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ट्विटर से सांप्रदायिक हैशटैग को हटाने के लिए याचिका पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

LiveLaw News Network
23 Jun 2020 12:57 PM GMT
ट्विटर से सांप्रदायिक हैशटैग को हटाने के लिए याचिका पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
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तेलंगाना हाईकोर्ट ने सोमवार को ट्विटर से "सांप्रदायिक हैशटैग" को हटाने के लिए दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में कहा गया है कि ट्विटर पर ट्रेंड करनेवाले "सांप्रदायिक हैशटैग" के माध्यम से पूरे मुस्लिम समुदाय को निशाना बना गया है और उन्हें कोरोना वायरस फैलाने का दोषी बताया गया।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान और न्यायमूर्ति बी विजयसेन रेड्डी की बेंच ने इस याचिका पर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और ट्विटर को नोटिस जारी किया है।

अदालत ने प्रतिवादियों से कहा है कि वे चार सप्ताह के भीतर इस मामले में प्रति हलफ़नामा दायर करें और बताएँ क्यों इस तरह के ट्वीट को हटाया नहीं गया है।

याचिककर्ता वक़ील खाजा ऐजाजुद्दीन ने इससे पहले वेबसाइट्स पर इस्लाम से डर पैदा करने वाले ऐसे पोस्ट्स को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी जिससे मुस्लिम समुदाय की भावना को ठेस पहुँच सकती है।

उन्होंने कहा कि तब्लीगी जमात के सदस्य जो जाँच के बाद पॉज़िटिव पाए गए उस मामले को काफ़ी तूल दिया गया और इस धार्मिक जलसे को सांप्रदायिक रंग दे दिया गया जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर पोस्ट्स लिखे गए जिनको भारी प्रचार मिला और इस बीमारी को धर्म से जोड़ दिया गया।

याचिककर्ता ने कहा कि इस तरह के पोस्ट भारतीय कानूनों के ख़िलाफ़ हैं विशेषकर भारतीय दंड संहिता के जिसमें धर्म को अपमानित करने, किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं और देश के सांप्रदायिक सौहार्द को ठेस पहुँचाने के।

याचिका में कहा गया है कि डब्ल्यूएचओ ने 18 मार्च को जो दिशानिर्देश जारी किया उसमें भी यही कहा गया है कि 'महामारी को किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाएगा'।

इस पृष्ठभूमि में याचिककर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि वह केंद्र और तेलंगाना पुलिस को नोटिस जारी कर सोशल मीडिया प्लैट्फ़ॉर्म ट्विटर को 'महामारी को धर्म से जोड़कर उसे ग़ैरक़ानूनी रूप से ट्रेंड कराने से रोकने को कहे क्योंकि यह अनावश्यक, ग़ैरक़ानूनी और असंवैधानिक है।

फिर उसने यह भी कहा है कि ऑनलाइन सोशल मीडिया नेटवर्क्स या साइट्स को ऐसे संदेश स्वीकार करने से रोकना चाहिए जो किसी विशेष समुदाय की भावनाओं का अपमान करता है।

पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिककर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दी और यह आज़ादी दी कि वह चाहे तो तेलंगाना हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। इसके बाद ही उसने यह याचिका दायर की है।

हाईकोर्ट ने इस पर नोटिस जारी कर दिया है और अब वह इसकी सुनवाई चार सप्ताह बाद करेगा।

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