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यूएपीए | 'आतंकवादी कृत्य के लिए प्रारंभिक कार्रवाई इच्छित परिणाम के निकट होनी चाहिए': मद्रास हाईकोर्ट ने पीएफआई सदस्यों को जमानत दी
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में आठ लोगों को जमानत दे दी, जो कथित तौर पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पदाधिकारी, सदस्य और कैडर थे और उन पर भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी कृत्य की साजिश रचने के लिए गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाया गया था। जस्टिस एसएस सुंदर और जस्टिस सुंदर मोहन की पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा एकत्र किए गए दस्तावेज़ किसी भी अपीलकर्ता को सीधे तौर पर कथित अपराधों से नहीं जोड़ते हैं और इसलिए विशेष अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार करके गलती...
COVID-19 के दौरान आईसीयू ड्यूटी की दहशत से कम उम्र में दिल का दौरा पड़ने का खतरा: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को स्वास्थ्य कार्यकर्ता की पत्नी को मुआवजा जारी करने का आदेश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में माना कि 'एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के लिए बीमा योजना', जो महामारी के दरमियान अग्रिम पंक्ति पर कार्यरत था, की 'राज्य की ओर से व्यापक व्याख्या ' की आवश्यकता है, इसलिए, हाईकोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि जब एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु के समय तक सक्रिय रूप ये COVID-19 ड्यूटी पर था तो प्रधान मंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत अन्य शर्तों और तकनीकीताओं को 'व्यापक रूप से समझा जाना चाहिए'।प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के आवेदन के संबंध में,...
वैवाहिक घर में पत्नी को पति की शर्तों पर रहने के लिए संपत्ति या बंधुआ मजदूर के रूप में नहीं माना जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि वैवाहिक घर में, पत्नी को पति द्वारा लगाई गई शर्तों के तहत रहने के लिए किराए की संपत्ति या बंधुआ मजदूर के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।पीठ ने यह भी कहा कि यदि पति बिना किसी पर्याप्त कारण के पत्नी से उसके साथ के अलावा किसी अन्य स्थान पर रहने की अपेक्षा करता है और यदि पत्नी उसकी मांग का विरोध करती है, तो यह पत्नी द्वारा की गई क्रूरता नहीं होगी।जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस दीपक कुमार तिवारी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्नी की अपने पति से उसे अपने...
आरबीआई ऋणकर्ता के खाते की शेष राशि के बारे में बैंक के ज्ञान, 'क्षतिपूर्ति के अधिकार' के आवेदन का निर्धारण करेगा: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल में माना कि बैंक को वन टाइम सेटलमेंट देते समय ऋणकर्ता के खाते में शेष राशि की जानकारी थी या नहीं, और क्या बैंक 'क्षतिपूर्ति के अधिकार' (Right to Recompense) का प्रयोग कर सकता है, इन सवालों पर बैंक को खुद ही फैसला करना होता है।'क्षतिपूर्ति का अधिकार' एक उपकरण है, जिसका बैंक और वित्तीय संस्थान तनावग्रस्त संपत्तियों (Stressed Assets) के लिए ऋण पर दी गई छूट की रिकवरी के लिए उपयोग करते हैं। जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा कि प्रतिवादी फेडरल बैंक को सिद्ध तथ्यात्मक परिस्थितियों पर...
तेलंगाना हाईकोर्ट पेपरलेस होगा - 1 नवंबर से मामलों के लिए इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट के जुलाई में पेपरलेस प्रणाली में परिवर्तित होने के बाद तेलंगाना हाईकोर्ट भी इसका अनुसरण करने के लिए तैयार है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश 1 नवंबर से पेपरलेस प्रणाली में जाने के लिए तैयार हैं। इस आशय की एक आधिकारिक सूचना प्रकाशित की गई है। सभी पक्षकारों और वकीलों को निर्देश दिया जाता है कि वे प्रथम न्यायालय के समक्ष दायर किए जा रहे मामलों/याचिकाओं की एक सॉफ्ट कॉपी निर्दिष्ट ईमेल पते - tshc.ch1@gmail.com पर ईमेल करें।मामलों/याचिकाओं की सॉफ्ट कॉपी भेजने के बाद वकीलों/पक्षकारों को...
[ओबीसी अधिवक्ता अनुदान योजना] हमें ओबीसी श्रेणी से भी सर्वश्रेष्ठ वकीलों और न्यायाधीशों की आवश्यकता है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को टिप्पणी की कि ओबीसी वर्ग से संबंधित जूनियर वकीलों का समर्थन करना राज्य का कर्तव्य है। हाईकोर्ट ओबीसी अधिवक्ता अनुदान योजना के तहत कानून की किताबें, गाउन और पोशाक/यूनिफॉर्म खरीदने के लिए ओबीसी वर्ग के जूनियर वकीलों को बारह हजार रुपये के वार्षिक अनुदान का दावा करने के लिए अधिसूचना जारी नहीं करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था।जस्टिस देवन रामचंद्रन ने टिप्पणी की कि ओबीसी वर्ग से संबंधित जूनियर वकीलों का समर्थन करना राज्य का कर्तव्य है।उन्होंने कहा, “हमें इन...
न्यूज़क्लिक अरेस्ट केस : दिल्ली कोर्ट ने यूएपीए मामले में एचआर हेड और प्रबीर पुरकायस्थ को 02 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा
दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती को पोर्टल पर चीन समर्थक प्रचार के लिए धन प्राप्त करने के आरोपों के बाद दर्ज यूएपीए मामले में 02 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। पटियाला हाउस कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर ने न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने पर दोनों को अदालत में पेश किए जाने के बाद आदेश पारित किया।दिल्ली पुलिस ने पुरकायस्थ और चक्रवर्ती के लिए 9 दिन की कस्टडी रिमांड मांगी थी।इससे पहले दोनों को सात दिन की पुलिस...
पैरोल पर फरार होने की संभावना मात्र अस्थायी रिहाई को अस्वीकार करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या के लिए दोषी ठहराए गए और आजीवन कारावास की सजा पाए एक व्यक्ति को यह कहते हुए पैरोल दे दी कि कैदी के फरार होने की संभावना अस्थायी रिहाई को अस्वीकार करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। जस्टिस लिसा गिल और जस्टिस रितु टैगोर की खंडपीठ ने इस बात पर जोर दिया कि पैरोल पर फरार होने की संभावना ही इनकार के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, क्योंकि यह राज्य की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरे का संकेत नहीं देता है।बेंच ने कहा,"पैरोल पर रहते हुए फरार होने की...
गुजरात हाईकोर्ट के सीनियर जज ने ओपन कोर्ट में तीखी नोकझोंक के लिए साथी जज से मांगी माफी, कहा- 'मैं गलत था, ऐसा नहीं होना चाहिए था'
गुजरात हाईकोर्ट के जज, जस्टिस बीरेन वैष्णव ने ओपन कोर्ट में वकीलों और स्टाफ सदस्यों की उपस्थिति में साथी जज से माफी मांगी।जस्टिस बीरेन वैष्णव की सोमवार को एक मामले पर सुनवाई के बाद आदेश पारित करते वक्त जस्टिस मौना एम. भट के साथ तीखी नोकझोंक हो गई थी।जस्टिस वैष्णव ने ओपन में कहा,"सोमवार को जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था। मैं गलत था। मुझे इसके लिए खेद है। हम नया सत्र शुरू कर रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए था। यह सिर्फ इतना है, मुझे नहीं पता... मैं गलत था।"खंडपीठ के सीनियर जज, जस्टिस वैष्णव की सोमवार...
सीपीसी की धारा 19 के तहत 'गलत किया गया' कृत्य और उसके प्रभाव दोनों शामिल हैं: केरल हाईकोर्ट ने कहा- स्थानीय अदालत दिल्ली में मरने वाली नौकरानी की मां को राहत दे सकती है
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि केरल में उप-न्यायालय के पास दिल्ली में हुई गलती की भरपाई के लिए मुकदमा चलाने का क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार है, क्योंकि सीपीसी की धारा 19 के तहत "गलत किए गए" की व्यापक व्याख्या के अनुसार, इसके प्रभाव केरल में क्षेत्राधिकार स्थापित करने को गलत ठहराया, जहां वादी रहता है।जस्टिस बसंत बालाजी ने कहा कि यद्यपि महिला की मृत्यु दिल्ली में न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में हुई थी, लेकिन उस मृत्यु का प्रभाव केरल में अपीलकर्ता-मां को महसूस हुआ, जिसने अपनी बेटी और अपने परिवार...
नाइजीरियाई दूतावास को नाइजीरिया में पति की मौत के लिए मुआवजे का दावा करने वाली महिलाओं के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने की सुनवाई, केंद्र सरकार को दिया यह निर्देश
मद्रास हाईकोर्ट हाल ही में नाइजीरिया में अपने पतियों की मृत्यु के लिए मुआवजे का दावा करने वाली दो तमिल महिलाओं की सहायता के लिए आया।जस्टिस बी पुगलेंधी ने कहा कि अदालत कोई सकारात्मक निर्देश जारी करने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि विदेश में मरने वाले भारतीय नागरिकों को राहत दिलाने के लिए प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी सार-संग्रह में नाइजीरिया को शामिल नहीं किया गया। हालांकि, यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता युवा गरीब विधवाएं हैं, जो नाइजीरिया में मुकदमे नहीं लड़ सकतीं, अदालत ने केंद्र...
हाईकोर्ट ने 26 साल बाद बेटे को दिया फ्लैट का कब्जा, डीडीए द्वारा 1996 में पिता को किया गया था आवंटित
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में डीडीए का रद्दीकरण आदेश रद्द कर दिया। उक्त फ्लैट डीडीए द्वारा बेटे के पिता को 1996 में आवंटित किया गया था। अब हाईकोर्ट ने निर्देश दिया गया कि इसे आवंटी के बेटे (याचिकाकर्ता) को सौंप दिया जाए।जस्टिस जसमीत सिंह ने याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय लेते हुए कहा कि प्राधिकरण द्वारा आवंटन रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है, क्योंकि पहले से कोई कारण बताओ/समाप्ति नोटिस नहीं दिया गया था।1979 में आवंटी/याचिकाकर्ता के पिता ने फ्लैट के आवंटन के लिए डीडीए को...
ग्रेजुएट होने के बावजूद क्या पत्नी केवल पति से भरण-पोषण का दावा करने के लिए जानबूझ कर काम नहीं कर रही है? दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि पत्नी के पास ग्रेजुएट की डिग्री है, यह नहीं माना जा सकता कि वह जानबूझकर पति से अंतरिम भरण-पोषण का दावा करने के इरादे से काम नहीं कर रही है, खासकर जब वह पहले कभी नियोजित नहीं थी।जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने पत्नी को दिए गए अंतरिम भरण-पोषण को कम करने से इनकार करते हुए कहा:“इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पत्नी ग्रेजुएट है और उसके पास डिग्री भी है, लेकिन उसे कभी भी लाभप्रद नौकरी नहीं मिली। इसका कोई निष्कर्ष नहीं निकाला...
जबरदस्ती कैरी बैग देने के लिए आइकिया पर उपभोक्ता अदालत ने लगाया जुर्माना, कहा- बड़े मॉल द्वारा ग्राहक को कैरी बैग न ले जाने देना हैरानी भरा
बेंगलुरु की उपभोक्ता अदालत ने आइकिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया कि वह अपने ग्राहक को कैरी बैग देने के लिए ली गई 20 रुपये की राशि ब्याज सहित वापस करे और शिकायतकर्ता को हुए उत्पीड़न और मानसिक पीड़ा के लिए 1000 रुपये का मुआवजा दे।उपभोक्ता अदालत के प्रेसीडेंट बी नारायणप्पा की अध्यक्षता वाली पीठ ने ग्राहकों को स्टोर से अपनी खरीदारी ले जाने के लिए अपने बैग का उपयोग करने की अनुमति नहीं देकर बड़े मॉल और शोरूम द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा के स्तर पर आश्चर्य व्यक्त किया।उन्होंने कहा,"यदि...
शपथ ग्रहणकर्ता या ऑफिशियल ट्रांसलेटर द्वारा प्रमाणित अंग्रेजी ट्रांसलेशन की कॉपी ए एंड सी एक्ट की धारा 47(2) का पर्याप्त अनुपालन है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने माना कि किसी ऑफिशियल ट्रांसलेटर द्वारा प्रमाणित अंग्रेजी ट्रांसेलशन की कॉपी दाखिल करना ए एंड सी एक्ट की धारा 47 (2) की आवश्यकता को पूरा करता है, जो यह प्रावधान करता है कि यदि कोई अवार्ड किसी विदेशी भाषा में है तो अवार्ड की ट्रांसलेटिड कॉपी विदेशी अवार्ड के प्रवर्तन के उद्देश्य से दायर की जानी है और इसे अवार्ड धारक के देश के कांसुलर या राजनयिक एजेंट द्वारा प्रमाणित किया जाना है।जस्टिस रजनेश ओसवाल की पीठ ने न्यूयॉर्क कन्वेंशन के अनुच्छेद V के प्रावधान को ए एंड सी एक्ट...
डॉक्टर बिना जांच के मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- मेडिकल काउंसिल के रोल से उनका नाम हटाना एकमात्र जुर्माना नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 डॉक्टरों द्वारा अनुचित तरीके से मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने के खिलाफ दायर चुनौती में हाल ही में माना कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के रजिस्टर (एमसीआई रोल) के रोल से उनके नाम हटाना एकमात्र सजा नहीं थी जो दी जा सकती।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने इंडियन मेडिकल काउंसिल (व्यावसायिक आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 के विनियम 7.7 और 8.2 की व्याख्या करते हुए कहा कि अनुचित सर्टिफिकेट जारी करने के लिए एमसीआई रोल से डॉक्टर का नाम हटाना केवल संभावित दंडों में से एक था, लेकिन केवल...
भीमा कोरेगांव: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी कवि वरवर राव को मोतियाबिंद सर्जरी के लिए हैदराबाद जाने की अनुमति दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अस्सी वर्षीय तेलुगु कवि वरवर राव को अपनी आंख की मोतियाबिंद की सर्जरी कराने के लिए सात दिनों के लिए हैदराबाद जाने की अनुमति दे दी।जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस श्याम चांडक ने राव से दूसरी आंख की सर्जरी कराने के लिए ट्रायल कोर्ट से नए सिरे से अनुमति मांगने को कहा।अनुमति देने से इनकार करने वाले विशेष एनआईए अदालत के आदेश के खिलाफ राव ने नवंबर 2022 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।कवि कथित माओवादी संबंधों को लेकर यूएपीए के तहत आरोपों का सामना कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त 2022...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यूएपीए मामले में बच्चे के साथ हिरासत में ली गई महिला को जमानत दी, कहा कि उसके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महिला को जमानत दे दी, जिसे उसके पति के प्रकटीकरण बयान के आधार पर 2022 में कठोर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत हिरासत में लिया गया था। विजय सिंह ने कहा कि उसकी पत्नी सुखप्रीत कौर अवैध गतिविधियों में उसका साथ देती थी। सिंह ने अपने प्रकटीकरण बयान में कहा कि उसे सीमा क्षेत्र से एक पार्सल एकत्र किया जिसमें एक हथगोला, एक पिस्तौल और अन्य विस्फोटक थे।जब अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया तो कौर गर्भावस्था के अंतिम चरण में थी और उसने जेल में बच्चे को...
[सीआरपीसी की धारा 323] मजिस्ट्रेट को मामले को सत्र न्यायालय में सौंपने के कारणों को रिकॉर्ड करना चाहिए: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना कि सीआरपीसी की धारा 323 के तहत जांच/मुकदमा शुरू होने के बाद किसी मामले को सत्र न्यायालय में सौंपने की शक्ति का इस्तेमाल मजिस्ट्रेट द्वारा स्पीकिंग ऑर्डर के माध्यम से कारण दर्ज करने के बाद ही किया जा सकता है।जस्टिस पी.वी. कुन्हिकृष्णन ने देखा,"चूंकि सीआरपीसी की धारा 323 में "यह उसे किसी भी स्तर पर प्रतीत होता है .........." शब्द का उपयोग किया जाता है, इसलिए यह स्पष्ट है कि जब कोई मजिस्ट्रेट सीआरपीसी की धारा 323 के तहत शक्तियों का प्रयोग करता है, इसका कारण भी दर्ज किया जाना...
केवल पत्नी की दलीलों में दोष बताकर पति भरण-पोषण के दायित्व से नहीं बच सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता-पति द्वारा दायर आपराधिक पुनर्विचार आवेदन खारिज करते हुए रेखांकित किया कि भरण-पोषण का दावा करने वाली निराश्रित पत्नी को केवल उसकी दलीलों में दोषों के आधार पर पीड़ित नहीं किया जा सकता है। पति ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने सीआरपीसी की धारा 127 के तहत भरण-पोषण राशि कम करने के उसके आवेदन को खारिज कर दिया था।जस्टिस प्रेम नारायण सिंह की एकल न्यायाधीश पीठ ने सुनीता कछवाहा एवं अन्य बनाम अनिल कछवाहा, (2015) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र...






![[ओबीसी अधिवक्ता अनुदान योजना] हमें ओबीसी श्रेणी से भी सर्वश्रेष्ठ वकीलों और न्यायाधीशों की आवश्यकता है: केरल हाईकोर्ट [ओबीसी अधिवक्ता अनुदान योजना] हमें ओबीसी श्रेणी से भी सर्वश्रेष्ठ वकीलों और न्यायाधीशों की आवश्यकता है: केरल हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2023/07/04/500x300_479492-750x450458500-394130-advocates-lawyers.jpg)












![[सीआरपीसी की धारा 323] मजिस्ट्रेट को मामले को सत्र न्यायालय में सौंपने के कारणों को रिकॉर्ड करना चाहिए: केरल हाईकोर्ट [सीआरपीसी की धारा 323] मजिस्ट्रेट को मामले को सत्र न्यायालय में सौंपने के कारणों को रिकॉर्ड करना चाहिए: केरल हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2023/06/23/500x300_478041-750x450455828-414005-justice-pv-kunhikrishnan-and-kerala-hc1.jpg)
