन' के सिद्धांत पर किसी कर्मचारी के बरी होने के खिलाफ आपराधिक अपील की लंबितता का हवाला देते हुए वेतन से इनकार नहीं कर सकता।जस्टिस मंगेश एस. पाटिल और जस्टिस संदीप वी. मार्ने की खंडपीठ ने निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के बावजूद महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के वेतन का भुगतान नहीं करने के फैसले को चुनौती देने वाली रिट याचिका में याचिकाकर्ता को वापस वेतन और सेवा की निरंतरता प्रदान की।अदालत ने कहा,"सिर्फ...

नियमित जमानत की मांग करने वाले व्यक्ति को अदालत की कस्टडी में होना चाहिए, जिसे फिजिकल कस्टडी में रखने की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
नियमित जमानत की मांग करने वाले व्यक्ति को अदालत की कस्टडी में होना चाहिए, जिसे फिजिकल कस्टडी में रखने की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जमानत अर्जी दाखिल करते समय आरोपी का फिजिकल कस्टडी में होना अनिवार्य नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर आरोपी फिजिकल कस्टडी से बाहर है, लेकिन उसकी स्वतंत्रता अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों के अधीन है यानी आरोपी क्रिएटिव कस्टडी में है तो वह नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकता है।जस्टिस सौरभ विद्यार्थी की पीठ ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 और 120 बी के तहत आरोपों का सामना कर रहे जितेंद्र को नियमित जमानत देते हुए इस प्रकार कहा। कोर्ट ने कहा कि उसका नाम...

दिल्ली हाईकोर्ट
[सीपीसी] लिखित प्रश्नों का उद्देश्य विवादों को संकीर्ण करना है, वादी द्वारा सबूतों के बोझ को प्रतिस्थापित करने के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि वादी द्वारा प्रासंगिक साक्ष्य जोड़कर चीजों को साबित करने के अपने बोझ को प्रतिस्थापित करने के लिए यह कहते हुए लिखित प्रश्नों का उपयोग नहीं किया जा सकता है कि इसका उद्देश्य विवाद को संकीर्ण करना और विवादित तथ्यों के बारे में मुद्दों को तैयार करने की सुविधा प्रदान करना है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने आगे कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 का आदेश 11 नियम 1 वाद की सुनवाई में तेज़ी लाने के लिए है, जिससे न्यायिक समय और मुकदमेबाजी की लागत में बचत होती है।अदालत ने कहा,...

केरल हाईकोर्ट
कोर्ट के कर्मचारियों द्वारा केरल क्रिमिनल रूल्स ऑफ प्रैक्टिस का पालन न करना शिकायतकर्ता या किसी भी पक्ष को सूट न करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं: हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने इस सवाल पर विचार किया कि क्या अदालत के कर्मचारियों द्वारा केरल क्रिमिनल रूल्स ऑफ प्रैक्टिस का पालन न करना शिकायतकर्ता या किसी भी पक्ष को सूट न करने के लिए पर्याप्त आधार होगा, और इसका उत्तर नकारात्मक में दिया।जस्टिस ए. बधारुद्दीन ने कहा,"यह स्थापित कानून है कि अदालत द्वारा की गई गलती अदालत के समक्ष पीड़ित पक्ष को मुकदमा न करने के रास्ते में नहीं खड़ी होगी। कहावत 'एक्टस क्यूरी नेमिनेम ग्रेवाबिट' उक्त सिद्धांत का प्रतीक है। ऐसी स्थिति में, न्यायालय गलत को...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
सरफेसी एक्ट लागू करने के बाद भी यदि अकाउंट में धोखाधड़ी की गई तो बैंक आपराधिक कार्रवाई शुरू कर सकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) किसी कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ बैंक द्वारा दर्ज शिकायत की जांच कर सकता है, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है, यहां तक ​​​​कि सरफेसी अधिनियम (SARFAESI Act) के तहत वसूली प्रमाण पत्र कार्यवाही शुरू करने के बाद भी कर सकता है।अदालत ने कहा,"इस न्यायालय ने फिर से कई मामलों में स्पष्ट रूप से माना कि जब बैंक द्वारा ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र का उपयोग किया जाता है, जब तक कि ऐसी कार्रवाई को धोखाधड़ी घोषित नहीं किया जाता है,...

[सीनियर सिटीजन एक्ट] वकील मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के समक्ष पक्षकारों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, धारा 17 का कोई प्रतिबंध नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
[सीनियर सिटीजन एक्ट] वकील मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के समक्ष पक्षकारों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, धारा 17 का कोई प्रतिबंध नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता और सीनियर सिटीजन का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 17 पक्षकारों को भरण-पोषण न्यायाधिकरण (Maintenance Tribunal) के समक्ष कानूनी विशेषज्ञ का प्रतिनिधित्व करने से नहीं रोकेगी।अधिनियम, 2007 की धारा 17 में विशेष रूप से कहा गया कि किसी न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष कार्यवाही में किसी भी पक्ष का प्रतिनिधित्व किसी कानूनी व्यवसायी द्वारा नहीं किया जाएगा, चाहे किसी भी कानून में कुछ भी शामिल हो। हाईकोर्ट के समक्ष 2019 में दायर याचिकाओं के बैच ने...

लोन एप्स
मुंबई कोर्ट ने धोखाधड़ी वाले लोन ऐप्स का अंतर्राष्ट्रीय रैकेट चलाने के चीनी मूल के आरोपी व्यक्ति को डिफ़ॉल्ट जमानत दी

मुंबई की एक अदालत ने पिछले हफ्ते चीनी मूल के एक व्यक्ति को डिफ़ॉल्ट जमानत दे दी, जिस पर अंतरराष्ट्रीय लोन धोखाधड़ी रैकेट का हिस्सा होने का आरोप लगाया गया है।मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, कुर्ला, मुंबई जेएम अंबोडकर ने लियांग ची शेंग को जमानत दी, जिस पर आईटी अधिनियम की धारा 419, 420, 354 (ए), 509, 384, 120 (बी), आर/डब्ल्यू 56, 66 के तहत मामला दर्ज किया गया है।यह आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने सैकड़ों लोगों को फिनटेक कंपनियों और अन्य कॉल सेंटरों में नौकरी का लालच देकर उन्हें लोन धोखाधड़ी रैकेट के लिए...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
दोष सिद्ध होने पर कंपनी को जुर्माने की सजा दी जा सकती है, भले ही अपराध में कारावास की भी सजा हो: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि जहां एक कंपनी पर अपराध का आरोप है और उस पर दिन-प्रतिदिन के कारोबार के संचालन के लिए जिम्मेदार निदेशकों/व्यक्तियों को दोषी ठहराए बिना भी मुकदमा चलाया जा सकता है, उक्त कंपनी को जुर्माने की सजा दी जा सकती है, भले ही जिस अपराध के लिए कंपनी को दोषी ठहराया गया है, उसके लिए कारावास की सजा दी जा सकती है।ज‌स्टिस संजय धर की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसके संदर्भ में याचिकाकर्ता फार्मा कंपनी ने प्रतिवादी ड्रग्स...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
आरोपी की हिरासत में पूछताछ केवल इसलिए अनिवार्य नहीं है क्योंकि उस पर हत्या का मुकदमा दर्ज है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत दी

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने आरोपी व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दर्ज मुकदमे में उसे अग्रिम जमानत देते हुए कहा,"आरोपी की हिरासत में पूछताछ केवल इसलिए अनिवार्य नहीं है क्योंकि उस पर हत्या का मामला दर्ज है।"जस्टिस भारती डांगरे की पीठ ने कहा कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की वैध आशंका अग्रिम जमानत लेने के लिए पर्याप्त है, यह कहते हुए कि अपराध कथित रूप से तीन साल पहले हुआ था जिसमें उसकी कथित रूप से सीमित भूमिका थी।कोर्ट ने कहा,"केवल इसलिए कि इसमें शामिल अपराध आईपीसी की...

मद्रास हाईकोर्ट ने मेडिको-कानूनी दस्तावेजों के डिजिटलीकरण के लिए याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
मद्रास हाईकोर्ट ने मेडिको-कानूनी दस्तावेजों के डिजिटलीकरण के लिए याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, दुर्घटना/चोट रिपोर्ट आदि सहित कानूनी महत्व वाले मेडिकल रिकॉर्ड के कम्प्यूटरीकरण की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा।एक्टिंग चीफ जस्टिस टी राजा और जस्टिस डी कृष्णकुमार की पीठ के समक्ष यह मामला आया।याचिकाकर्ता डॉ मोहम्मद खादर मीरन ने प्रस्तुत किया कि मेडिको लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्टमॉर्टम रिपोर्टिंग (मेडलीपीआर) नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर है, जो विभिन्न मेडिको-लीगल रिपोर्ट और सर्टिफिकेट...

धारा 311 सीआरपीसी | ट्रायल कोर्ट उस क्रम को विनियमित कर सकता है, जिसमें गवाहों की जांच की जानी है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
धारा 311 सीआरपीसी | ट्रायल कोर्ट उस क्रम को विनियमित कर सकता है, जिसमें गवाहों की जांच की जानी है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने हाल ही में कहा कि जब सीआरपीसी की धारा 311 के तहत अपनी शक्ति के अनुसार निचली अदालत किसी गवाह को तलब कर सकती है, तो वह उस क्रम को भी नियंत्रित कर सकती है, जिसमें उनकी जांच की जानी है।जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने प्रमुख गवाहों के "समझौता की संस्कृति" के शिकार होने की प्रवृत्ति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा -"गवाहों को समझौता की संस्कृति से बचाने के लिए ट्रायल कोर्ट को इस अवसर का उपयोग करना चाहिए। बिना किसी उचित कारण के चश्मदीदों को रोकना, उन्हें समझौते की संस्कृति...

श्रीजातो बंद्योपाध्याय
कथित 'कंडोम-त्रिशूल' टिप्पणी के लिए कवि के खिलाफ केस: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बिधाननगर डीसीपी से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बिधाननगर के डिप्टी कमिश्नर से कवि श्रीजातो बंद्योपाध्याय के खिलाफ उनके फेसबुक अकाउंट पर 2017 में पोस्ट की गई उनकी कथित 'कंडोम-त्रिशूल' कविता के लिए दर्ज मामले की जांच के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।जस्टिस राजशेखर मंथा की पीठ ने बिधाननगर के डीसीपी को 17 नवंबर को जांच रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।यह आदेश एक बिप्लब कुमार चौधरी द्वारा दायर याचिका पर दिया गया है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस मामले की ठीक से जांच नहीं कर रही है और बल्कि, वे जांच में देरी कर रहे हैं। अभी...

नियमित जमानत पर रिहा आरोपी को अतिरिक्त धाराओं में अग्रिम जमानत दी जा सकती है, यदि वह आजादी का दुरुपयोग नहीं कर रहा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
नियमित जमानत पर रिहा आरोपी को अतिरिक्त धाराओं में अग्रिम जमानत दी जा सकती है, यदि वह आजादी का दुरुपयोग नहीं कर रहा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक व्यक्ति जिसे पहले ही सीआरपीसी की धारा 439 के तहत नियमित जमानत दी जा चुकी है और यदि यह पाया जाता है कि उसने स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया है तो उसे एक ही अपराध से संबंधित अतिरिक्त धाराओं के संबंध में सीआरपीसी की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत दी जा सकती है।इसके साथ ही जस्टिस कृष्ण पहल की खंडपीठ ने आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत अपराध के सिलसिले में शहजाद नामक एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत दे दी।उसे फरवरी 2022 में सत्र न्यायाधीश, सहारनपुर ने धारा 379, 427...