ताज़ा खबरें
कश्मीर में इंटरनेट और मीडिया पर प्रतिबंध अनुचित, वकील वृंदा ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट में लगातार दूसरे दिन दलील दी
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर में लगाए गए इंटरनेट बैन और मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की याचिका पर वकील वृंदा ग्रोवर की दलीलें लगातार दूसरे दिन सुनीं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि इंटरनेट और मीडिया की तालाबंदी पिछले 90 दिनों से कश्मीर में जारी है, जो बोलने की आज़ादी पर अनुचित प्रतिबंध है। ग्रोवर कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की ओर से पैरवी कर रही हैं, जिन्होंने राज्य की विशेष...
IPS एसोसिएशन की मांग, तीस हज़ारी हिंसा में शामिल वकीलों के लाइसेंस रद्द किए जाएं
तीस हज़ारी अदालत परिसर में शनिवार को पुलिस और वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प के सम्बंध में केंद्रीय IPS एसोसिएशन ने हिंसा में शामिल वकीलों पर कार्रवाई की मांग की है। यह कहते हुए कि अदालतों को सभी पक्षों को "समान रूप से" व्यवहार करना चाहिए, केंद्रीय IPS एसोसिएशन ने मंगलवार को मांग की कि, "सभी वकील जो हिंसा का हिस्सा थे, उनकी पहचान की जानी चाहिए और उनके लाइसेंस रद्द करने सहित उन पर उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।" हिंसा का हिस्सा रहे वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दिल्ली पुलिस...
भीमा कोरेगांव हिंसा : नवलखा ने पुणे की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले के आरोपी एक्टिविस्ट गौतम नवलखा ने आखिरकार अग्रिम जमानत के लिए पुणे की स्पेशल कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। नवलखा को सुप्रीम कोर्ट से मिला गिरफ्तारी से सरंक्षण 12 नवंबर को खत्म हो रहा है।जल्द से जल्द याचिका का निपटारा करने के निर्देश इससे पहले सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवलखा को कहा था कि वो पुणे की स्पेशल कोर्ट में अपनी अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करेंं। हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट को भी निर्देश दिया है कि वो जल्द से जल्द याचिका का निपटारा करे। पीठ ने पुणे पुलिस को...
फायर आर्म के बिना अगर किसी के पास कोई कारतूस मिलता है तो हथियार अधिनियम के तहत उस पर मुकदमा नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात को दोहराया है कि अगर किसी व्यक्ति के पास से कोई कारतूस बरामद होता है लेकिन हथियार नहीं तो उस व्यक्ति पर हथियार अधिनियम के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने पास मौजूद एकल कारतूस की मौजूदगी के बारे में अनभिज्ञ है और उसके पास से कोई फायर आर्म (आग्नेयास्त्र) बरामद नहीं होता और इस तरह किसी को कोई ख़तरा नहीं था तो उस व्यक्ति को हथियार अधिनियम की धारा 45d के तहत संरक्षण मिलेगा। क्या कहती है हथियार अधिनियम...
[बलात्कार और हत्या] अभियुक्त को सिर्फ अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति साबित होने पर ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक युवक को रिहा करने के आदेश दिए हैं, जिसने बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद लगभग तेरह साल जेल में बिता दिए। जस्टिस मोहन एम एस और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने उच्च न्यायालय और ट्रायल कोर्ट द्वारा समवर्ती सजा को पलट दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष अन्य परिस्थितियों को साबित करने में विफल रहा है, जबकि एक अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति के अलावा यह मामला उचित संदेह से परे है। न्यायालय ने कहा कि हमारी राय में केवल इसलिए कि अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति साबित हुई...
केंद्र ने अधिवक्ता एमके गोयल की राजस्थान हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की
केंद्र सरकार ने सोमवार को एडवोकेट महेंद्र कुमार गोयल को राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की। उनके नाम के साथ इस वर्ष जुलाई में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा एडवोकेट फरजंद अली के नाम की सिफारिश की गई थी। हालांकि केंद्र की अधिसूचना में अली की नियुक्ति का कोई ज़िक्र नहीं है। कॉलेजियम की सिफारिश पिछले साल उच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिश पर आधारित थी। गोयल और अली के अलावा, हाईकोर्ट कॉलेजियम ने अधिवक्ता अनुराग शर्मा, अश्विन गर्ग, राजीव पुरोहित,...
तीस हज़ारी विवाद : दिल्ली हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण पर बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किए
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और सभी जिला अदालतों के बार एसोसिएशनों को गृह मंत्रालय द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें तीस हजारी अदालत मुद्दे पर नवीनतम आदेश पर स्पष्टीकरण मांगा है। गृह मंत्रालय ने स्पष्टीकरण के लिए अदालत से एक विशिष्ट निर्देश मांगा गया था कि दिल्ली पुलिस द्वारा तीस हजारी कोर्ट परिसर में हुई झड़प के लिए जिन वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाएगी। गृह मंत्रालय ने...
उपद्रव और हिंसा का बार में कोई स्थान नहीं है, बीसीआई ने दिल्ली के सभी बार एसोसिएशनों से कार्य पर लौटेने को कहा
दिल्ली की जिला अदालत में फैली हिंसा और वकीलों का अदालत के काम से निरंतर विरक्त रहने के मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए , बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने सभी बार एसोसिएशनों के नेताओं से कहा है कि वह काम न करने का अपना संकल्प वापस लें और अदालत परिसर में शांति बहाल करें। दिल्ली के बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति और दिल्ली के सभी जिला बार एसोसिएशनों को संबोधित एक पत्र में बीसीआई ने कहा, ''हम फिर से आपसे अनुरोध करते हैं...सोमवार को पारित प्रस्ताव को वापस लें और आज से ही अदालत का कामकाज ...
कश्मीर प्रतिबंध पर वकील वृंदा ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, क्या वाजिब प्रतिबंध अधिकारों को नष्ट कर सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में लगाए गए इंटरनेट बैन और मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की याचिका पर वकील वृंदा ग्रोवर की दलीलें सुनीं। इस दौरान ग्रोवर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 90 दिनों के बाद भी कश्मीर में तालाबंदी हटाने का कोई संकेत नहीं है। "कश्मीर टाइम्स 11 अक्टूबर से केवल एक मिनट का संस्करण प्रकाशित करने में सक्षम है। डेटा सेवाएं अनुपलब्ध हैं। आज कोई भी मोबाइल, इंटरनेट सेवाएं, एसएमएस आदि उपलब्ध नहीं हैं। प्रतिबंध के 90 दिन...
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर जुवेनाइल जस्टिस कमेटी को कश्मीर में बच्चों की अवैध हिरासत को लेकर फिर से रिपोर्ट देने के निर्देश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर जुवेनाइल जस्टिस कमेटी को निर्देश दिया कि वह कश्मीर में नाबालिगों को हिरासत में रखने के आरोपों पर नए सिरे से रिपोर्ट पेश करे। इस कमेटी में हाईकोर्ट के चार जज शामिल हैं। कमेटी को 3 दिसंबर तक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। न्यायमूर्ति एन वी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ वकील हुज़ेफ़ा अहमदी की दलीलों के बाद सहमति व्यक्त की कि कमेटी ने बिना किसी स्वतंत्र जांच किए केवल जम्मू-कश्मीर पुलिस की रिपोर्ट को आगे बढ़ाया था। कमेटी ने यह भी नहीं देखा कि...
कर्नाटक राजनीतिक विवाद : मुख्यमंत्री के कथित टेप पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, " आपने बता दिया, हम विचार करेंगे"
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह कांग्रेसी नेता द्वारा कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के कथित ऑडियो टेप को 17 बागी विधायकों की अयोग्यता के खिलाफ याचिका पर फैसला देने में रिकॉर्ड पर लेने पर विचार करेगा। येदियुरप्पा द्वारा बातचीत की दर्ज की गई टेप में कथित तौर पर जेडीएस-कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए 17 बागी विधायकों की गतिविधियों में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की भूमिका को स्वीकार किया गया है। दरअसल 26 अक्टूबर को अदालत ने कांग्रेस और जेडीएस के 17 बागी विधायकों की अपनी अयोग्यता के...
(क्रिमिनल ट्रायल) कोर्ट को डिस्चार्ज की अर्जी खारिज करने की वजह बतानी चाहिए : कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि यह अदालत का कर्तव्य है कि वह उन कारणों का उल्लेख करे, जिनके आधार पर उसने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर विश्वास करते हुए डिस्चार्ज के आवेदन को अस्वीकार करने के लिए राय बनाई थी।' न्यायमूर्ति जी नरेंद्र ने संतोष कुमार द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा पारित एक आदेश को रद्द कर दिया है। निचली अदालत ने संतोष कुमार की उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने खुद को डिस्चार्ज करने की मांग की थी। न्यायालय ने कहा,''उक्त आदेश को देखने से साफ जाहिर हो...
सुप्रीम कोर्ट ने IPS अफसर की जासूसी को लेकर जताई चिंता, छत्तीसगढ़ सरकार से मांगा जवाब
IPS अधिकारी मुकेश गुप्ता के फोन टैपिंग की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है और इस तरह के कदम उठाने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। पीठ ने सोमवार को छत्तीसगढ़ सरकार की खिंचाई की और एक नागरिक के निजता के अधिकार के उल्लंघन के तरीके पर चिंता व्यक्त की। जस्टिस अरुण मिश्रा ने फोन टैपिंग के आदेश को पारित करने के बारे में पूछताछ करते हुए टिप्पणी की, "इस देश में क्या हो रहा है? लगता है कोई निजता नहीं बची है।" गुप्ता के लिए अपील करते हुए वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने...
सीआरपीसी की धारा 482 : हाईकोर्ट के फैसले को बदलने के लिए अंतर्निहित अधिकार का प्रयोग नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट सीआरपीसी की धारा 482 का प्रयोग करते हुए साक्ष्यों के आधार पर निर्णीत मामलों में फैसले को बदल नहीं सकता या उसे दोबारा खोल नहीं सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में यह कहा। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट के पास अपने फैसले को बदलने का अधिकार नहीं है। क्या है मामला निचली अदालत ने आईपीसी की धारा 468, 471 और 419 के तहत एक आरोपी को दोषी पाया। निचली अदालत का निष्कर्ष था कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी हासिल...
हाईकोर्ट में आपराधिक अपीलों के निपटारे में देरी : सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को अमिक्स क्यूरी नियुक्त किया
उच्च न्यायालयों द्वारा आपराधिक अपीलों पर जल्द फैसले देने में असमर्थता पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को समस्या के समाधान के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सहायता मांगी है। साथ ही पीठ ने पूर्व हाईकोर्ट जज और वरिष्ठ वकील आर एस सोढ़ी को भी मदद करने को कहा है। दरअसल मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ उस मामले पर विचार कर रही थी जहां आरोपी को आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया गया है और उसकी अपील इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है। उच्च न्यायालय ने लंबित मामले में जल्द सुनवाई...
पितृत्व जांच -गुजरात हाईकोर्ट ने 80 साल के व्यक्ति का डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने एक 80 वर्षीय व्यक्ति को डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में फैमिली कोर्ट के एक आदेश को बरकरार रखा है। फैमिली कोर्ट के समक्ष एक व्यक्ति ने केस दायर कर दावा किया था कि यह 80 साल का व्यक्ति उसका जैविक पिता है। एक व्यक्ति ने एक मुकदमा दायर किया था, जिसमें उसने बताया था कि उसकी मां ने अपने पहले पति की मृत्यु के बाद प्रतिवादी से शादी कर ली थी, जिसके बाद वे समाज में खुले तौर पर पति-पत्नी के रूप में रह रहे थे। दलील दी गई कि अपीलकर्ता का जन्म,...
बच्चे को पढ़ाई के लिए विदेश भेजने से पहले माता-पिता दोनों की सहमति आवश्यक, बॉम्बे हाईकोर्ट ने भरण पोषण की अपील पर दिया फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा है कि माता और पिता, दोनों की सहमति के बगैर संतान को उच्च शिक्षा के लिए विदेश नहीं भेजा जा सकता। ऐसे मामलों में उस अभिभावक की सहमति विशेष रूप से आवश्यक है, जिसे संतान के विदेश में रहने और पढ़ने को खर्च उठाना है। शीतल भटिजा की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में अपने पति दीपक के खिलाफ दाखिल के एक मामले में जस्टिस अकील कुरैशी और जस्टिस एसजे काठवाला की डिवीजन बेंच ने ये टिप्पणी की। शीतल भटिजा ने उच्च न्यायालय में फेमिली कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ...
भीमा कोरेगांव हिंसा : बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवलखा को पुणे की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने को कहा, जल्द निपटारा करने के निर्देश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले के आरोपी एक्टिविस्ट गौतम नवलखा को कहा है कि वो पुणे की स्पेशल कोर्ट में अपनी अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने को कहा है।हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट को भी निर्देश दिया है कि वो जल्द से जल्द याचिका का निपटारा करे। पीठ ने पुणे पुलिस को भी कहा है कि वो अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनवाई को ना टालें। पुलिस के मुताबिक नवलखा का सरंक्षण 12 नवंबर को खत्म हो रहा है। इससे पहले 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए चार हफ्ते के लिए गिरफ्तारी से...
" शहर घुट रहा है" : सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को रोकने के लिए दिशा- निर्देश जारी किए, पराली जलाने पर पंजाब, हरियाणा और UP के चीफ सेकेट्री तलब
दिल्ली-NCR क्षेत्र में व्याप्त वायु प्रदूषण को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कई दिशा-निर्देश दिए हैं। प्रमुख दिशा निर्देश हैं: • पराली जलाने पर अंकुश लगाने के उपायों पर अदालत को जानकारी देने के लिए 6 नवंबर को पंजाब, यूपी और हरियाणा के मुख्य सचिवों को समन किया गया है। • कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है कि आगे पराली ना जलाई जाए । यदि पराली जलती है तो ग्राम प्रधानों और स्थानीय प्रशासन को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा। •...
नीतीश कटारा हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट ने विकास यादव को पेरोल देने से इनकार किया
2002 के नीतीश कटारा हत्याकांड में सजायाफ्ता विकास यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने विकास को पेरोल देने से इनकार करते हुए अर्जी खारिज कर दी है। सोमवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि विकास को 25 साल की सजा हुई है इसलिए वो इस दौरान पेरोल पाने का हकदार नहीं है। हालांकि इस दौरान विकास यादव की ओर से कहा गया कि वो 17.5 साल से जेल में बंद है। उसे कभी भी इस दौरान पेरोल नहीं मिला है। ये उसके मौलिक अधिकारों का हनन है, लेकिन...





![[बलात्कार और हत्या] अभियुक्त को सिर्फ अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति साबित होने पर ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट [बलात्कार और हत्या] अभियुक्त को सिर्फ अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति साबित होने पर ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/11/05/500x300_366254-785vwqjl3aldthtpo1pdzwc7jxq9yj5hyft6969036.jpg)












