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[पशु क्रूरता निवारण अधिनियम] अभियुक्त-मालिक को जब्त मवेशियों की अंतरिम कस्टडी देने से मना करने का कोई विशेष प्रावधान नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट
[पशु क्रूरता निवारण अधिनियम] अभियुक्त-मालिक को जब्त मवेशियों की अंतरिम कस्टडी देने से मना करने का कोई विशेष प्रावधान नहीं: उड़ीसा हाईकोर्ट

उड़ीसा हाईकोर्ट (Orissa High Court) ने कहा कि पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम अधिनियम, 1960 या पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम (जानवरों की देखभाल और रखरखाव) नियम, 2017 के तहत कोई विशेष नियम नहीं है, जिसमें कहा गया हो कि आरोपी-मालिक को जब्त की गई मवेशी की अंतरिम कस्टडी देने से अनिवार्य रूप से मना किया जाए।क़ानून और नियमों के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की एकल न्यायाधीश खंडपीठ ने कहा,"जानवरों की कस्टडी मालिक को दी जा सकती है अगर कोई पिछला पूर्ववृत्त नहीं है या उसका...

सिर्फ इसलिए कि चालक के पास LMV के लिए वैध लाइसेंस है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह दोपहिया वाहन चलाने के लिए भी अधिकृत या सक्षम है: दिल्ली हाईकोर्ट
सिर्फ इसलिए कि चालक के पास LMV के लिए वैध लाइसेंस है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह दोपहिया वाहन चलाने के लिए भी अधिकृत या सक्षम है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा पारित वह फैसला रद्द कर दिया, जिसमें उसने दुर्घटना में शामिल दोपहिया वाहन के ड्राइवर/मालिक के खिलाफ बीमा कंपनी को वसूली अधिकार देने से इनकार कर दिया था।बीमा कंपनी के इस तर्क को खारिज करते हुए कि वह कुछ भी भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि ड्राइवर के पास दोपहिया वाहन चलाने के लिए वैध लाइसेंस नहीं था, एमएसीटी ने कहा कि पुरुष व्यक्ति जो हल्के मोटर वाहन चलाने के लिए सक्षम है, उससे दुपहिया वाहन चलाने में अक्षम होने की...

ट्रायल में देरी आर्टिकल 21 का उल्लंघन: उड़ीसा हाईकोर्ट ने 8 साल से हिरासत में लिए गए कथित आदिवासी चरमपंथियों के मामले तेजी से सुनवाई करने को कहा
'ट्रायल में देरी आर्टिकल 21 का उल्लंघन': उड़ीसा हाईकोर्ट ने 8 साल से हिरासत में लिए गए कथित 'आदिवासी चरमपंथियों' के मामले तेजी से सुनवाई करने को कहा

उड़ीसा हाईकोर्ट ने निचली अदालतों को उन तीन आदिवासी महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है, जो राज्य द्वारा 'चरमपंथी' कहे जाने के बाद पिछले आठ वर्षों से जेल में बंद हैं।जस्टिस सुभाशीष तालापात्रा और जस्टििस सावित्री राठो की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को राहत प्रदान करते हुए कहा,“… याचिकाकर्ता लगभग 8 साल से हिरासत में हैं। उनकी हिरासत के दौरान, उन्हें कुछ मामलों में आरोपी दिखाया गया, जिनमें जांच लंबित है... यह याचिकाकर्ताओं को सलाखों के पीछे रखने की चाल है। मुकदमे को पूरा...

समान आरोपों पर शिकायतकर्ता द्वारा कई आपराधिक कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत अभियुक्त के अधिकारों का उल्लंघन करती है: जेकेएल हाईकोर्ट
समान आरोपों पर शिकायतकर्ता द्वारा कई आपराधिक कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत अभियुक्त के अधिकारों का उल्लंघन करती है: जेकेएल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में पाया कि एक ही कथित अपराध के लिए शिकायतकर्ता द्वारा एक ही अभियुक्त के खिलाफ कई आपराधिक कार्यवाही दायर करना कानून में निषिद्ध है।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के तारक दश मुखर्जी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में निर्णय पर भरोसा जताते हुए कहा,"आरोपी को एक ही कथित अपराध में कई आपराधिक कार्यवाही में उलझाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, जो संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 की जांच का सामना नहीं कर सकता है।"पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही...

टैक्स चोरी का कोई प्रयास नहीं होने पर पेश न होने पर जुर्माना मान्य नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
टैक्स चोरी का कोई प्रयास नहीं होने पर पेश न होने पर जुर्माना मान्य नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि यदि टैक्स से बचने का कोई प्रयास नहीं किया जाता तो इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) के समक्ष उपस्थिति न होने को जुर्माना कार्यवाही शुरू करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है।जस्टिस रितु बिहारी और जस्टिस मनीषा बत्रा की खंडपीठ ने पाया कि चालक ने आईसीसी और बाद में जांच के समय उसने सभी चालान दिखाए। टैक्स चोरी का कोई प्रयास नहीं किया गया। इसलिए वैट अपील की अनुमति दी गई और पंजाब वैट अधिनियम, 2005 की धारा 51(7)(सी) के तहत जुर्माना लगाने का कोई मामला नहीं बनता।माल...

जे जे एक्ट|  कानून के साथ संघर्ष करने वाला बच्चा अग्रिम जमानत नहीं मांग सकता : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 2022 के फैसले से असहमति जताई
जे जे एक्ट| " कानून के साथ संघर्ष करने वाला बच्चा अग्रिम जमानत नहीं मांग सकता" : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 2022 के फैसले से असहमति जताई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (जेजे अधिनियम) के अनुसार कानून के साथ संघर्ष करने वाला बच्चा सीआरपीसी की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दायर नहीं कर सकता।अदालत ने कहा, "यदि, धारा 438 सीआरपीसी के प्रावधानों को किशोर के मामलों में अधिकार रखने की अनुमति दी जाती है, तो अधिनियम का उद्देश्य और लक्ष्य ही विफल हो जाएगा। कानून की व्याख्या तरह से नहीं की जा सकती है, जिससे इस कानून के तैयार करने के पीछे व्यापक और गंभीर उद्देश्य को हासिल...

Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
आईपीसी और अन्य कानून के तहत अपराधों के लिए निजी शिकायत सुनवाई योग्य, मध्य प्रदेश सोसायटी पंजीकरण अधिनियम की धारा 37 के तहत वर्जित नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में कहा कि भारतीय दंड संहिता और अन्य कानूनों के तहत अपराध करने का आरोप लगाने वाली एक निजी शिकायत सुनवाई योग्य है और मध्य प्रदेश सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1973 की धारा 37 के तहत वर्जित नहीं है।कोर्ट के सामने सवाल था कि क्या एक पंजीकृत सोसायटी के सदस्यों के खिलाफ एक निजी पार्टी द्वारा दायर की गई शिकायत अधिनियम की धारा 18, 32 और 37 (2) के प्रावधानों के मद्देनजर खारिज करने योग्य है।जेएमएफसी के समक्ष दायर एक शिकायत को रद्द करने की मांग करते...

Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
‘कथित रूप से रेप 'पीड़िता' द्वारा बनाए गए वीडियो से पता लगाएं कि क्या कृत्य सहमति या इच्छा के विरुद्ध था’: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के वकील को निर्देश दिया

कथित रेप पीड़िता (Rape Victim) द्वारा दावा किए जाने के बाद कि उसने स्वयं घटना का वीडियो बनाया है, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने राज्य के वकील को वीडियो देखने और यह पता लगाने का निर्देश दिया कि क्या कथित कृत्य पीड़िता की सहमति या इच्छा के विरूद्ध था।कोर्ट ने कहा,"राज्य के वकील से अनुरोध है कि वे पैन-ड्राइव के साथ जांच अधिकारी को बुलाएं और एजी कार्यालय में फ़ाइल को अपनी मशीन में सेव किए बिना उसका अवलोकन करें और उसके बाद, पेन-ड्राइव को जांच अधिकारी को लौटा दें और इस कोर्ट के...

सीआरपीसी की धारा 173 के तहत दायर नकली पुलिस रिपोर्ट के जर‌िए अभियुक्त के डिफॉल्ट जमानत के अधिकार को विफल नहीं किया जा सकता: जेकेएल हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 173 के तहत दायर 'नकली पुलिस रिपोर्ट' के जर‌िए अभियुक्त के डिफॉल्ट जमानत के अधिकार को विफल नहीं किया जा सकता: जेकेएल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने माना कि धारा 173 सीआरपीसी के तहत एक 'नकली पुलिस रिपोर्ट', भले ही धारा 167 सीआरपीसी की समय सीमा के भीतर दायर की गई हो, को किसी अभियुक्त के वैधानिक/डिफ़ॉल्ट जमानत अधिकार के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती है।जस्टिस राहुल भारती की बेंच ने कहा,"यह अधिकार, उपार्जित होने पर, प्री-ट्रायल कस्टडी के तहत आरोपी के खिलाफ अपराध के आरोप की कथित गंभीरता के बावजूद, हकदार अभियुक्त के पूछने पर सीधे दिया जाता है"।धारा 167 (2) सीआरपीसी के तहत एक...

यदि रोजगार के दौरान हुई 40% विकलांगता के कारण सरकारी कर्मचारी का कैडर डाउनग्रेड किया गया है तो भी उसके वेतन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं  पड़ेगा: कर्नाटक हाईकोर्ट
यदि रोजगार के दौरान हुई 40% विकलांगता के कारण सरकारी कर्मचारी का कैडर डाउनग्रेड किया गया है तो भी उसके वेतन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी करते समय 40% या उससे अधिक की विकलांगता से पीड़ित होता है तो अधिकार के रूप में ऐसा कर्मचारी वेतन और अन्य लाभों पर बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के सेवा जारी रखने के लिए कैडर के डाउनग्रेडिंग के लाभ का हकदार होगा।जस्टिस सूरज गोविंदराज की सिंगल जज बेंच ने एमबी जयदेवैया की ओर से दायर याचिका की अनुमति देते हुए यह स्पष्टीकरण दिया और बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (बीएमटीसी) द्वारा जारी सामान्य आदेश को रद्द कर दिया और ड्राइवर के पद...

Gauhati High Court
'यहां पोक्सो एक्ट को क्यों जोड़ा गया? हिरासत में पूछताछ की क्या आवश्यकता है?: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 'बाल विवाह अधिनियम' के कई मामलों में अग्रिम जमानत दी

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज विभिन्न मामलों में कुछ अभियुक्तों को अग्रिम जमानत देते हुए आज कहा कि ये ऐसे मामले नहीं हैं, जिनमें हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता होती है।जस्टिस सुमन श्याम ने मौखिक रूप से कहा,"यदि विवाह कानून का उल्लंघन करके किया जा रहा है तो कानून अपना काम करेगा। ये मामले समय से हो रहे हैं। हम केवल तभी विचार करेंगे कि तत्काल हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है या नहीं। इस समय यह अदालत समझती है कि हिरासत में पूछताछ कोई मायने...

गुजरात हाईकोर्ट ने हिंदू देवी-देवताओं के आपत्तिजनक आर्ट वर्क पर छात्र को बिना जांच के ‌डीबार करने के यूनिवर्सिटी के फैसले को खारिज किया
गुजरात हाईकोर्ट ने हिंदू देवी-देवताओं के आपत्तिजनक आर्ट वर्क पर छात्र को बिना जांच के ‌डीबार करने के यूनिवर्सिटी के फैसले को खारिज किया

गुजरात हाईकोर्ट ने महाराजा सयाजीराव यूविर्सिटी के एक आदेश को रद्द कर दिया, जिसने हिंदू देवी-देवताओं के आपत्तिजनक आर्ट वर्क के प्रदर्शन के लिए फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट के ‌डिपार्टमेंट ऑफ स्कल्पचर के स्नातकोत्तर छात्र को स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया था।जस्टिस भार्गव डी करिया की सिंगल जज बेंच ने कहा कि आक्षेपित आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन था। कोर्ट ने मामले को प्रतिवादी-यूनिवर्सिटी को फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच रिपोर्ट पर उचित आदेश पारित करने और छात्र को सुनवाई का अवसर देने के...

अन्यत्र उप‌‌‌स्थिति की प्रतिरक्षा को आरोप तय करने के स्तर पर ‌उठाया जा सकता है, ऐसा कोई नियम नहीं कि केवल प्रतिरक्षा साक्ष्य के दरमियान ही इस पर विचार किया जा सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
अन्यत्र उप‌‌‌स्थिति की प्रतिरक्षा को आरोप तय करने के स्तर पर ‌उठाया जा सकता है, ऐसा कोई नियम नहीं कि केवल प्रतिरक्षा साक्ष्य के दरमियान ही इस पर विचार किया जा सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि आरोप तय करने के चरण में अन्यत्र उपस्थिति की प्रतिरक्षा को जल्द से जल्द उठाया जा सकता है, क्योंकि ऐसा कोई नियम नहीं है कि इस तरह के बचाव को केवल बचाव साक्ष्य के स्तर पर ही माना जा सकता है।औरंगाबाद खंडपीठ के जस्टिस एसजी मेहारे ने सीआरपीसी की धारा 319 के तहत एक व्यक्ति को पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमे के लिए जारी किए गए निचली अदालत के सम्मन को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि निचली अदालत को उसकी अन्यत्र उपस्थिति की प्रतिरक्षा पर पर विचार करना चाहिए...

गुजरात हाईकोर्ट ने हिंदू इलाकों में दुकानें खरीदने वाले मुस्लिम व्यक्ति को परेशान करने वालों पर जुर्माना लगाया
गुजरात हाईकोर्ट ने हिंदू इलाकों में दुकानें खरीदने वाले मुस्लिम व्यक्ति को परेशान करने वालों पर जुर्माना लगाया

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति को हिंदू इलाकों में कुछ दुकानों की बिक्री को मंजूरी देने वाले आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी।जस्टिस बीरेन वैष्णव ने याचिकाकर्ताओं पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।उन्होंने कहा,"यह एक परेशान करने वाला कारक है कि एक अशांत क्षेत्र में संपत्ति के एक सफल खरीदार को परेशान किया जा रहा है और उस संपत्ति का आनंद लेने के उसे रोका जा रहा है, जिसे उसने सफलतापूर्वक खरीदा है।"याचिकाकर्ता बिक्री लेनदेन के गवाह...

Allahabad High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित पीएफआई नेता को गैरकानूनी गतिविधियों के लिए 20 करोड़ रुपये से अधिक इकट्ठा करने के आरोप में जमानत देने से इनकार कर दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीएमएलए मामले में कथित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नेता अब्दुल रजाक पीडियाक्कल की जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी, जिसमें उन पर पीएफआई पर 20 करोड़ रुपये से अधिक धन एकत्र करने और काले धन को वैध करने का आरोप लगाया गया है।ज‌स्टिस राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने मंगलवार को जमानत याचिका खारिज कर दी।उल्लेखनीय है कि ईडी ने दिसंबर 2021 में पीडियाक्कल के आवास के साथ-साथ मुन्नार विला विस्टा प्रोजेक्ट (एमवीवीपी) साइट पर छापा मारा था, जिसमें उसे विदेशों से संदिग्ध विदेशी धन की...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की जेलों का निरीक्षण करने का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की जेलों का निरीक्षण करने का आदेश दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को सुधार गृहों के कैदियों से प्रतिबंधित वस्तुओं की तलाशी और बरामदगी के मुद्दे पर आईजीपी (सुधारात्मक सेवाएं), पश्चिम बंगाल द्वारा उठाए गए आकस्मिक दृष्टिकोण पर नाराजगी जताई।जस्टिस अजय कुमार गुप्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा,"हम पुलिस डायरेक्टर जनरल (सुधारात्मक सेवाएं), पश्चिम बंगाल द्वारा सुधार गृहों की ढीली निगरानी में विशेष रूप से कैदियों से प्रतिबंधित वस्तुओं की तलाशी और बरामदगी के मामले में उठाए गए आकस्मिक दृष्टिकोण के संबंध में अपनी नाराजगी दर्ज करते...

एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोपी जमानत या अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं जा सकता: केरल हाईकोर्ट
एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोपी जमानत या अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं जा सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दंडनीय अपराधों का आरोपी व्यक्ति जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकता।जस्टिस ए. बदरुद्दीन की एकल पीठ याचिकाकर्ता द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (पीओए) एक्ट की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) के तहत अपराध का आरोप लगाया गया।याचिकाकर्ता ने अग्रिम जमानत देने के लिए एससी/एसटी (पीओए) एक्ट के तहत विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया।...

पीएमएलए के तहत दोहरी जमानत शर्तों से कौन से बीमार व्यक्ति को छूट दी गई है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नवाब मलिक की याचिका पर पूछा
पीएमएलए के तहत दोहरी जमानत शर्तों से कौन से 'बीमार व्यक्ति' को छूट दी गई है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नवाब मलिक की याचिका पर पूछा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को जानना चाहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत किसे "बीमार" व्यक्ति कहा जा सकता है और क्या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता नवाब मलिक त्वरित जमानत सुनवाई के लिए उस श्रेणी में आते हैं।जस्टिस एमएस कार्णिक ने कहा,"मेरे पास इस पर कुछ सवाल हैं, क्योंकि अब कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां व्यक्ति (आरोपी) कहता है कि मुझे बीमार होने के कारण जमानत दे दो। इसलिए मैं जानना चाहता हूं कि बीमार व्यक्ति कौन है। मैं चाहता हूं कि आप इस पर बहस करें .... कौन करेगा?"उन्होंने कहा कि...

सर्जरी में लापरवाही का मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट हॉस्पिटल को श्रीलंकाई महिला को 40 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया
सर्जरी में लापरवाही का मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट हॉस्पिटल को श्रीलंकाई महिला को 40 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने हाल ही में एक प्राइवेट इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट हॉस्पिटल को एक श्रीलंकाई महिला को मुआवजा देने का निर्देश दिया था, जो एक खराब सर्जरी के कारण स्थायी रूप से विकलांग हो गई थी।जस्टिस जी चंद्रशेखरन ने कहा कि डॉक्टरों और अस्पताल को महिला के चिकित्सकीय इतिहास के बारे में पता था और फिर भी उचित एहतियात के बिना सर्जरी जारी रखी। सर्जरी के बाद महिला को एक छिद्रित बृहदान्त्र और स्थायी विकलांगता के साथ छोड़ दिया गया।अदालत ने कहा कि डॉक्टर क्लाइंट को उपचार में शामिल जोखिमों...

किसी एक कानून के प्रावधान के तहत भरण-पोषण प्राप्त कर रही महिला को अन्य कानून के तहत भरण पोषण की मांग करने से नहीं रोका जा सकता : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
किसी एक कानून के प्रावधान के तहत भरण-पोषण प्राप्त कर रही महिला को अन्य कानून के तहत भरण पोषण की मांग करने से नहीं रोका जा सकता : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है कि किसी एक कानून के प्रावधान के तहत भरण-पोषण प्राप्त कर रही महिला को अन्य कानून के तहत भरण पोषण की मांग करने से रोका जा सके।जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की पीठ ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 14(1) के तहत भरण पोषण के एवज में महिला को मिली संपत्ति पर उसका स्वामित्व बरकरार रखते हुए उक्त अवलोकन किया।मामले के तथ्य यह है कि अपीलकर्ता/प्रतिवादी और प्रतिवादी/वादी एक-दूसरे से विवाहित है। अपीलकर्ता पति ने अपनी शादी के कुछ वर्षों के बाद...