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सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

LiveLaw News Network
26 Sep 2021 5:15 AM GMT
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
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सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (20 सितंबर 2021 से 24 सितंबर 2021) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं, सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप।

पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

NEET-AIQ में कोटा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण लागू करने का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश की टिप्पणियों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि NEET-अखिल भारतीय कोटा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण केवल सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की मंजूरी से ही लागू किया जा सकता है, जो संविधान पीठ 103वें संविधान संशोधन की सत्यता की जांच कर रही है जिसमें आर्थिक आरक्षण का प्रावधान किया गया था।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय की टिप्पणियां अनावश्यक थीं। पीठ ने कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय NEET-AIQ में ओबीसी आरक्षण को लागू करने की मांग करने वाली एक अवमानना ​​याचिका पर विचार कर रहा था, और इसलिए 10% ईडब्ल्यूएस कोटा पर टिप्पणी उसके अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है।

केस शीर्षक: भारत संघ बनाम द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और अन्य

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कमलेश तिवारी मर्डर केस : सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल लखनऊ से प्रयागराज स्थान्तरित करने के आदेश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या के मामले में लखनऊ से प्रयागराज स्थानांतरित करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने आरोपी अशफाक हुसैन और नौ अन्य द्वारा दायर एक याचिका पर स्थानांतरण का आदेश दिया, जिन्होंने मुकदमे को उत्तर प्रदेश राज्य से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की थी। आरोपियों ने कहा कि उन्हें लखनऊ में जान का खतरा है और सांप्रदायिक तनाव के माहौल के कारण निष्पक्ष सुनवाई की संभावना नहीं है।

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"बच्चों के विवाह के अनुष्ठापन का बचाव करता है": सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2021 की धारा 8 की संवैधानिक वैधता को चुनौती

राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2021 की धारा 8 की संवैधानिक वैधता को उस हद तक चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका दायर की गई है, जहां तक ​​यह बाल विवाह के पंजीकरण की अनुमति देता है।

राजस्थान राज्य विधानसभा ने पिछले सप्ताह 2009 अधिनियम [राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम] में संशोधन करने के लिए उपरोक्त विधेयक पारित किया, जो बाल विवाह सहित विवाह के अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान करता है। 2009 के अधिनियम की धारा 8 के अनुसार, पक्षकारों का यह कर्तव्य है कि वे विवाह के पंजीकरण के लिए उस रजिस्ट्रार को एक ज्ञापन प्रस्तुत करें जिसके अधिकार क्षेत्र में विवाह संपन्न हुआ है।

केस : यूथ बार एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया

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दिल्ली जिमखाना क्लब मामला: सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक सीसीटीवी रिकॉर्ड रखने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली जिमखाना क्लब के रिकॉर्ड को नष्ट किए जाने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए गुरुवार को क्लब के प्रशासक को अगले आदेश तक सीसीटीवी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।

जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ दिल्ली जिमखाना क्लब की सामान्य समिति को निलंबित करने और मामलों के प्रबंधन के लिए भारत सरकार द्वारा नामित प्रशासक की नियुक्ति के एनसीएलएटी के आदेश को चुनौती देने वाली दीवानी अपील (ओं) पर सुनवाई कर रही थी।

केस शीर्षक: राजीव सभरवाल बनाम भारत संघ

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साक्ष्य के सख्त नियम विभागीय जांच पर लागू नहीं होते: सुप्रीम कोर्ट ने केस डायरी को रिकॉर्ड में रखने की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने माना है कि सबूत के सख्त नियम विभागीय जांच पर लागू नहीं होते हैं। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई ने उक्त विचार के साथ, उत्तराखंड के एक अतिरिक्त जिला जज को अनुमति दी कि वह केस डायरी का रिकॉर्ड सामने रखे।

अति‌रिक्त जिला जज एक विभागीय जांच का सामना कर रहे हैं। याचिकाकर्ता-एडीजे ने जांच अधिकारी के समक्ष कुछ दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर रखने के लिए 24 नंवबर, 2020 को एक आवेदन दायर किया था, जिसे इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि प्रेजेंटिंग ऑफिसर ने दस्तावेजों का यह कहते हुए समर्थन किया कि वे भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 85ए और 85बी के मद्देनजर स्वीकार योग्य नहीं है।

कारण शीर्षक: कंवर अमनिंदर सिंह बनाम माननीय उत्तराखंड हाईकोर्ट, नैनीताल अपने रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से

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2021 की जनगणना में ओबीसी संबंधित जानकारी इकट्ठा करना संभव नहीं: केंद्र ने महाराष्ट्र सरकार की याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा

केंद्र सरकार ने 2011-2013 में केंद्र द्वारा एकत्र किए गए ओबीसी की जनगणना के आंकड़ों को साझा करने के लिए महाराष्ट्र सरकार की याचिका के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में है कि जनगणना के दायरे से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा किसी भी जाति को बाहर करना एक सचेत नीति निर्णय है जो कि केंद्र सरकार द्वारा लिया गया है।

केस का शीर्षक: महाराष्ट्र राज्य बनाम भारत संघ | डब्ल्यूपी (सी) 841/2021

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"भारत में, हर राज्य की कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए, ऐसा न करने पर, यह अनुच्छेद 14 के जनादेश का उल्लंघन होगा": सुप्रीम कोर्ट ने NH टोल प्लाजा स्थानांतरित करने का आदेश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने पटना उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को दीदारगंज के पास करमलीचक से पटना-बख्तियारपुर फोर-लेन रोड (NH-30) पर टोल प्लाजा को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।

जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने फैसले में कहा, "निस्संदेह, भारत में, प्रत्येक राज्य की कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए, ऐसा न करने पर, यह अनुच्छेद 14 के जनादेश का उल्लंघन होगा। इस समय, हम यह भी नोटिस कर सकते हैं कि कारण बताने का कर्तव्य, यहां तक ​​कि प्रशासनिक कार्रवाई के मामले में, जहां कानूनी अधिकार दांव पर हैं और प्रशासनिक कार्रवाई कानूनी अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।"

केस : भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बनाम मधुकर कुमार

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जमानत मिलने के बाद कैदियों की रिहाई में देरी: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को आदेशों की ई-प्रमाणित प्रतियां स्वीकार करने के निर्देश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस तरह के आदेशों के संचार में देरी के कारण जमानत के आदेश पारित होने के बावजूद रिहाई नहीं होने पर जेलों की दुर्दशा के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए आदेशों की ई-प्रमाणित प्रतियों के प्रसारण के लिए फास्टर ( फास्ट एंड सिक्योर ट्रांसमिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स) नामक एक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के उपयोग को मंजूरी दे दी।

मामले का शीर्षक - जमानत मिलने के बाद दोषियों की रिहाई में देरी [एसएमडब्ल्यू (सी) संख्या 4/2021]

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रेस जुडिकेटा की याचिका को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तभी निर्धारित किया जा सकता है जब इसमें केवल कानून के प्रश्न का निर्णय शामिल हो : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेस जुडिकेटा की याचिका को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तभी निर्धारित किया जा सकता है जब इसमें केवल कानून के प्रश्न का निर्णय शामिल हो।

केस: जामिया मस्जिद बनाम के वी रुद्रप्पा (मृत्यु के बाद )

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'फिजिकल सुनवाई के लिए मुश्किल से आ रहे हैं वकील': सुप्रीम कोर्ट ने SCBA अध्यक्ष से सदस्यों को फिजिकल रूप से आने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह से कहा कि वे बार के सदस्यों को फिजिकल सुनवाई के लिए कोर्ट आने के लिए प्रोत्साहित करें।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना, न्यायमूर्ति नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने एक सितंबर, 2021 से सुप्रीम कोर्ट में मामलों की फिजिकल सुनवाई फिर से शुरू होने के बाद कम संख्या में फिजिकल सुनवाई के लिए अदालत में वकीलों के आने पर निराशा व्यक्त की।

मामले का शीर्षक: सीमा के विस्तार के लिए पुन: संज्ञान में

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'हम बहुत खुश हैं' : सुप्रीम कोर्ट ने COVID-19 से होने वाली मौतों के लिए 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि पर केंद्र के फैसले पर संतोष व्यक्त किया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को COVID-19 के कारण मारे गए लोगों के परिजनों को अनुग्रह मुआवजा प्रदान करने के केंद्र के फैसले पर खुशी व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीआरएफ) द्वारा तैयार दिशा-निर्देशों के अनुसार, COVID-19 मौतों के लिए अनुग्रह मुआवजा 50,000 रुपये तय किया गया है। इसका भुगतान राज्यों द्वारा राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष से किया जाएगा।

केस शीर्षक: गौरव कुमार बंसल बनाम भारत संघ

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COVID पॉजिटिव पाए जाने के 30 दिनों के भीतरआत्महत्या से मरने वालों के परिवार वाले भी अनुग्रह राशि के हकदार होंगे : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

आत्महत्या से मृत्यु को शामिल ना करने, भले ही COVID 19 एक साथ की स्थिति हो, केंद्र को अपने निर्णय पर फिर से विचार करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब केंद्र ने बताते हुए एक हलफनामा दायर किया है कि पॉजिटिव पाए जाने के 30 दिनों के भीतर आत्महत्या से मरने वालों के परिवार वाले अनुग्रह राशि के हकदार होंगे।

(मामला: गौरव कुमार बंसल बनाम भारत संघ)।

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पेगासस केस : जासूसी के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट तकनीकी समिति का गठन करने की तैयारी में, अगले हफ्ते आएगा आदेश

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके पत्रकारों, एक्टिविस्ट आदि की जासूसी के आरोपों की जांच के लिए एक तकनीकी समिति का गठन करने की संभावना है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने गुरुवार को कहा कि अदालत अगले सप्ताह मामले में आदेश पारित करेगी। सीजेआई ने यह बात मौखिक रूप से वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह को बताई, जो पेगासस याचिकाओं में से एक में पेश हो रहे थे, जबकि वो आज एक अन्य मामले का उल्लेख कर रहे थे। सीजेआई ने कहा कि कोर्ट इसी हफ्ते आदेश पारित करना चाहता है।

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यदि प्रश्न में शामिल विवाद मध्यस्थता समझौते से संबंधित नहीं है तो मध्यस्थता संदर्भ को अस्वीकार किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 11 के तहत मध्यस्थता के संदर्भ के लिए प्रार्थना को अस्वीकार किया जा सकता है, यदि प्रश्नगत विवाद मध्यस्थता समझौते से संबंधित नहीं है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि केवल एक आवेदक द्वारा चुने गए मध्यस्थ के समक्ष उठाए गए कथित विवाद को निस्तारित करने के लिए यांत्रिक रूप से कार्य करने की उम्मीद नहीं है।

केस: डीएलएफ होम डेवलपर्स लिमिटेड बनाम राजापुरा होम्स प्राइवेट लिमिटेड

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सुप्रीम कोर्ट मामलों को दायर करने की सीमा अवधि बढ़ाने के स्वत: संज्ञान आदेश को 1 अक्तूबर से वापस लेने को तैयार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह 27 अप्रैल, 2021 के स्वत: संज्ञान आदेश को वापस लेगा, जिसने 14 मार्च, 2021 से मामलों को दायर करने की सीमा अवधि बढ़ा दी थी। कोर्ट ने कहा कि सीमा अवधि का स्वत: विस्तार 1 अक्टूबर, 2021 से वापस ले लिया जाएगा। इसने यह भी संकेत दिया कि 90 दिनों की एक सीमा अवधि 1 अक्टूबर से प्रभावी होगी। कोर्ट ने कहा कि वह इस आशय के लिए एक आदेश पारित करेगा और नियम और शर्तों को निर्धारित करेगा।

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एनडीपीएस : आरोपी के कब्जे से प्रतिबंधित मादक पदार्थ की बरामदगी न होना जमानत देने का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत किसी आरोपी को महज इस तथ्य के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती कि आरोपी के पास प्रतिबंधित मादक पदार्थ नहीं था।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह का निष्कर्ष एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37(1)(बी)(ii) के तहत आवश्यक जांच के स्तर से अदालत को मुक्त नहीं करता है। कोर्ट ने दोहराया कि जमानत देते समय कसौटी पर कसने की असली बात यह है कि क्या यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि आरोपी ने कोई अपराध नहीं किया है और क्या जमानत पर रहते हुए आरोपी द्वारा कोई अपराध किए जाने की आशंका है।

केस का नाम: भारत सरकार बनाम मोहम्मद नवाज खान

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"आइए, एक छोटी शुरूआत करें" : सुप्रीम कोर्ट ने सैन्य स्कूलों में लड़कियों को शामिल करने के मुद्दे को संबोधित करने को कहा

यह देखते हुए कि रक्षा बलों ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी ( एनडीए) में महिलाओं को शामिल करने के लिए एक पाठ्यक्रम आगे बढ़ाया है, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज में लड़कियों के प्रवेश के मुद्दे को संबोधित किया जाना चाहिए और इसे स्थगित नहीं किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने भारत सरकार को आरआईएमसी और राष्ट्रीय सैन्य स्कूल में महिलाओं को शामिल करने के मुद्दे को एनडीए में महिलाओं को शामिल करने के मुद्दे के समान संबोधित करने और 2 सप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

केस: कैलास उधवराव मोरे बनाम भारत संघ

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कांग्रेस टूलकिट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता रमन सिंह, संबित पात्रा के खिलाफ एफआईआर पर रोक के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार की अपील खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में जांच पर रोक लगा दिया गया था।

दरअसल, यह मामला संबित पात्रा के एक ट्वीट को लेकर शुरू हुआ जिसमें उन्होंने ट्वीट किया था कि कांग्रेस पार्टी ने विदेशी मीडिया में देश की छवि खराब करने के लिए टूलकिट तैयार किया है।

केस टाइटल: छत्तीसगढ़ राज्य बनाम रमन सिंह एंड अन्य और छत्तीसगढ़ राज्य बनाम संबित पात्रा एंड अन्य

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शैक्षिक योग्यता पदोन्नति के मामलों में समान वर्ग के व्यक्तियों के बीच वर्गीकरण के लिए एक वैध आधार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पदोन्नति के मामलों में एक ही वर्ग के व्यक्तियों के बीच वर्गीकरण के लिए शैक्षिक योग्यता एक वैध आधार है। चंदन बनर्जी और अन्य बनाम कृष्ण प्रसाद घोष और अन्य मामले में दिए गए फैसले में जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ ने कहा कि शैक्षिक योग्यता के आधार पर ऐसा वर्गीकरण संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं है।

ऐसा मानते हुए कोर्ट ने कोलकाता नगर निगम में डिप्लोमा और डिग्री धारी सुपरन्यूमेरी एसिस्टेंट इंजीनियरों को पदोन्नति के लिए अलग पात्रता शर्तों की वैधता को बरकरार रखा।

केस शीर्षक: चंदन बनर्जी और अन्य बनाम कृष्ण प्रसाद घोष और अन्य।

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सुप्रीम कोर्ट ने श्री पद्मनाभ स्वामी ट्रस्ट की 25 साल के विशेष ऑडिट के आदेश से छूट देने की अर्जी खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर ट्रस्ट (जो तत्कालीन त्रावणकोर शाही परिवार द्वारा बनाया गया था) द्वारा दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें पिछले साल कोर्ट द्वारा तिरुवनंतपुरम के प्रतिष्ठित श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के लिए 25 साल के विशेष ऑडिट के आदेश से छूट देने का आग्रह किया गया था।

केस: श्री मार्तंड वर्मा (डी) एलआर के माध्यम से बनाम केरल राज्य | सीए नंबर 2732/2021

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'सशस्त्र बल आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित; महिलाओं का प्रवेश रोका नहीं जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को एनडीए की परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के आदेश को रद्द करने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महिला उम्मीदवारों को नेशनल ड‌िफेंस अकेडमी (एनडीए) की परीक्षाओं में बैठने की अनुमति देने के लिए पास अंतरिम आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने एनडीए को मौजूदा एंट्रेंस में महिलाओं को शामिल करने से छूट देने की रक्षा मंत्रालय की प्रार्थना ठुकरा दी है। मंत्रालय ने कहा था कि महिलाओं को शामिल करने की अनुमति देने के लिए कुछ बुनियादी ढांचे और पाठ्यक्रम में बदलाव की आवश्यकता है, और इसलिए महिलाओं को एनडीए एंट्रेस में भाग लेने की अनुमति देने के लिए मई 2022 तक का समय मांगा था।

केस शीर्षक: कुश कालरा बनाम यू‌नियन ऑफ इंडिया और अन्य

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सीपीसी का आदेश VII नियम 11: वादपत्र को खारिज करना होगा अगर इसमें मांगी गयी राहत कानून के तहत नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक अदालत को एक वादपत्र खारिज करना होगा यदि उसे लगता है कि इसमें मांगी गई कोई भी राहत कानून के तहत वादी को नहीं दी जा सकती है।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने कहा कि ऐसे मामले में, दिखावटी मुकदमेबाजी को समाप्त करना आवश्यक होगा ताकि आगे न्यायिक समय बर्बाद न हो। कोर्ट ने कहा कि सीपीसी के आदेश VII नियम 11 का अंतर्निहित उद्देश्य यह है कि जब कोई वादी कार्रवाई के कारण का खुलासा नहीं करता है, तो अदालत वादी को अनावश्यक रूप से मुकदमे को लंबा खींचने की अनुमति नहीं देगी।

केस का नाम: राजेंद्र बाजोरिया बनाम हेमंत कुमार जालान

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मोटर दुर्घटना मुआवजा- मृतक के लिए जो प्रासंगिक गुणक हो, उसे ही लागू किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना मुआवजे की गणना करते समय मृतक के लिए प्रासंगिक गुणक लागू किया जाना चाहिए। मामले के मुताबिक, एक दुर्घटना में जे जयचंद्रन की मृत्यु के बाद उसके माता-पिता ने मुआवजे का दावा दायर किया था। एमएसीटी ने 16 का गुणक लिया क्योंकि दुर्घटना के समय मृतक की उम्र 33 वर्ष थी, और 30,81,577 रुपए की राशि की गणना की। एमएसीटी का तर्क यह था कि मृतक सऊदी अरब में नौकरी करता था, जहां वह 3,500 रियाल कमा रहा था।

केस शीर्षक: चंद्रा बनाम शाखा प्रबंधक, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड

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"धोखाधड़ी हर गंभीर कार्य को नष्ट कर देती है " सुप्रीम कोर्ट ने एक पंजीकृत उपहार विलेख को शून्य घोषित करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा

धोखाधड़ी हर गंभीर कार्य को नष्ट कर देती है, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखते हुए टिप्पणी की, जिसने धोखाधड़ी और अनुचित प्रभाव के आधार पर एक पंजीकृत उपहार विलेख ( गिफ्ट डीड) को शून्य घोषित कर दिया।

इस मामले में, एक पंजीकृत उपहार विलेख द्वारा, यदुनंदन मिस्त्री, जो संतान-रहित था, ने अपने भतीजे की पत्नी के पक्ष में 2.92 एकड़ भूमि इस धारणा पर उपहार में दी कि उसका भतीजा यदुनंदन वृद्धावस्था में उसकी और पत्नी की देखभाल करेगा।

हालांकि, उन्होंने तुरंत रद्दीकरण विलेख के माध्यम से उपहार को रद्द करने की मांग की। बाद में, उन्होंने यह घोषणा करने के लिए एक मुकदमा दायर किया कि उपहार विलेख धोखाधड़ी और अनुचित प्रभाव का अभ्यास करके प्राप्त किया गया था और इसलिए, इसे शून्य घोषित किया जाना चाहिए।

केस : सोनामती देवी बनाम महेंद्र विश्वकर्मा

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हर अवैध बर्खास्तगी/ समाप्ति मामले में पूरे वेतन के साथ बहाली हर मामले में स्वचालित नहीं होती : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि पूरे वेतन के साथ बहाली हर मामले में स्वचालित नहीं होती है, जहां बर्खास्तगी/ समाप्ति कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं पाई जाती है।

इस मामले में, इलाहाबाद बैंक द्वारा क्लर्क-सह-कैशियर के रूप में नियुक्त एक कर्मचारी को बैंक रिकॉर्ड को जलाने से संबंधित घटना में शामिल होने का आरोप लगाते हुए सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। औद्योगिक ट्रिब्यूनल ने पाया कि हालांकि एक मजबूत संदेह था, लेकिन सेवा से बर्खास्त करने के लिए उसके कदाचार को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे।

केस: इलाहाबाद बैंक बनाम कृष्ण पाल सिंह

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के 17 न्यायाधीशों के ट्रांसफर की सिफारिश की

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के 17 जजों के ट्रांसफर/री-ट्रांसफर की सिफारिश की है।

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2012-2013 वित्तीय वर्ष से पहले टीडीएस काटने में भुगतानकर्ता की चूक के कारण निर्धारिती को कम अग्रिम कर चुकाने पर ब्याज के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि 2012-2013 वित्तीय वर्ष से पहले अग्रिम कर की गणना करते समय निर्धारिती द्वारा स्रोत पर कटौती योग्य या संग्रहणीय आयकर की राशि को कम किया जा सकता है।

इसलिए, निर्धारिती को अग्रिम कर की कमी के लिए आयकर की धारा 234बी के तहत ब्याज के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है, जो अग्रिम कर से स्रोत पर कटौती योग्य या संग्रहणीय आयकर को कम करने के कारण उत्पन्न होता है। दूसरे शब्दों में, टीडीएस काटने में भुगतानकर्ता की चूक के कारण निर्धारिती को अग्रिम कर के कम भुगतान पर ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है।

केस : आयकर निदेशक, नई दिल्ली बनाम मेसर्स मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन

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सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के अंशकालिक शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के समान वेतन देने के आदेश पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगाने का निर्देश दिया जिसमें पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग को एक गैर सरकारी सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक स्कूल में कार्यरत नियमित शिक्षक के वेतनमान में अंशकालिक शिक्षकों को मूल वेतन के बराबर वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने पश्चिम बंगाल राज्य द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका में नोटिस जारी किया, जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 3 सितंबर 2020 को चुनौती दी गई थी, इस तरह के भुगतान को 28 जुलाई,2010 से 24 दिसंबर 2013 तक प्रभावी करने का निर्देश दिया गया था जब सरकार के 28 जुलाई के आदेश को वापस ले लिया गया।

केस: पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य बनाम अनिर्बान घोष और अन्य।

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कई हत्याओं के आरोपी को 'समवर्ती' आजीवन कारावास की सजा हो सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल के एक आदेश में कहा कि एक से अधिक व्यक्तियों की हत्या के दोषी अभियुक्तों को समवर्ती आजीवन कारावास की सजा देने पर कोई रोक नहीं है। अदालत एक कैदी की रिट याचिका पर विचार कर रही थी, जिसने अपनी रिहाई का की मांग की थी और कहा था कि वह 16 साल की वास्तविक सजा सहित 21 साल से अधिक की सजा काट चुका है।

इस मामले में, लागू छूट नीति में एक खंड (5) था, जिसमें यह प्रावधान था कि जिन्हें आजीवन कारावास के अलावा एक या अधिक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और जो ट्रायल सहित 20 साल की सजा काट चुके हैं, उन्हें छूट सहित 26 साल की सजा पूरी करने के बाद में रिहा किया जाएगा।

केस शीर्षक: महावीर बनाम मध्य प्रदेश राज्य

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प्रोमो में दिखाए गए गाने को छोड़ने के लिए मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट ने यशराज फिल्म्स के खिलाफ एनसीडीआरसी के आदेश पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यशराज फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी किया। यशराज फिल्म्स ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के एक आदेश को चुनौती दी गई थी।

एनसीडीआरसी ने अपनी निर्देश में यशराज फिल्म्स ने शाहरुख खान-स्टारर 'फैन' से 'जबरा फैन' गाने को फिल्म से बाहर करने से निराश होकर एक उपभोक्ता को मुआवजे के रूप में 10, 000 रुपये का भुगतान करने के लिए प्रोडक्शन हाउस को दिया था।

केस शीर्षक: यश राज फिल्म्स प्रा. लिमिटेड बनाम आफरीन फातिमा जैदी और अन्य।

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समान हितधारी कई उपभोक्ताओं की ओर से उपभोक्ता शिकायत केवल उपभोक्ता फोरम की अनुमति से दायर की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक या दो उपभोक्ताओं की ओर से एक ही प्रकार की उपभोक्ता शिकायत केवल उस उपभोक्ता फोरम की अनुमति से दायर की जा सकती है, जिसके अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया गया है।

मामले में नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (एनसीडीआरसी) ने इन्वेस्टर फोरम अनेजा ग्रुप की ओर से दायर एक शिकायत को मंजूर कर लिया।

अपील में यह तर्क दिया गया था कि इन्वेस्टर फोरम इस तथ्य के मद्देनजर एनसीडीआरसी के अधिकार क्षेत्र को लागू नहीं कर सकता था कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 2(1)(बी) के तहत शिकायतकर्ता का अर्थ या तो उपभोक्ता है या कंपनी अधिनियम, 1956 या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत पंजीकृत कोई स्वैच्छिक उपभोक्ता संघ।

केस शीर्षक: योगेश अग्रवाल बनाम अनेजा कंसल्टेंसी

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सुप्रीम कोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों के निरीक्षण के लिए विशेष आयोग गठित करने के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (17 सितंबर) को ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड और दतिया जिले में चलाए जा रहे नर्सिंग कॉलेजों के निरीक्षण के लिए वकीलों, जिला जज और जिला कलेक्टर को मिलाकर आयोग गठित करने के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति यूयू ललित, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने म.प्र. सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 के तहत पंजीकृत निजी नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन द्वारा उच्च न्यायालय के 18 अगस्त, 2021 के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका में नोटिस जारी किया।

केस का शीर्षक: प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन बनाम हरिओम एंड अन्य

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संयुक्त हिंदू परिवार का कर्ता अपनी गर्भवती भाभी के इलाज में सेवा में कमी के संबंध में उपभोक्ता शिकायत दर्ज नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संयुक्त हिंदू परिवार का कर्ता अपनी गर्भवती भाभी के इलाज को लेकर अस्पताल/डॉक्टर की ओर से सेवा में कमी के संबंध में उपभोक्ता शिकायत दर्ज नहीं कर सकता है।

न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, संयुक्त हिंदू परिवार की अवधारणा गर्भवती भाभी के इलाज तक नहीं है। इस मामले में संयुक्त हिंदू परिवार के एक 'कर्ता' ने अपनी गर्भवती भाभी किरण श्रीवास्तव के इलाज के संबंध में सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए एक क्लिनिक के खिलाफ उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराई।

केस: जगनारायण लाल बनाम डॉक्टर गिरिजा तिवारी

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रजिस्टर्ड सेल डीड को एकतरफा रद्द करना अग्रिम जमानत की शर्त नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (17 सितंबर, 2021) को कहा कि हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के कथित अनुपालन में एक पंजीकृत बिक्री विलेख को एक पक्ष द्वारा एकतरफा रद्द नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह उन खरीदारों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है जो हाईकोर्ट के समक्ष पक्षकार नहीं हैं।

वर्तमान मामले में मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा 8 जून, 2021 के आदेश को चुनौती देने वाली उस विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देते हुए अभियुक्त को निर्देश दिया था कि वह रजिस्टर्ड सेल डीड को निरस्त करे और शिकायतकर्ता से प्राप्त राशि उसे लौटाए।

केस शीर्षक: सैयद अफसर पाशा क़ादरी बनाम तेलंगाना सरकार

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चोरी की घटना के बारे में बीमा कंपनी को सूचित करने में देरी दावे से इनकार करने का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चोरी की घटना के बारे में बीमा कंपनी को सूचित करने में केवल देरी बीमा दावे को अस्वीकार करने का आधार नहीं हो सकता है। इस मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वाहन चोरी होने पर मुआवजे के दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया कि चोरी की सूचना बीमा कंपनी को देने में 78 दिन की देरी हुई है।

शिकायतकर्ता ने महिंद्रा एंड महिंद्रा मेजर जीप खरीदी थी, जो एक शराब की दुकान के कार्यालय के बाहर चोरी हो गई, जिसमें वह एक भागीदार था। युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ वाहन का बीमा किया गया था।

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