मुख्य सुर्खियां
अगर कोई सदस्य सम्मिलित परिवार को छोड़कर अपना अलग परिवार बसाता है तो घरेलू हिंसा का अधिनियम लागू नहीं होगा : कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने माना है कि अगर परिवार की कोई सदस्य साझा घर छोड़कर अपना घर बसाती है तो वह घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत मामला दायर नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति बीए पाटिल की पीठ ने एक मां और बेटे की याचिका स्वीकार कर लिया जिसमें निचली अदालत के फ़ैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा, "हमारी राय में प्रतिवादी ने ऐसा कोई आधार नहीं बताया है कि उसे घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कोई राहत दी जाए। मैंने निचली अदालत के आदेश और फ़ैसले पर ग़ौर किया है। दोनों न्यायालय उक्त तथ्यों पर ग़ौर किए...
मरने से पहले दिया गया बयान केवल इसलिए अविश्वसनीय नहीं होगा क्योंकि इसे कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया है : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि मरने से पहले दिया गया बयान (dying declaration) केवल इसलिए अविश्वसनीय नहीं होगा, क्योंकि इसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के बजाय एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया गया है। न्यायमूर्ति आईएस मेहता की एकल पीठ ने उल्लेख किया है कि जैसे ही यह मालूम हो कि मरने से पहले स्वेच्छा से बयान दिया गया है और यह सत्य है तो इसकी प्रासंगिकता इस बात से प्रभावित नहीं होगी कि एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा इस बयान को दर्ज किया गया है। वर्तमान मामले में आरोपी व्यक्तियों द्वारा कई...
दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप पीड़िता का नाम प्रकाशित करने के लिए अख़बार से माफ़ी मांगने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने हैदराबाद बलात्कार मामले में पीड़िता का नाम छापने वाले अख़बार 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' से माफ़ी माँगने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति हरि शंकर की खंडपीठ ने मीडिया पोर्टल से पूछा कि इस तरह का प्रकाशन अज्ञानतावश हुआ या जानबूझकर। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह आदेश दिया। इस याचिका में अदालत से पीड़िता और हैदराबाद बलात्कार मामले के चार आरोपी व्यक्तियों की पहचान का खुलासा करने वाले मीडिया के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देने का आग्रह किया गया...
ज़मानत देते समय आरोपी की गरीबी का ध्यान रखा जाना चाहिए : एचपी हाईकोर्ट
ज़मानत देते समय अदालतों द्वारा पालन किए जाने वाले सिद्धांतों को ज़िक्र करते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ज़मानत देते समय किसी आरोपी की गरीबी या उसकी समझी गई निर्धन स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। दाताराम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य, Crl. Apl. No. 227/2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अभिनिर्धारित किया था कि "किसी अभियुक्त की गरीबी या डीम्ड इंडिविजुअल स्टेटस भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारक है और यहां तक कि संसद ने भी दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 436 में एक...
माता –पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण संशोधन विधेयक के प्रमुख बिंदु
केंद्र सरकार ने माता –पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 ( Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) में संशोधन मां-बाप/वरिष्ठ नागरिकों का ख़याल नहीं रखने को आपराधिक क़रार देने वाले संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश किया। इस विधेयक के माध्यम से इस क़ानून की धारा 24 का संशोधन किया जाएगा, जिसमें अभी तक सिर्फ़ वरिष्ठ नागरिकों को परित्यक्त करने पर ही दंड का प्रावधान था। अब इस संधोशन से इस कार्य को आपराधिक क़रार दिया जाएगा। इस विधेयक में कहा गया है, " ऐसा कोई भी...
रेलवे के प्रदूषण संभावित कारणों वाले स्टेशन पर्यावरण कानून से परे नहीं : एनजीटी
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की प्रिंसिपल बेंच ने कहा है कि प्रमुख रेलवे स्टेशनों को जल अधिनियम और वायु अधिनियम के तहत स्थापना/ विस्तार के लिए सहमति और संचालित करने के लिए अनुमति प्राप्त कर लेनी चाहिए। अगर तीन महीने के भीतर यह अनुमति प्राप्त नहीं की गई तो राज्य, बोर्ड जल और वायु अधिनियम के प्रावधानों के तहत कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेगा। चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ एक सलोनी सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रेलवे स्टेशनों पर होने वाले...
आरे कॉलोनी मामला : सुप्रीम कोर्ट अब जनवरी में करेगा सुनवाई
मुंबई उपनगर में आरे कॉलोनी में मेट्रो कार शेड के लिए पेड़ काटने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर अब जनवरी में सुनवाई करेगा। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने ये सुनवाई याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस की दलील पर टाली जिसमें उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में नई सरकार बनी है और वो मेट्रो कार शेड के लिए किसी दूसरी जगह वैकल्पिक जगह की तलाश कर रही है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने 7 अक्तूबर को मुंबई उपनगर में आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर यथास्थिति का आदेश...
अगर किसी को गवाह संरक्षण योजना, 2018 के तहत हिरासत में रखा गया है तो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर विचार नहीं : एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने कहा कि अगर किसी को गवाह संरक्षण योजना, 2018 के तहत हिरासत में रखा गया है तो उसके बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर ग़ौर नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल और एससी शर्मा की पीठ ने इस तरह इस याचिका को ख़ारिज कर दिया। पीठ ने कहा, "सिर्फ़ इस वजह से कि बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दी गई है, अदालत को इस याचिका पर ग़ौर करने का कोई कारण नहीं दिखाई देता। विशेषकर जब किसी को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से हिरासत में नहीं लिया गया है तो उस स्थिति में बंदी...
कैसा रहा सुप्रीम कोर्ट में पिछला सप्ताह, वीकली राउंड अप में प्रमुख ऑर्डर, जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिसंबर से 13 दिसंबर तक के सप्ताह में कई अहम ऑर्डर, जजमेंट पास किए। आइए वीकली राउंड अप में प्रमुक ऑर्डर, जजमेंट पर एक नज़र डालते हैं। मध्यस्थता अवार्ड की अपील दाखिल करने में 120 दिनों से ज्यादा की देरी माफी लायक नहीं : सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 37 के तहत अपील दायर करने में 120 दिनों से अधिक की देरी को माफ नहीं किया जा सकता है। M/S एन वी इंटरनेशनल बनाम स्टेट ऑफ़ असम में मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत एक...
मध्यस्थता अवार्ड की अपील दाखिल करने में 120 दिनों से ज्यादा की देरी माफी लायक नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 37 के तहत अपील दायर करने में 120 दिनों से अधिक की देरी को माफ नहीं किया जा सकता है। M/S एन वी इंटरनेशनल बनाम स्टेट ऑफ़ असम में मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत एक अपील दायर की गई थी, जिसमें जिला जज के एक आदेश को चुनौती देते हुए धारा 34 के तहत मध्यस्थता अवार्ड को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था। अपील दायर करने में 189 दिन की देरी हुई और उक्त आधार पर अपील खारिज कर दी गई थी। शीर्ष अदालत के समक्ष तर्क...
CLAT 2020 : परीक्षा का शेड्यूल, सिलेबस और पैटर्न
CLAT 2020 के लिए विस्तृत कार्यक्रम और परीक्षा पैटर्न 11 दिसंबर को हुई बैठक के बाद एनएलयू की कंसोर्टियम की कार्यकारी समिति द्वारा जारी किया गया है। यह परीक्षा 10 मई को आयोजित की जानी है। परीक्षा के लिए आवेदन 1 जनवरी 2020 से किए जा सकेंगे और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2020 होगी। उत्तर पुस्तिका 11 मई 2020 को एनएलयू कंसोर्टियम की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी और 12 मई से 15 मई, 2020 के बीच उत्तर पुस्तिका पर किसी भी आपत्ति पर विचार किया जाएगा। इसके बाद, अंतिम पुस्तिका 18 मई 2020 को जारी...
अधिवक्ता कल्याण योजना- समिति ने दिल्ली सरकार को फंड के 50 करोड़ रुपये का उपयोग करने के सुझाव पर रिपोर्ट सौंपी
मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना के तहत लागू की जाने वाली योजना का प्रस्ताव देने के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट दिल्ली सरकार को दे दी है। इस समिति को दिल्ली सरकार द्वारा 29 नवंबर को स्थापित किया गया था और वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश कुमार खन्ना इसके संयोजक बनाए गए थे। समिति का कार्यक्षेत्र या काम एक योजना का प्रस्ताव बनाना था, जो सरकार द्वारा अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए अनुमोदित 50 करोड़ के वार्षिक बजट के उपयोग के संबंध में था या इस बजट का उपयोग कैसे किया जाए। विभिन्न जीवन बीमा कंपनियों पर...
राज्य ने की कोर्ट के स्पष्ट आदेश की अवज्ञा, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जाहिर की चिंता
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने से स्वयं को इसलिए अचानक रोक लिया, क्योंकि वह सेवानिवृत्त हो चुका है। इस अधिकारी ने याचिकाकर्ता के पक्ष में एकल न्यायाधीश के ''स्पष्ट'' निष्कर्षों के बावजूद जन्म की तारीख में सुधार के लिए इस आदमी(याचिकाकर्ता) के प्रतिनिधित्व को खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति चंद्र भूषण बारोवालिया की खंडपीठ ने ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ दायर सरकार की अपील को खारिज करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की।...
न्यूनतम मूल्य का निर्धारण किसान को अपनी ज़मीन की बाज़ार की क़ीमत के अनुरूप क़ीमत प्राप्त करने से नहीं रोक सकता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्र मेनन और न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की खंडपीठ ने कहा है कि स्टैम्प अधिनियम के अंतर्गत चुकाई जाने वाली स्टैम्प ड्यूटी के तहत न्यूनतम वैल्यू की जो बात की जाती है, ज़रूरी नहीं है कि वह हमेशा ही उस संपत्ति का वास्तविक मूल्य हो। खंडपीठ भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक याचिका की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कहा कि इसका यह मतलब नहीं कि सही क्रेता वास्तविक मूल्य नहीं दिखा सकता है और उसके हिसाब से स्टैम्प ड्यूटी नहीं चुका सकता। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने...
एक्सप्लेनरः कैसे मिलती है भारतीय नागरिकता, कैसी होती है खत्म
नागरिकता अधिकारों का गट्ठर है, जो व्यक्ति और राज्य के बीच संबंधों को परिभाषित करती है। भारत में मौलिक अधिकारों और कई वैधानिक अधिकारों का उपभोग भारतीय नागरिकता होने पर निर्भर हैं।जन्म और वंश से नागरिकतादुनिया भर के देश नागरिकता की दो अवधारणाओं का पालन करते हैं: 1-'jus soli' (मिट्टी का अधिकार) या जन्मसिद्ध नागरिकता 2-'jus sanguinis' (रक्त का अधिकार) या वंश द्वारा नागरिकता। पहले मॉडल में, माता-पिता की राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना उन सभी को नागरिकता दी जाती है] जो देश की सीमा के भीतर पैदा...
अविवाहित जोड़े का होटल के कमरे में रहना नहीं है अपराध : मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने माना है कि एक अविवाहित का होटल के कमरे में रहना कोई आपराधिक कृत्य नहीं है। न्यायमूर्ति एम.एस रमेश ने याचिकाकर्ता द्वारा संचालित एक होटल की सीलिंग को रद्द करते हुए कहा कि- ''जाहिर है, कोई ऐसा कानून या नियम नहीं है, जो बतौर मेहमान के रूप में होटल के कमरे में रहने के लिए विपरीत लिंग के अविवाहित व्यक्तियों को मना करता हो। जब दो वयस्कों के लिव-इन-रिलेशनशिप को अपराध नहीं माना जाता तो ऐसे में एक अविवाहित जोड़े का होटल के कमरे में रहना किसी अपराध को आकर्षित नहीं करता। इस आधार पर...
सिर्फ इस वजह से कि परिसंपत्ति वक्फ़ के अधीन है, वह दीवानी अदालत के सीमाक्षेत्र से बाहर नहीं हो जाती : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि वक्फ़ अधिनियम की परिसंपत्ति से जुड़े मामले में दीवानी अदालतों पर रोक इस अधिनियम की धारा 6(5), 7 और 85 से आगे नहीं जाएगी। हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ के न्यायमूर्ति आरवी घुगे नांदेड़ जिले के 75 वर्षीय सैयद अब्दुल्लाह की याचिका पर गौर कर रहे थे, जब यह मुद्दा उठा कि अगर कोई मामला वक्फ़ की परिसंपत्ति पर रोक से सिर्फ जुड़ा है तो क्या दीवानी अदालत इस मामले की सुनवाई कर सकती है या नहीं? यवतमाल जिले के 78 वर्षीय राजेश्वर देशपांडे के मामले में एक प्रतिवादी के रूप में याचिकाकर्ता...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने वकालतनामा पर अंगूठे का जाली निशान लगाने के मामले में वादियों पर दस हजार रुपए का जुर्माना लगाया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक एडीशनल कलेक्टर (अतिक्रमण/ एविक्शन) द्वारा पारित एक आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए दायर एक मामले में तीन याचिकाकर्ताओं पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है क्योंकि वे 'जाली' अंगूठे के निशान के बारे में बताने में असमर्थ रहे। जबकि यह अंगूठे का निशान वकालतनामा पर चौथे याचिकाकर्ता की तरफ से लगाया गया था, जिसमें उनकी रिट याचिका को वापस लेने के लिए प्रार्थना की गई थी।न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की खंडपीठ 15 अप्रैल, 2019 को रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जब प्रतिवादी...
बेंगलुरु में सत्र न्यायालय ने दिया आदेश, बंधुआ मजदूर के मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराया जाए पीड़ितों का बयान
देश में बंधुआ मजदूर के मामलों में या कम से कम कर्नाटक राज्य में यह पहला मामला हो सकता है, जब बेंगलुरु शहरी जिले के अनेकाल में स्थित एक सत्र न्यायालय ने श्रम तस्करी और बंधुआ मजदूरी के एक मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तीन पीड़ितों के बयान उनके गृह जिले बलांगीर, ओडिशा से दर्ज करने की अनुमति दी है। अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश सैय्यद बलेगुर रहमान ने 20 नवंबर, 2019 को उक्त आदेश पारित किया, जिसमें सिविल कोर्ट, बलांगीर के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा...
"स्थिति गंभीर"- हाईकोर्ट और ज़िला अदालतों में सशस्त्र बलों की नियुक्ति अत्यावश्यक : जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की सरकार और भारत सरकार ऐसे सभी सर्कुलर पेश करने को कहा है जिसके द्वारा जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट और सभी ज़िला अदालतों को उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र घोषित किया गया। अदालत ने भारत सरकार को निर्देश दिया कि वह जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के दोनों विंग और ज़िला अदालतों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की नियुक्ति पर ग़ौर करे।अदालत ने कहा,"ज़िला अदालतों के मुख्य द्वार पर ताला लगाने के गंभीर...




















