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पितृत्व जांच -गुजरात हाईकोर्ट ने 80 साल के व्यक्ति का डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया

LiveLaw News Network
5 Nov 2019 4:23 AM GMT
पितृत्व जांच -गुजरात हाईकोर्ट ने 80 साल के व्यक्ति का डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया
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गुजरात हाईकोर्ट ने एक 80 वर्षीय व्यक्ति को डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में फैमिली कोर्ट के एक आदेश को बरकरार रखा है। फैमिली कोर्ट के समक्ष एक व्यक्ति ने केस दायर कर दावा किया था कि यह 80 साल का व्यक्ति उसका जैविक पिता है।

एक व्यक्ति ने एक मुकदमा दायर किया था, जिसमें उसने बताया था कि उसकी मां ने अपने पहले पति की मृत्यु के बाद प्रतिवादी से शादी कर ली थी, जिसके बाद वे समाज में खुले तौर पर पति-पत्नी के रूप में रह रहे थे।

दलील दी गई कि अपीलकर्ता का जन्म, प्रतिवादी और उसकी मां के बीच विवाह होने के बाद हुआ था। यह भी कहा गया कि वह जिस स्कूल में पढ़ रहा था, उस स्कूल में उसे प्रतिवादी के बेटे रूप में बताया गया था। इतना ही नहीं उसने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के प्रमाण पत्र के लिए भी आवेदन किया था। वहीं उसे राशन कार्ड में परिवार के सदस्य के रूप में भी दिखाया गया था।

न्यायमूर्ति ए.पी ठक्कर ने कहा कि प्रतिवादी 80 वर्ष की आयु का है। ऐसे में अगर डीएनए परीक्षण या टेस्ट की अनुमति नहीं दी गई तो मुकदमे की पेंडेंसी के दौरान अपीलकर्ता की मृत्यु जैसी कोई अप्रिय घटना होने के कारण मामले में सबूत उपलब्ध नहीं हो पाएंगे।

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को संशोधित कर दिया है। साथ ही कहा है कि वादी (मुकदमा दायर करने वाला व्यक्ति) ट्रायल कोर्ट के समक्ष 1 लाख रुपये जमा करे। यदि डीएनए रिपोर्ट में यह साबित नहीं हो पाया कि प्रतिवादी ही वादी का जैविक पिता है तो यह राशि प्रतिवादी को दी जाएगीऔर यदि रिपोर्ट सकारात्मक आती है, तो वादी को यह राशि वापस की जा सकती है।

आदेश की प्रतिलिपि जारी नहीं की गई है ताकि संबंधित पक्षकारों की गोपनीयता को बनाए रखा जा सके, क्योंकि आदेश में कई स्थानों पर उनके नामों का उल्लेख किया गया है।

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