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कर्नाटक हाईकोर्ट ने लिखित बयान में शिकायतकर्ता के खिलाफ मानहानि के आरोप लगाने के आरोपी वकील के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लिखित बयान में शिकायतकर्ता के खिलाफ मानहानि के आरोप लगाने के आरोपी वकील के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने उस वकील के खिलाफ मानहानि की शिकायत खारिज करने से इनकार कर दिया, जिस पर अपने मुवक्किलों की ओर से उपलोकायुक्त के समक्ष "शिकायतकर्ता के खिलाफ आपत्तिजनक बयान" के साथ लिखित बयान दर्ज करने का आरोप है। वह शिकायतकर्ता का भी वकील है।जस्टिस के नटराजन ने अभियुक्त वकील संतोष कुमार एम के इस तर्क को खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता को बदनाम करने का कोई आपराधिक इरादा नहीं है या उसने केवल अपने मुवक्किल की रक्षा करने के लिए नेक नीयत से काम किया है।पीठ ने कहा,"आरोपी द्वारा दिए गए कथन या अभियुक्त...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत भरण-पोषण के लिए दायर आवेदनों का समयबद्ध निपटान सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए

कर्नाटक हाईकोर्ट ने निचली अदालतों को निर्देश जारी किया है कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अपने-अपने पतियों से भरण-पोषण की मांग करने वाली महिलाओं द्वारा दायर आवेदनों पर निर्णय लेने के लिए एक समय-सीमा का पालन किया जाए। जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश की पीठ ने निर्देश जारी करने की आवश्यकता महसूस करते हुए कहा कि ‘‘धारा 24 के प्रावधान निर्देश देते हैं कि भरण-पोषण की मांग करने वाले धारा 24 के तहत दायर एक आवेदन को 60 दिनों के भीतर यथासंभव निपटाया जाना चाहिए। शब्द ‘‘जहां तक संभव हो’’...

लोक सेवक द्वारा जारी की गई सामान्य अधिसूचना आईपीसी की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध के लिए अभियुक्तों की ओर से ज्ञान की शर्त को पूरा नहीं करेगी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
लोक सेवक द्वारा जारी की गई सामान्य अधिसूचना आईपीसी की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध के लिए अभियुक्तों की ओर से 'ज्ञान' की शर्त को पूरा नहीं करेगी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि लोक सेवक द्वारा जारी की गई सामान्य अधिसूचना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध के लिए अभियुक्तों की ओर से 'ज्ञान' की शर्त को पूरा नहीं करेगी।जस्टिस राजेंद्र कुमार वर्मा की पीठ ने कहा,जैसा कि पहले देखा गया कि आईपीसी की धारा 188 के तहत गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को लोक सेवक के आदेश का वास्तविक ज्ञान होना चाहिए, जिसमें उसे कुछ कार्य करने या न करने की आवश्यकता होती है। ऐसा ज्ञान प्राप्त करना या प्राप्त करना पूर्व-आवश्यकता है। लोक सेवक...

फ्लैट ओनर्स अपार्टमेंट के कब्जे के बाद भी बिल्डर की ओर से वादा की गई सुविधाओं का दावा करने का अधिकार नहीं खोते: सुप्रीम कोर्ट
फ्लैट ओनर्स अपार्टमेंट के कब्जे के बाद भी बिल्डर की ओर से वादा की गई सुविधाओं का दावा करने का अधिकार नहीं खोते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ्लैट ओनर्स, जिन्हें अक्सर परिस्थितियों के कारण अपार्टमेंट का कब्जा लेना पड़ता है, भले ही उन्हें बिल्डर ने वादा की गई सुविधाएं प्रदान ना की हों, वे बिल्डर से ऐसी सेवाओं का दावा करने के अपने अधिकार को नहीं खोते।जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने पीड़ित फ्लैट मालिकों की ओर से पेश मुआवजे के दावे को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा इस आधार पर खारिज करने के लिए कि उन्होंने कब्जा ले लिया है, की आलोचना की।पीठ ने अपने फैसले (देबाशीष सिन्हा बनाम...

कट-ऑफ तारीख के बाद पैदा हुए बच्चे के नहीं रहने पर उम्मीदवार को महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा: बॉम्बे हाईकोर्ट
कट-ऑफ तारीख के बाद पैदा हुए बच्चे के नहीं रहने पर उम्मीदवार को महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कट-ऑफ तारीख के बाद पैदा हुआ बच्चा, जिसका नामांकन से पहले निधन हो गया, उसे माता-पिता को महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 के तहत पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा।जस्टिस अरुण आर. पेडनेकर की औरंगाबाद खंडपीठ ने महिला को इस आधार पर अयोग्य ठहराने वाले अधिकारियों का आदेश खारिज कर दिया कि कट-ऑफ तारीख के बाद उसके दो से अधिक बच्चे थे।अदालत ने कहा,"इस प्रकार बच्चा कट-ऑफ तारीख के बाद पैदा हुआ और नामांकन से पहले निधन हो गया, उसे अयोग्यता के उद्देश्य...

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राज्य को नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बरकरार रखना चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट ने आरएसएस के रूट मार्च पर शर्तें लगाने वाले एकल न्यायाधीश का आदेश रद्द किया

मद्रास हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा किए जाने वाले रूट मार्च पर कुछ शर्तें लगाने के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं के बैच को अनुमति दे दी।जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस मोहम्मद शफीक की पीठ ने कहा कि राज्य को नागरिकों के भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को बनाए रखना चाहिए। इस प्रकार अदालत ने आरएसएस को तीन अलग-अलग तारीखों पर रूट मार्च करने के लिए नए सिरे से आवेदन दायर करने का निर्देश दिया और तमिलनाडु पुलिस को निर्देश दिया कि आरएसएस को राज्य भर के...

[जेकेपीएससी भर्ती] प्रासंगिक विषय में योग्यता संबंधित विषय में योग्यता की तुलना में पात्रता का व्यापक दायरा है: हाईकोर्ट
[जेकेपीएससी भर्ती] 'प्रासंगिक विषय' में योग्यता 'संबंधित विषय' में योग्यता की तुलना में पात्रता का व्यापक दायरा है: हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि भर्ती के मामलों में 'संबंधित विषय में योग्यता' वाक्यांश की तुलना में 'संबंधित विषय में योग्यता' वाक्यांश का व्यापक प्रभाव है।ऐसा पाते हुए कोर्ट ने 'एप्लायड जियोलॉजी' में मास्टर डिग्री धारक को 'जियोलॉजी' सहायक प्रोफेसर के रिक्त पद के लिए आवेदन करने की अनुमति दी। यह कहते हुए कि इस मामले में जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग द्वारा जारी भर्ती अधिसूचना में केवल डिग्री रखने वाले उम्मीदवार को निर्धारित किया गया है।जस्टिस संजीव कुमार और मोक्ष खजुरिया...

Gauhati High Court
[अतिरिक्त सर्विस] रिटायरमेंट की तिथि के संबंध में भ्रामक जानकारी के बिना कर्मचारी से कोई वसूली नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बुधवार को असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (एपीडीसी) को मृतक पूर्व लाइनमैन के कानूनी उत्तराधिकारियों को अतिरिक्त वेतन और भत्तों की प्रतिपूर्ति करने का निर्देश दिया। उक्त वेतन और भत्ता कर्मचारी के रिटायरमेंट की तारीख के निरीक्षण के कारण भुगतान किया गया।जस्टिस देवाशीष बरुआ की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,"यह स्वीकार किया गया कि यह निरीक्षण के कारण था कि रिटायरमेंटकी तिथि 31.12.2015 के रूप में सेवा निवर्तन रजिस्टर में दर्ज की गई, जिसके लिए याचिकाकर्ताओं के...

दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालतों को सांसदों, विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर तय करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालतों को सांसदों, विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर तय करने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी की निचली अदालतों को पूर्व और मौजूदा सांसदों (सांसदों और विधायकों) के खिलाफ लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर तय करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की त्वरित सुनवाई के संबंध में वर्ष 2020 में शुरू किए गए स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है।लंबित मामलों के साथ-साथ मामले में दायर की गई स्टेटस रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए पीठ ने विशेष अदालतों और एसीएमएम...

अविवाहित बेटी के आभूषण और मां के आभूषण घर में रखे जा सकते हैं: आईटीएटी ने जोड़ को हटाया
अविवाहित बेटी के आभूषण और मां के आभूषण घर में रखे जा सकते हैं: आईटीएटी ने जोड़ को हटाया

इलाहाबाद आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) ने जोड़ को हटा दिया है क्योंकि अविवाहित बेटियों से संबंधित आभूषणों को निर्धारिती के आभूषणों के साथ फैमिली होम में रखा जाएगा, जहां वे एक साथ रह रहे हैं।विजय पाल राव (न्यायिक सदस्य) और रामित कोचर (लेखाकार सदस्य) की दो सदस्यीय पीठ ने पाया कि निर्धारिती ने तलाशी के दरमियान मिले गहनों की व्याख्या करके और एक बयान में यह समझाते हुए कि 504 ग्राम उसकी मां का है, अपने प्राथमिक बोझ का निर्वहन किया है, जिसे बाद में निर्धारिती द्वारा उसकी मां द्वारा निष्पादित एक...

पीएम डिग्री विवाद-‘किसी की बचकानी जिज्ञासा आरटीआई अधिनियम के तहत सार्वजनिक हित नहीं’,गुजरात यूनिवर्सिटी ने गुजरात हाईकोर्ट में तर्क दिया
पीएम डिग्री विवाद-‘किसी की बचकानी जिज्ञासा आरटीआई अधिनियम के तहत सार्वजनिक हित नहीं’,गुजरात यूनिवर्सिटी ने गुजरात हाईकोर्ट में तर्क दिया

वर्ष 2016 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘‘श्री नरेंद्र दामोदर मोदी के नाम पर डिग्री के बारे में जानकारी’’ प्रदान करने के लिए गुजरात यूनिवर्सिटी को निर्देश देने वाले केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को चुनौती देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को गुजरात हाईकोर्ट के समक्ष दलील दी कि आरटीआई अधिनियम का ‘‘स्कोर तय करने और विरोधियों पर बचकाना प्रहार करने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है।’’ गुजरात यूनिवर्सिटी की तरफ से एसजी तुषार मेहता ने तर्क दिया कि यूनिवर्सिटी ने पहले ही...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने वाले वकील के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना कार्यवाही शुरू की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने वाले वकील के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना कार्यवाही शुरू की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपने अनुकूल ज़मानत आदेश प्राप्त करने के लिए अदालत को गुमराह करने वाले एक वकील के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की। जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने एडवोकेट परमानंद गुप्ता के खिलाफ यह आदेश यह देखने के बाद पारित किया कि वकील ने अदालत से यह तथ्य छुपाते हुए ज़मानत का अनुकूल आदेश प्राप्त किया कि उनके मुवक्किल की अदालत की एक अन्य पीठ द्वारा पहले एक और जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।न्यायालय ने यह भी कहा कि यह एक अकेला मामला है, जहां...

सुप्रीम कोर्ट के वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता एहतेशाम हाशमी का निधन
सुप्रीम कोर्ट के वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता एहतेशाम हाशमी का निधन

सुप्रीम कोर्ट के वकील और मानवाधिकार रक्षक एहतेशाम हाशमी का गुरुवार को सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। हाशमी को कई मानवाधिकार मुद्दों को उठाने के लिए जाना जाता था। उन्होंने 2021 में एक टीम का नेतृत्व किया जिसने त्रिपुरा में सांप्रदायिक हिंसा के बारे में एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट प्रकाशित की जिसने राज्य को हिलाकर रख दिया था। रिपोर्ट प्रकाशित होने पर त्रिपुरा पुलिस ने हाशमी पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया । बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी सहित कोई भी कठोर कदम...

मुख्य परीक्षा में गवाह का साक्ष्य केवल इसलिए अस्वीकार्य नहीं हो जाता क्योंकि उससे जिरह नहीं की जा सकती थी: पटना हाईकोर्ट
मुख्य परीक्षा में गवाह का साक्ष्य केवल इसलिए अस्वीकार्य नहीं हो जाता क्योंकि उससे जिरह नहीं की जा सकती थी: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने दोहराया है कि एक गवाह द्वारा अपनी मुख्य परीक्षा में दिए गए साक्ष्य को केवल इसलिए पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है कि विरोधी पक्ष द्वारा उसकी जिरह नहीं की जा सकती थी।जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की एकल न्यायाधीश पीठ ने रेखांकित किया कि इस तरह के साक्ष्य को स्वीकार्य बनाया जा सकता है लेकिन इस तरह की गवाही से जुड़ा वजन तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।याचिकाकर्ता/वादी ने बिक्री-विलेख को धोखाधड़ी, अवैध, निष्क्रिय और बिना प्रतिफल के घोषित करने के लिए एक मुकदमा दायर किया।...

ड्राइविंग लाइसेंस, अन्य दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी स्वीकार करने पर एसओपी का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें : हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा
ड्राइविंग लाइसेंस, अन्य दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी स्वीकार करने पर एसओपी का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें : हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और अधिनियम में किए गए बाद के संशोधनों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करे।मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्रों के सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक रूप में अन्य परिवहन संबंधी दस्तावेज के संबंध में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 17 दिसंबर, 2018 को जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का सख्ती से अनुपालन करने का भी आह्वान किया।यह देखते...

दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल के कैदियों के लिए ई-मुलाकात, अन्य सुविधाओं की मांग करने वाली नताशा नरवाल, देवांगना कलिता की याचिका का निपटान किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल के कैदियों के लिए ई-मुलाकात, अन्य सुविधाओं की मांग करने वाली नताशा नरवाल, देवांगना कलिता की याचिका का निपटान किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को नताशा नरवाल और 2020 के उत्तर-पूर्व दंगों से संबंधित बड़े षड्यंत्र मामले में आरोपी देवांगना कलिता द्वारा वीडियो कॉलिंग या ई-मुलाकात, खाने संबंधी जरूरतों, दैनिक टेलीफोनिक बातचीत, तिहाड़ जेल के सभी कैदियों को इंटरनेट की सुविधा और विभिन्न सुविधाओं की मांग करने वाली याचिका का निस्तारण किया। नरवाल और कलिता दोनों ने 2020 में COVID-19 महामारी के मद्देनजर जेल के अंदर विचाराधीन कैदियों के सामने आने वाली कई समस्याओं को उजागर करते हुए याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने उन्हें जून...

पत्नी अगर यह साबित कर दे कि उसने पति को गहने सौंपे थे तो दहेज निरोधक अधिनियम के तहत उन्हें वापस पाने का दावा किया जा सकता हैः केरल ‌हाईकोर्ट
पत्नी अगर यह साबित कर दे कि उसने पति को गहने सौंपे थे तो दहेज निरोधक अधिनियम के तहत उन्हें वापस पाने का दावा किया जा सकता हैः केरल ‌हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि पत्नी के नाम पर लॉकर में रखे गए सोने के आभूषणों को पति या पति के परिवार को सौंपे जाने के समान नहीं माना जा सकता है और इस प्रकार तलाक की कार्यवाही में इसकी वसूली शुरू नहीं की जा सकती है।जस्टिस अनिल के नरेंद्रन और जस्टिस पीजी अजित कुमार ने कहा कि पर्याप्त सबूत के अभाव में कि शादी के समय पत्नी को दिए गए सोने के गहने उसके द्वारा अपने पति या ससुराल वालों को सौंपे गए थे, दहेज रोकथाम अधिनियम के तहत उसे वापस पाना संभव नहीं होगा।अदालत परिवार अदालत के उस...

स्थगन के अनुरोध का जवाब नहीं देना, उसके बाद किसी भी समय मामले को उठाने की प्रथा जब मूल्यांकन अधिकारी उचित समझे तो समर्थन योग्य नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
स्थगन के अनुरोध का जवाब नहीं देना, उसके बाद किसी भी समय मामले को उठाने की प्रथा जब मूल्यांकन अधिकारी उचित समझे तो समर्थन योग्य नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने कहा कि स्थगन के अनुरोध का जवाब नहीं देने और उसके बाद किसी भी समय मामले को उठाने की प्रथा जब मूल्यांकन अधिकारी उचित समझे तो समर्थन योग्य नहीं है।जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस संदीप एन. भट की खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत 148ए(डी) और नोटिस जारी करने का आदेश पुनर्विचार के योग्य है। दोनों को रद्द करने की जरूरत है। मामला 25.3.2022 को दायर जवाब पर विचार करने के चरण में वापस जाता है।आयकर अधिनियम की धारा 148ए(डी) के तहत आदेश पारित...

आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल द्वारा सीपीसी के अनुसार सत्यापित ना होने पर दावा याचिका को खारिज करना, न्यायोचित नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल द्वारा सीपीसी के अनुसार सत्यापित ना होने पर दावा याचिका को खारिज करना, न्यायोचित नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

bने एक फैसले में कहा कि प्रक्रियात्मक कानूनों का पालन करने में विफलता मध्यस्थ कार्यवाही के लिए घातक नहीं होगी और इस प्रकार, मध्यस्थ न्यायाधिकरण को केवल इस आधार पर दावा याचिका/दावों के बयान को खारिज करने में न्यायोचित नहीं ठहराया जाएगा कि उन्हें जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) के आदेश VI नियम 15 के तहत विचार किया गया, वैसे सत्यापित नहीं किया गया है।चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष शास्त्री की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हाईकोर्ट की अधीक्षण की शक्ति के...