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न्यूनतम मूल्य का निर्धारण किसान को अपनी ज़मीन की बाज़ार की क़ीमत के अनुरूप क़ीमत प्राप्त करने से नहीं रोक सकता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
14 Dec 2019 3:15 AM GMT
न्यूनतम मूल्य का निर्धारण किसान को अपनी ज़मीन की बाज़ार की क़ीमत के अनुरूप क़ीमत प्राप्त करने से नहीं रोक सकता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्र मेनन और न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की खंडपीठ ने कहा है कि स्टैम्प अधिनियम के अंतर्गत चुकाई जाने वाली स्टैम्प ड्यूटी के तहत न्यूनतम वैल्यू की जो बात की जाती है, ज़रूरी नहीं है कि वह हमेशा ही उस संपत्ति का वास्तविक मूल्य हो।

खंडपीठ भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक याचिका की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कहा कि इसका यह मतलब नहीं कि सही क्रेता वास्तविक मूल्य नहीं दिखा सकता है और उसके हिसाब से स्टैम्प ड्यूटी नहीं चुका सकता।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 18.09.2018 को एक आदेश दिया था, जिसके तहत उसने भूमि के आवश्यक अधिग्रहण में उचित अथॉरिटी द्वारा निर्धारित मुआवज़े में किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था। इसके बाद ही इस आदेश को चुनौती दी गई।

शिकायत यह थी कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित 1370 वर्ग मीटर कृषि भूमि के लिए मुआवज़े की राशि मात्र ₹16,97,430/- निर्धारित की गई थी जबकि 144 वर्ग मीटर ज़मीन के लिए ₹65,01,600/- के मुआवज़े की राशि दी गई थी और इस तरह मुआवज़े की राशि के निर्धारण के लिए जो फ़ॉर्मूला तय किया गया वह ग़लत और इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उलट था।

अपीलकर्ता के वक़ील ने कहा कि पुनर्स्थापना और पुनर्वास अधिनियम, 2013 की धारा 26(1) के तहत उचित अधिकारी को ज़मीन की ऊंची दर को ध्यान में रखना ज़रूरी है और इसके लिए वह क्लाज (a), (b) और ( c) के तहत तीन आधार अपना सकता है और वह इस ज़मीन के आसपास उपलब्ध ज़मीन की औसत बिक्री क़ीमत को नज़रंदाज़ कर सकता है, क्योंकि उसी दर पर अगर इस ज़मीन की क़ीमत निर्धारित की गई तो यह ज़मीन के मालिक के हितों के ख़िलाफ़ होगा।

पुनर्स्थापना और पुनर्वास अधिनियम, 2013 की धारा 26 में कहा गया है,

कलेक्टर द्वारा भूमि की बाज़ार में क़ीमत के निर्धारण के लिए निम्न तरीक़ा अपनाएगा -

(a) बिक्री क़रार के लिए स्टैम्प अधिनियम 1899 (1899 के 2) के तहत जहां ज़मीन मौजूद है, उस क्षेत्र में ज़मीन की बाज़ार में क़ीमत; या

(b) सबसे नज़दीक के गांव में इसी तरह की ज़मीन की औसत बिक्री दर; या

(c) अगर ज़मीन का अधिग्रहण कोई निजी कंपनी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के लिए या फिर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजना के लिए करती है तो धारा 2 की उपधारा 2 के तहत जिस मुआवज़े की जिस राशि पर सहमति हुई है उनमें से जो भी अधिक हो :

बशर्ते बाज़ार क़ीमत के निर्धारण की तिथि वह तिथि होगी जिस दिन धारा 11 के तहत अधिसूचना जारी की गई।

स्पष्टीकरण 1.- क्लॉज (बी) में निर्दिष्ट औसत बिक्री मूल्य बिक्री क़रारों को ध्यान में रखते हुए या उस वर्ष के तीन वर्षों से पहले के दौरान निकटवर्ती गांव या आसपास के क्षेत्र में इसी तरह के क्षेत्र के लिए पंजीकृत बेचने के लिए निर्धारित किया जाएगा, जिसमें भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है।

स्पष्टीकरण 2.- स्पष्टीकरण 1 में निर्दिष्ट औसत बिक्री मूल्य का निर्धारण करने के लिए, बिक्री के कुल क़रारों की कुल संख्या का आधा या बेचने के लिए जिन समझौतों में उच्चतम बिक्री मूल्य का उल्लेख किया गया है, उन्हें ध्यान में रखा जाएगा।

स्पष्टीकरण 3.- इस धारा के तहत बाजार मूल्य का निर्धारण और स्पष्टीकरण 1 या स्पष्टीकरण 2 में निर्दिष्ट औसत बिक्री मूल्य का निर्धारण करते समय, जिले में इससे पूर्व में इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के रूप में भुगतान की गई किसी भी कीमत पर ध्यान नहीं दिया जाएगा।

स्पष्टीकरण 4.- इस खंड के तहत बाजार मूल्य का निर्धारण करते हुए और स्पष्टीकरण 1 या स्पष्टीकरण 2 में निर्दिष्ट औसत बिक्री मूल्य, किसी भी कीमत का भुगतान किया जाता है, जो कलेक्टर की राय में वास्तविक प्रचलित बाजार मूल्य का संकेत नहीं है, तो बाजार में उसकी क़ीमतों के निर्धारण के लिए उसे नज़रंदाज़ किया जा सकता है।

(2) उप-धारा (1) के अनुसार निर्धारित किए गए बाजार मूल्य को पहली अनुसूची में निर्दिष्ट कारक से गुणा किया जाएगा।

(3) जहां सब-सेक्शन (1) या सब-सेक्शन (2) के तहत बाजार मूल्य इस वजह से निर्धारित नहीं किया जा सकता है-

भूमि ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां भूमि का लेन-देन थोड़े समय के लिए उस क्षेत्र में लागू किसी अन्य क़ानून के तहत प्रतिबंधित है; या

उप-धारा (1) के क्लाज (a) के आधार पर इसी तरह की ज़मीन के लिए पंजीकृत बिक्री क़रार या समझौता पिछले नवीनतम तीन वर्षों के लिए उपलब्ध नहीं हैं; या

(c) भारतीय स्टैम्प अधिनियम, 1899 के तहत उचित अथॉरिटी द्वारा ज़मीन की क़ीमत नहीं बताई गई है, संबंधित राज्य सरकार उस ज़मीन की फ़्लोर क़ीमत बताएगी या प्रति यूनिट क्षेत्र की क़ीमत बताएगी जिसका निर्धारण निकटतम क्षेत्र में इसी तरह की ज़मीन की क़ीमत के आधार पर (जैसा कि उप-धारा 1 में बताया गया है) होगा -

बशर्ते रिक्वायरिंग बॉडी अपना शेयर मुआवज़े के रूप में भूमि के मालिक को (जिसकी भूमि अधिग्रहीत की गई है) प्रस्तावित करता है, भूमि अधिग्रहण के लिए इस तरह का शेयर कुल क़ीमत का 25% से अधिक नहीं होगा-

बशर्ते रिक्वायरिंग बॉडी किसी भी स्थिति में किसी भी भूस्वामी (जिसकी ज़मीन अधिग्रहीत की गई है) को अपना शेयर लेने को नहीं कहेगा जिसकी क़ीमत को ज़मीन की क़ीमत से घटाया जा सकता है जिसे उप-धारा (1) के तहत निर्धारित किया गया है-

बशर्ते यह भी कि कलेक्टर किसी भी क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले बाज़ार में ज़मीन की प्रचलित क़ीमत के आधार पर ज़मीन की बाज़ार क़ीमत को संशोधित और अपडेट करने के लिए हर ज़रूरी क़दम उठाएगा -

बशर्ते कि उपयुक्त सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यक द्वारा स्थापित किसी शैक्षणिक संस्थान की किसी भी भूमि या संपत्ति के अधिग्रहण के लिए निर्धारित बाजार मूल्य ऐसा हो, जो अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन के अधिकार को प्रतिबंधित या निरस्त नहीं करेगा।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि स्टैंप ड्यूटी के निर्धारण के लिए अधिसूचित किए जाने वाले न्यूनतम मूल्य से नीचे कोई पंजीकरण या संप्रेषण की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अदालत ने कहा,

"इसका मतलब यह नहीं है कि एक उचित क्रेता वास्तविक मूल्य को डीड ऑफ़ कन्वेएंस में नहीं दिखा सकता है, जो न्यूनतम मूल्य से बहुत अधिक हो सकता है और तदनुसार अपेक्षित स्टांप शुल्क का भुगतान कर सकता है। जब ऐसी संपत्ति अनिवार्य रूप से अधिग्रहित की जाती है, तो या तो एनएच अधिनियम के प्रावधानों के तहत या पुनर्स्थापना और पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत, सक्षम प्राधिकरण यह नहीं कह सकता है कि उपरोक्त के अनुसार, मुआवजे का भुगतान केवल डीड ऑफ़ कन्वेएँस के पंजीकरण के लिए 'न्यूनतम मूल्य' के आधार पर किया जाएगा।"

अपील स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि न्यूनतम मूल्य का निर्धारण किसी भूस्वामी को अपनी ज़मीन के लिए वास्तविक बाजार मूल्य प्राप्त करने से रोक नहीं सकता अगर यह राशि न्यूनतम मूल्य से काफ़ी अधिक है।



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