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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपांकर दत्ता ने इस्लामिक स्टेट से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार दो व्यक्तियों की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपांकर दत्ता ने इस्लामिक स्टेट से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार दो आरोपियों को जमानत देने से इनकार करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की सुनवाई से बुधवार को खुद को अलग कर लिया।दोनों आवेदकों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कथित रूप से कट्टरवादी बनाने और प्रभावशाली युवा मुसलमानों को प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन में शामिल करने के लिए भर्ती करने की आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। अपील पर सुनवाई के लिए जस्टिस रवींद्र भट और दीपांकर दत्ता...
घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पति या परिवार के पुरुष सदस्य को सुरक्षा उपलब्ध नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी के खिलाफ पति की ओर से दायर मामले पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा, घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 2 (ए) के तहत महिलाओं के लिए उपलब्ध सुरक्षा पति या परिवार के पुरुष सदस्य के लिए उपलब्ध नहीं है। धारा 2 (ए) एक "पीड़ित व्यक्ति" को किसी भी महिला के रूप में परिभाषित करती है, जिसका 'प्रतिवादी' के साथ घरेलू संबंध हो, या रही हो और घरेलू हिंसा के किसी कृत्य का आरोप लगाती हो।जस्टिस जसमीत सिंह घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत पति द्वारा शुरू की गई कार्यवाही के खिलाफ एक पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे...
लखनऊ कोर्ट ने केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को जमानत पर रिहा करने और जल्द ही जेल से बाहर आने के आदेश पर साइन किए
लखनऊ की एक सत्र अदालत ने बुधवार को केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को जमानत पर रिहा करने के आदेशों पर हस्ताक्षर किए। अदालत ने उनके जमानत मुचलके को स्वीकार कर लिया और कल सुबह तक उनके जेल से बाहर आने की संभावना है। सत्र न्यायाधीश, लखनऊ द्वारा हस्ताक्षरित रिहाई आदेश में अधीक्षक, जिला जेल, लखनऊ को निर्देश दिया गया है कि यदि कप्पन किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो कप्पन से निजी मुचलका प्राप्त कर उसे रिहा कर दें।धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के...
भले ही ड्राइवर नशे में हो, बीमाकर्ता तीसरे पक्ष को भुगतान के लिए उत्तरदायी: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि बीमा कंपनी मोटर दुर्घटना पीड़ित को आरंभ में मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी होगी, भले ही चालक ने नशे की हालत में वाहन चलाकर पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन किया हो।जस्टिस मैरी जोसेफ की सिंगल जज बेंच ने कहा,"निस्संदेह, जब चालक नशे की हालत में होता है तो उसकी चेतना और इंद्रियां क्षीण हो जाती हैं, जिससे वह ड्राइविंग करने के लिए अयोग्य हो जाता है। हालांकि पॉलिसी के तहत देयता प्रकृति में वैधानिक है और इसलिए कंपनी को पीड़ित को मुआवजे देने से छूट नहीं दी जाएगी।"कोर्ट ने बजाज...
दिल्ली के खत्म खोते जंगल से कुछ भी हो सकता है, हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कुछ छोड़ना चाहिए: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर 2015 में शुरू की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी अपने वन क्षेत्र को तेजी से खो रही है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने एएसजी ऐश्वर्या भाटी को व्यक्तिगत रूप से मामले को देखने के लिए यह रेखांकित करते हुए कि "प्रकृति के साथ अन्याय किया जा रहा है।"चीफ जस्टिस शर्मा ने जैसे ही भाटी पीठ द्वारा सहायता का अनुरोध करने के बाद कार्यवाही में शामिल हुईं उनसे समान मुद्दों से निपटने वाले...
मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 9 के तहत अंतिम राहत नहीं दी जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली के हाईकोर्ट ने माना है कि न्यायालय ऐसी राहत नहीं दे सकता है, जो मध्यस्थता और सुलह अधिनियम (A&C एक्ट) की धारा 9 के तहत आवेदन में अंतिम प्रकृति की हो।जस्टिस चंद्र धारी सिंह की पीठ ने माना कि अधिनियम की धारा 9 के तहत विचारित राहत प्रकृति में केवल अंतरिम है, अर्थात, 'बीच के समय में' या 'अनंतिम' और यह निर्णय के प्रवर्तन की सहायता में और अवार्ड में दी गई अंतिम राहत के अधीन होना चाहिए।अदालत ने प्रतिवादी को कथित देरी के कारण भुगतान रोकने से रोकने से इनकार कर दिया, क्योंकि अदालत ने पाया कि...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया, कहा-विभाजन को बढ़ावा देने वाले कृत्य बहुलवाद पर प्रभाव डालते हैं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिसाब-किताब टिप्पणी मामले में जेल में बंद नेता मुख्तार अंसारी के बेटे और मऊ सदर विधायक अब्बास अंसारी के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया।जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा कि अंसारी द्वारा एक सार्वजनिक सभा में आपत्तिजनक शब्द जिस संदर्भ और मंशा से बोले गए थे, उसे देखते हुए इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि आईपीसी की धारा 153-ए के तहत याचिकाकर्ता के खिलाफ अपराध नहीं बनता है।कोर्ट के आदेश में कहा गया,"धारा 482 सीआरपीसी के तहत शक्ति का दायरा...
तेजी से सुनवाई के आदेश के बाद सिविल कोर्ट मामले के निस्तारण के लिए "शॉर्टकट" नहीं अपना सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में कहा कि भले ही दीवानी अदालत को किसी मामले में तेजी से सुनवाई करने का निर्देश दिया गया हो, निचली अदालत मामले को निपटाने के लिए शॉर्टकट तरीके नहीं अपना सकती है।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की पीठ ने कहा कि किसी भी कठिनाई के मामले में, ट्रायल कोर्ट हमेशा हाईकोर्ट से मार्गदर्शन लेने के लिए स्वतंत्र है-"रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि ट्रायल कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश ने 07.12.2019 के अपने ही आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें वादी द्वारा अपने पूर्वजों के कुछ...
[एनडीपीएस एक्ट] 100 किलोमीटर के दायरे या हर चार जिलों के बीच एक विशेष अदालतों की स्थापना की संभावना तलाशें: मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा
मद्रास हाईकोर्ट ने सुझाव दिया है कि प्रत्येक चार जिलों के बीच एक स्पेशल कोर्ट की स्थापना की जाए या 100 किलोमीटर के दायरे में विशेष न्यायालयों की स्थापना की जाए। कोर्ट ने नोट किया कि वर्तमान में एनडीपीएस मामलों के निस्तारण के लिए केवल सात विशेष न्यायालय हैं।जस्टिस बी पुगलेंधी ने यह सुझाव दिया कि जांच अधिकारियों को मामलों के फॉलो अप में मुश्किल हो रही है, क्योंकि उन्हें लगातार लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती थी। अदालत ने कहा कि ईसी/एनडीपीएस मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतों के रूप में...
मद्रास हाईकोर्ट ने भक्तों को भ्रमित करने और मंदिरों के नाम पर लाभ कमाने वाली फर्जी वेबसाइटों को बंद करने का आदेश दिया
मद्रास हाईकोर्ट ने मंदिरों के नाम पर बनाई गई और भक्तों को गुमराह कर उनसे चंदा वसूल करने वाली सभी अवैध/अनधिकृत वेबसाइटों को बंद करने का आदेश दिया।जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस सत्य नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि मंदिर पूजा के स्थान हैं, जहां लोग शाश्वत शांति और सद्भाव प्राप्त करने के लिए जाते हैं। इसलिए मंदिरों को मुनाफा कमाने के स्थानों में नहीं बदलना चाहिए। इस प्रकार, अदालत ने कहा कि मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अलावा, तीसरे पक्ष को मंदिरों के नाम पर वेबसाइटों को बनाए रखने और धन एकत्र करने की...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद भी एफआईआर दर्ज करने में अत्यधिक देरी के लिए डीजीपी को पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच करने का निर्देश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस डायरेक्टर जनरल और इंस्पेक्टर जनरल को कपासपेट पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर प्रवीण के.वाई के खिलाफ विभागीय जांच करने का निर्देश दिया, जो मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा दिए गए आदेश का पालन करने में विफल रहने पर चोरी की निजी शिकायत की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश देता है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा कि न्यायिक प्राधिकरण द्वारा पारित वैध आदेशों को पुलिस द्वारा ईमानदारी से लागू करने की आवश्यकता होती है और ऐसा करने में विफलता अपराध के पीड़ितों के लिए न्याय तक पहुंच के...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने नेशनल मेडिकल काउंसिल के वकील के खिलाफ बार काउंसिल में शिकायत दर्ज करने के लिए विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट की खिंचाई की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को उस विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट को फटकार लगाई, जिसने नेशनल मेडिकल काउंसिल के वकील के खिलाफ बार काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया कि उसने अदालत के सामने झूठा बयान दिया।कोर्ट ने कहा,“यह हमारे बार में वकील को डराने का प्रयास है, जो प्रतिवादी (एनएमसी) के लिए पेश हो रहा है और जो अपना काम कर रहा है। वह (एनएमसी के वकील) जस्टिस धानुका की अगुवाई वाली पीठ के आदेश की ओर इशारा कर रहे हैं ... क्या वह (याचिकाकर्ता यति पाटिल) जस्टिस धानुका के बारे में जो कहा...
पोस्टिंग के स्थान, प्रतिनियुक्ति, काम के घंटे, प्राप्त अवकाश के बारे में जानकारी आरटीआई एक्ट के तहत नहीं दी जा सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि कर्मचारी की पोस्टिंग की जगह, प्रतिनियुक्ति की अवधि, काम के घंटे, प्रतिनियुक्ति के दौरान मुख्यालय का स्थान, मुख्यालय छोड़ने की अनुमति के साथ ली गई किसी भी प्रकार की छुट्टी, उपस्थिति की प्रति के संबंध में जानकारी रजिस्टर और संचलन रजिस्टर व्यक्तिगत प्रकृति के होते हैं, इसलिए आरटीआई एक्ट के तहत इसका खुलासा नहीं किया जा सकता।अदालत ने उस मामले में फैसला सुनाया, जहां राज्य सूचना आयोग, हरियाणा ने 2015 में आरटीआई एक्ट के तहत आवेदक को डेंटल सर्जन से संबंधित ऐसी...
हिरासत में मौत के आरोप: ‘अनुच्छेद 21 का उल्लंघन, ललिता कुमारी मामले के दिशानिर्देश’ : कलकत्ता हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक कथित हिरासत में मौत के मामले का निर्धारण करते हुए हाल ही में फैसला सुनाया कि संबंधित पुलिस अधिकारियों ने ‘ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014)’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों तथा दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधानों का पालन न करके संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन किया है।तदनुसार, कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को हिरासत में मौत के मामले में सीआरपीसी की धारा 202 के तहत जांच करने का आदेश दिया। मौजूदा मामले में, मृतक को बिना कोई नोटिस दिए...
निष्पादन कार्यवाही में विभाजन और अलग कब्जे के लिए प्रार्थना नहीं दी जा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि उन याचिकाकर्ताओं के लिए निष्पादन कार्यवाही फिर से खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिन्होंने 14 साल तक कोई आपत्ती नहीं दर्ज कराई और अदालत द्वारा निष्पादन आदेश पारित होने के दो साल तक उसे कोई चुनौती नहीं दी।जस्टिस संदीप वी. मार्ने ने रिट याचिका खारिज करते हुए कहा,“…आपत्तियां केवल औपचारिकता के रूप में दायर की गई प्रतीत होती हैं और उस पर कभी मुकदमा नहीं चलाया गया। निष्पादन अदालत द्वारा डिक्री की संतुष्टि दर्ज किए जाने के दो साल बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी आपत्ति...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आवासीय क्षेत्र में देशी शराब बार खोलने की अनुमति को चुनौती देने के लिए नासिक निवासी पर 10,000 रूपए का जुर्माना लगाया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में उस याचिकाकर्ता पर 10,000/- रूपए का जुर्माना लगाया, जिसने अपने पड़ोस में देशी शराब बार खोलने पर आपत्ति जताई थी। उसने अपनी याचिका में कहा था कि उसके आरोप व्यवसाय के मालिक के व्यापार करने के अधिकार को बाधित करते हैं।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव ने रिट याचिका खारिज करते हुए कहा कि जिस तरीके से याचिका का मसौदा तैयार किया गया है, वह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। याचिका में नासिक कलेक्टर के मौजूदा परिसर से नए परिसर में सीएल III लाइसेंस (देशी शराब की खुदरा बिक्री के लिए...
पत्नी का भरण-पोषण भत्ता कर्ज नहीं, पति की पेंशन को बकाये के भुगतान के लिए कुर्की से छूट नहींः मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने माना है कि पत्नी को दिया जाने वाला भरण-पोषण भत्ता कर्ज के दायरे में नहीं आएगा और इस प्रकार, पति की पेंशन को भरण-पोषण के बकाये के भुगतान के लिए कुर्की से छूट नहीं दी गई है।इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि भरण-पोषण एक सामाजिक न्याय है जो अभाव और खानाबदोशी को रोकता है, जस्टिस वी शिवगणनम ने कहा, ‘‘एक संकटग्रस्त महिला के वैध दावे को निर्ममतापूर्वक और कानूनन इनकार नहीं किया जाना चाहिए। सामाजिक न्याय की अंतरात्मा, हमारे संविधान की आधारशिला की रक्षा की जाएगी। इसलिए, मेरा मानना है कि...
उड़ीसा हाईकोर्ट ने जिला न्यायालयों से युवा वकीलों के लिए 'वकील ऑफ द ईयर अवार्ड' स्कीम की अधिसूचना जारी की
उड़ीसा हाईकोर्ट ने 'वकील ऑफ द ईयर अवार्ड' देने के लिए उस स्कीम की अधिसूचना जारी, जिसे पिछले साल शुरू किया गया था। अवार्ड के पीछे का उद्देश्य जिलों के बाहरी स्टेशनों सहित जिला न्यायालयों में प्रैक्टिस करने वाले युवा वकीलों को प्रोत्साहित करना है।इस योजना में अवार्ड की विशेषताओं, आवेदन करने की पात्रता, जूरी, चयन मानदंड आदि से संबंधित विवरण शामिल हैं। हाईकोर्ट ने हर साल 28 अप्रैल को अवार्ड देने की योजना बनाई है, जिसे ओडिशा राज्य भर में उत्कल गौराबा मधुसूदन दास की जयंती मनाने के लिए 'लॉयर डे' के रूप...
आग न बुझाना, मौत के बोध और इरादे को दर्शाता हैः बॉम्बे हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या करने वाले पति की सजा बरकरार रखी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति को हत्या के मामले में दी गई सजा को बरकरार रखते हुए कहा है कि उसने आग बुझाने की कोशिश नहीं की,जो यह दर्शाता है कि उसका इरादा अपनी पत्नी की हत्या करने का था। जस्टिस नितिन डब्ल्यू सांबरे और जस्टिस आर एन लड्डा की खंडपीठ ने कहा, ‘‘मृतक के शरीर पर मिट्टी का तेल डालने, उसे आग लगाने और आग न बुझाने का अभियुक्त का कृत्य पूरी तरह से उसके खिलाफ माना जाएगा और यह अपीलकर्ता के इरादे और बोध को प्रदर्शित करता है। मृतक अपीलकर्ता की पत्नी थी और घर में अकेली थी। अपीलकर्ता...
[विशेष विवाह अधिनियम] युवा विदेश में बड़े पैमाने पर कार्यरत, 30 दिन का अनिवार्य निवास और उसके बाद की प्रतीक्षा अवधि पर पुनर्विचार की आवश्यकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट के समक्ष हाल ही में एक याचिका दायर की गई, जिसमें विशेष विवाह अधिनियम के प्रावधान को इस सीमा तक चुनौती दी गई कि यह इच्छित विवाह की सूचना देने के बाद 30 दिनों की प्रतीक्षा अवधि को अनिवार्य करता है।रिट याचिका में मांग की गई है कि अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि को असंवैधानिक घोषित किया जाए, या यह घोषणा की जाए कि धारा 6 में उल्लिखित विवाह की सूचना देने के बाद 30 दिनों की अवधि और अधिनियम के तहत सभी परिणामी प्रावधान केवल निर्देशिका हैं और इस पर जोर नहीं दिया जा सकता है।जस्टिस वीजी अरुण ने कहा कि...









![[एनडीपीएस एक्ट] 100 किलोमीटर के दायरे या हर चार जिलों के बीच एक विशेष अदालतों की स्थापना की संभावना तलाशें: मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा [एनडीपीएस एक्ट] 100 किलोमीटर के दायरे या हर चार जिलों के बीच एक विशेष अदालतों की स्थापना की संभावना तलाशें: मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/12/01/500x300_447086-madrashighcourt.jpg)









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