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आरे कॉलोनी मामला : सुप्रीम कोर्ट अब जनवरी में करेगा सुनवाई 

LiveLaw News Network
16 Dec 2019 10:53 AM GMT
आरे कॉलोनी मामला : सुप्रीम कोर्ट अब जनवरी में करेगा सुनवाई 
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मुंबई उपनगर में आरे कॉलोनी में मेट्रो कार शेड के लिए पेड़ काटने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर अब जनवरी में सुनवाई करेगा।

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने ये सुनवाई याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस की दलील पर टाली जिसमें उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में नई सरकार बनी है और वो मेट्रो कार शेड के लिए किसी दूसरी जगह वैकल्पिक जगह की तलाश कर रही है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने 7 अक्तूबर को मुंबई उपनगर में आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर यथास्थिति का आदेश दिया था। पीठ ने महाराष्ट्र सरकार से कहा था कि अगर कोई एक्टिविस्ट हिरासत में है तो उसे फौरन रिहा किया जाए।

पीठ ने सरकार को ये भी बताने को कहा था कि उक्त जमीन का स्टेटस क्या है और अब तक लगाए गए पौधों का ब्योरा भी मांगा। महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि अब और पेड़ नहीं काटे जाएंगे और दशहरा की छुट्टी के बाद पर्यावरण मामलों की बेंच द्वारा पेड़ों की कटाई की वैधता तय की जा सकती है।

कानून के छात्रों के एक समूह ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की थी

गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस भारती डांगरे की पीठ ने गोरेगांव में आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को चुनौती देने वाली एनजीओ और पर्यावरण एक्टिविस्ट की पांच याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

कोर्ट ने कहा था कि शहरी विकास विभाग द्वारा मेट्रो कार शेड (24 अगस्त 2017 और 9 नवंबर 2017 को जारी अधिसूचनाओं के अनुसार) क्षेत्र को आरक्षित करने के फैसले को पिछले मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। तब डिवीजन बेंच द्वारा चुनौती पर सुनवाई नहीं की गई थी।

26 अक्टूबर, 2018 को दिए गए अपने फैसले में उस पीठ ने उल्लेख किया था कि यह बताने के लिए कि भूमि एक जंगल थी, रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं था। उस फैसले के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके अलावा एक और मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में लंबित है क्योंकि इस क्षेत्र को वन घोषित करने और 2016 में केंद्रीय वन मंत्रालय के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ईको सेंसिटिव जोन के लिए इस क्षेत्र को बाहर करने की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी।

इसका हवाला देते हुए उच्च न्यायालय ने 4 अक्टूबर के अपने फैसले में कहा था कि याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इस मुद्दे पर पहले से ही एक समन्वय पीठ द्वारा निर्णय ले लिया गया था।

मुंबई रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लिए मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए आरे कॉलोनी में 2000 से अधिक पेड़ों को काटने का प्रस्ताव दिया गया था। पर्यावरणविदों के अनुसार आरे कॉलोनी, 1,287 हेक्टेयर में है और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से सटकर स्थित है और ये महानगर का एक बड़ा फेफड़ा है।

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