मुख्य सुर्खियां
पागलपन की दलील साबित करने के लिए अभियुक्त पर सबूत का बोझ संभाव्यता की प्रबलता में से एक है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पागलपन की दलील को स्वीकार करते हुए हाल ही में ट्रायल कोर्ट के 2006 के एक फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें हत्या के अपराध के लिए एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने कहा कि 2004 में हुए अपराध के समय अपीलकर्ता को सिज़ोफ्रेनिया का इलाज चल रहा था। रिकॉर्ड पर सबूत थे कि घटना से पहले, उसने मानसिक बीमारी के लिए एक सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज कराया था। अपीलकर्ता की बीमारी के संबंध में दो डॉक्टरों ने भी अदालत के समक्ष गवाही दी थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने उन...
सुप्रीम कोर्ट पहली बार अपना स्थापना दिवस मनाएगा
भारत का सर्वोच्च न्यायालय 4 फरवरी, 2023 को पहली बार अपना स्थापना दिवस मनाने के लिए तैयार है। सिंगापुर के मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस सुंदरेश मेनन को इस कार्यक्रम के लिए मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है और वे 'बदलती दुनिया में न्यायपालिका की भूमिका' ( 'Role of judiciary in a changing world') विषय पर व्याख्यान देंगे। यह कार्यक्रम जो भारत के सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की 73 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित किया ज रहा है, जिसमें जस्टिस संजय किशन कौल का स्वागत भाषण और सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ का...
न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी में सरकार के नामित व्यक्ति को शामिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया है : कानून मंत्री किरेन रिजिजू
कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को खुलासा किया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया है कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में खोज-सह-मूल्यांकन समिति (Search-cum-Evaluation Committee) में भारत सरकार द्वारा नामित प्रतिनिधि शामिल होना चाहिए। . उन्होंने आगे कहा कहा," हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए, समिति में भारत सरकार द्वारा नामित एक प्रतिनिधि और हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र के तहत राज्य सरकार (सरकारों) के एक प्रतिनिधि को...
न्यायाधीशों की नियुक्ति का मामला - सरकार ने एससी कॉलेजियम की 18 सिफारिशों को वापस भेजा, कॉलेजियम ने छह को दोहराया : कानून मंत्री किरेन रिजिजू
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को राज्यसभा को सूचित किया कि जजों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (एससीसी) द्वारा अनुशंसित कुल 18 प्रस्तावों को सरकार ने कॉलेजियम को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है। उन्होंने उच्च सदन को बताया, "न्यायाधीश की नियुक्ति के कुल 64 प्रस्ताव सरकार के पास लंबित हैं और प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं।"कानून मंत्री राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी और माकपा के सांसद जॉन ब्रिटास के सवालों का जवाब दे रहे थे।पिछले तीन वर्षों के दौरान सरकार द्वारा...
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एडमिशन फीस के भुगतान में एक दिन की देरी करने पर दो छात्रों को 'गैर-कॉलेजिएट' घोषित करने का लॉ कॉलेज का फैसला रद्द किया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एडमिशन फीस के भुगतान में निर्धारित तारीख से एक दिन की देरी करने पर दो छात्रों को 'नॉन-कॉलेजिएट' घोषित करने वाले बीआरएम लॉ कॉलेज द्वारा जारी नोटिस को खारिज कर दिया और साथ ही स्टूडेंट को तीसरे वर्ष के 5वें सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने की अनुमति दी। याचिकाकर्ता, कल्याण बुरागोहेन और रोबिउल हुसैन बीआरएम गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स में के छात्र हैं। । उनका मामला था कि उन्होंने 31.10.2022 को एडमिशन फीस जमा की, जबकि तारीख बढ़ाने के बाद फीस जमा करने की अंतिम तिथि...
[फार्मेसी एक्ट 1948] राज्य सरकार के पास पीसीआई में नामित राज्य सदस्य के नामांकन को रद्द करने की कोई पूर्ण अधिकार नहीं: त्रिपुरा हाईकोर्ट
त्रिपुरा हाईकोर्ट (Tripura High Court) ने कहा कि राज्य सरकार के पास फार्मेसी अधिनियम, 1948 के तहत फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया में नामित राज्य सदस्य के नामांकन को रद्द करने का पूर्ण अधिकार नहीं है।याचिकाकर्ता को राज्य स्वास्थ्य सचिव (प्रतिवादी संख्या 2) द्वारा 29.11.2018 को फार्मेसी अधिनियम, 1948 (अधिनियम) की धारा 3 (एच) के तहत फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के राज्य सदस्य के रूप में नामित किया गया था।हालांकि, एक बाद के आदेश के तहत, प्रो. (डॉ.) सुवकांत दाश (प्रतिवादी संख्या 6) को आधिकारिक तौर...
अस्थायी रूप से भारत में रहने वाले प्रवासी नागरिक घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत की मांग करने के हकदार : मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि भारत में कानून भारत की विदेशी नागरिकता (ओसीआई) कार्ड रखने वाले व्यक्ति या अस्थायी रूप से यहां रहने वाले व्यक्ति को भारतीय अदालतों में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत की मांग करने से प्रतिबंधित नहीं करता।जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम ने घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण (डीवी) अधिनियम की धारा 27 पर कहा,"स्पष्ट रूप से यह निर्धारित करता है कि पीड़ित व्यक्ति अस्थायी रूप से रह रहा है या व्यवसाय कर रहा है या कार्यरत है, वह भी घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के दायरे में आ रहा...
जमानत की संभावना पर राय बनाए बिना डिटेनिंग अथॉरिटी पहले से ही हिरासत रखे गए व्यक्ति को निवारक हिरासत में नहीं ले सकती: मणिपुर हाईकोर्ट
मणिपुर हाईकोर्ट ने कहा कि निरोधक प्राधिकरण को निवारक निरोध कानूनों के तहत शक्ति का प्रयोग करने से पहले यह देखना होगा कि डिटेन्यू जो पहले से ही हिरासत में है, उसने जमानत याचिका दायर की है या नहीं।डिटेन्यू पहले से ही अन्य दो मामलों में ही न्यायिक हिरासत में था। उसको अक्टूबर 2022 में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 3(2) के तहत जिला मजिस्ट्रेट, थौबल द्वारा हिरासत में लिया गया।चीफ जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस अहंथेम बिमोल सिंह की खंडपीठ ने विवादित आदेश के खिलाफ डिटेन्यू की पत्नी...
'उसके पास उच्च स्तर का विस्फोटक पदार्थ और आपत्तिजनक साहित्य था': कलकत्ता हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी नागरिक की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को आतंकवादी संगठन अल-बदर से जुड़े एक पाकिस्तानी नागरिक को दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा, जो बांग्लादेश के माध्यम से अवैध रूप से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने और आतंकवादी गतिविधियां अंजाम देने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर जा रहा था।दोषी को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), कोलकाता ने 19 मार्च, 2009 को इंटरसेप्ट करने के बाद गिरफ्तार किया था और उसके पास विस्फोटक पदार्थ और जाली ड्राइविंग लाइसेंस और वोटर आईडी कार्ड पाया था।15 मार्च, 2021 को प्रथम...
दिल्ली हाईकोर्ट ने हंसल मेहता की फिल्म 'फराज' की रिलीज पर रोक लगाने से किया इनकार, फिल्म कल होगी रिलीज
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने फिल्म निर्माता हंसल मेहता की फिल्म 'फराज' की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार किया। फिल्म कल रिलीज हो रही है।यह फिल्म 01 जुलाई, 2016 को होली आर्टिसन, ढाका, बांग्लादेश में हुए आतंकवादी हमले पर आधारित है।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस तलवंत सिंह की एक खंडपीठ ने फिल्म निर्माता और निर्माताओं को निर्देश दिया कि वे उस डिस्क्लेमर का गंभीरता से पालन करें जिसमें कहा गया है कि फिल्म हमले से प्रेरित है और इसमें निहित तत्व पूरी तरह से काल्पनिक हैं।अदालत एकल न्यायाधीश के...
दिसंबर 2022 तक कर्मचारी के वेतन और पेंशन का भुगतान हो चुका है, जनवरी का भुगतान दो से तीन दिनों में किया जाएगा: दिल्ली हाईकोर्ट में एमसीडी आयुक्त ने कहा
दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के आयुक्त ने गुरुवार को कहा कि निकाय के कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का भुगतान पिछले साल दिसंबर तक कर दिया गया है और जनवरी महीने का भुगतान दो से तीन दिनों के भीतर किया जाएगा।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ एमसीडी के विभिन्न कर्मचारियों को वेतन का भुगतान न करने पर 2020 में COVID-19 के मद्देनजर दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।कुछ याचिकाएं नागरिक निकाय के सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा दायर की गई हैं, जिसमें शिकायत की...
'दिशा-निर्देशों का अनुपालन न करने से दो युवक बहते पानी में डूबे', सिक्किम हाईकोर्ट ने गती हाइड्रो पावर को विधवा माताओं को 70 लाख रूपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया
सिक्किम हाईकोर्ट ने गती हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट कंपनी द्वारा अचानक पानी छोड़े जाने के कारण उफनती नदी में डूबने से जिन दो विधवा माताओं के युवा पुत्रों की मृत्यु हुई थी, उनमें से प्रत्येक को सरकार के दिशा-निर्देशों और अदालत द्वारा पूर्व में जारी निर्देशों का पालन न करने के कारण समान दुर्घटना होने पर 35-35 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।जस्टिस मीनाक्षी मदन राय ने पाया कि कंपनी (प्रतिवादी नंबर 3) नदी के पास पर्याप्त रूप से चेतावनी सायरन लगाने में विफल रही, जिससे स्थानीय लोगों के लिए पानी के...
पीएफआई के पूर्व अध्यक्ष का नियमित आधार पर 'प्रभावी' मेडिकल उपचार सुनिश्चित करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को तिहाड़ जेल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पूर्व अध्यक्ष ई अबूबकर को नियमित रूप से प्रभावी मेडिकल सुविधा प्रदान की जाए।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस तलवंत सिंह की खंडपीठ अबुबकर की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें मेडिकल आधार पर जमानत की उसकी अर्जी खारिज कर दी गई।अदालत के समक्ष उसकी अपील में कहा गया कि अबूबकर कई बीमारियों से पीड़ित है, जिसमें...
एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवार की श्रेणी के वर्गीकरण के संबंध में विवादों का फैसला कर सकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल एक्ट 1985 के तहत गठित एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के पास 'भर्ती' से संबंधित सभी मामलों पर विचार करने का अधिकार है, जिसमें अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से लेकर सरकारी नौकरी के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित करने से लेकर आदेश तक सभी निर्णय शामिल हैं।कलाबुरगी पीठ में बैठे एकल न्यायाधीश की पीठ जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े ने अमीना अफरोज द्वारा दायर याचिका का निस्तारण करते हुए स्पष्टीकरण दिया, जिसने ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया था,...
टेरर फंडिंग मामले में अलगाववादी नेता नईम खान की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एनआईए से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कथित टेरर फंडिंग के यूएपीए मामले में अलगाववादी नेता नईम अहमद खान की जमानत याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जवाब मांगा है।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस तलवंत सिंह की खंडपीठ ने दिसंबर 2022 में उन्हें जमानत देने से इनकार करने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ खान की अपील पर नोटिस जारी किया।अब इस मामले की सुनवाई 23 मार्च को होगी।खान पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा कश्मीर घाटी में "अशांति पैदा करने" का आरोप लगाया गया है। उसे 24 जुलाई, 2017 को गिरफ्तार...
'उनका सर्वोत्तम हित तभी सुनिश्चित किया जा सकता है जब वे मूल देश लौटें': मद्रास हाईकोर्ट ने मां को जुड़वां बच्चों को अमेरिका में रह रहे पिता को लौटाने का निर्देश दिया
मद्रास हाईकोर्ट ने यह मानते हुए कि कस्टडी से संबंधित मामलों में अदालतों को हमेशा बच्चे के सर्वोत्तम हित को देखना चाहिए, मां को निर्देश दिया है कि वह अपने जुड़वां लड़कों को अमेरिका में उनके पिता को लौटा दे।जस्टिस पीएन प्रकाश (अब से सेवानिवृत्त) और जस्टिस आनंद वेंकटेश की खंडपीठ ने कहा कि बच्चे अब ऐसे माहौल में रह रहे हैं, जो उनके लिए पराया है, क्योंकि वे लगभग 13 साल से अमेरिका में थे।अदालत ने कहा,"हमारे विचार में बच्चों का सर्वोत्तम हित तभी सुनिश्चित किया जा सकता है, जब बच्चे अपने मूल देश अर्थात...
दोषी ठहराए जाने के बाद भी हाईकोर्ट सीआरपीसी की धारा 482 के तहत घरेलू हिंसा का केस रद्द कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ पत्नी की ओर से दर्ज घरेलू हिंसा के मामले को खारिज करते हुए कहा कि अपील लंबित होने पर भी सजा के बाद भी वैवाहिक विवाद से संबंधित केस को रद्द करने पर कोई रोप नहीं है।इस मामले में आरोपी को ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2021 में दोषी ठहराया था।जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई और जस्टिस आरएम जोशी की खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग सजा के बाद के मामलों में कर सकता सकता है, जब एक न्यायिक मंच के समक्ष अपील...
'पुलिस ने गुपचुप तरीके से पूरी की जांच': उड़ीसा हाईकोर्ट ने क्राइम ब्रांच को आरटीआई एक्टिविस्ट की 'हत्या' की जांच करने का आदेश दिया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने 2020 में आरटीआई एक्टिविस्ट की कथित हत्या की अपराध शाखा द्वारा नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया।डॉ. जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही ने पुलिस द्वारा की गई जांच पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा,“इससे पता चलता है कि पुलिस ने वीडियो क्लिप और उसमें दोषियों के बारे में उचित विचार नहीं किया। दरअसल, पुलिस ने सभी कोणों को जांच के दायरे में लाए बिना गुपचुप तरीके से जांच पूरी की है।”35 वर्षीय आरटीआई एक्टिविस्ट रंजन कुमार दास 2020 में खेत में मृत पाए गए थे। पुलिस ने कहा कि दास की दुर्घटना में...
यूपीएचजेएस परीक्षा 2020-‘साक्षात्कार में उपयुक्त अवसर लेने के बाद चयन प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकते’: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक उम्मीदवार को राहत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उस असफल उम्मीदवार को राहत देने से इनकार कर दिया,जो उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा परीक्षा 2020 के साक्षात्कार में उपस्थित हुई थी और जिसने सूची में नाम नहीं आने पर अंतिम चयन सूची को चुनौती दी थी। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा कि उसने साक्षात्कार में सफल होने का एक उपयुक्त मौका लिया, लेकिन जब परिणाम उसके अनुकूल नहीं रहा, तो उसने चयन सूची को चुनौती दी और इस प्रकार, उसकी रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं थी। पीठ ने कहा,‘‘अंतिम चयन सूची...
बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका, उपराष्ट्रपति, कानून मंत्री को कॉलेजियम और मूल संरचना सिद्धांत पर टिप्पणी पर कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने की मांग
'कॉलेजियम प्रणाली' की लगातार सार्वजनिक आलोचना और बुनियादी ढांचे के सिद्धांत के खिलाफ टिप्पणी के बाद उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और कानून मंत्री किरेन रिजिजू को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।याचिकाकर्ता - बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन का दावा है कि दोनों ने भारत के संविधान में विश्वास की कमी व्यक्त करते हुए अपने आचरण के माध्यम से उपराष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्री के संवैधानिक पदों को धारण करने से खुद को अयोग्य बना दिया है।इसलिए...






![[फार्मेसी एक्ट 1948] राज्य सरकार के पास पीसीआई में नामित राज्य सदस्य के नामांकन को रद्द करने की कोई पूर्ण अधिकार नहीं: त्रिपुरा हाईकोर्ट [फार्मेसी एक्ट 1948] राज्य सरकार के पास पीसीआई में नामित राज्य सदस्य के नामांकन को रद्द करने की कोई पूर्ण अधिकार नहीं: त्रिपुरा हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/08/01/500x300_428363-410444-tripura.jpg)













