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बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, नोटिस ऑफ़ मोशन पर एकपक्षीय आदेश सिर्फ हम पास कर सकते हैं [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
28 Dec 2017 4:46 AM GMT
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, नोटिस ऑफ़ मोशन पर एकपक्षीय आदेश सिर्फ हम पास कर सकते हैं [निर्णय पढ़ें]
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल में एक फैसले में कहा कि ओरिजिनल साइड रूल्स के नियम 90 के तहत नोटिस ऑफ़ मोशन पर एकपक्षीय निर्णय सिर्फ यह कोर्ट ही दे सकता है और सीपीसी के आदेश VIII के तहत यह नहीं दिया जा सकता।

न्यायमूर्ति जीएस पटेल ने अपने 7 मार्च 2014 को दिए आदेश को वापस लेने में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों और हाई कोर्ट के दो खंडपीठों के निर्णयों का अनुकरण किया है।

मामले की पृष्ठभूमि

मुद्दई मधु गुप्ता द्वारा दायर एक मामले में जब 7 मार्च 2014 को न्यायमूर्ति पटेल ने एकपक्षीय फैसला सुनाया तो मुद्दालह ने याचिका दायर कर इसे वापस लेने की अपील की। उसकी इस अपील पर न्यायमूर्ति (अवकाशप्राप्त) रोशन दलवी ने इस आदेश को स्थगित कर दिया। इसके बाद 21 दिसंबर 2016 को एक आदेश के द्वारा न्यायमूर्ति केआर श्रीराम ने एकपक्षीय आदेश को इस आधार पर वापस ले लिया कि सम्मन की रिट की तामील नहीं हुई।

न्यायमूर्ति श्रीराम के आदेश के खिलाफ अपील हुई और न्यायमूर्ति आरएम सावंत और न्यायमूर्ति एसवी कोतवाल की पीठ ने 10 नवंबर 2017 को कहा कि आदेश वापस लेने के समय विलंब के प्रश्न पर विचार नहीं किया गया। इस तरह, नोटिस ऑफ़ मोशन पर दुबारा वर्तमान बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए पेश किया गया।

न्यायमूर्ति पटेल ने कहा कि आदेश की तामील में 150 दिनों की देरी हुई। उन्होंने आगे कहा,

मेरा मानना है कि मुझे इसमें हुई देरी को नजरअंदाज करते हुए इस नोटिस ऑफ़ मोशन की अनुमति दे देनी चाहिए। इसकी वजह सेवाओं के देने या नहीं देने की वजह से या फिर इसके लिए किकोई दावेदार नहीं” के साथ पैकेट का वापस जाना अच्छी सर्विस है, इसलिए नहीं। क्योंकि, जब यह पैकेट बिना बिना डिलीवरी के वापस गया, कारिंदे ने इसे दुबारा हाथों हाथ डिलीवरी के लिए मुद्दालह नंबर दो को भेजा। आदेश को वापस लेने का मौलिक कारण है बॉम्बे हाई कोर्ट (ओरिजिनल साइड) के रूल्स और विशेषकर रूल 90 जिसके अनुसार -

रूल 90 : लिखित बयान के अभाव में फैसला – लिखित बयान नहीं होने के कारण फैसले के लिए आवेदन नोटिस ऑफ़ मोशन के द्वारा होगा पर इस तरह का कोई मोशन सम्मन की तामील होने की तारीख से पहले नहीं जारी किया जा सकता है।

कोर्ट ने इस मामले के संदर्भ में इरीडियम इंडिया टेलिकॉम लिमिटेड बनाम मोटोरोला इंक मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और निकिता ट्रेडिंग बनाम निर्लों सिंथेटिक्स फाइबर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड एवं अन्य और तारदेओ प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड बनाम बैंक ऑफ़ बड़ोदा मामलों में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया।

इस तरह, इस एकपक्षीय फैसले को कोर्ट ने वापस ले लिया।


 
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