ताज़ा खबरें

जस्टिस कुरैशी की सिफारिश : केंद्र ने कहा, फैसला अंतिम चरण में, सुप्रीम कोर्ट 7 नवंबर को करेगा सुनवाई
जस्टिस कुरैशी की सिफारिश : केंद्र ने कहा, फैसला अंतिम चरण में, सुप्रीम कोर्ट 7 नवंबर को करेगा सुनवाई

न्यायमूर्ति अकील कुरैशी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति करने में देरी का विरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब 7 नवंबर को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलील पर ये सुनवाई टाली जिसमें कहा गया कि कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र द्वारा फैसला लेने का अंतिम चरण चल रहा है। कुछ प्रशासनिक कारण शामिल हैं, इसलिए अगले सोमवार तक का समय चाहिए। लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने कहा...

1984 सिख विरोधी दंगा : सज्जन कुमार ने जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की, मुख्य न्यायाधीश ने कहा, विचार करेंगे
1984 सिख विरोधी दंगा : सज्जन कुमार ने जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की, मुख्य न्यायाधीश ने कहा, विचार करेंगे

1984 में हुए सिख विरोधी दंगे में आजीवन कारावास के सजायाफ्ता कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद सज्जन कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई है। इस पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि वो विचार करेंगे। सोमवार को वरिष्ठ वकील शेखर नाफडे ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई से जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वो विचार करेंगे। इससे पहले 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील और सजा के निलंबन की याचिका को अगले साल गर्मियों की...

व्यावसायिक मामलों में दस्तावेज की स्वीकृति/अस्वीकृति के लिए हलफनामा 45 दिनों में ही दायर किये जाएं : दिल्ली हाईकोर्ट
व्यावसायिक मामलों में दस्तावेज की स्वीकृति/अस्वीकृति के लिए हलफनामा 45 दिनों में ही दायर किये जाएं : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी दस्तावेज की स्वीकृति/अस्वीकृति के लिए हलफनामा दायर करने की समय सीमा 45 दिन है और इसका आवश्यक रूप से पालन किया जाना चाहिए। वर्तमान आवेदन में याचिकाकर्ता ने संयुक्त रजिस्ट्रार के आदेश को चुनौती दी थी जिसने 45 दिन की सीमा के समाप्त हो जाने के बाद याचिकाकर्ता को दस्तावेजों की स्वीकृति/अस्वीकृति के बारे में हलफनामा दायर करने की अनुमति देने से मना कर दिया था। याचिकाकर्ता कंपनी ने दलील दी थी कि उसने देरी होने के जो कारण दिए थे, संयुक्त रजिस्ट्रार ने उन कारणों...

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, NRC भविष्य के लिए एक आधारभूत दस्तावेज़, अवैध प्रवासियों की संख्या का पता लगाना तत्काल आवश्यक था
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, NRC भविष्य के लिए एक आधारभूत दस्तावेज़, अवैध प्रवासियों की संख्या का पता लगाना तत्काल आवश्यक था

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने रविवार को कहा कि असम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) भविष्य के लिए आधार दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि भविष्य के दावों को निर्धारित करने के लिए यह एक तरह का संदर्भ दस्तावेज है। उन्होंने कहा,"1985 के असम समझौते और इसके सहवर्ती विशेषताओं - नागरिकता अधिनियम में धारा 6A की शुरुआत और नागरिकों के एक राष्ट्रीय रजिस्टर का वादा कानूनी ढांचे के माध्यम से एक समाधान विकसित करने का प्रयास था। परिणाम क्या हैं? धारा 6 ए को सुप्रीम कोर्ट की सहमति का इंतज़ार है...

अपर्याप्त सजा के खिलाफ पीड़ित नहीं कर सकता सीआरपीसी की धारा 372 के तहत अपील, दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला
अपर्याप्त सजा के खिलाफ पीड़ित नहीं कर सकता सीआरपीसी की धारा 372 के तहत अपील, दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 372 के तहत पीड़ित द्वारा अपील दायर करने के अधिकार पर कानून की स्थिति को स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा है कि यह प्रावधान पीड़ित को इस बात की अनुमति नहीं देता है कि वह अपील दायर कर दोषी व्यक्ति को दी गई सजा को बढ़ाने की मांग करे। पीड़ित को इस तरह की अपील दायर करने का अधिकार नहीं है, यह कहते हुए न्यायमूर्ति विभु बाखरु ने कहा कि पीड़ित अपने इस अधिकार को सीआरपीसी की धारा 372 के तहत केवल निम्नलिखित परिस्थितियों में ही प्रयोग कर सकती है, जो इस प्रकार हैं- ...

तीस हज़ारी कोर्ट हिंसा  : बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने की अधिवक्ताओं से मंगलवार से काम पर लौटने की अपील
तीस हज़ारी कोर्ट हिंसा : बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने की अधिवक्ताओं से मंगलवार से काम पर लौटने की अपील

दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट के परिसर में शनिवार को हुई हिंसा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के मद्देनजर, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अधिवक्ताओं से 5 नवंबर, यानी मंगलवार से अदालत का काम फिर से शुरू करने की अपील की है। इस संबंध में जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, "बार काउंसिल ऑफ इंडिया दिल्ली के माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित ऐतिहासिक आदेश का स्वागत करता है, जिससे बार काउंसिल ऑफ इंडिया और दिल्ली के वकीलों द्वारा 2 नवंबर 2019 को तीस हजारी कोर्ट के अधिवक्ताओं के खिलाफ पुलिस...

दिल्ली हाईकोर्ट ने तीस हजारी कोर्ट हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश दिए, घायल वकीलों को मुआवजा
दिल्ली हाईकोर्ट ने तीस हजारी कोर्ट हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश दिए, घायल वकीलों को मुआवजा

 दिल्ली उच्च न्यायालय ने विशेष सुनवाई करते हुए रविवार को तीस हजारी अदालत परिसर में हुई पुलिस और वकीलों के बीच झड़प की न्यायिक जांच का निर्देश दिया है। अदालत ने दिल्ली के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एसपी गर्ग को जांच का जिम्मा सौंपा है और कहा है कि सीबीआई निदेशक की मदद से इसे 6 सप्ताह के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को सभी घायल वकीलों के बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने आगे आदेश दिया कि वकीलों...

तीस हजारी कोर्ट फ़ायरिंग : दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की, 3 जज अस्पताल में घायल वकीलों से मिलने पहुंचे
तीस हजारी कोर्ट फ़ायरिंग : दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की, 3 जज अस्पताल में घायल वकीलों से मिलने पहुंचे

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीएन पटेल ने शनिवार को दिल्ली की तीस हजारी अदालत परिसर में हुई अधिवक्ताओं और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प पर विचार-विमर्श करने के लिए उच्च न्यायालय के सात वरिष्ठतम न्यायाधीशों के साथ पांच घंटे लंबी बैठक की। यह बैठक शनिवार रात लगभग 9.40 बजे हुई जिसमें संयुक्त पुलिस आयुक्त, नई दिल्ली, पुलिस उपायुक्त और दिल्ली के अतिरिक्त मुख्य सचिव, दिल्ली सरकार ने भी भाग लिया।मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले पर गंभीरता से विचार किया और वकीलों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त...

उन लोगों के खिलाफ राहत का दावा नहीं किया जा सकता जो सीपीसी आदेश XXXVII के तहत दायर संक्षिप्त मुकदमे से संबंधित दस्तावेज के बारे में नहीं जानते : दिल्ली हाईकोर्ट
उन लोगों के खिलाफ राहत का दावा नहीं किया जा सकता जो सीपीसी आदेश XXXVII के तहत दायर संक्षिप्त मुकदमे से संबंधित दस्तावेज के बारे में नहीं जानते : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे व्यक्ति के खिलाफ राहत का दावा नहीं किया जा सकता है जो समझौते के बारे में हुए करार के बारे में नहीं जानते। ये ऐसे करार हैं जिनके आधार पर सीपीसी के आदेश XXXVII के तहत हुए संक्षिप्त कार्यवाही शुरू की गई और इस तरह के व्यक्तियों को इस कार्यवाही में पक्षकार नहीं बनाया जा सका। इस संबंध में न्यायमूर्ति राजीव एन्दलाव ने कहा, "सीपीसी के आदेश XXXVII के तहत किसी मुकदमे पर तभी गौर किया जा सकता है, जब आदेश XXXVII की सीमा के तहत कोई दावा किया जाता है।" वादियों ने ऐसे लोगों...

दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट में पुलिस ने की फायरिंग, वकील हुए घायल, बीसीआई ने किया कड़ा विरोध
दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट में पुलिस ने की फायरिंग, वकील हुए घायल, बीसीआई ने किया कड़ा विरोध

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच शनिवार को जमकर विवाद हुआ और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस की गोलीबारी से वकील घायल हो गए। इस झड़प का कारण अदालत परिसर के भीतर पार्किंग विवाद को बताया जा रहा है। पुलिस ने वकीलों पर गोलियां चलाईं, जिसमें वकील घायल हुए।इस घटना में कई वकील घायल हुए हैं और बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस मामले का संज्ञान लिया है और अपने एक दल को अदालत में भेजने और उसमें मौजूद स्थिति का आकलन करने का फैसला किया है। बीसीआई ने दिल्ली के उपराज्यपाल और पुलिस आयुक्त से भी...

मेडिकल लापरवाही : ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने से पहले मेडिकल एक्सपर्ट की रिपोर्ट की जांच करनी चाहिए, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मेडिकल लापरवाही : ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने से पहले मेडिकल एक्सपर्ट की रिपोर्ट की जांच करनी चाहिए, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि मेडिकल लापरवाही के आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले एक स्वतंत्र मेडिकल एक्सपर्ट की रिपोर्ट की जांच करना महत्वपूर्ण है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य और अन्य (2005) 6 एससीसी 1 के मामले में आईपीसी की धारा 304 ए के तहत दंडनीय आपराधिक लापरवाही के लिए डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दिशा निर्देश दिए थे। इस मामले में कहा गया था कि 1. जब तक शिकायतकर्ता लापरवाही के आरोप की पुष्टि करने के लिए किसी अन्य सक्षम चिकित्सक द्वारा दी...

स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों को नहीं दी जा सकती केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के समान पेंशन : दिल्ली हाईकोर्ट
स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों को नहीं दी जा सकती केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के समान पेंशन : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों के साथ ( जिनको सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दी जाती हैं) पेंशन के मामले में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान व्यवहार नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति मुरलीधर और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की खंडपीठ ने माना है कि सिविल सेवा नियमों के तहत पेंशन का लाभ वित्त मंत्रालय की सहमति के बिना स्वायत्त निकायों को नहीं दिया जा सकता। वर्तमान मामले में, दो रिट याचिकाएं थीं, जिनमें न्यायालय के समक्ष समान मुद्दा था कि केंद्रीय सिविल सेवा...

दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण : सुप्रीम कोर्ट करेगा EPCA की प्रदूषण नियंत्रण रिपोर्ट पर विचार
दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण : सुप्रीम कोर्ट करेगा EPCA की प्रदूषण नियंत्रण रिपोर्ट पर विचार

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कारण सांस लेना मुश्किल हो रहा है। वायु गुणवत्ता में गंभीर गिरावट के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) की विशेष प्रदूषण नियंत्रण रिपोर्ट सहित अन्य संबंधित मुद्दों पर सोमवार को विचार करेगा। पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) ने अपनी रिपोर्ट में एनसीआर राज्यों को कचरा के जलाने से रोकने, निर्माण स्थलों से जहरीले उत्सर्जन और निर्माण कार्य से पैदा होने वाली...

उड़ीसा में वकीलों की हड़ताल खत्म, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की बैठक में लिया फैसला
उड़ीसा में वकीलों की हड़ताल खत्म, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की बैठक में लिया फैसला

उड़ीसा में वकीलों की लंबे समय से चली आ रही हड़ताल आखिरकार उड़ीसा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अदालती काम को फिर से शुरू करने के संकल्प के साथ समाप्त हो गई। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण मोहंती के नेतृत्व में शुक्रवार को आयोजित एक सामान्य निकाय की बैठक में यह निर्णय लिया गया।इस बैठक में कहा गया, "बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुरोध और वरिष्ठ अधिवक्ताओं और एक्शन कमेटी के सदस्यों के बहुमत के विचार और हमारे बार एसोसिएशन की शिकायतों और मांगों पर गौर करने के लिए भारत के माननीय कानून...

दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की एम्स के प्रायवेट वार्ड में इलाज करवाने का अनुरोध अस्वीकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की एम्स के प्रायवेट वार्ड में इलाज करवाने का अनुरोध अस्वीकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि पी चिदंबरम को एम्स में स्टरलाइज़्ड (जीवाणुरहित) निजी वार्ड में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने आगे तिहाड़ अधीक्षक को चिदंबरम के लिए साफ और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कई दिशा-निर्देश दिए। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री इस समय INX मीडिया मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में ईडी द्वारा दर्ज मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। बुधवार को विशेष सीबीआई कोर्ट, दिल्ली द्वारा उनकी न्यायिक हिरासत 13 नवंबर तक बढ़ा दी गई थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार...

अगर प्रतिवादी के सफल रहने की उम्मीद कम है तो अदालत को व्यावसायिक मामलों में सुनवाई करने की जरूरत नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट
अगर प्रतिवादी के सफल रहने की उम्मीद कम है तो अदालत को व्यावसायिक मामलों में सुनवाई करने की जरूरत नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट

अगर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि किसी मामले में प्रतिवादी को अपने दावे का बचाव करने में सफलता की उम्मीद बहुत ही कम है तो उस स्थिति में अदालत को व्यावसायिक मुकदमों में सुनवाई करने की जरूरत नहीं है, इसके बावजूद कि मामले के तथ्यों को लेकर विवाद है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने दोहराया कि कमर्शियल कोर्ट एक्ट, 2015 में संक्षिप्त सुनवाई का जो प्रावधान किया गया है, उसका उद्देश्य वाणिज्यिक विवादों को समय पर निपटाना है। उन्होंने कहा, सीपीसी के आदेश XIIIA का नियम 3 अदालत को प्रतिवादी के खिलाफ...