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बलात्कार की शिकार 12 साल की गर्भवती के 23 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने के फैसले पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की राय मांगी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 12 साल की एक नाबालिग लड़की की अपने 23 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति के लिए दायर याचिका पर सुनवाई की और इस बारे में चंद्रपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड को अपनी राय देने को कहा है। यह लड़की बलात्कार की शिकार रही है। नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति वीएम देशपांडे ने इस अपील की सुनवाई की। चूंकी याचिककर्ता किसी वक़ील की सेवा नहीं ले पायी, इसलिए विधिक सेवा प्राधिकरण ने स्वीटी भाटिया को पीड़ित के लिए वक़ील नियुक्त किया। उन्होंने इस लड़की की ओर से याचिका...
लॉकडाउन : दिल्ली हाईकोर्ट ने लोन लेने वाले को उस सम्पत्ति पर अंतरिम क़ब्ज़े की अनुमति दी जिसका बैंक ने प्रतिभूतिकरण किया है
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक परिवार को देशव्यापी लॉकडाउन के कारण एक फ़्लैट के एक फ़्लोर पर अंतरिम क़ब्ज़ा क़ायम रखने की अनुमति दे दी है। इस फ़्लैट को एसएआरएफएईएसआई अधिनियम की धारा 14 के तहत आईआईएफएल होम फ़ाइनेंस लिमिटेड ने प्रतिभूतिकरण किया है। याचिकाकर्ता को इस परिसंपत्ति के एक फ़्लोर पर रहने की अनुमति देकर न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंड लॉ और न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वे लोग इस फ़्लैट के पहले माले पर किसी और को नहीं रखेंगे और इस परिसंपत्ति के किसी अन्य भाग पर कोई क़ब्ज़ा...
समय पर जागरूकता स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के काम में बाधा डालने वालों पर एनएसए लगाने जैसे कठोर कदम उठाने से बचा सकती है : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट (औरंगाबाद पीठ) ने कहा है कि समय पर जागरूकता के लिए कदम उठाने से COVID-19 का इलाज करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई करने जैसे ''कठोर उपायों'' से बचा जा सकता है।न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वारले ने इंदौर में स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ एनएसए लगाने के मामले में मीडिया में आई खबरों पर ध्यान देते हुए यह टिप्पणी की है। पीठ ने कहा कि''यह बताने के लिए किसी...
कार्पोरेट मामलों के मंत्रालय की सफाई, COVID-19 के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया गया धन सीएसआर नहीं माना जाएगा
कार्पोरेट मामलों के केंद्रीय मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि COVID-19 के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष या राज्य राहत कोष में दिया गया धन कंपनी अधिनियम के तहत सीएसआर व्यय नहीं माना जाएगा। अधिनियम की अनुसूची II में मुख्यमंत्री राहत कोष या राज्य राहत कोष का उल्लेख नहीं है । मंत्रालय ने कहा है, "COVID-19 संबंधित गतिविधियों के लिए CSR की धनराशि खर्च करना CSR व्यय माना जाएगा। आगे स्पष्ट किया गया है कि अनुसूची II के आइटम नंबर (i) और (xii) में शामिल COVID-19 से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के लिए धन...
(17 ए पीसी एक्ट) सरकारी कर्मचारी के खिलाफ पूछताछ/ जांच शुरू करने से पहले सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्यः राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि भ्रष्टाचार के मामले में लोक सेवकों के खिलाफ जांच के लिए सरकार की अनुमति आवश्यक है। किसी निजी शिकायत के आधार पर ऐसी जांच नहीं कराई जा सकती है।जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा, "... भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत लोक सेवकों के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार की अनुमति आवश्यक है और ऐसी अनुमति के बिना प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की जा सकती है। ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो लोक सेवकों पर तो मुकदमा नहीं ही चला सकता है, निजी व्यक्तियों के खिलाफ भी...
उड़ीसा हाईकोर्ट ने दो पहिया वाहन के उपयोग से बैन हटाया, जब्त वाहनों को अंडरटेकिंग लेने के बाद छोड़ने का आदेश
उड़ीसा हाईकोर्ट ने गुरुवार को लॉकडाउन उल्लंघनकर्ताओं के वाहनों को जब्त करने के संबंध में महत्वपूर्ण टिप्पणी की और कहा कि जब तक राज्य में " पैदल चलने योग्य दूरी" पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होती है, वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस पांडा और न्यायमूर्ति बिश्वनाथ रथ की खंडपीठ ने कहा कि जब से देशव्यापी लॉकडाउन लागू हुआ है, राज्य के लोग "गंभीर पीड़ा" में हैं और दो पहिया वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध है। पैदल चलकर जाने योग्य दूरी पर आवश्यक...
राज्य अटके पड़े प्रवासी मज़दूरों को सभी ज़रूरी सुविधाएँ सुनिश्चित करें : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि राज्य में अटके पड़े प्रवासी मजदूरों को वह, भोजन, आश्रय, दवा, पेय जल सहित सभी बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित करे। ये मज़दूर कोविड-19 महामारी के कारण घोषित लॉकडाउन के कारण अपने घर वापस नहीं जा पाए हैं। न्यायमूर्ति एए सैयद ने सर्वहारा जन आंदोलन एवं घर बनाओ आंदोलन की सम्मिलित जनहित याचिका पर सुनवाई की। इन दोनों ही याचिकाओं में प्रवासी मज़दूरों और हाशिए पर मौजूद लोगों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर अमल का आदेश दिए जाने की माँग की गई है। एजीपी...
बेंगलुरु में असहाय और बेघर लोगों की सहायता न करने के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने बीबीएमपी को लगाई फटकार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) को कड़ी फटकार लगाई है क्योंकि बीबीएमपी ने यह पता लगाने के लिए कोई व्यवस्थित प्रयास नहीं किया कि बेंगलुरु शहर में कितने प्रवासी, बेघर और फंसे हुए या असहाय लोग सड़कों पर रह रहे हैं या फ्लाईओवर के नीचे जैसी सार्वजनिक जगहों पर रहने को मजबूर हैं। मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति बी.वी नागरथना की खंडपीठ ने इस मामले में दायर याचिकाओं पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की है। पीठ ने 7 अप्रैल को बीबीएमपी को निर्देश...
मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी, उम्मीद है कि सरकार डॉक्टरों, पुलिस और स्वच्छताकर्मियों की सेवाओं की तारीफ करेगी और उनका वेतन बढ़ाएगी
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि लॉकडाउन में डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों, सफाईकर्मी अनवरत सेवाएं दे रहे हैं, जो बहुत ही सम्मानजनक है। इसलिए उम्मीद है कि सरकार उनकी सेवाओं के मुताबिक उनका वेतन बढ़ाएगी। जस्टिस एन किरुबाकरन और जस्टिस आर हेमलता की पीठ ने कहा, "यह उम्मीद की जाती है सरकारें उनके वेतन में उचित वृद्धि करके उनकी सेवाओं की सराहना करेंगी। कोर्ट का दृढ़ मत है कि डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और पुलिसकर्मी दिन-रात सेवारत रहते हैं, मगर उनका वेतन उनके काम के मुताबिक नहीं है।"उनका काम समाज में अच्छा...
दिल्ली हाईकोर्ट उच्चाधिकार प्राप्त समिति से सहमत, निजी मुचलके पर विचाराधीन क़ैदियों को छोड़ने की अनुमति दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति से सहमति जताते हुए विचाराधीन क़ैदियों को निजी मुचलके पर जेल से रिहा करने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने कहा, "…जिस तरह की अप्रत्याशित परिस्थिति है और जेलों में भीड़ कम करने के सुप्रीम कोर्ट की चिंता को देखते हुए…इस और इसके तहत आनेवाले किसी भी अधीनस्थ अदालत के 7 अप्रैल 2020 या उसके उसके पहले जारी ज़मानत के आदेश स्योरिटी की ज़रूरत को ख़त्म करते हुए और बदले में सिर्फ़ क़ैदी के निजी मुचलके पर, जो जेल...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे के एक व्यक्ति को अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए सड़क मार्ग से असम जाने की इजाज़त दी
COVID-19 महामारी के कारण हुए लॉकडाउन के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को अपने पिता के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए पुणे से सड़क मार्ग से असम जाने की इजाज़त दे दी। बिनी ढोलानी पुणे के रहने वाले हैं और उनके पिता की 5 अप्रैल को मौत हो गई। न्यायमूर्ति एके मेनन ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह संबंधित अधिकारी से यात्रा की अनुमति लेने के क्रम में उसे अपने जाने का कारण बताए और यह भी कि वह किस रास्ते से जाएगा। याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था जिसे रिट याचिका में बदल दिया गया...
कोरोना वायरस के संक्रमण के समय में पुलिस ज़्यादती की ख़िलाफ़ तेलंगाना हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, भेजा नोटिस
तेलंगाना हाईकोर्ट ने बुधवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए कोरोना वायरस के समय लॉकडाउन को नहीं मानने वालों के ख़िलाफ़ पुलिस ज़्यादतियों के मामले की सुनवाई की। इस बारे में वानापार्थी में हुई घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाँच की और इस पर महाधिवक्ता का जवाब मांंगा। वकील उमेश चंद्रा पीवीजी ने 4 अप्रैल 2020 को वानापार्थी में एक व्यक्ति को उसके बच्चे के सामने पुलिस पिटाई के बारे मेन एक पत्र लिखकर तेलंगाना हाईकोर्ट का ध्यान आकृष्ट किया था। सोशल मीडिया में इस पिटाई पर...
किसी सम्मेलन पर प्रतिबंध की बात सभी धर्मों पर बिना किसी अपवाद के लागू होती है; कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकार को बेंगलुरु करगा उत्सव को रोकने का निर्देश दिया
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्ज़ ऑफ़ इंडिया में छपी खबर पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से ऐतिहासिक बेंगलुरु करगा उत्सव को COVID-19 महामारी को देखते हुए रोकने का निर्देश दिया है। अख़बार ने खबर छापी थी कि सरकार इस उत्सव को मनाने की अनुमति दे दी है। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि 24 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जो दिशा निर्देश जारी किया था उसके अनुसार सभी तरह के पूजा स्थल को बंद कर दिया गया है और सभी तरह के धार्मिक सभाओं पर बिना किसी अपवाद के पाबंदियां लगा दी गई...
कानूनी शिक्षा के मौजूदा और प्रस्तावित केंद्रों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया से 'नियमित स्वीकृति' प्राप्त करनी होगी: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कानूनी शिक्षा नियम, 2008 के नियम 2 (xxiv) को बरकरार रखा है, जिसके तहत कानूनी शिक्षा के केंद्रों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया की स्वीकृति के बिना शिक्षा प्रदान करने पर रोक थी। जस्टिस अमित बोरकर और एएस चंदुरकर की पीठ ने कहा कि जब तक कानूनी शिक्षा का कोई केंद्र 2008 के नियमों के तहत नियमित मंजूरी नहीं पाता, बावजूद इसके कि वह पहले ही स्थायी मंजूरी पा चुका था, तब तक, 2009-10 के बाद से वह केंद्र न किसी छात्र का दाखिला नहीं ले सकता और न शिक्षा प्रदान कर सकता है। डॉ...
मध्यप्रदेश शासन ने की अतिरिक्त महाधिवक्ता और उप महाधिवक्ता की नियुक्ति, पढ़ें अधिसूचना
मध्यप्रदेश शासन विधि और विधायी कार्य विभाग ने नई दिल्ली कार्यालय में अतिरिक्त महाधिवक्ता और उप महाधिवक्ता के पदों पर नियुक्ति की अधिसूचना जारी की है।इन पदाधिकारियों की नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने के दिनांक से आगामी आदेश तक राज्य शासन द्वारा समय समय पर निर्धारित निश्चित पारिश्रमिक मात्र पर की जाती है। नियुक्ति पाने वाले पदाधिकारी इस प्रकार हैं।अतिरिक्त महाधिवक्ता, नई दिल्ली1. श्री पीव्ही योगेश्वरण, अधिवक्ता2. सुश्री स्वरूपमा चतुर्वेदी, अधिवक्ता3. श्री जोयदीप रॉय, अधिवक्ता4. श्री सौरभ मिश्रा,...
वयस्क होने के बावजूद लड़की को बालिका गृह में बंद रखने पर बाल कल्याण समिति से राजस्थान हाईकोर्ट ने लड़की को मुआवज़ा देने को कहा
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक वयस्क लड़की को सरकारी बालिका गृह में एक साल तक बंद रखने का दोषी मानते हुए राज्य की बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष को इस लड़की को 50,000 रुपए का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। अध्यक्ष को नोटिस जारी कर यह भी पूछा गया है कि इस चूक के लिए उन्हें क्यों नहीं उनके पद से हटा दिया जाए। बंद की गई लड़की को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हुई सुनवाई में स्कूल के प्रमाणपत्र के आधार पर उसे बालिग़ बताया गया। जोधपुर के बालिका गृह के अधिकारियों के बाल कल्याण समिति को लगातार इस बारे में...
दिल्ली सरकार लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं के लिए आवाजाही के पास सुनिश्चित करे : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि लॉकडाउन अवधि के दौरान शहर में आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही के लिए पास दिए जाएं और इस सुविधा को बनाए रखा जाए। न्यायमूर्ति विभू बाखरू की एकल पीठ ने एक पंजीकृत ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका में आदेश पारित किया, जिसमें शहर में आवश्यक वस्तुओं को लाने ले जाने के लिए एक प्रस्ताव दिया गया था। सिविलियन वेलफेयर एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट नामक एक पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा स्थानांतरित, याचिका में जरूरत पड़ने पर लोगों को विभिन्न आवश्यक...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे ज़रूरतमंद वकील और क्लर्क की सहायता पर स्वत: संज्ञान लिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को आर्थिक रूप से कमजोर अधिवक्ताओं और ऐसे पंजीकृत अधिवक्ता क्लर्कों के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया, जो अब लॉकडाउन के कारण अदालत के काम के नुकसान से भुखमरी के कगार पर हैं। मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि"लॉकडाउन लागू करने के बाद से पूरे देश में न्यायिक कामकाज की गति कम हो गई है और कोर्ट अर्जेंट मामलों की ही सुनवाई कर रहे हैं। ऐसे लाखों लोग, जिनका अस्तित्व न्यायपालिका के काम करने पर निर्भर करता है, न्यायायिक कार्यों...


















