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शाहीन बाग प्रोटेस्ट के कारण बंद हुए कालिंदी कुंज - शाहीन बाग मार्ग को फिर खोलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका
शाहीन बाग प्रोटेस्ट के कारण बंद हुए कालिंदी कुंज - शाहीन बाग मार्ग को फिर खोलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका

कालिंदी कुंज - शाहीन बाग मार्ग को बंद करने के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की गई है। यह मार्ग जो वर्तमान में चल रहे एंटी-सीएए विरोध के कारण बंद किया गया है। कालिंदी कुंज - शाहीन बाग मार्ग, ओखला अंडरपास के साथ, 15 जनवरी को नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में बढ़ी भीड़ के कारण बंद कर दिया गया था। यह विशेष खंड नोएडा, फरीदाबाद और हरियाणा जाने वाले मार्गों को जोड़ता है। कालिंदी कुंज - शाहीन बाग मार्ग बंद होने से यात्रियों के लिए एक बड़ी...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का वैवाहिक मामलों में आय और संपत्ति के शपथपत्र पर ज़ोर, भरण पोषण के मामलों में अनावश्यक बोझ न बढ़े
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का वैवाहिक मामलों में आय और संपत्ति के शपथपत्र पर ज़ोर, भरण पोषण के मामलों में अनावश्यक बोझ न बढ़े

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य के सभी फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि वे सभी वैवाहिक मामलों में संपत्ति, आय और व्यय के शपथ पत्र पर जोर दें, ताकि भरण पोषण की मांग करने की इच्छुक पत्नियों को अनावश्यक बोझ से बचाया जा सके। जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल ने कहा कि- ''सर्वोत्तम प्रथाओं का हमेशा पालन किया जाना चाहिए विशेष रूप से यदि यह प्रथाएं आगे के समय में कुशल और प्रभावी न्याय वितरण के लिए हों। इस तरह के (आय) हलफनामों को दायर करने से ऐसे मामलों में ''लुका-छुपी'' के खेल खेलने की प्रथा की जांच...

CAA के समर्थन में जारी फोन नंबर पर फेसबुक पोस्ट करने के आरोपी की गिरफ्तारी पर त्रिपुरा हाईकोर्ट ने रोक लगाई
CAA के समर्थन में जारी फोन नंबर पर फेसबुक पोस्ट करने के आरोपी की गिरफ्तारी पर त्रिपुरा हाईकोर्ट ने रोक लगाई

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक व्यक्ति को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी, जिसे एक एफआईआर में आरोपी बनाया गया , जिसने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के समर्थन में मिस्ड कॉल अभियान के लिए भाजपा द्वारा प्रचारित फोन नंबर पर आधारित एक फेसबुक पोस्ट की थी। आरोपी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा था, "गलती से यदि आप 8866288662 में कॉल करते हैं, तो मोबाइल में सहेजा गया आपका सारा डेटा हैकर्स के पास चला जाएगा। सतर्क रहें ... सतर्क रहें ..."। आरोप लगाया कि यह फेसबुक पोस्ट धार्मिक विभाजनों को भड़काने...

आत्महत्या के लिए उकसाने को स्थापित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं, एमपी हाईकोर्ट ने 23 साल पहले मिली सज़ा के खिलाफ दायर अपील स्वीकार की
आत्महत्या के लिए उकसाने को स्थापित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं, एमपी हाईकोर्ट ने 23 साल पहले मिली सज़ा के खिलाफ दायर अपील स्वीकार की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच, जबलपुर ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में एक अपीलार्थी-अभियुक्त को मिली सज़ा के फैसले को पलट दिया। इस मामले में 23 साल पहले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने इस अपीलार्थी को उसकी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषी पाया था, जो आईपीसी की धारा 306 के तहत दंडनीय है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि, ''रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य निर्णायक रूप से उकसाने को साबित नहीं करते, जो कि आईपीसी की धारा 107 के तहत आवश्यक है। किसी भी गवाह द्वारा यह आरोप...

हिन्दू उत्तराधिकार : हिन्दू पुरुष की मौत के बाद उसकी सम्पत्ति संयुक्त परिवार की सम्पत्ति नहीं रह जाती
हिन्दू उत्तराधिकार : हिन्दू पुरुष की मौत के बाद उसकी सम्पत्ति संयुक्त परिवार की सम्पत्ति नहीं रह जाती

सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में हिन्दू उत्तराधिकार कानून 1956 के तहत उत्तराधिकार के सिद्धांतों पर विचार किया है। अधिनियम की धारा छह और आठ का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि हिन्दू पुरुष की मौत के बाद उसकी सम्पत्ति का खयाली बंटवारा (नोशनल पार्टिशन) होगा और यह उसके कानूनी वारिस को उसके अपेक्षित हिस्से के तौर पर हस्तांतरित होगा। इसलिए, इस तरह की सपत्ति ऐसे बंटवारे के बाद 'संयुक्त परिवार की सम्पत्ति' नहीं रह जायेगी। ये वारिस संबंधित सम्पत्ति के 'टिनेंट्स-इन-कॉमन' के सदृश होंगे तथा तब तक...

फ़िज़ूल मुक़दमा दायर करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाया 50 लाख का जुर्माना कहा, संभव हो तो याचिकाकर्ता को काली सूची में डालें
फ़िज़ूल मुक़दमा दायर करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाया 50 लाख का जुर्माना कहा, संभव हो तो याचिकाकर्ता को काली सूची में डालें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फ़ैसले में नागार्जुना एग्रो केमिकल्ज़ प्रा. लि. पर बेतुका मुक़दमा दायर करने के लिए 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। कंपनी ने याचिका में एसटीएफआर (Soil Testing Fertilizer Recommendations) तकनीक के उत्पादन और उनके विपणन की जांच की मांग की थी। इस तकनीक को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और भारतीय कृषि शोध संस्थान (आईएआरआई) ने विकसित की है। नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति आरके देशपांडे और न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की पीठ ने याचिकाकर्ता को मुक़दमे की लागत के रूप...

लीज़ पर ली गई ज़मीन पर बने स्कूलों की आरटीई अधिनियम के तहत मान्यता समाप्त करने के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगाई
लीज़ पर ली गई ज़मीन पर बने स्कूलों की आरटीई अधिनियम के तहत मान्यता समाप्त करने के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस आदेश को स्थगित कर दिया है, जिसमें उसने कहा था कि मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत चलने वाले स्कूलों के पास अपनी ज़मीन होनी चाहिए नहीं तो अधिनियम की धारा 18 और 19 के तहत उन्हें मान्यता नहीं दी जाएगी। राज्य के विशेष सचिव ने जनवरी 11, 2019 को एक आदेश जारी किया था कि जिन स्कूलों के पास अपने परिसर नहीं हैं, उन्हें आरटीई अधिनियम के तहत मान्यता देने पर विचार नहीं किया जाएगा। इसमें यह भी कहा गया कि जो स्कूल उपरोक्त शर्तों पर खड़ा...

बरी किए जाने के आदेश के ख़िलाफ़ क्या हाईकोर्ट रिविज़नल ज्यूरिडिक्शन का प्रयोग कर सकता है? पढ़िए इलाहाबाद HC ने क्या कहा
बरी किए जाने के आदेश के ख़िलाफ़ क्या हाईकोर्ट रिविज़नल ज्यूरिडिक्शन का प्रयोग कर सकता है? पढ़िए इलाहाबाद HC ने क्या कहा

हाल के एक फ़ैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निजी प्रतिवादी को बरी करते हुए कहा कि जहां निचली अदालत के फ़ैसले को किसी भी तरह से ग़ैरक़ानूनी नहीं कहा जा सकता या जिसमें किसी भी तरह से क्षेत्राधिकार संबंधी ग़लती नहीं है, ऐसे फ़ैसले में हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं है। न्यायमूर्ति राज बीर सिंह की एकल पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के रिविज़नल संबंधी क्षेत्राधिकार की परिधि काफ़ी सीमित है और इसका प्रयोग यदाकदा किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सिंह ने वेंकटेशन बनाम रानी एवं अन्य, (2013) 14 SCC 207 मामले में आए...

JJ एक्ट : 7 साल से ज्यादा की अधिकतम सजा लेकिन न्यूनतम सजा प्रदान न करने वाले अपराध जघन्य  नहीं  गंभीर श्रेणी के : सुप्रीम कोर्ट
JJ एक्ट : 7 साल से ज्यादा की अधिकतम सजा लेकिन न्यूनतम सजा प्रदान न करने वाले अपराध 'जघन्य ' नहीं ' गंभीर' श्रेणी के : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 2 (33) के में 7 साल से अधिक कारावास की सजा का प्रावधान है लेकिन कोई न्यूनतम सजा प्रदान नहीं दी गई है, या 7 साल से कम की न्यूनतम सजा प्रदान की गई है तो इसे 'जघन्य अपराध' नहीं माना जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 142 को लागू करते हुए न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने अपराध, जहां अधिकतम सजा 7 साल से अधिक का कारावास है, लेकिन कोई न्यूनतम सजा या 7 साल से कम की सजा है तो इसे...

केंद्र ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दो और अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की
केंद्र ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दो और अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की

विधि और न्याय मंत्रालय (न्याय विभाग) ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीशों के रूप में निम्नलिखित नियुक्तियों को अधिसूचित किया है। 1) अमित बालाचंद्र बोरकर 2) श्रीकांत दत्तराय कुलकर्णी इन नियुक्तियों के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या 72 हो गई, जो 94 जजों की स्वीकृत से संख्या अभी भी 22 कम है। पिछले साल, बॉम्बे उच्च न्यायालय में दस नए न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे। दिसंबर में छह न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे और जनवरी में माधव जामदार को नियुक्त किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हथनी को रिहा करने की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका वापस लेने की अनुमति के साथ खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने हथनी को रिहा करने की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका वापस लेने की अनुमति के साथ खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हथनी लक्ष्मी को उसके पूर्व महावत को वापस सौंपने से इनकार कर दिया और महावत द्वारा हथनी को वापस पाने के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उचित राहत के लिए हाईकोर्ट से संपर्क करने की स्वतंत्रता देने के साथ याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए याचिका का निपटान कर दिया। मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वर्तमान में याचिकाकर्ता महावत का हथनी पर स्वामित्व का दावा किसी भी कानूनी दस्तावेज से साबित नहीं होता है। हालांकि, अदालत ने हाईकोर्ट से...

शाहीन बाग में चल रहे सीएए के विरोध को कहीं और स्थानांतरित करने से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार
शाहीन बाग में चल रहे सीएए के विरोध को कहीं और स्थानांतरित करने से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने शाहीन बाग में सीएए के विरोध में चल रहे विरोध प्रदर्शन को अलग 'अधिकृत विरोध क्षेत्र' में स्थानांतरित करने की मांग करने वाले आवेदन पर विचार करने से इनकार कर दिया है। यह आवेदन दिल्ली में रहने वाले एक छात्र ने दिया था। यह छात्र चाहता था कि विरोध प्रदर्शन को शाहीन बाग से स्थानांतरित कर दिया जाए, उसके अनुसार, इस प्रदर्शन के कारण डीएनडी फ्लाईओवर मार्ग की ओर ट्रैफिक का बहुत बढ़ जाता है। आवेदन में उल्लेख किया गया था कि विरोध प्रदर्शनों से कालिंदी कुंज रोड क्षेत्र में भारी भीड़ हो...

प्रतिकूल कब्जे के जरिये अपने नागरिकों की जमीन पर सरकार को पूर्ण स्वामित्व की अनुमति नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट
प्रतिकूल कब्जे के जरिये अपने नागरिकों की जमीन पर सरकार को पूर्ण स्वामित्व की अनुमति नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश की एक 80-वर्षीया निरक्षर विधवा को राहत प्रदान की है, जिसकी जमीन राज्य सरकार ने 1967-68 में सड़क निर्माण के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाये बिना जबरन ले ली थी। न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने व्यवस्था दी कि सरकार नागरिकों से हड़पी जमीन पर पूर्ण स्वामित्व के लिए प्रतिकूल कब्जे (एडवर्स पजेशन) के सिद्धांत का इस्तेमाल नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया अपनाये बगैर निजी सम्पत्ति से किसी को जबरन बेदखल करना उसके मानवाधिकार तथा...

अडानी ग्रुप द्वारा कथित कस्टम ड्यूटी छिपाने पर DRI के LR को खारिज करने वाले बॉम्बे HC के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक 
अडानी ग्रुप द्वारा कथित कस्टम ड्यूटी छिपाने पर DRI के LR को खारिज करने वाले बॉम्बे HC के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक 

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें राजस्व निदेशालय (DRI) द्वारा अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और अडानी समूह की कंपनी अदानी पावर लिमिटेड द्वारा इंडोनेशियाई कोयले की खरीद और बिक्री के बारे में जानकारी के लिए सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, हांगकांग और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के अधिकारियों को जारी किए गए लेटर रोगेटरी को खारिज कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की तीन जजों की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ DRI...

स्पेसिफिक परफॉर्मेंस एक्ट में अस्थायी आदेश का अनुरोध करने वाले वादी को अविवादित तथ्यों के आईने में प्रथमदृष्ट्या मजबूत आधार दिखाना होगा : सुप्रीम कोर्ट
स्पेसिफिक परफॉर्मेंस एक्ट में अस्थायी आदेश का अनुरोध करने वाले वादी को अविवादित तथ्यों के आईने में प्रथमदृष्ट्या मजबूत आधार दिखाना होगा : सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि करार के तहत निश्चित अदायगी (स्पेसिफिक परफॉर्मेंस) से संबंधित मुकदमे में अस्थायी आदेश के तौर पर राहत पाने के लिए अविवादित तथ्यों के जरिये प्रथमदृष्ट्या मजबूत आधार बनाना जरूरी है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि निश्चित अदायगी खुद में विवेकाधीन उपाय है। पीठ ने यह भी कहा कि अंतरिम आदेश के लिए प्रथमदृष्ट्या मामला, सुविधा का संतुलन और अपूरणीय क्षति जैसे तथ्यों के अलावा संबंधित पक्षों का व्यवहार...

मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 163 A के तहत उधार पर वाहन चलाने वाले का वाहन मालिक और बीमा कंपनी पर दावा सुनवाई योग्य नहीं
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 163 A के तहत उधार पर वाहन चलाने वाले का वाहन मालिक और बीमा कंपनी पर दावा सुनवाई योग्य नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 163A के तहत वाहन मालिक और बीमा कंपनी के खिलाफ दावा सुनवाई योग्य नहीं है जिसे मृतक खुद चला रहा था। इस मामले में मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों ने उस वाहन के मालिक और बीमा कंपनी के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 163A के तहत दावा दायर किया जो मृतक द्वारा स्वयं चलाया जा रहा था। ट्रिब्यूनल ने इस आधार पर दावा करने की अनुमति दी कि मृतक उस वाहन के मालिक के रोजगार में था जिसे उसके द्वारा संचालित किया गया था और दूसरी बात, अधिनियम की धारा 163A...