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कोर्ट यह तय नहीं कर सकता कि सावरकर बहादुर थे या कायर: राहुल गांधी के ट्रायल पर रोक के लिए हाईकोर्ट में याचिका

पुणे स्पेशल MP/MLA कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि के मामले में दखल देने की पंकज फड़नीस की अर्जी खारिज की थी। यह मामला दक्षिणपंथी विचारक विनायक सावरकर की कथित तौर पर बदनामी करने से जुड़ा है। इसके बाद फड़नीस ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। उनका दावा है कि स्पेशल कोर्ट अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर के मुद्दों पर विचार कर रही है और यह तय करने की कोशिश कर रही है कि सावरकर बहादुर थे या कायर।पेशे से प्रोफेसर फड़नीस, जिनका दावा है कि उन्हें सावरकर के जीवन के बारे में...

लिव-इन रिलेशनशिप शादी जैसा ही, अपनी मर्ज़ी से साथ रहने वाले बालिग़ों को पुलिस सुरक्षा का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप शादी के समान ही होते हैं, भले ही उन्हें कानूनी तौर पर शादी न माना गया हो। ऐसे रिश्तों में रहने वाले बालिग़ों को पुलिस सुरक्षा पाने का अधिकार है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों को भारत के संविधान के आर्टिकल 19 और 21 के तहत आज़ादी, जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार मिलते हैं।कोर्ट ने कहा कि अपनी मर्ज़ी से साथ रहने वाले बालिग़ों को अपना पार्टनर चुनने और उनके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का पूरा अधिकार है, जिसमें...

छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा गैर-कानूनी हिरासत और मारपीट का आरोप: पटना हाईकोर्ट पहुंचा वकील

पटना हाईकोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर की। उनका आरोप है कि पटना के गांधी मैदान के पास विरोध कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के दौरान जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से संयम बरतने का अनुरोध किया, तो उन्हें गैर-कानूनी तरीके से पकड़ा गया, उनके साथ मारपीट की गई और लगभग 31 घंटे तक हिरासत में रखा गया।याचिकाकर्ता आदिल हुसैन ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (आदेश) की मांग की है ताकि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया जा सके।...

BNSS, UAPA के तहत हिरासत की अवधि को 90 दिनों तक सीमित नहीं करता: हाईकोर्ट का लाल किला बम धमाका आरोपी को डिफ़ॉल्ट ज़मानत देने से इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (18 अगस्त) को जसीर बिलाल वानी उर्फ़ दानिश को डिफ़ॉल्ट ज़मानत देने से इनकार किया। वह 10 नवंबर, 2025 को लाल किले के पास हुई कार में धमाके के आरोपियों में से एक है, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी।'लेजिस्लेशन बाय रेफरेंस' (कानून के संदर्भ का सिद्धांत) को लागू करते हुए कोर्ट ने कहा कि UAPA की धारा 43(D)(2) पर लागू होने वाली CrPC की धारा 167 को BNSS की धारा 187 के तौर पर समझा जाना चाहिए।बता दें, UAPA की धारा 43D(2) के पहले प्रावधान के तहत हिरासत की अवधि को 180 दिनों तक...

NDPS मामले में मथुरा SSP ने आरोपियों के खिलाफ CCTV में दिखाई फर्जी बारदमगी, हाईकोर्ट ने कहा- गंभीर मामला, किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के SSP को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। यह आदेश NDPS मामले के दो आरोपियों द्वारा पेश किए गए CCTV फुटेज के आधार पर दिया गया, जिससे कोर्ट को प्रथम दृष्टया लगा कि उनके खिलाफ "फर्जी बरामदगी" दिखाई गई।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने इस मामले को "बहुत गंभीर" बताया और SSP को निर्देश दिया कि वे आवेदकों द्वारा लगाए गए आरोपों का बिंदुवार (para-wise) जवाब दें।यह आदेश आरोपी पिंकू और नरेश शर्मा द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के...

पत्नी के रंग-रूप, कम IQ और बातचीत के कौशल को लेकर ताने मारना मात्र IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ क्रूरता का मामला रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी के रंग-रूप, कम IQ और बातचीत के खराब कौशल को लेकर ताने मारने के आरोप, अकेले IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए काफी नहीं हैं।संदर्भ के लिए, IPC की धारा 498A में क्रूरता को इस तरह परिभाषित किया गया: a) ऐसा कोई जानबूझकर किया गया व्यवहार जिससे महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो सकती है या उसके शरीर या स्वास्थ्य को गंभीर चोट पहुँच सकती है, या b) उसे या उसके रिश्तेदारों को दहेज...

AAP MLA कुलदीप कुमार की कथित गैर-कानूनी हिरासत का मामला दिल्ली हाईकोर्ट ने बंद किया, पुलिस ने कहा- उन्हें रिहा कर दिया गया

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (18 अगस्त) को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कुलदीप कुमार की कथित गैर-कानूनी हिरासत के मामले में दायर 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को बंद कर दिया। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि उन्हें उसी दिन पहले ही रिहा कर दिया गया।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने गौर किया कि कुमार को 18 अगस्त को दोपहर करीब 3:48 बजे रिहा कर दिया गया और कहा कि उनकी रिहाई के साथ ही इस याचिका का मकसद पूरा हो गया।इस मामले का ज़िक्र सीनियर एडवोकेट शादान फरासत...

अनुकंपा नियुक्ति पॉलिसी में लड़के-लड़की के बीच फ़र्क नहीं किया जाता, पहला बच्चा का मतलब- सबसे पहले पैदा हुआ बच्चा: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य की अनुकंपा आधार पर नौकरी देने की पॉलिसी में मृतक कर्मचारी के बेटे और बेटी के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता है और यह सख्ती से 'पहले बच्चे' पर लागू होती है। [2026 LiveLaw (MP) 325]जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डिवीज़न बेंच ने मृतक कर्मचारी के इकलौते बेटे की हमदर्दी के आधार पर नौकरी की मांग को खारिज करते हुए कहा:"ऊपर बताई गई क्लॉज़ (धारा) लड़कियों और लड़कों के बीच कोई भेदभाव नहीं करती या कोई अलग वर्ग नहीं बनाती; यह सख्ती से 'पहले बच्चे' का...

पुणे कोर्ट में बोले सावरकर के रिश्तेदार: महात्मा गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे RSS के सक्रिय सदस्य थे

दक्षिणपंथी विचारक विनायक सावरकर की कथित तौर पर बदनामी करने के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि के मुकदमे में एक अहम मोड़ आया। सावरकर के पोते (भाई के पोते) सत्याकी ने पुणे की एक विशेष MP/MLA कोर्ट को बताया कि उनके नाना गोपाल गोडसे और नाथूराम गोडसे - जिन्होंने 1948 में महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 'सक्रिय' सदस्य थे।सत्याकी ने गांधी पर लंदन में भाषण देकर अपने दादा के भाई (ग्रैंड-अंकल) सावरकर की बदनामी करने का आरोप...

अगर आर्थिक निर्भरता साबित हो जाए तो मृतक के ससुराल पक्ष के भाई-बहन आश्रित के तौर पर दुर्घटना का मुआवज़ा दावा कर सकते हैं: सिक्किम हाईकोर्ट

सिक्किम हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुआवज़े का दावा करने के लिए मृतक के ससुराल पक्ष के भाई-बहनों को 'आश्रित' माना जा सकता है, बशर्ते सबूतों से उनकी आर्थिक निर्भरता साबित हो जाए।कोर्ट ने कहा कि निर्भरता तय करने का कोई तय नियम नहीं है और हर मामले में फ़ैसला तथ्यों और सबूतों के आधार पर किया जाना चाहिए।चीफ़ जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक ने कहा:“इसमें कोई शक नहीं कि दावा करने वाले 'कानूनी प्रतिनिधि' (लीगल रिप्रेजेंटेटिव) की परिभाषा में आते हैं। सवाल यह है कि क्या दावा करने वालों को मृतक...

राहुल गांधी के ख़िलाफ़ मानहानि का मामला: पुणे कोर्ट ने सावरकर के जानकार होने का दावा करने वाले रिसर्चर की दखल देने की अर्ज़ी ठुकराई

पुणे की स्पेशल MP/MLA कोर्ट ने शुक्रवार (14 अगस्त) को पंकज फड़नीस की अर्ज़ी खारिज की। फड़नीस खुद को दक्षिणपंथी विचारक विनायक सावरकर के जीवन का 'जानकार' बताते हैं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ख़िलाफ़ चल रहे आपराधिक मानहानि के मामले में दखल देना चाहते थे।बता दें, सावरकर के पोते (भाई के पोते) सत्याकी ने लंदन में भाषण के दौरान सावरकर की कथित तौर पर बदनामी करने के लिए गांधी के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया। स्पेशल कोर्ट में गांधी के वकील मिलिंद पवार उनसे जिरह (cross-examination) कर रहे...