मुख्य सुर्खियां
BJP का टिकट पाने के लिए व्यक्ति ने योगी आदित्यनाथ के नाम से PM Modi को लिखा पत्र, कोर्ट ने ठहराया दोषी
दिल्ली कोर्ट ने एक व्यक्ति को दोषी ठहराया। उस पर आरोप था कि उसने 2019 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में BJP का टिकट पाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी गई एक कथित सरकारी चिट्ठी में हेराफेरी की थी।राउज़ एवेन्यू कोर्ट की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियरी मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी ने कहा कि मनगढ़ंत सरकारी कामों में सरकारी अधिकारियों के नामों का गलत इस्तेमाल "जनता के भरोसे की बुनियाद पर ही चोट करता है।"जज ने कहा,"सरकारी अधिकारियों के नामों के...
हिरासत में मौत का मामला: मदुरै कोर्ट ने सभी नौ पुलिस अधिकारियों को सुनाई मौत की सज़ा
मदुरै की पहली एडिशनल ज़िला और सेशन कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को, 2020 में साथनकुलम में पिता-पुत्र जयराज और बेनिक्स की हत्या के दोषी पाए गए सभी नौ पुलिस अधिकारियों को मौत की सज़ा सुनाई।जज जी. मुथुकुमारन ने टिप्पणी की कि यह दुर्लभ मामला था, जहां पुलिस अधिकारी, जिनका फ़र्ज़ क़ानून-व्यवस्था बनाए रखना था, उन्होंने ख़ुद ही क़ानून के ख़िलाफ़ काम किया और पिता-पुत्र पर बेरहमी से हमला किया, जिनके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। अदालत ने अधिकारियों को मृतकों के परिवार को कुल 1.40 करोड़ रुपये का...
शराब नीति मामला: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग वाली केजरीवाल की याचिका पर नोटिस जारी
दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की उस अर्जी पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने शराब नीति मामले से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने की मांग की थी।दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को CBI को नोटिस जारी किया। यह नोटिस दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल की उस अर्जी पर जारी किया गया, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के मामले से हटने की मांग की थी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा अभी CBI की उस याचिका पर सुनवाई कर रही हैं, जिसमें कथित शराब नीति...
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री का वादा, पॉलिसी के बिना कानूनी तौर पर लागू नहीं होगा: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि किसी मुख्यमंत्री द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया कोई आश्वासन या वादा, किसी औपचारिक पॉलिसी या कानूनी आधार के बिना कानूनी तौर पर लागू होने वाला वादा नहीं माना जा सकता।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीज़न बेंच ने कहा कि अगर कोई कानूनी ज़िम्मेदारी मौजूद नहीं है तो ऐसे वादे को 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (आदेशिका) के ज़रिए लागू नहीं करवाया जा सकता।कोर्ट ने ये टिप्पणियां तब कीं, जब उसने एक सिंगल जज का आदेश रद्द किया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद...
X अकाउंट ब्लॉकिंग पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त: 'डॉ. निमो यादव' और 'नेहर हू' अकाउंट तुरंत बहाल करने का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ब्लॉक किए गए दो अकाउंट डॉ. निमो यादव और नेहर हू को तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि पूरे अकाउंट को ब्लॉक करना उचित नहीं है। हालांकि विवादित पोस्ट फिलहाल ब्लॉक रहेंगे।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने यह आदेश प्रकरण की सुनवाई के दौरान पारित किया। यह याचिका डॉ. निमो यादव नाम से संचालित पैरोडी अकाउंट के संचालक प्रतीक शर्मा की ओर से दायर की गई। इसी तरह कुमार नयन द्वारा संचालित नेहर हू अकाउंट के मामले में भी अदालत ने समान राहत दी।सुनवाई...
केजरीवाल के किराया माफी बयान को लागू कराने से इनकार: दिल्ली हाईकोर्ट ने सिंगल जज का आदेश पलटा
दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस बयान को कानूनी रूप से लागू कराने से इनकार किया, जिसमें उन्होंने कोविड लॉकडाउन के दौरान गरीब किरायेदारों का किराया सरकार द्वारा देने की बात कही थी।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने सिंगल जज के आदेश को संशोधित करते हुए कहा कि इस तरह के बयान को लागू कराने के लिए अदालत कोई निर्देश (मैंडेमस) जारी नहीं कर सकती। कोर्ट ने याचिका को भ्रमित बताते हुए खारिज किया।अदालत ने स्पष्ट कहा,“मुख्यमंत्री द्वारा प्रेस...
मृत व्यक्ति के खिलाफ अपील दाखिल करने पर फटकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार की अपील खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर लापरवाही का मामला सामने आने पर उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने उस अपील को खारिज किया, जो सरकार ने ऐसे व्यक्ति के खिलाफ दाखिल की थी, जिसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है और उसके कानूनी वारिसों को पक्षकार भी नहीं बनाया गया।जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि राज्य की ओर से अपील दाखिल करने में घोर लापरवाही बरती गई और केवल यह कहकर देरी को माफ नहीं किया जा सकता कि अपील दाखिल करने की अनुमति देर से मिली।अदालत ने टिप्पणी की,“राज्य की ओर से मृत प्रतिवादी के खिलाफ अपील दाखिल...
हैबियस कॉर्पस का इस्तेमाल पति को पेश कराने के लिए नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मेंटेनेंस (भरण-पोषण) के मामले में वारंट से बच रहे पति को कोर्ट में पेश कराने के लिए हैबियस कॉर्पस याचिका का उपयोग नहीं किया जा सकता।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संबंधित फैमिली कोर्ट को ही आवश्यक कठोर (coercive) कदम उठाने का अधिकार है।मामला क्या था?आजमगढ़ की फैमिली कोर्ट ने जनवरी 2021 में पति को पत्नी और बेटी को भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। लेकिन पति भुगतान से बच रहा था और उसके खिलाफ वारंट जारी होने के...
चुनावी कार्य में लगे अधिकारी का बिना अनुमति ट्रांसफर अवैध: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे अधिकारी का Election Commission of India की पूर्व अनुमति के बिना किया गया तबादला अवैध और मनमाना है।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने कहा कि Representation of the People Act, 1950 की धारा 13CC के तहत चुनावी कार्य में लगे अधिकारी उस अवधि में चुनाव आयोग के नियंत्रण में होते हैं, इसलिए उनका ट्रांसफर बिना अनुमति नहीं किया जा सकता।क्या था...
शराब नीति मामले से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने के लिए फिर से हाईकोर्ट पहुंचे अरविंद केजरीवाल
आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में नई अर्जी दाखिल की। इस अर्जी में उन्होंने मांग की कि कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में उनकी रिहाई को चुनौती देने वाली सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटा दिया जाए।इस अर्जी पर जस्टिस शर्मा द्वारा सोमवार को सुनवाई होने की संभावना है। CBI द्वारा दाखिल मुख्य याचिका भी जज के सामने आइटम नंबर 50 पर लिस्टेड है।खास बात यह है कि यह अर्जी केजरीवाल ने खुद दाखिल...
यूपी ज़मींदारी उन्मूलन अधिनियम की धारा 122-B (4-F) की शर्तें पूरी होने पर भी भूमिधर का दर्जा नहीं बदला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिर से दोहराया कि अगर यूपी ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 122-B (4-F) के तहत दी गई शर्तें पूरी होती हैं तो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति (जैसा भी मामला हो) से संबंधित मज़दूर को उस ज़मीन का भूमिधर माना जाएगा, और किसी भी अधिकारी द्वारा इस भूमिधरी की समीक्षा नहीं की जा सकती।यूपी ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 122-B(4-F) में यह प्रावधान है कि जहां कोई भी कृषि मज़दूर, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित है, 13.05.2007 से पहले से ही...
दीवानी मामलों के लिए पुलिस के पास जाने की प्रवृत्ति कानून के शासन को कमज़ोर करती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'दिखावटी' FIRs की कड़ी आलोचना की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात को 'परेशान करने वाला' बताया कि जनता दीवानी मामलों के समाधान के लिए पुलिस और कलेक्टरों के पास जाती है, क्योंकि यह प्रवृत्ति कानून के शासन की बुनियाद को कमज़ोर करती है। ऐसे मामलों में समाधान के लिए उन गैर-कानूनी एजेंसियों को बढ़ावा देती है, जिनका उन मामलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होता।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दलजीत सिंह और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका की सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।उनकी याचिका में...
जज की कुर्सी पर बैठकर गाना बजाते हुए दिया पोज़: राजस्थान हाईकोर्ट ने वायरल वीडियो पर भेजा अवमानना का नोटिस, कहा- कोर्टरूम या क्लब?
राजस्थान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का कड़ा संज्ञान लिया। इस वीडियो में बीकानेर के एक ग्राम न्यायालय के अंदर दो लोग जज की कुर्सी पर बैठे हुए और गाने बजाते हुए दिखाई दे रहे हैं।जस्टिस संदीप शाह की बेंच ने तीन लोगों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए नोटिस जारी किया।यह मामला तब सामने आया, जब बीकानेर के ग्राम न्यायालय के जज ने हाईकोर्ट को औपचारिक पत्र (10 मार्च, 2026 का) भेजा।इस पत्र में हाईकोर्ट को बताया गया कि जब स्थानीय अदालत बंद थी, तब दो लोग तीसरे...
CPF विकल्प चुनने के बाद CCS नियमों के तहत पेंशन का दावा करने के लिए इसे बदला नहीं जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
जस्टिस संजीव नरूला की अध्यक्षता वाली दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच ने फैसला सुनाया कि कोई भी कर्मचारी जिसने CPF योजना के तहत बने रहने का विकल्प चुना है, वह बाद में CCS पेंशन नियमों के तहत पेंशन लाभों का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि 'मानित रूपांतरण' (Deemed Conversion) केवल वहीं लागू होता है जहाँ कोई विकल्प नहीं चुना गया।पृष्ठभूमि के तथ्ययाचिकाकर्ता एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल (EIC) और एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन एजेंसियों (EIAs) के पूर्व कर्मचारियों का एक समूह हैं। उन्होंने केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम,...
पदोन्नति के लिए कर्मचारियों से सीधे संवाद की जगह सार्वजनिक विज्ञापन नहीं ले सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीज़न बेंच ने यह फ़ैसला दिया कि विभागीय ज़रूरतों के लिए कर्मचारियों से सीधे संवाद की जगह सार्वजनिक विज्ञापन नहीं ले सकते, और बिना उचित सूचना के योग्य कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित करना मनमाना है। आगे यह भी कहा गया कि प्रभावित कर्मचारी उस तारीख से पिछली तारीख से पदोन्नति के हकदार हैं, जिस तारीख को उनके जूनियर कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई।पृष्ठभूमि के तथ्यये कर्मचारी झारखंड सरकार के सड़क निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर...
BSF के कॉम्बैट पदों पर तैनात जवान 57 साल की उम्र में रिटायर होंगे, 60 साल की सिविलियन रिटायरमेंट उम्र का दावा नहीं कर सकते - दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस अनिल क्षेतर्पाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीज़न बेंच ने फैसला सुनाया कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) में किसी कॉम्बैट पद पर दोबारा नियुक्त किया गया कोई पूर्व सैनिक, जो उस कॉम्बैट कैडर के लाभों का आनंद लेता है, BSF की 57 साल की वैधानिक रिटायरमेंट उम्र के अधीन होगा, न कि सिविलियन पदों पर लागू 60 साल की रिटायरमेंट उम्र के।पृष्ठभूमि के तथ्यप्रतिवादी को 31 अगस्त, 1990 को भारतीय वायु सेना से सेवामुक्त कर दिया गया। इसके बाद 13 दिसंबर, 1991 को उसे BSF की एयर विंग में सब-इंस्पेक्टर...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (30 मार्च, 2026 से 03 अप्रैल, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।पार्टियां सिंगल जज के सामने यह मान लेने के बाद कि मामला किसी बाध्यकारी मिसाल के दायरे में आता है, इंट्रा-कोर्ट अपील में उन मुद्दों को दोबारा नहीं उठा सकतीं: पटना हाईकोर्ट पटना हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि एक बार जब पार्टियाँ सिंगल जज के सामने यह मान लेती हैं कि कोई मुद्दा किसी बाध्यकारी मिसाल से पहले...
एपस्टीन फाइल्स केस: हरदीप पुरी की बेटी के मानहानि केस में रोक के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा एक्टिविस्ट
रायपुर के सोशल एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट में रोक लगाने वाले आदेश को चुनौती दी। इस आदेश में उन्हें और कई अन्य लोगों को उन पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया गया, जिनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को अमेरिकी फाइनेंसर और बच्चों के यौन शोषण के दोषी जेफरी एपस्टीन से जोड़ा गया।इस मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच करेगी।इसे "मुकदमे से पहले का एकतरफ़ा रोक आदेश" बताते हुए शुक्ला ने अपनी अपील में कहा कि उन्होंने जो जानकारी...
S. 35 BNSS | पेशी का नोटिस फिजिकली ही दिया जाना चाहिए, WhatsApp या ईमेल मान्य तरीके नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि धारा 35(3) पुलिस को यह अधिकार नहीं देती कि वह WhatsApp या ईमेल के ज़रिए गिरफ्तारी से पहले का नोटिस या FIR की कॉपी भेजे। कोर्ट ने साफ किया कि गिरफ्तारी से पहले के चरण में नोटिस को फिजिकली (व्यक्तिगत रूप से) देना अनिवार्य है, जैसा कि विधायिका का इरादा था।जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भरोसा करते हुए यह माना कि BNSS की धारा 35 [CrPC की धारा 41A] के तहत नोटिस का इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा जाना अमान्य है, जैसा कि...
NBW पर IO को सस्पेंड करना भारी पड़ा: हाईकोर्ट ने बस्ती SP को दी अवमानना की चेतावनी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती के पुलिस अधीक्षक द्वारा एक जांच अधिकारी को निलंबित किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना करार दिया।बता दें, यह मामला उस समय सामने आया, जब जांच अधिकारी ने आरोपियों की पेशी सुनिश्चित कराने के लिए गैर-जमानती वारंट प्राप्त किया था।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि एसपी द्वारा जारी निलंबन आदेश अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2, बस्ती के आदेश की अवहेलना जैसा प्रतीत होता है। मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी के आवेदन पर...




















