Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

पीड़िता को लगातार ब्लैकमेल की करने की इजाजत नहीं दे सकते : SC ने जिंदल गैंगरेप आरोपियों को पीड़िता को ICloud पासवर्ड देने को कहा

LiveLaw News Network
8 Feb 2018 6:59 AM GMT
पीड़िता को लगातार ब्लैकमेल की करने की इजाजत नहीं दे सकते : SC ने जिंदल गैंगरेप आरोपियों को पीड़िता को ICloud पासवर्ड देने को कहा
x

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच ने ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के गैंग रेप के आरोपियों को पीड़ित के साथ आईक्लाउड अकाउंट पासवर्ड साझा करने के लिए कहा है।

जस्टिस एस ए बोबडे ने आरोपी हार्दिक सीकरी,  करन छाबड़ा और विकास गर्ग के लिए पेश वकील से कहा,  "हम दोषी के बारे में चिंतित नहीं हैं हम वर्तमान स्थिति के बारे में चिंतित हैं। आप में से एक के पास लड़की की तस्वीरें हैं और हमारे लिए ब्लैकमेल को स्वीकार करना और सहन करना मुश्किल है। "

बेंच ने कहा, "आपको उन तस्वीरों तक पहुंच देना चाहिए।  यदि आपने उन्हें हटा दिया है, तो सुनिश्चित करें कि उन्हें जारी ना किया जाए।  अगर नहीं, तो आपको लड़की को पासवर्ड देना होगा। " वहीं आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ  वकीलों शांति भूषण और मुकुल रोहतगी ने अदालत को आश्वासन दिया कि अगर कोई पासवर्ड उपलब्ध है, तो उसे साझा किया जाएगा।

 भूषण ने कहा कि उनका मुव्वकिल  इस संबंध में एक अंडरटेकिंग देने को तैयार है।

दरअसल लड़की ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को निलंबित कर दिया गया था।

 उसने आशंका भी जाहिर की है कि आरोपियों के पास उसकी नग्न तस्वीरें हैं और उन्हें जारी किया गया तो उसे नुकसान होगा। उसने आरोप लगाया कि आरोपी उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं।

भूषण ने तर्क दिया कि यह लड़की ही थी, जिसने अभियुक्तों को तस्वीरें भेजी थीं।

दूसरी ओर पीड़िता की ओर से पैरवी कर रहे  वरिष्ठ वकील कॉलिन गोन्जाल्विस ने तर्क दिया कि पुलिस और यूनिवर्सिटी के अधिकारियों द्वारा पूछताछ के बावजूद इस लड़की को आतंकित किया गया। पासवर्ड को पीड़िता के साथ साझा नहीं किया गया।

उन्होंने अदालत से मांग की कि व्हाट्सएप चैट को पढा जाए ताकि पता चल सके कि किस तरह आरोपी द्वारा पीडिता को भयभीत किया गया।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा तीनों आरोपियों को दी गई जमानत पर रोक लगा दी थी। तीनों पीडिता के साथ  विश्वविद्यालय के  छात्र थे।

 पिछले साल सितंबर में  उच्च न्यायालय ने इस आधार पर  उनकी सजा को निलंबित कर दिया था कि पीडिता  "समझौतावादी " थी और ये "आकस्मिक यौन पलायन" था।

लड़की ने 11 अप्रैल, 2015 को विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत दर्ज कराई थी  जिसमें आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय के अंतिम वर्ष के कानून छात्रों ने अगस्त 2013 के बाद से ब्लैकमेल किया और बलात्कार किया। उसने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपी के पास उसके आपत्तिजनक फोटो हैं और वे उसे वायरल  करने की धमकी दे रहे हैं। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे ब्लैकमेल किया जा रहा है और शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया।

पिछले साल मार्च में  सोनीपत की एक ट्रायल कोर्ट ने इस अपराध के लिए तीनों को दोषी ठहराया था और हार्दिक व करण को  20 साल की सजा सुनाई थी जबकि विकास के लिए सात साल की जेल तय की गई।

 हालांकि  उच्च न्यायालय ने उनकी सजा को निलंबित कर दिया था और पिछले साल सितंबर में उन्हें जमानत दे दी थी। आदेश से पीड़ित होने के बाद लड़की ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है।

Next Story