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CAA के समर्थन में जारी फोन नंबर पर फेसबुक पोस्ट करने के आरोपी की गिरफ्तारी पर त्रिपुरा हाईकोर्ट ने रोक लगाई

LiveLaw News Network
12 Jan 2020 11:26 AM GMT
CAA के समर्थन में जारी फोन नंबर पर फेसबुक पोस्ट करने के आरोपी की गिरफ्तारी पर त्रिपुरा हाईकोर्ट ने रोक लगाई

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक व्यक्ति को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी, जिसे एक एफआईआर में आरोपी बनाया गया , जिसने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के समर्थन में मिस्ड कॉल अभियान के लिए भाजपा द्वारा प्रचारित फोन नंबर पर आधारित एक फेसबुक पोस्ट की थी।

आरोपी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा था,

"गलती से यदि आप 8866288662 में कॉल करते हैं, तो मोबाइल में सहेजा गया आपका सारा डेटा हैकर्स के पास चला जाएगा। सतर्क रहें ... सतर्क रहें ..."।

आरोप लगाया कि यह फेसबुक पोस्ट धार्मिक विभाजनों को भड़काने की एक साजिश थी और इसके आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई। यह भी आरोप लगाया गया कि पोस्ट गलत सूचना फैलाती है और सार्वजनिक उपद्रव का माहौल निर्मित करती है। यह आपराधिक साजिश के परिणामस्वरूप अफवाह फैलाने वाली है।

एफआईआर में शुरू में भारतीय दंड संहिता की धारा 153A (सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करना) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत अपराधों का उल्लेख किया गया था। ट्रायल कोर्ट द्वारा इन अपराधों के लिए अभियुक्त को ज़मानत दिए जाने के बाद, पुलिस ने धारा 505 आईपीसी के तहत अपराध को जोड़ा। इस नए जोड़े गए अपराध के संबंध में आरोपी ने प्राथमिकी को रद्द करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत उच्च न्यायालय का रुख किया।

मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए प्रथम दृष्टया आधार हैं। मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी ने पूछा,

" एक गंभीर सवाल यह होगा कि भले ही शिकायत में लगाए गए आरोपों को उनके अंकित मूल्य पर लिया जाए, क्या यह कहा जा सकता है कि उपर्युक्त में से कोई भी अपराध किया गया है?"

याचिका पर नोटिस जारी किया गया और प्राथमिकी के आधार पर जांच और गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई।


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