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केवल मृत भाई के सिम कार्ड का उपयोग अपराध नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी का मामला रद्द किया
केवल मृत भाई के सिम कार्ड का उपयोग अपराध नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी का मामला रद्द किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि केवल मृत भाई के सिम कार्ड का उपयोग करना कोई अपराध नहीं है, डॉक्टर के खिलाफ उसकी भाभी द्वारा उसके मृत पति के सिम कार्ड के कथित उपयोग और उसके बिना उसकी चल संपत्ति की बिक्री के लिए दायर धोखाधड़ी का मामला रद्द कर दिया।जस्टिस नितिन डब्ल्यू साम्ब्रे और जस्टिस आरएन लड्ढा की खंडपीठ ने मामला रद्द करने की मांग करते हुए आरोपियों द्वारा दायर रिट याचिका में टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया कार्यवाही पूरी तरह से पारिवारिक मतभेदों के कारण शुरू की गई।खंडपीठ ने कहा,“सिर्फ इसलिए कि...

रेलवे सेवा पेंशन नियम | जिस छुट्टी के लिए वेतन देय नहीं, उसे योग्य सेवा में नहीं गिना जाएगा: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
रेलवे सेवा पेंशन नियम | जिस छुट्टी के लिए वेतन देय नहीं, उसे 'योग्य सेवा' में नहीं गिना जाएगा: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि रेलवे सेवा पेंशन नियम 1993 के तहत 'बिना वेतन छुट्टी' (एलडब्ल्यूपी) की अवधि को पेंशन लाभ के लिए अर्हक सेवा (Qualifying Service) के रूप में नहीं गिना जा सकता।हाईकोर्ट ने कहा,"अनुपस्थिति की अवधि, जिसे बिना वेतन छुट्टी के रूप में माना जाता है, नियम 14 (x), (रेलवे सेवा पेंशन नियम, 1993) के तहत कवर नहीं की जा सकती। हालांकि, सवाल यह है कि क्या ऐसी अवधि नियम 36 के तहत कवर की जाएगी। इसे हम पहले ही कर चुके हैं। साथ ही इससे ऊपर माना गया है कि जिस छुट्टी के लिए वेतन देय नहीं...

कर्मचारी सर्विस लिटिगेशन के लिए आरटीआई एक्ट के तहत सहकर्मी के सर्विस रिकॉर्ड की मांग कर सकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्मचारी सर्विस लिटिगेशन के लिए आरटीआई एक्ट के तहत सहकर्मी के सर्विस रिकॉर्ड की मांग कर सकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयुक्त द्वारा पारित वह आदेश रद्द कर दिया है, जिसमें कॉलेज प्रोफेसर द्वारा अपने सहकर्मी के सर्विस रिकॉर्ड विवरण की मांग करने वाला आवेदन खारिज कर दिया गया था।जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की एकल पीठ ने ए एस मल्लिकार्जुनस्वामी द्वारा दायर याचिका स्वीकार कर ली। साथ ही आयोग की याचिका रद्द कर दी, जिसके तहत सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8 (1) (जे) के प्रावधानों का हवाला देते हुए उनके आरटीआई आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया था।एक्ट की धारा 8 (1)(जे) इस प्रकार है: इस...

अन्यथा पात्र अभ्यर्थी को उसकी आसवधानी के कारण अवसर देने से इनकार   करने का कोई कारण नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट ने NEET-PG अभ्यर्थी को जाति सुधारने और कोटा प्राप्त करने की अनुमति दी
अन्यथा पात्र अभ्यर्थी को उसकी आसवधानी के कारण अवसर देने से इनकार करने का कोई कारण नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट ने NEET-PG अभ्यर्थी को जाति सुधारने और कोटा प्राप्त करने की अनुमति दी

कर्नाटक हाईकोर्ट एक 23 वर्षीय छात्रा के पक्ष में आगे आया है। छात्रा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-पीजी (एनईईटी-पीजी) के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आवेदन भरते समय ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित कोटा के तहत अनजाने में अपनी जाति का चयन करने में विफल रही।जस्टिस जी नरेंद्र और जस्टिस विजयकुमार ए पाटिल की खंडपीठ ने डॉ. लक्ष्मी पी गौड़ा द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज को निर्देश दिया कि वह उन्हें आवेदन/स्कोर कार्ड के कॉलम नंबर 7 में प्रविष्टि को सही करने की...

सिविल सेवा परीक्षा 2023: दिल्ली हाईकोर्ट ने सीएसएटी कट-ऑफ में 10% कटौती की मांग वाली याचिका खारिज की
सिविल सेवा परीक्षा 2023: दिल्ली हाईकोर्ट ने सीएसएटी कट-ऑफ में 10% कटौती की मांग वाली याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है, जिसमें सिविल सेवा एप्टीट्यूड टेस्ट 2023 के लिए कट ऑफ को 33% से घटाकर 23% करने का आदेश देने से इनकार कर दिया गया था। रंजन कुमार और अन्य सहित बनाम बिहार राज्य और अन्य, (2014) सहित कई उदाहरणों का जिक्र करते हुए जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस अनूप कुमार मेंड्रियाट्टा की खंडपीठ ने कहा,“ट्रिब्यूनल ने ठीक ही कहा था कि उक्त निर्णय न्यायिक निकायों/मंचों को प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करने से...

मानहानि का मामला| केजरीवाल की पुनर्विचार याचिका स्थानांतरित, गुजरात हाईकोर्ट ने 10 दिन में फैसला करने का निर्देश दिया
मानहानि का मामला| केजरीवाल की पुनर्विचार याचिका स्थानांतरित, गुजरात हाईकोर्ट ने 10 दिन में फैसला करने का निर्देश दिया

गुजरात हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल सेशंस सिटी सिविल कोर्ट, अहमदाबाद को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आप राज्यसभा सांसद संजय सिंह की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका को एक अलग अदालत में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया और अदालत को 10 दिनों के भीतर मामले का फैसला करने का आदेश दिया। स्थानांतरण का कारण यह है कि पुनरीक्षण याचिका पर विचार करने वाला पीठासीन अधिकारी वर्तमान में छुट्टी पर है।दरअसल, केजरीवाल और सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री केजरीवाल पर कथित रूप से कई टिप्पणियां की...

सीपीसी - दस्तावेज़ प्राप्त करने के लिए न्यायालय कोई डाकघर नहीं है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
सीपीसी - दस्तावेज़ प्राप्त करने के लिए न्यायालय कोई डाकघर नहीं है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि यदि प्रतिवादी आदेश VIII नियम 1ए (3) सीपीसी में आवेदन दाखिल करते समय लिखित बयान के साथ दस्तावेज दाखिल करने में विफल रहते हैं तो उन्हें पर्याप्त कारण बताने चाहिए। जस्टिस बीवीएलएन चक्रवर्ती ने कहा कि प्रावधान यह कहता है कि इस नियम के तहत प्रतिवादी द्वारा दस्तावेजों को अदालत में पेश किया जाना चाहिए, लेकिन यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो अदालत की अनुमति के बिना मुकदमा की सुनवाई के दौरान उसकी ओर से साक्ष्य के रूप में प्राप्त नहीं किया जाएगा।कोर्ट ने कहा,“रवि...

ज्ञानवापी मस्जिद के वुज़ुखाना क्षेत्र में शिव लिंग को छोड़कर एएसआई सर्वेक्षण के लिए वाराणसी न्यायालय में आवेदन
ज्ञानवापी मस्जिद के वुज़ुखाना क्षेत्र में 'शिव लिंग' को छोड़कर एएसआई सर्वेक्षण के लिए वाराणसी न्यायालय में आवेदन

वाराणसी ‌स्थित जिला अदालत के समक्ष एक आवेदन दायर किया गया है, जिसमें मांग की गई है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को संरचना को कोई नुकसान पहुंचाए बिना वज़ुखाना क्षेत्र ('शिव लिंग' को छोड़कर) का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है। आवेदन में कहा गया है कि संबंधित संपत्ति के धार्मिक चरित्र का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण आवश्यक है। इसलिए, यह "शिवलिंगम" को छोड़कर संरक्षित क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण/जांच चाहता है।राखी सिंह ने सीपीसी की धारा 75 (ई) और आदेश 26 नियम 10 ए सहपठित धारा 151 के तहत,...

स्वच्छ भारत मिशन: कर्नाटक हाईकोर्ट ने सार्वजनिक शौचालयों के लिए स्वीकृत लगभग 70 लाख की कथित हेराफेरी का मामला रद्द करने से इनकार किया
स्वच्छ भारत मिशन: कर्नाटक हाईकोर्ट ने सार्वजनिक शौचालयों के लिए स्वीकृत लगभग 70 लाख की कथित हेराफेरी का मामला रद्द करने से इनकार किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने जुलाई 2016 और मई 2017 के बीच होन्नल्ली, गुडदानल और याराडोना गांवों की सीमा के भीतर शौचालयों के निर्माण के लिए 'स्वच्छ भारत मिशन परियोजना' के संबंध में स्वीकृत धन के दुरुपयोग के आरोपी सात व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस वेंकटेश नाइक टी की एकल पीठ ने हंपम्मा और अन्य द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 201 के तहत दंडनीय अपराध का आरोप है।पीठ ने कहा,“ रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के अवलोकन से ऐसा प्रतीत होता है कि...

मेडिकल छात्र की मौत: तेलंगाना हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में लागू रैगिंग विरोधी उपायों पर रिपोर्ट मांगी
मेडिकल छात्र की मौत: तेलंगाना हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में लागू रैगिंग विरोधी उपायों पर रिपोर्ट मांगी

तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य भर में स्कूल और कॉलेज परिसरों में रैगिंग को रोकने के लिए किए गए उपायों के बारे में एक हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस टी. विनोद कुमार की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका में यह आदेश पारित किया। यह याचिका काकतीय मेडिकल कॉलेज (केएमसी) के प्रथम वर्ष के छात्र की जाति आधारित रैगिंग और मौत की घटना के बाद अदालत समक्ष सुनवाईके लिए आई।" चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के विद्वान सरकारी वकील...

दत्तपुकुर विस्फोट - पुलिस को जांच पूरी करने के लिए समय दें: कलकत्ता हाईकोर्ट ने एनआईए जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
दत्तपुकुर विस्फोट - 'पुलिस को जांच पूरी करने के लिए समय दें': कलकत्ता हाईकोर्ट ने एनआईए जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को पश्चिम बंगाल के दत्तपुकुर में एक कथित अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोटों की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच की मांग करने वाली भाजपा के सुवेंदु अधिकारी की याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणम और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने जनहित याचिका को अपरिपक्व बताकर खारिज करते हुए कहा:“यह घटना 27 अगस्त 2023 को हुई,आपके प्रतिनिधित्व से ऐसा लगता है जैसे यह 2020 में हुआ था। यह केवल परसों ही हुआ है। तुरंत आप जनहित याचिका दायर कर रहे हैं, क्या करना...

बुजुर्गों के भरण-पोषण के दावे का समर्थन करने के लिए किसी सकारात्मक कानून की आवश्यकता नहीं, चाहे वे किसी भी धर्म के हों: केरल हाईकोर्ट ने सीनियर सिटीजन को राहत दी
बुजुर्गों के भरण-पोषण के दावे का समर्थन करने के लिए किसी सकारात्मक कानून की आवश्यकता नहीं, चाहे वे किसी भी धर्म के हों: केरल हाईकोर्ट ने सीनियर सिटीजन को राहत दी

केरल हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह माना कि अतीत और भविष्य में गुजारा भत्ता देने के लिए सकारात्मक कानून कोई अनिवार्य शर्त नहीं है। इस तरह के गुजारा भत्ते के लिए बुजुर्गों के अधिकार को उनके धर्म की परवाह किए बिना मान्यता दी गई।जस्टिस ए. मुहम्मद मुश्ताक और जस्टिस सोफी थॉमस ने इस प्रकार कहा,“कानून की किसी भी सकारात्मक सहायता के बिना भी अदालत पिछले भरण-पोषण और भविष्य के भरण-पोषण का दावा करने के लिए किसी भी धर्म के बुजुर्ग के अधिकार को मान्यता दे सकती है। केवल इस कारण से कि कानून ने केवल संभावित भरण-पोषण...

किसी महिला का अपमान करना या उसके साथ शिष्ट व्यवहार न करना उसकी गरिमा का हनन नहीं माना जाएगा: दिल्ली हाईकोर्ट
किसी महिला का अपमान करना या उसके साथ शिष्ट व्यवहार न करना 'उसकी गरिमा का हनन' नहीं माना जाएगा: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि किसी महिला का अपमान करना, उसके साथ अशिष्ट व्यवहार करना और उसके साथ शिष्ट व्यवहार न करना, जैसा कि वह किसी से व्यवहार की उम्मीद करती है, भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 509 के अनुसार "महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने" की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आएगा। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा,“अदालतों को आईपीसी की धारा 509 के मामलों का फैसला करते समय, शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि पर भी विचार करना होगा, क्योंकि इससे अदालतों को यह निर्णय लेने में मदद मिल सकती है कि...

सिर्फ न्यायाधीश से तीखी नोकझोंक केस ट्रांसफर करने का कोई आधार नहीं : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
सिर्फ न्यायाधीश से तीखी नोकझोंक केस ट्रांसफर करने का कोई आधार नहीं : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी अदालत के पीठासीन अधिकारी के साथ तीखी बहस ही किसी अन्य अदालत में स्थानांतरण की मांग का कारण नहीं हो सकती। बेंच ने कहा," यह ध्यान में रखना होगा कि बहस के दौरान कई बार भले ही इसकी आवश्यकता न हो, तापमान बहुत अधिक हो जाता है। हालांकि यह अकेले किसी के भी मन में आशंका पैदा करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं होगा।"जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ ने कहा,''पक्षकारों को संबंधित न्यायालय से न्याय नहीं मिलेगा।' 'न्यायालय ने आगे स्पष्ट किया कि साथ ही, यह पीठासीन...

पति को सिर्फ इसलिए पत्नी पर अत्याचार करने और उसे पीटने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वे शादीशुदा हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
पति को सिर्फ इसलिए पत्नी पर अत्याचार करने और उसे पीटने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वे शादीशुदा हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जोड़े की एक दशक पुरानी शादी को खत्म करते हुए कहा है कि कोई भी कानून पति को यह अधिकार नहीं देता है कि वह अपनी पत्नी को केवल इसलिए पीटने और प्रताड़ित करने का अधिकार देता है क्योंकि उन्होंने शादी कर ली है। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने कहा," केवल इसलिए कि दोनों पक्षों ने शादी कर ली है और प्रतिवादी उसका पति है, कोई भी कानून उसे अपनी पत्नी को पीटने और यातना देने का अधिकार नहीं देता है।"कोर्ट ने यह माना कि पति द्वारा शारीरिक उत्पीड़न का शिकार...

बार-बार निषेधाज्ञा आदेश का उल्लंघन करने पर 5 लाख रुपये का भुगतान करें या सिविल जेल का सामना करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने रमाडा के ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में होटल को आदेश दिया
'बार-बार निषेधाज्ञा आदेश का उल्लंघन करने पर 5 लाख रुपये का भुगतान करें या सिविल जेल का सामना करें': दिल्ली हाईकोर्ट ने रमाडा के ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में होटल को आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय आतिथ्य कंपनी रमाडा द्वारा दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन मुकदमे में इसके खिलाफ पारित निषेधाज्ञा आदेश के बार-बार उल्लंघन और "अपमानजनक अवज्ञा" के 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने साथ ही होटल को जुर्माने की 5 लाख रुपये की राशि इसकी रजिस्ट्री में जमा करेने का निर्देश दिया।जस्टिस सी हरि शंकर ने कहा कि यदि राशि जमा नहीं की जाती है तो ला रमाडा वर्ल्ड रिज़ॉर्ट एंड स्पा के निदेशक कुमार संभव को एक सप्ताह की अवधि के लिए सिविल जेल में कैद की सजा भुगतनी होगी।पीठ ने...

क्या कोई दोषी आरटीआई के तहत केस डायरी की कॉपी मांग सकता है? तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
क्या कोई दोषी आरटीआई के तहत केस डायरी की कॉपी मांग सकता है? तेलंगाना हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

तेलंगाना हाईकोर्ट ने इस सवाल का जवाब देने के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है कि क्या कोई दोषी व्यक्ति सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत केस डायरी भाग- I की कॉपी मांग सकता है।जस्टिस बी विजयसेन रेड्डी ने कहा कि अपवाद प्रावधान इस बात को लेकर अस्पष्ट हैं कि क्या दोषी अधिनियम के तहत केस डायरी तक पहुंचने का हकदार है, जिसमें विवरण उनके अपने मामले के बारे में जानकारी है।पीठ ने कहा,“आरटीआई एक्ट की धारा 8 के तहत अपवाद प्रावधान बहुत अस्पष्ट हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि पहले मुझ पर आरोप लगाया गया;...

क्या आप अपनी प्रैक्टिस सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने के इच्छुक हैं? - सुप्रीम कोर्ट लॉयर वेलफेयर ट्रस्ट ने जस्टिस जेएस वर्मा फ़ेलोशिप स्कीम की घोषणा की
क्या आप अपनी प्रैक्टिस सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने के इच्छुक हैं? - सुप्रीम कोर्ट लॉयर वेलफेयर ट्रस्ट ने जस्टिस जेएस वर्मा फ़ेलोशिप स्कीम की घोषणा की

सुप्रीम कोर्ट लॉयर वेलफेयर ट्रस्ट (एससीएलडब्ल्यूटी) ने जस्टिस जेएस वर्मा फैलोशिप की स्थापना करके सुप्रीम कोर्ट में मुकदमेबाजी के क्षेत्र में युवा कानूनी प्रतिभा को पहचानने और बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख प्रैक्टिसिंग सीनियर वकीलों के योगदान से 2008 में स्थापित उक्त ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट के भीतर वकीलों के लिए पेशेवर अवसरों और कल्याण पहलों को समर्थन देने और बढ़ाने के लिए समर्पित है।ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने के इच्छुक योग्य...

कोई आश्चर्य नहीं कि अंबेडकर का जातिविहीन समाज का सपना अभी भी एक सपना है: मद्रास हाईकोर्ट ने नौकरी पाने के लिए गलत कम्युनिटी सर्टिफिकेट हासिल करने वाले लोगों के लिए कहा
कोई आश्चर्य नहीं कि अंबेडकर का 'जातिविहीन समाज' का सपना अभी भी एक सपना है: मद्रास हाईकोर्ट ने नौकरी पाने के लिए गलत कम्युनिटी सर्टिफिकेट हासिल करने वाले लोगों के लिए कहा

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात पर अफसोस जताया कि हालांकि संविधान निर्माताओं ने समतावादी समाज का सपना देखा था, जहां लोगों के साथ उनके धर्म, जाति या लिंग के बावजूद समान व्यवहार किया जाएगा, लेकिन कुछ लोग आज भी रोजगार और शिक्षा प्राप्त करने के लिए झूठे कास्ट सर्टिफिकेट पेश करने में लगे हुए हैं। इस प्रकार योग्य लोगों को अवसर से वंचित किया जा रहा है।जस्टिस एन माला ने कहा कि ऐसे लोगों के कारण ही डॉ. अंबेडकर का जातिविहीन समाज बनाने का सपना अभी भी एक सपना ही है।जस्टिस माला ने टिप्पणी की,“हमारे...

एक बार आरोप तय होने के बाद दोषमुक्ति/दोषी ठहराया जाना चाहिए, सीआरपीसी की धारा 216 आरोप को हटाने की अनुमति नहीं देती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एक बार आरोप तय होने के बाद दोषमुक्ति/दोषी ठहराया जाना चाहिए, सीआरपीसी की धारा 216 आरोप को हटाने की अनुमति नहीं देती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक बार आरोप तय होने के बाद मुकदमे के अंत में आरोपी को या तो बरी होना चाहिए या दोषी ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि सीआरपीसी की धारा 216 आरोप को हटाने की अनुमति नहीं देती।जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने देव नारायण नामक व्यक्ति द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। उक्त पुनर्विचार याचिका में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी), चित्रकूट द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों में बदलाव के लिए...