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झारखंड हाईकोर्ट ने भारत के माध्यम से अन्य देशों में मानव तस्करी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर केंद्र से जवाब मांगा [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
9 Feb 2018 12:42 PM GMT
झारखंड हाईकोर्ट ने भारत के माध्यम से अन्य देशों में मानव तस्करी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर केंद्र  से जवाब मांगा [आर्डर पढ़े]
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भारत के माध्यम से अन्य देशों में विदेशी नागरिकों की तस्करी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार द्वारा इसे रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।

अदालत अमीर हुसैन द्वारा दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि दो बांग्लादेशी लड़कियां, उनमें से एक 17 साल की नाबालिग है, मुंबई से दुबई के लिए अवैध तस्करी के जरिए भेजा जा रहा था। हालांकि उन्हें पश्चिम बंगाल से एक ट्रेन यात्रा के दौरान बचाया गया और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत उनका बयान दर्ज किया गया है।

बयान की जांच करते हुए जस्टिस आनंद सेन ने कहा कि इनसे  स्थिति की गंभीरता का पता चलता है और कहा, "धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज  के बयान के बाद यह एक धारणा बनती है कि एक अच्छी तरह से नियोजित रैकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहा है। बांग्लादेश से भारत के माध्यम से अन्य देशों के लिए लड़कियों की तस्करी गंभीर चिंता का मामला है, जहां भारतीय क्षेत्र का इस्तेमाल विदेशी नागरिकों (नाबालिग लड़कियों) को अलग-अलग देशों में, इस मामले में संयुक्त अरब अमीरात, ले जाने के लिए किया जा रहा है। लड़कियों के अवैध रूप से सीमा पार करने से, निश्चित रूप से,  अधिकारी इस तस्करी को रोकने में असफल रहे। "

जस्टिस सेन ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में पुलिस कर्मियों ने दो लड़कियों के संपर्क में होने के बावजूद कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की थी और ट्रेन के यात्रियों के बाद ही हस्तक्षेप किया। उन्होंने निर्देश दिया, "यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है, जिसे भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। इस प्रकार, मैं भारत के  सहायक सॉलिसिटर जनरल, राजीव सिन्हा, जो अदालत में हैं, को निर्देशित करता हूं कि वो एक उचित हलफनामा दाखिल कर बताएं कि  गृह मंत्रालय क्या कर रहा है या  विचार कर रहा है, ताकि पड़ोसी देशों से मनुष्यों की इस प्रकार की तस्करी को रोका जा सके। "

न्यायालय ने झारखंड राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (जेएचएएलएसए) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि दोनों लड़कियों को उचित कानूनी सहायता प्रदान की जाए। मामले की सुनवाई अब छह सप्ताह के बाद होगी।


 
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