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मद्रास हाईकोर्ट की टिप्‍पणी, उम्‍मीद है कि सरकार डॉक्टरों, पुलिस और स्वच्छताकर्मियों की सेवाओं की तारीफ करेगी और उनका वेतन बढ़ाएगी

LiveLaw News Network
11 April 2020 5:30 AM GMT
मद्रास हाईकोर्ट की टिप्‍पणी, उम्‍मीद है कि सरकार डॉक्टरों, पुलिस और स्वच्छताकर्मियों की सेवाओं की तारीफ करेगी और उनका वेतन बढ़ाएगी
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मद्रास हाईकोर्ट ने‌ कहा है कि लॉकडाउन में डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों, सफाईकर्मी अनवरत सेवाएं दे रहे हैं, जो बहुत ही सम्मानजनक है। इसलिए उम्‍मीद है कि सरकार उनकी सेवाओं के मुताबिक उनका वेतन बढ़ाएगी।

जस्टिस एन किरुबाकरन और जस्टिस आर हेमलता की पीठ ने कहा, "यह उम्मीद की जाती है सरकारें उनके वेतन में उचित वृद्धि करके उनकी सेवाओं की सराहना करेंगी। कोर्ट का दृढ़ मत है कि डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और पुलिसकर्मी दिन-रात सेवारत रहते हैं, मगर उनका वेतन उनके काम के मुताबिक नहीं है।"

उनका काम समाज में अच्छा स्वास्थ्य, कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक हैं। बेंच ने डॉक्टरों, स्वास्‍थ्यकर्मियों और पुलिसकर्मियों की स्वास्थ्य की स्थिति पर भी चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि वे कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में "अग्रणी योद्धा" हैं।

कोर्ट ने यह टिप्‍पण‌ियां COVID-19 के संदिग्धों / प्रभावित रोगियों को सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में "नि:शुल्क चिकित्सा सहायता" उपलब्‍ध कराने के लिए दायर एक याचिका में की है।

याचिकाकर्ता एडवोकेट एस जिमराज मिल्टन ने याचिका में कहा है, "बेड और अन्य चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाकर वायरस के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है। केवल सरकारी और निजी अस्पतालों के सहयोग से ही इस संकट से निपटा जा सकता है। इसलिए आकस्मिकता की इस अवधि में ये चिकित्सा सेवाएं जनता को नि: शुल्क प्रदान की जानी चाहिए।"

याचिका में ‌डिजास्टर मैनेजमेंट एक्‍ट के तहत राज्य स्तर पर और जिला स्तर पर कार्यकारी समितियों के गठन की मांग की गई है, ताकि नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल द्वारा तय दिशा-निर्देशों के आधार पर COVID-19 के प्रसार को रोका जा सके।

एडवोकेट मिल्टन ने याचिका में कहा है कि सरकार को निर्देश‌ित किया जाना चाहिए कि वह महामारी का मुकाबला करने के लिए हजारों स्वयंसेवकों की सेवाओं का उपयोग भी करे।

याचिका में उन्होंने निम्नलिखित मुद्दों को उठाया है:

-सभी जिलों में सरकारी और निजी अस्पतालों में COVID 19 के लिए अलग वार्ड अधिसूच‌ित और अनुमोदित किए जाएं, जिनमें पर्याप्त बेड के साथ-साथ आवश्यक परीक्षण प्रयोगशालाओं का इंतजाम हो। जांच, उपचार, मरीजों की देखभाल पूरी तरह मुफ्त हो।

-स्कूल, कॉलेज के छात्रावासों, विवाह और सामुदायिक हॉल को अस्थायी आइसोलेशन वार्ड या अस्पताल/ क्वारंटीन सेंटर में बदला जाए;

-WHO के निर्देशानुसार, COVID-19 वार्डों में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्‍थ्य कर्मियों के ल‌िए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) प्रदान करना;

-सफाइकर्म‌ियों, पुलिसकर्मियों, निगमों, बिजली और दूरसंचार कर्मचारियों और सभी आवश्यक सेवा कर्मचारियों को निर्धारित सुरक्षात्मक गियर प्रदान करें;

-गरीबों और प्रवासी मजदूरों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक रसोई खोलें।

अतिरिक्त महाधिवक्ता पीएच अरविंद पांडियन ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि सरकार ने इस दिशा में आवश्यक कदम उठा चुकी है। साथ ही कहा कि आवश्यकता पड़ने पर पंजीकृत हो चुके 45,000 स्वयंसेवकों की सेवाओं का उपयोग भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "हालांकि 100 डॉक्टरों, 3500 पैरा मेडिकल स्टाफ सहित लगभग 45,000 व्यक्तियों ने स्वैच्छिक सेवा के लिए पंजीकरण किया है, लेकिन उनकी सेवाओं का उपयोग नहीं किया जा रहा है ... आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन उनकी सेवाओं का उपयोग करने के लिए तैयार है।"

उन्होंने बताया कि सरकार के पास लगभग 37,648 PPE, 1,17,000 N-95 मास्क, 7,75,106 त्री-स्तरीय मास्क और 14,000 टेस्टिंग किट उपलब्ध हैं। सामुदायिक रसोई के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक राशन कार्ड धारक को 1000 रुपए दिए गए थे, मुफ्त राशन सामग्री और किराने का सामान भी दिया गया है।

सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों के आधार पर कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

मामले का विवरण:

केस का शीर्षक: एस जिमराज मिल्टन बनाम यूनियर ऑफ इंडिया व अन्य।

केस नं: WP No 7414/2020; WP No 7456/2020

कोरम: जस्टिस एन किरुबाकरन और आर हेमलता

प्रतिनिधित्व: एडवोकेट एस पार्थसारथी (याचिकाकर्ता के लिए); अतिरिक्त महाधिवक्ता पीएच अरविंद पांडियन, साथ में विशेष सरकारी वकील एएन थंबीदुरई और सरकारी वकील सीवी सैलेंद्रन (उत्तरदाताओं के लिए)।

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