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अडानी ग्रुप द्वारा कथित कस्टम ड्यूटी छिपाने पर DRI के LR को खारिज करने वाले बॉम्बे HC के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक 

LiveLaw News Network
9 Jan 2020 5:32 AM GMT
अडानी ग्रुप द्वारा कथित कस्टम ड्यूटी छिपाने पर DRI के LR को खारिज करने वाले बॉम्बे HC के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक 
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सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें राजस्व निदेशालय (DRI) द्वारा अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और अडानी समूह की कंपनी अदानी पावर लिमिटेड द्वारा इंडोनेशियाई कोयले की खरीद और बिक्री के बारे में जानकारी के लिए सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, हांगकांग और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स के अधिकारियों को जारी किए गए लेटर रोगेटरी को खारिज कर दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की तीन जजों की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ DRI द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की और अडानी समूह की कंपनियों को नोटिस जारी किया।

इस दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता DRI के लिए पेश हुए और दलील दी कि इंडोनेशियाई कोयले के आयात के लिए कथित ज्यादा कीमत की जांच जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए।

दरअसल अक्टूबर 2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस रंजीत मोरे और जस्टिस भारती डांगरे ने लेटर रोगेटरी को खारिज कर दिया था और कहा था,

" DRI ने मजिस्ट्रेट से आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना एक गैर-संज्ञेय अपराध की जांच शुरू कर दी है और ऐसी परिस्थितियों में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए LR परीक्षण को पूरा नहीं करते और Cr.P.C के अध्याय XII के अनुरूप नहीं हैं। जांच शुरू करने की अनिवार्य आवश्यकता पूरी नहीं की गई है, जैसा कि अध्याय XII में निर्धारित है।"

यह था मामला

दरअसल अडानी समूह की कंपनियों के साथ-साथ उनके बैंकों द्वारा लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों / सूचनाओं को करने में असहयोग के चलते DRI ने मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, मुंबई के समक्ष आवश्यक सूचनाओं को सुरक्षित करने के लिए सिंगापुर, यूएई, हांगकांग, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंडस के अधिकारियों को लेटर ऑफ रोगेटरी जारी करने के अनुरोध का आवेदन दाखिल किया।

DRI के अनुसार याचिकाकर्ता इंडोनेशियाई मूल के कोयले की अधिक कीमत में शामिल थे और यह आरोप लगाया गया है कि अक्टूबर 2010 से मार्च 2016 के बीच की अवधि में अडानी ग्रुप ऑफ कंपनीज ने इंडोनेशियाई कोयले की लगभग 1300 खेपों का आयात किया था और अधिकांश आयात उनके समूह की सहायक कंपनी यानी अडानी ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (AGPTE), सिंगापुर और अडानी ग्लोबल Adani Global (AGFZE), दुबई के माध्यम से आया था।

कथित रूप से याचिकाकर्ताओं ने कुछ व्यक्तियों और कंपनियों के साथ मिलकर कोयले के आयात मूल्य को वास्तविक निर्यात मूल्य की तुलना में कम करके और विदेशों में ज्यादा रुपयों के एक उच्चतर टैरिफ का लाभ उठाने के लिए ये रास्ता अपनाया था ताकि वो भारत में बिजली उपयोग करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेच सकें।

अडानी समूह की कंपनियों पर आरोप

अडानी समूह की दो कंपनियों के खिलाफ सटीक आरोप यह है कि इंडोनेशियाई निर्यातकों द्वारा निर्यात के समय इंडोनेशियाई अधिकारियों के सामने घोषित और इंडोनेशियाई कोयले के मूल्य के बीच करोड़ों का अंतर था और यह अधिक मूल्य निर्धारण 231 खेपों में देखा गया था।

DRI के अनुसार, याचिकाकर्ता अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से इंडोनेशिया से कोयला आयात कर रहा था और एक तरफ AIFTA के तहत शुल्क की रियायती दरों का लाभ उठा रहा था और दूसरी तरफ, याचिकाकर्ता कोयला आयात के मूल्य को कम करने में लगे हुए थे और मूल्यों में बेमेल से यह स्पष्ट था।

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