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आजीवन कारावास की सजा देते हुए ट्रायल कोर्ट के पास यह शक्ति नहीं है कि वह प्राकृतिक मौत होने तक या सजा में छूट न देने की बात कहते हुए सजा की अवधि भी निश्चित करे
आजीवन कारावास की सजा देते हुए ट्रायल कोर्ट के पास यह शक्ति नहीं है कि वह प्राकृतिक मौत होने तक या सजा में छूट न देने की बात कहते हुए सजा की अवधि भी निश्चित करे

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बार फिर से इस बात की पुष्टि की है कि ट्रायल कोर्ट के पास यह आदेश देने की शक्ति नहीं है कि वह आजीवन कारावास की सजा को प्राकृतिक मौत होने तक चलने का आदेश दे सके या यह आदेश दे कि आरोपी को सजा में कोई छूट नहीं दी जाएगी। न्यायमूर्ति एस मुरलीधर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फैसला दिया। पीठ ने कहा है कि ''वी श्रीहरन'' मामले में शीर्ष अदालत की संविधान पीठ द्वारा व्यक्त किए गए विचार के अनुसार यह शक्ति केवल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पास ही है।यह फैसला देने...

यात्रियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक :  कर्नाटक हाईकोर्ट को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने बताया
यात्रियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक : कर्नाटक हाईकोर्ट को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने बताया

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने बुधवार को कर्नाटक हाईकोर्ट को बताया है कि यात्रियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप का उपयोग वैकल्पिक है,न कि अनिवार्य। मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायमूर्ति अशोक एस किन्गी की खंडपीठ ने एएआई के वकील द्वारा दिए गए बयान को दर्ज करते हुए कहा कि वह अब अलग-अलग सरकारी विभागों द्वारा जारी किए गए व्यक्तिगत मानक संचालन प्रक्रियाओं पर निर्णय लेने के बजाय याचिकाकर्ता अनिवार ए अरविंद की तरफ से दायर याचिका में मांगी गई अंतरिम राहत पर विचार करेंगे।इस लंबित रिट याचिका में अंतरिम...

कथित तौर पर पुलिस हिरासत से गायब होने का मामला : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लापता बीएचयू छात्र के मामले में लिया संज्ञान
कथित तौर पर पुलिस हिरासत से गायब होने का मामला : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लापता बीएचयू छात्र के मामले में लिया संज्ञान

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उस पत्र याचिका पर संज्ञान ले लिया है,जो मुख्य न्यायाधीश को वाराणसी से लापता एक छात्र के संबंध में लिखा गया था। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि छह महीने पहले यह छात्र कथित रूप से पुलिस हिरासत से गायब हो गया था। मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। साथ ही सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई पर संक्षिप्त जवाबी हलफनामे के रूप में तथ्यों का पूरा विवरण दायर करें। बनारस हिंदू...

Allahabad High Court expunges adverse remarks against Judicial Officer
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना और अपने अधीनस्थ न्यायालयोंं द्वारा जारी अंतरिम आदेश को 31 अक्टूबर तक बढ़ाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खुद जारी और अपने अधीनस्थ न्यायालयोंं/ न्यायाधिकरणों द्वारा जारी अंतरिम आदेशों की मियाद 31 अक्टूबर तक के लिए बुधवार को बढ़ा दी। न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने 'न्याय के हित में' इस बाबत एक न्यायिक आदेश जारी किया। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 148ए के तहत दायर कैविएट के अस्तित्व में 90 दिनों तक बने रहने की निर्धारित अवधि में से लॉकडाउन की अवधि और उस अवधि को भी बाहर रखा...

प्रत्यर्पण अनुरोध स्वीकार किये जाने तक अभियुक्त को किसी भी मामले में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट कोर्ट
प्रत्यर्पण अनुरोध स्वीकार किये जाने तक अभियुक्त को किसी भी मामले में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट कोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अभियुक्त के खिलाफ प्रत्यर्पण का अनुरोध स्वीकार किये जाने तक उसे किसी भी मामले में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी विनय कुमार (याचिकाकर्ता) की रिट याचिका का निपटारा करते हुए की। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंजाब नेशनल बैंक की रकम के गबन के लिए सात अलग मामलों में विनय मित्तल के खिलाफ आरोप पत्र दायर किये हैं। ट्रायल के दौरान याचिकाकर्ता भारत छोड़ चुका था और सीबीआई द्वारा शुरू किये गये मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष उपस्थित...

हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ आपराधिक केस दायर करने वाले न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उचित ठहराया
हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ आपराधिक केस दायर करने वाले न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उचित ठहराया

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उस न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को बरकरार रखा है जिन्होंने मुख्य न्यायाधीश और हाईकोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ आपराधिक केस दायर किए थे। छत्तीसगढ़ के न्यायिक अधिकारी प्रभाकर ग्वाल के मामले में बिना जांच के ही पूर्ण न्यायालय ने उसकी बर्खास्तगी की सिफारिश की थी, जिसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया था। इस मामले में आरोप था कि इस अधिकारी ने अपनी पत्नी के माध्यम से तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश और हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ न्यायाधीश सहित कई व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामला...

भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 376A की वैधता को दी गई थी चुनौती, तेलंगाना हाईकोर्ट ने खार‌िज की जनहित याचिका
भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 376A की वैधता को दी गई थी चुनौती, तेलंगाना हाईकोर्ट ने खार‌िज की जनहित याचिका

तेलंगाना हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एक जनहित याचिका को खार‌िज़ कर दिया, जिसमें भारतीय दंड संहिता की कुछ धाराओं की वैधता को चुनौती दी गई थी। जनहित याचिका में किए गए मुख्य अनुरोध- (a) भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और धारा 376 ए की घोषणा करना, अब तक यह 16 साल से कम उम्र की महिलाओं के साथ बलात्कार के अपराध के लिए मृत्युदंड का प्रावधान नहीं करता है क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है, और फलस्वरूप उस सीमा तक इसे असंवैधानिक घोषित करना। (b) संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के उल्लंघन...

अदालतों में शारीरिक रूप से कामकाज शुरू होने पर अधिवक्ता पूर्ण सहयोग करें और इसका पूरा उपयोग करें :  बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने अधिवक्ताओं से अनुरोध किया
अदालतों में शारीरिक रूप से कामकाज शुरू होने पर अधिवक्ता पूर्ण सहयोग करें और इसका पूरा उपयोग करें : बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने अधिवक्ताओं से अनुरोध किया

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ( BCD) ने अपने अध्यक्ष एडवोकेट केसी मित्तल के माध्यम से एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की वजह से अदालत के प्रतिबंधात्मक कामकाज की लंबी अवधि के दौरान होने वाली कठिनाई को कम करने के लिए अधिवक्ताओं से अदालत के शारीरिक रूप से शुरू होने का पूर्ण रूप से सहयोग करने और उसका उपयोग करने का अनुरोध किया है। 'अपील टू एडवोकेट्स' शीर्षक से जारी बयान में कहा गया है कि समन्वय समितियों और बार एसोसिएशनों और एडवोकेट जनरल के लिए यही समय है कि वे मुख्य...

COVID उपचार के संबंध में अस्पताल में आंदोलन की खबर के प्रकाशन के पीछे विद्वेषपूर्ण आशय का होना नहीं कहा जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने संपादक को अग्रिम ज़मानत दी
COVID उपचार के संबंध में अस्पताल में आंदोलन की खबर के प्रकाशन के पीछे विद्वेषपूर्ण आशय का होना नहीं कहा जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने संपादक को अग्रिम ज़मानत दी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार (17 अगस्त) को 'आनंदबाजार पत्रिका' के एक पूर्व संपादक को जमानत देते हुए कहा कि COVID रोगियों के उपचार के संबंध में एक सरकारी अस्पताल में सार्वजनिक आंदोलन को लेकर समाचार आइटम का प्रकाशन, विद्वेषपूर्ण आशय (Malicious Intention) से नहीं कहा जा सकता है। न्यायमूर्ति कौशिक चंद्रा एवं न्यायमूर्ति जोय्मल्या बागची की खंडपीठ ने यह बात उस मामले में कही, जहाँ संपादक/याचिकाकर्ता ने एक समाचार आइटम/रिपोर्ट का प्रकाशन किया था। क्या था यह मामला? दरअसल संपादक/याचिकाकर्ता ने उक्त...

पुलिस इस मामले की जांच से अपना पल्ला झाड़ रही है  : बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस आयुक्त को दिया निर्देश, पुलिस क्रूरता के कारण हुई मौत के मामले की जांच के लिए गठित करें एसआईटी
''पुलिस इस मामले की जांच से अपना पल्ला झाड़ रही है " : बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस आयुक्त को दिया निर्देश, पुलिस क्रूरता के कारण हुई मौत के मामले की जांच के लिए गठित करें एसआईटी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को मुंबई के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह 24 घंटे के अंदर ''एकदम स्वच्छ छवि और निर्विवाद क्षमता'' वाले दो अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम गठित करें ताकि वह विले पारले मेंं 22 वर्षीय व्यक्ति की मौत की जांच ''स्वतंत्र और निष्प्क्ष'' रूप से कर सकें। पारले पर लाॅकडाउन के दौरान 29 मार्च को पुलिस अधिकारियों ने हमला किया था और बाद में उसकी मौत हो गई थी।मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ इस मामले में एक वकील फिरदौस ईरानी की तरफ से...

[कुदाथयी मर्डर] मात्र इसलिए कि याचिकाकर्ता एक महिला है, वह जमानत की हकदार नहीं, केरल हाईकोर्ट ने रद्द की जॉली की जमानत
[कुदाथयी मर्डर] मात्र इसलिए कि याचिकाकर्ता एक महिला है, वह जमानत की हकदार नहीं, केरल हाईकोर्ट ने रद्द की जॉली की जमानत

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इसलिए कि याचिकाकर्ता एक महिला है, वह जमानत की हकदार नहीं है। हाईकोर्ट ने यह टिप्‍पणी कुदाथयी गांव की जॉली जोसेफ की जमानत याचिका को खारिज करते हुए की है। जॉली पर सायनाइड देकर अपने परिवार के छह सदस्यों की हत्या करने का आरोप है। उसने यह कृत्य 17 सालों की अवधि में किया था। जमानत याचिका की सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि एक महिला होने के कारण के आरोपी धारा 437 (1) सीआरपीसी के पहले प्रावधान की हकदार है, जिसमें कहा गया है कि 'अदालत यह निर्देश दे सकती है कि...

जमानत आवेदनों में वास्तविक श‌िकायतकर्ता को, उन मामलों को छोड़कर, जिनमें कानून ऐसा कहता हो, नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं हैः केरल हाईकोर्ट
जमानत आवेदनों में वास्तविक श‌िकायतकर्ता को, उन मामलों को छोड़कर, जिनमें कानून ऐसा कहता हो, नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं हैः केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि न्यायालय के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह वास्तविक (‌ड‌िफैक्टो) शिकायतकर्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए एक स्वतः नोटिस जारी करे या उन मामलों को छोड़कर, जिसमें आपराधिक प्रक्रिया संहिता और अन्य अधिनियमों में ऐसा आग्रह किया गया हो या जमानत अदालत को लगता हो कि उस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में वास्तविक शिकायतकर्ता को भी सुना जाना है, को छोड़कर, अभियुक्त को निर्देश दे कि वह जमानत याचिका में वास्तविक शिकायतकर्ता को आरोपित करे। इस मामले में आरोपी के खिलाफ धारा 420,...

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में चार न्यायिक अधिकारियों और गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में तीन अधिवक्ताओं की नियुक्ति का प्रस्ताव दिया
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में चार न्यायिक अधिकारियों और गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में तीन अधिवक्ताओं की नियुक्ति का प्रस्ताव दिया

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में चार न्यायिक अधिकारियों और गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में तीन अधिवक्ताओं की नियुक्ति का प्रस्ताव दिया है। 14 अगस्त को हुई अपनी बैठक में, कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में निम्नलिखित न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी। संजय कुमार पचोरी (जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बरेली) सुभाष चंद्र शर्मा (पीठासीन अधिकारी, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वसन और पुनर्वास प्राधिकरण, कानपुर नगर)। ...

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश, फिजिकल एक्जाम 14 सितंबर तक आयोजित करवाएं, पीडब्ल्यूडी श्रेणी के छात्रों के ठहरने और परिवहन की सुविधा देने पर करें विचार
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश, फिजिकल एक्जाम 14 सितंबर तक आयोजित करवाएं, पीडब्ल्यूडी श्रेणी के छात्रों के ठहरने और परिवहन की सुविधा देने पर करें विचार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह उन छात्रों की पहचान करे जो शारीरिक रूप सेे (फ़िज़िकल) परीक्षा देने के इच्छुक हैं। साथ ही उनके ठहरने और परिवहन की सुविधा देने के तौर-तरीकों पर विचार करें। दिल्ली विश्वविद्यालय के अलावा मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी निर्देश दिया गया है कि एक हलफनामा दायर करें और बताएं कि शारीरिक रूप से परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्रों में पीडब्ल्यूडी श्रेणी के छात्रों की आसान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए क्या तौर-तरीकों अपनाए जाने चाहिए। ...

[अनुच्छेद 300 ए] कानूनी अध‌िकार के बिना कार्यकारी आदेश के जर‌िए वेतन और पेंशन पर रोक नहीं लगाई जा सकती हैः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने लॉकडाउन में कर्मचा‌रियों के भुगतान रोकने के सरकारी आदेश को रद्द किया
[अनुच्छेद 300 ए] कानूनी अध‌िकार के बिना कार्यकारी आदेश के जर‌िए वेतन और पेंशन पर रोक नहीं लगाई जा सकती हैः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने लॉकडाउन में कर्मचा‌रियों के भुगतान रोकने के सरकारी आदेश को रद्द किया

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को, "इक्विटी जुरिस्डिक्शन" के प्रयोग में, राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अपने कर्मचारियों को वेतन और पेंशन के विलंबित हिस्से को 12% की दर से ब्याज के साथ वितरित करे। अदालत ने भुगतानों को विलंबित करने के सरकारी आदेशों को रद्द कर दिया और उन्हें अनुच्छेद 14, 15, 16, 21 और 300-ए का उलंघन बताया। अदालत ने निर्देशों को मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद 25 (1) के तहत गारंटीकृत आजीविका के अधिकारों के खिलाफ भी बताया। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन और वित्तीय संकट...

अभियुक्तों ने पूरी घटना को दबाया जैसे वे त्रासदी की प्रतीक्षा कर रहे हों : गुजरात हाईकोर्ट ने औद्योगिक दुर्घटना के लिए कारखाने के प्रबंधकों को माना प्रथम दृष्टया आईपीसी की धारा 304 का दोषी, अग्रिम ज़मानत देने से इनकार
अभियुक्तों ने पूरी घटना को दबाया जैसे वे त्रासदी की प्रतीक्षा कर रहे हों : गुजरात हाईकोर्ट ने औद्योगिक दुर्घटना के लिए कारखाने के प्रबंधकों को माना प्रथम दृष्टया आईपीसी की धारा 304 का दोषी, अग्रिम ज़मानत देने से इनकार

''अगर कोई आज भी भोपाल का दौरा करता है, तो उस त्रासदी की दहशत आज भी मानव विवेक को हिला देती है।'' मंगलवार को गुजरात हाईकोर्ट ने दिसम्बर 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी का संदर्भ देते हुए राज्य के एक रासायनिक कारखाने के आरोपी प्रबंधकीय कर्मचारियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। जून माह में इस कारखाने में हुई एक औद्योगिक दुर्घटना के चलते 10 श्रमिकों की मृत्यु हो गई थी और 77 अन्य घायल हो गए थे। पीठ ने मई माह में एल.जी.पॉलिमर केमिकल प्लांट, विशाखापत्तनम ,आंध्र प्रदेश में हुई औद्योगिक...