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पीड़ित को भी निष्पक्ष जांच और सुनवाई का मौलिक अधिकार है: राजस्थान हाईकोर्ट ने चौथी बार जांच स्थानांतरित करने के डीजीपी के निर्देश को रद्द कर दिया
पीड़ित को भी निष्पक्ष जांच और सुनवाई का मौलिक अधिकार है: राजस्थान हाईकोर्ट ने चौथी बार जांच स्थानांतरित करने के डीजीपी के निर्देश को रद्द कर दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में कई जुड़े आपराधिक मामलों की जांच को चौथी बार स्थानांतरित करने के राजस्थान के पुलिस महानिदेशक के आदेश को रद्द कर दिया। जयपुर में जस्टिस बीरेंद्र कुमार की एकल-न्यायाधीश पीठ ने डीजीपी के उक्त आदेश को रद्द करते हुए रेखांकित किया कि 'निष्पक्ष सुनवाई और निष्पक्ष जांच का अधिकार' 'पीड़ित का भी अधिकार' है।इसके अतिरिक्त, अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस महानिदेशक द्वारा जारी आदेश प्रशासनिक निर्देश का उल्लंघन है कि किसी मामले को तीन बार से अधिक स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है।...

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 47 पूर्व न्यायाधीशों को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 47 पूर्व न्यायाधीशों को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया

सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को आयोजित अपनी पूर्ण अदालत की बैठक में हाईकोर्ट के 47 पूर्व न्यायाधीशों को सीनियर एडवोकेट डेसिग्नेशन प्रदान करने का निर्णय लिया। उनमें से नौ हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं। वे हैं :1. सुश्री सोनिया गोकानी, गुजरात हाईकोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश।2. श्री अली मोहम्मद माग्रे, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश।3. श्री सतीश कुमार मित्तल (सतीश कुमार), राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश।4. श्री रमेश देवकीनंदन धानुका, बॉम्बे हाईकोर्ट के...

पीएमएलए की धारा 50 के तहत समन जारी करने की ईडी की शक्ति में गिरफ्तारी की शक्ति शामिल नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
पीएमएलए की धारा 50 के तहत समन जारी करने की ईडी की शक्ति में गिरफ्तारी की शक्ति शामिल नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि पीएमएलए की धारा 50 के तहत किसी व्यक्ति को समन जारी करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शक्ति में उस व्यक्ति की गिरफ्तारी की शक्ति शामिल नहीं है।जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने कहा कि गिरफ्तारी की शक्ति पीएमएलए की धारा 50 में "स्पष्ट रूप से अनुपस्थित" है, जो ईडी अधिकारियों को किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार देती है, बशर्ते कि वे उसमें उल्लिखित शर्तों को पूरा करते हों।अदालत ने कहा,“पीएमएलए की धारा 50 के तहत किसी व्यक्ति को समन जारी करने और...

न्यायिक कार्य को सदैव भगवान का कार्य माना: जस्टिस सूर्य प्रकाश केसरवानी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से विदाई ली
न्यायिक कार्य को सदैव भगवान का कार्य माना: जस्टिस सूर्य प्रकाश केसरवानी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से विदाई ली

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को जस्टिस सूर्य प्रकाश केसरवानी को कलकत्ता हाईकोर्ट में उनके स्थानांतरण पर विदाई देने के लिए एक पूर्ण अदालत का आयोजन किया। जस्टिस केसरवानी ने संस्कृत में दिए भाषण में कहा, ''मैंने हमेशा न्यायिक कार्य को भगवान का कार्य माना है। ' 'मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर ने न्यायिक जिम्मेदारियों के प्रति जस्टिस केसरवानी के समर्पण और हाईकोर्ट के प्रशासनिक कामकाज में उनकी सहायता की प्रशंसा की।मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर ने कहा,“जस्टिस केसरवानी का इस संस्थान से कोलकाता...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने परीक्षा में नकल करने से रोकने के लिए स्टूडेंट का कंधा छूने को सेक्सुअल फ्लेवर मानने से किया इनकार, स्कूल शिक्षक को बर्खास्त करने का CAT का आदेश रद्द किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने परीक्षा में नकल करने से रोकने के लिए स्टूडेंट का कंधा छूने को सेक्सुअल फ्लेवर मानने से किया इनकार, स्कूल शिक्षक को बर्खास्त करने का CAT का आदेश रद्द किया

पोर्ट ब्लेयर में कलकत्ता हाईकोर्ट की सर्किट बेंच ने कक्षा 8 के स्टूडेंट द्वारा लगाए गए आरोप पर मिडिल स्कूल शिक्षक (याचिकाकर्ता) को बर्खास्त करते हुए अनुशासनात्मक प्राधिकरण, अपीलीय प्राधिकरण और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) का आदेश रद्द कर दिया है। याचिकाकर्ता ने 2009 में उसकी पीठ पर शारीरिक स्पर्श करके उसकी लज्जा को ठेस पहुंचाई, जिससे स्टूडेंट में अशांति फैल गई थी।जस्टिस सुव्रा घोष और जस्टिस सुभेंदु सामंत की खंडपीठ ने कहा कि शिक्षक द्वारा पीड़ित को परीक्षा में नकल करने से रोकने के प्रयास...

खेड़ा में मुस्लिम पुरुषों की पिटाई के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने चार पुलिसकर्मियों को अवमानना ​​का दोषी पाया, 14 दिन की जेल की सजा का आदेश दिया
खेड़ा में मुस्लिम पुरुषों की पिटाई के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने चार पुलिसकर्मियों को अवमानना ​​का दोषी पाया, 14 दिन की जेल की सजा का आदेश दिया

गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार को गुजरात पुलिस के 4 अधिकारियों को न्यायालय की अवमानना ​​(सुप्रीम कोर्ट के डीके बसु दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के लिए) का दोषी पाया और उन्हें पिछले साल अक्टूबर में खेड़ा जिले में मुस्लिम पुरुषों को सार्वजनिक रूप से पीटने के लिए 14 दिनों के साधारण कारावास की सजा सुनाई। जस्टिस एएस सुपेहिया और जस्टिस गीता गोपी की पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायालय इस बात से खुश नहीं है कि यह दिन आ गया है जब वह ऐसे आदेश पारित कर रही है जिसमें अधिकारियों को साधारण कारावास से गुजरने के...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सेक्स इच्छा पर किशोर लड़कियों को दी सलाह, कहा- गरिमा और आत्म-मूल्य की रक्षा करें, शरीर की स्वायत्तता और निजता का अधिकार बनाए रखते हुए यौन आग्रह पर नियंत्रण रखें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 'सेक्स इच्छा' पर किशोर लड़कियों को दी सलाह, कहा- गरिमा और आत्म-मूल्य की रक्षा करें, शरीर की स्वायत्तता और निजता का अधिकार बनाए रखते हुए यौन आग्रह पर नियंत्रण रखें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में युवा लड़के की अपील से संबंधित मामले में किशोर लड़कों और लड़कियों के लिए कई सिफारिशें जारी की हैं, जिसे अपनी नाबालिग साथी के साथ यौन संबंध बनाने के लिए 20 साल जेल की सजा सुनाई गई थी।जस्टिस चित्त रंजन दाश और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने अपीलकर्ता को बरी करते हुए कहा कि POCSO Act 16-18 वर्ष की आयु के बच्चों के बीच सहमति से गैर-शोषणकारी यौन संबंधों के लिए जिम्मेदार नहीं है। खंडपीठ ने इस दौरान, महाभारत के हितकारी कानूनी सिद्धांत "धर्मो रक्षयति रक्षयिता” (जो कानून...

भरण-पोषण कार्यवाही में ट्रांस पति की शारीरिक स्थिति को सत्यापित कराना चाहती थी पत्नी, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
भरण-पोषण कार्यवाही में 'ट्रांस' पति की शारीरिक स्थिति को सत्यापित कराना चाहती थी पत्नी, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह पारित फैमिली कोर्ट का आदेश को बरकरार रखा। उक्त आदेश में 'पत्नी' द्वारा खुद के ट्रांसजेंडर पुरुष होने का दावा करने वाले अपने 'पति' की शारीरिक स्थिति को सत्यापित करने के लिए सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण कार्यवाही में मेडिकल एक्सपर्ट बुलाने के लिए दायर याचिका खारिज कर दी गई थी।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने फैमिली कोर्ट के आदेश से सहमत होते हुए कहा कि भरण-पोषण की कार्यवाही में कथित पत्नी द्वारा दायर की गई याचिका का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि ऐसी...

लोक अदालत के अवार्ड को डीम्ड डिक्री, सीपीसी की धारा 96 के तहत आगे की अपील की अनुमति नहीं: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
लोक अदालत के अवार्ड को डीम्ड डिक्री, सीपीसी की धारा 96 के तहत आगे की अपील की अनुमति नहीं: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में देखा कि लोक अदालत द्वारा जारी प्रत्येक अवार्ड सिविल कोर्ट डिक्री माना जाता है और यह अंतिम और बाध्यकारी है। इसलिए सीपीसी की धारा 96 के तहत आगे की अपील के लिए दरवाजा बंद कर दिया गया है।जस्टिस वसीम सादिक नरगल ने कहा कि लोक अदालत के फैसले को केवल तभी चुनौती दी जा सकती है जब धोखाधड़ी का आरोप हो या डिक्री का आधार बनने वाला समझौता अमान्य हो।कोर्ट ने कहा,"कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 21 लोक अदालत के फैसले को सिविल कोर्ट के फैसले के बराबर करती...

नुकसान के लिए किरायेदार से प्रतिदावा, उसके सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करने के दायित्व से बचने के लिए कोई बचाव नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
नुकसान के लिए किरायेदार से प्रतिदावा, उसके सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करने के दायित्व से बचने के लिए कोई बचाव नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक कंपनी को समरी सूट की रक्षा के लिए बिना शर्त अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा कि मालिक द्वारा अपने लाइसेंसधारी से नुकसान के लिए मुकदमा दायर करना लाइसेंसधारी की सुरक्षा जमा राशि वापस करने की स्वीकृत देनदारी का एकमात्र बचाव नहीं हो सकता है। जस्टिस कमल खाता ने मुंबई में 17,196 वर्ग फुट के परिसर के मालिक - लोरन लीजिंग एंड इन्फोटेक प्राइवेट - को 18% ब्याज के साथ 90 लाख रुपये से अधिक की पूरी सुरक्षा जमा राशि अदालत में जमा करने का निर्देश दिया, इसके बाद ही लाइसेंसधारी प्ले गेम्स...

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम | पति के दावे के बावजूद मां मृत बेटे की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा कर सकती है: कर्नाटक हाईकोर्ट
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम | पति के दावे के बावजूद मां मृत बेटे की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा कर सकती है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि पहले मरे बेटे की मां पैतृक और संयुक्त परिवार की संपत्तियों में बेटे के हिस्से में श्रेणी- I की उत्तराधिकारी बन जाती है, भले ही उसका पति जीवित हो और हिंदू के उत्तराधिकार अधिनियम तहत संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा कर सकती है।जस्टिस एचपी संदेश ने टीएन सुशीलम्मा द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया, जिनकी कार्यवाही लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो गई थी और प्रथम अपीलीय अदालत के आदेश को पलट दिया, जिसमें कहा गया था पहले मरे बेटे संतोष की मां किसी भी हिस्से की हकदार नहीं...

यूएपीए | अपीलकर्ता प्राधिकारी धारा 25 के तहत निर्धारित समय सीमा से परे मामले को निर्दिष्ट प्राधिकारी को वापस नहीं भेज सकता: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
यूएपीए | अपीलकर्ता प्राधिकारी धारा 25 के तहत निर्धारित समय सीमा से परे मामले को निर्दिष्ट प्राधिकारी को वापस नहीं भेज सकता: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा है कि एक बार जब अपीलीय प्राधिकारी निर्दिष्ट प्राधिकारी के आदेश में रिजन‌िंग की कमी को पहचान लेता है तो अपीलीय निकाय के लिए यह अनिवार्य है कि वह गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अध‌िनियम की धारा 25(6) के तहत निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर आदेश की पुष्टि करे या उसे रद्द करे।जस्टिस वसीम सादिक नरगल ने स्पष्ट किया कि अपीलीय प्राधिकारी आदेश की पुष्टि करने या रद्द करने के लिए नामित प्राधिकारी के लिए निर्धारित 60 दिनों से अधिक वैधानिक समय...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने ही आदेश को वापस लिया; वकीलों ने बताया था, बेंच हंटिंग के लिए इस्तेमाल हो रहा था आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने ही आदेश को वापस लिया; वकीलों ने बताया था, बेंच हंटिंग के लिए इस्तेमाल हो रहा था आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने ही एक आदेश को तब वापस ले लिया, जब उन्हें बताया गया कि वकील उक्त आदेश का दुरुपयोग बेंच हंटिंग के लिए कर रहे हैं। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और ज‌स्टिस विशाल मिश्रा की पीठ ने पाया कि मामले में शामिल वकीलों ने बेंच हंटिंग की बात स्वीकार की है। उल्लेखनीय है कि बेंच हंटिंग एक ऐसी प्रैक्टिस हैं, जहां वादी या वकील किसी मामले को उन जजों के समक्ष सूचीबद्ध कराने का प्रयास करते हैं, जिनके बारे में उन्हें लगता है कि वे उन्हें अनुकूल आदेश देंगे। हाईकोर्ट के समक्ष एक रिव्यू...

सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व सीजे जस्टिस एस मुरलीधर को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया
सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व सीजे जस्टिस एस मुरलीधर को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया

सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया है।यह निर्णय भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा 16 अक्टूबर, 2023 को आयोजित एक पूर्ण न्यायालय बैठक में लिया गया।यह डेसिग्नेशन सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीनियर एडवोकेट के पदनाम के लिए दिशानिर्देश, 2023 के संदर्भ में है, जो 'सुश्री' इंदिरा जयसिंह बनाम. जनरल सेक्रेटरी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के मामले में पारित 12 मई, 2023 के फैसले के अनुपालन में तैयार किया गया है।जस्टिस (डॉ)...

राधास्वामी सत्संग सभा भूमि विध्वंस - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा जिला प्रशासन के खिलाफ दो अवमानना ​​याचिकाओं पर यूपी सरकार से जवाब मांगा
राधास्वामी सत्संग सभा भूमि विध्वंस - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा जिला प्रशासन के खिलाफ दो अवमानना ​​याचिकाओं पर यूपी सरकार से जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सत्संग सभा के स्वामित्व वाली भूमि पर आगरा जिला प्रशासन की विध्वंस कार्रवाई के खिलाफ राधास्वामी सत्संग सभा द्वारा दायर दो अवमानना ​​याचिकाओं से निपटते हुए शुक्रवार को सरकारी वकील को एक महीने के भीतर मामले में निर्देश लेने का निर्देश दिया। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 8 दिसंबर को पोस्ट करते हुए,आवेदक (सत्संग सभा) को 48 घंटे के भीतर सरकारी वकील आईबी सिंह को अवमानना ​​​​आवेदन की एक प्रति देने का निर्देश दिया।मूलतः, राधास्वामी सत्संग सभा एक...

पति द्वारा लगातार दुर्व्यवहार और अपमान करना क्रूरता के समान : कलकत्ता हाईकोट ने तलाक का फैसला बरकरार रखा
पति द्वारा लगातार दुर्व्यवहार और अपमान करना क्रूरता के समान : कलकत्ता हाईकोट ने तलाक का फैसला बरकरार रखा

कलकत्ता हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 ("एचएमए") की धारा 13 के तहत अपीलकर्ता (पति) और प्रतिवादी (पत्नी) के बीच विवाह को भंग करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित तलाक के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा बच्चे की कस्टडी की अस्वीकृति को बरकरार रखा और गुजारा भत्ता का भुगतान न करने के कारण हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 26 के तहत अपने बेटे की कस्टडी के लिए अपीलकर्ता की अपील को खारिज कर दिया।जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस सिद्धार्थ रॉय चौधरी की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले...

गुजरात हाईकोर्ट ने धार्मिक शत्रुता भड़काने के लिए कथित तौर पर व्हाट्सएप मैसेज पोस्ट करने के लिए एसडीपीआई सचिव के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
गुजरात हाईकोर्ट ने धार्मिक शत्रुता भड़काने के लिए कथित तौर पर व्हाट्सएप मैसेज पोस्ट करने के लिए एसडीपीआई सचिव के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से इनकार किया

गुजरात हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह दो अलग-अलग धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी पैदा करने के इरादे से एक समूह पर व्हाट्सएप संदेश पोस्ट करने के आरोप में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के सचिव मोहम्मद नौसरका के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। जस्टिस जेसी दोशी की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता का इरादा दो समूहों के बीच वैमनस्य या नफरत पैदा करने का था या नहीं, यह केवल मुकदमे के दौरान ही स्थापित किया जा सकता है और एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका के चरण में यह नहीं कहा जा...

झारखंड हाईकोर्ट ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, साऊंड एम्लीफायर पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध
झारखंड हाईकोर्ट ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, साऊंड एम्लीफायर पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम में शहर में ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक आदेश जारी किया। कोर्ट ने प्रत्येक जिले के उपायुक्तों को शहर में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, सार्वजनिक संबोधन प्रणाली, साऊंड एम्पलीफायरों पर पूर्ण प्रतिबंध के अपने आदेश को लागू करने का निर्देश दिया। अदालत ने आगे आदेश दिया कि अदालत द्वारा निर्धारित समय के दौरान कोई ढोल, ढोल या तुरही नहीं बजाया जाएगा।यह फैसला झारखंड सिविल सोसाइटी द्वारा अपने कोर कमेटी के सदस्य अतुल गेरा के माध्यम से दायर एक जनहित...

सरोगेसी | डोनर गैमीट्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाली अधिसूचना प्रथम दृष्टया विवाहित बांझ जोड़ों के माता-पिता बनने के अधिकार का उल्लंघन करती है: दिल्ली हाईकोर्ट
सरोगेसी | डोनर गैमीट्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाली अधिसूचना प्रथम दृष्टया विवाहित बांझ जोड़ों के माता-पिता बनने के अधिकार का उल्लंघन करती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना, जो सरोगेसी कराने के इच्छुक जोड़े के लिए दाता युग्मकों के उपयोग पर रोक लगाती है, प्रथम दृष्टया विवाहित बांझ जोड़े को माता-पिता बनने से वंचित करके उनके कानूनी और मेडिकल रूप से विनियमित प्रक्रियाओं और सेवाओं तक पहुंचने के मूल अधिकारों का उल्लंघन करती है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ ने कहा,"आगे लागू अधिसूचना सरोगेसी सेवाओं का लाभ उठाने के उद्देश्य से युग्मक पैदा करने की क्षमता...

कॉम्प्रोमाइज़ डिक्री के खिलाफ कोई नया मुकदमा नहीं, समाधान सीधे तौर पर उपलब्ध नहीं, चालाकी से मसौदा तैयार करके अप्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ नहीं उठाया जा सकता: पटना हाईकोर्ट
कॉम्प्रोमाइज़ डिक्री के खिलाफ कोई नया मुकदमा नहीं, समाधान सीधे तौर पर उपलब्ध नहीं, चालाकी से मसौदा तैयार करके अप्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ नहीं उठाया जा सकता: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि कानूनी उपाय, यदि प्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध नहीं हैं तो चतुराईपूर्ण प्रारूपण के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से नहीं मांगे जा सकते।जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा ने कहा,“इसमें कोई विवाद नहीं है कि वादी ने आदेश XXIII नियम 3 ए सीपीसी के तहत संबंधित न्यायालय के समक्ष पहले ही आवेदन दायर कर दिया है, जिसने कॉम्प्रोमाइज़ डिक्री रद्द करने के लिए उक्त डिक्री पारित की। इस प्रकार, वादी पहले ही इसका लाभ उठा चुका है। कानून में उचित उपाय उपलब्ध है, जो उपाय प्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध...