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सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
"हम प्रतिवादी - आरोपी को सुनना चाहेंगे": सुप्रीम कोर्ट ने  कोविड के कारण मौत की आशंका के आधार पर अग्रिम जमानत के आदेश को चुनौती देने पर यूपी सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा COVID के कारण मौत की आशंका के आधार पर एक कथित "धोखेबाज" को अग्रिम जमानत देने के संबंध में, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह इस सवाल पर विचार कर सकता है कि अग्रिम जमानत सही तरीके से दी गई थी या नहीं।यह देखते हुए कि प्रतिवादी-आरोपी ने यूपी राज्य द्वारा एसएलपी में एक जवाबी हलफनामा दायर किया है, जिसमें अग्रिम जमानत देने को चुनौती दी गई है, अदालत ने एसजी तुषार मेहता को 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि वह अंतिम फैसला लेने से पहले...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
'ड्रीम 11' फैंटेसी स्पोर्ट्स गेम जुआ नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने 'ड्रीम 11' पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज करने के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कोर्ट ने "ड्रीम 11" नामक ऑनलाइन गेम पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया गया था।न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया।ड्रीम 11 एक ऑनलाइन फैंटेसी स्पोर्ट्स गेम है जिसमें कोई वास्तविक जीवन के मैच के आधार पर एक फैंटेसी स्पोर्ट्स टीम बना सकता है और प्रतियोगिताओं में भाग ले सकता है और नकद पुरस्कार जीत सकता है। चंद्रेश...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
'किसी वीआईपी का लड़का अपह्रत होता सीबीआई का इतना सादा जवाब आता ? " तीन साल से लापता बच्चे के पिता ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपहरण के एक मामले की जांच के संबंध में एक मामले की सुनवाई ने उस समय अप्रत्याशित और भावनात्मक मोड़ ले लिया, जब याचिकाकर्ता पिता, जिनके बेटे का अपहरण 3 साल पहले किया गया था, ने अपने बेटे के मामले में जांच के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए अदालत से गुहार लगाई।वर्चुअल सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पिता को अपनी पत्नी के साथ हाथ जोड़कर शीर्ष अदालत के समक्ष दलील देते देखा गया। याचिकाकर्ता पिता ने कहा,"याचिकाकर्ता माता-पिता परम रक्षक के चरणों में हैं, माता-पिता बहुत...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
'यह जनहित याचिका दायर करने का तरीका नहीं है': सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस मामले में एडवोकेट एमएल शर्मा को फटकार लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता एमएल शर्मा की उस जनहित याचिका पर फटकार लगाई, जिसमें उन्होंने पेगासस जासूसी मामले की जांच की मांग की थी।भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ के समक्ष पेगासस मुद्दे पर नौ याचिकाओं को सूचीबद्ध किया गया है।जैसे ही पीठ ने मामलों को उठाया, शर्मा ने पहले यह कहते हुए प्रस्तुतियां देने की मांग की कि उनका मामला लिस्ट में सबसे पहले सूचीबद्ध है।सीजेआई ने शर्मा से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को पहले बहस करने के लिए कहा।सीजेआई ने आगे कहा कि, "शर्मा,...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
मजिस्ट्रेट को आरोपी को समन करने से पहले शिकायत दर्ज कराने वाले लोक सेवक का बयान दर्ज करने की आवश्यकता नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मजिस्ट्रेट को उस लोक सेवक का बयान दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है, जिसने आरोपी, जो क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रहता है, को सम्मन जारी करने से पहले अपने आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में शिकायत दर्ज की थी।इस मामले में, निरीक्षण अधिकारी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक कंपनी, उसके प्रबंध निदेशक और अन्य के खिलाफ कीटनाशक अधिनियम की धारा 3 (K) (i), 17, 18, 33, 29 के तहत 'गलत ब्रांडिंग' का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज की।अपीलकर्ता-आरोपी द्वारा उठाए गए तर्कों में से एक यह था...

अधिक समावेशिता, विविधता और सामुदायिक पहुंच का लक्ष्य करें : सीजेआई रमना ने लॉ फर्मों से कहा
अधिक समावेशिता, विविधता और सामुदायिक पहुंच का लक्ष्य करें : सीजेआई रमना ने लॉ फर्मों से कहा

सोसाइटी फॉर इंडियन लॉ फर्म्स (एसआईएलएफ) द्वारा आयोजित कॉफी टेबल बुक लॉन्च में, भारत के मुख्य न्यायाधीश, एन वी रमना ने भारतीय कानून फर्मों से आग्रह किया कि वे उन तक पहुंचने से रोके गए लोगों तक पहुंचने के लिए ज्यादा निशुल्क मामले उठाएं। नई पहली पीढ़ी के वकीलों के लिए रास्ते और आर्थिक गतिशीलता कानून फर्मों की प्रशंसा करते हुए, उन्होंने टियर -1 शहरों से परे कानून के छात्रों को अवसर प्रदान करते हुए, समावेशिता और विविधता बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने टिप्पणी की,"प्रमुख कानून फर्म केवल टीयर- I शहरों...

अगर रिपोर्ट सही हैं तो ये गंभीर आरोप हैं ; सच सामने आना चाहिए  : सुप्रीम कोर्ट
"अगर रिपोर्ट सही हैं तो ये गंभीर आरोप हैं ; सच सामने आना चाहिए " : सुप्रीम कोर्ट

यह कहते हुए कि आरोप गंभीर हैं, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पेगासस जासूसी विवाद की जांच की मांग करने वाली नौ याचिकाओं में पेश होने वाले वकीलों से भारत सरकार को अपनी याचिकाओं की प्रतियां देने के लिए कहा।मामले को अगले मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि आरोप गंभीर हैं, अगर रिपोर्ट सही है।"उन्होंने कहा, "सच्चाई सामने आनी चाहिए, यह एक अलग कहानी है। हमें नहीं पता कि इसमें किसके नाम हैं।"कोर्ट रूम...

National Uniform Public Holiday Policy
यदि लास्ट सीन थ्योरी सिद्ध होती है तो आरोपी को उन परिस्थितियों के बारे में बताना चाहिए, जिनमें उसने मृतक का साथ छोड़ा था: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में दोहराया है कि एक बार 'अंतिम बाद देखे जाने' (लास्ट सीन थ्योरी) का तथ्य स्थापित हो जाने के बाद, अभियुक्त के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है, यदि वह उन परिस्थितियों की व्याख्या करने में विफल रहता है जिसमें उसने मृतक का साथ छोड़ा था।सीजेआई एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ वर्ष 1987 के एक हत्या के मामले में पैदा हुई एक आपराधिक अपील का निपटारा कर रही थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी युगल को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, धारा सहपठित धारा 34 के...

एक सदी का एक चौथाई बीत चुका है  : सुप्रीम कोर्ट ने 26 साल से लंबित बंटवारे के वाद के शीघ्र ट्रायल का निर्देश दिया
"एक सदी का एक चौथाई बीत चुका है " : सुप्रीम कोर्ट ने 26 साल से लंबित बंटवारे के वाद के शीघ्र ट्रायल का निर्देश दिया

एक सदी का एक चौथाई यह निर्धारित करने में बीत चुका है कि क्या लाइसेंसधारी अपने बेटे के कब्जे वाले हिस्से पर कब्जा लेने का हकदार है!" सुप्रीम कोर्ट ने पुणे में एक अदालत को 26 सालों से लंबित एक बंटवारा मुकदमे के मुकदमे में तेज़ी लाने का निर्देश देते हुए कहा।एक मां ने अपने बेटे के खिलाफ कब्जे की डिक्री की मांग करते हुए वर्ष 1995 में स्मॉल कॉज कोर्ट, पुणे के समक्ष एक मुकदमा दायर किया था। उसी साल बेटे ने संपत्ति के बंटवारे का मुकदमा भी दायर किया। मां की मृत्यु के बाद, उसके दामाद ने दावा किया कि उसने...

जस्टिस अरुण मिश्रा का पुराना मोबाइल नंबर पेगासस की निगरानी सूची में शामिल: रिपोर्ट
जस्टिस अरुण मिश्रा का पुराना मोबाइल नंबर पेगासस की निगरानी सूची में शामिल: रिपोर्ट

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस अरुण मिश्रा का एक पुराना मोबाइल नंबर इजरायली स्पाइवेयर पेगासस की संभावित लक्ष्यों की सूची में शामिल था।रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सूची में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के दो अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी पेगासस की संभावित लक्ष्यों की सूची में शामिल था।रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए जस्टिस अरुण मिश्रा के नाम पर पंजीकृत राजस्थान का एक मोबाइल नंबर 2019 में डेटाबेस में जोड़ा गया था। बीएसएनएल के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में...

अगर किरायेदार विवाद करता है कि संपत्ति वक्फ की नहीं है तो बेदखली का मुकदमा वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष सुनवाई योग्य है : सुप्रीम कोर्ट
अगर किरायेदार विवाद करता है कि संपत्ति वक्फ की नहीं है तो बेदखली का मुकदमा वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष सुनवाई योग्य है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किरायेदार विवाद करता है कि संपत्ति वक्फ की नहीं है तो बेदखली का मुकदमा वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष सुनवाई योग्य है।ऐसा इसलिए है क्योंकि यह सवाल कि क्या कोई संपत्ति वक्फ की है, वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा विशेष रूप से विचारणीय है।इस मामले में, तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड ने आंध्र प्रदेश राज्य वक्फ न्यायाधिकरण, हैदराबाद के समक्ष एक वाद दायर कर प्रतिवादी को वक्फ संस्था से संबंधित संपत्ति से बेदखल करने की मांग की। प्रतिवादी ने अपना लिखित बयान दाखिल किया जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ...

भारत के बाहर किया गया अपराध : सीआरपीसी की धारा 188 के तहत केंद्र सरकार की पूर्व की मंजूरी संज्ञान स्तर पर आवश्यक नहीं, लेकिन इसके बिना ट्रायल शुरू नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट
भारत के बाहर किया गया अपराध : सीआरपीसी की धारा 188 के तहत केंद्र सरकार की पूर्व की मंजूरी संज्ञान स्तर पर आवश्यक नहीं, लेकिन इसके बिना ट्रायल शुरू नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत के बाहर किए गए अपराधों के लिए एक भारतीय नागरिक के खिलाफ आपराधिक मामले की सुनवाई आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 188 के तहत केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना शुरू नहीं हो सकती है।न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने कहा, ''लेकिन संज्ञान के स्तर पर ऐसी पिछली मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।''इस मामले में, सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपनी याचिका में हाईकोर्ट के समक्ष अभियुक्त की दलील थी कि कथित अपराध अमेरिका में किए गए थे और सीआरपीसी...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने गन्ना किसानों को गन्ने की उपज की कीमत के भुगतान के लिए मैकेनिज़्म की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक याचिका पर नोटिस जारी, जिसमें गन्ना किसानों को गन्ने की उपज की कीमत के भुगतान के लिए एक सख्त मैकेनिज़्म स्थापित करने और इस तरह के बकाया के भुगतान के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।याचिका में चीनी मिल के बीमार घोषित होने पर गन्ना किसानों को दुष्चक्र से बचाने के लिए तंत्र की मांग की गई है। आमतौर पर चीनी मिलों/कारखानों के समाधान या परिसमापन की प्रक्रिया के दौरान गन्ने की उपज का उनका बकाया भुगतान नहीं किया जाता है, जिससे वित्तीय स्थिति बिगड़ती है।याचिकाकर्ता की ओर...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
आयुष और एलोपैथिक डॉक्टरों के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति की आयु उचित नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आयुष प्रणाली का अभ्यास करने वाले डॉक्टरों और एलोपैथिक डॉक्टरों के लिए सेवानिवृत्ति की अलग-अलग उम्र के लिए कोई तर्कसंगत औचित्य नहीं है। न्यायालय ने कहा कि जहां तक ​​सेवानिवृत्ति की आयु का संबंध है, उपचार का तरीका इन दो श्रेणियों के बीच "समझदार अंतर" नहीं माना जाएगा।जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हृषिकेश रॉय की खंडपीठ दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ नई दिल्ली नगर निगम द्वारा दायर एक अपील पर फैसला कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि एनडीएमसी के तहत काम करने वाले आयुष...

कृष्णा नदी के पानी के बंटवारे के विवाद पर आंध्र ने तेलंगाना के साथ मध्यस्थता से इनकार किया, सीजेआई सुनवाई से अलग हुए
कृष्णा नदी के पानी के बंटवारे के विवाद पर आंध्र ने तेलंगाना के साथ मध्यस्थता से इनकार किया, सीजेआई सुनवाई से अलग हुए

आंध्र प्रदेश राज्य ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह कृष्णा नदी के पानी के बंटवारे के विवाद पर तेलंगाना राज्य के खिलाफ दायर अपनी रिट याचिका पर फैसला चाहता है।राज्य ने पड़ोसी राज्य तेलंगाना के साथ मध्यस्थता के माध्यम से विवाद को निपटाने से इनकार कर दिया है जैसा कि पहले शीर्ष न्यायालय ने सुझाव दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों को कृष्णा नदी के पानी के बंटवारे पर उनके विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए कहा था।आज सुनवाई के दौरान, आंध्र प्रदेश...

सिर्फ बयानों में अंसगति होने पर गवाह पर आईपीसी की धारा 193 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सिर्फ बयानों में अंसगति होने पर गवाह पर आईपीसी की धारा 193 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक गवाह पर आईपीसी की धारा 193 के तहत इसलिए झूठी गवाही के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता क्योंकि उसने अदालत के समक्ष असंगत बयान दिया था।सीजेआई एनवी रमाना की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अगर जानबूझकर झूठ नहीं बोला गया है तो झूठी गवाही के लिए अभियोजन का आदेश नहीं दिया जा सकता है। अदालत ने कहा,केवल असंगत बयानों का संदर्भ ही कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है जब तक कि एक निश्चित निष्कर्ष नहीं दिया जाता है कि वे असंगत हैं; एक दूसरे का विरोध कर रहा है ताकि उनमें से एक को जानबूझकर...

प्राथमिकी रद्द करना- मेरिट की विस्तृत जांच सीआरपीसी की धारा 482 के तहत जरूरी नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
प्राथमिकी रद्द करना- मेरिट की विस्तृत जांच सीआरपीसी की धारा 482 के तहत जरूरी नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 482 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए आरोपों के गुण-दोषों (मेरिट) की विस्तृत जांच जरूरी नहीं है।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए, हाईकोर्ट को उस तरह से तथ्यों की जांच नहीं करनी चाहिए जिस तरह से निचली अदालत आपराधिक मुकदमे के दौरान सबूत पेश करने के बाद करती है।पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा एक...

ये अन्यथा पूरे भारत में लागू होगा  : एसजी ने सुप्रीम कोर्ट से कोविड के कारण मौत की आशंका के एकमात्र आधार पर अग्रिम जमानत के हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने की गुहार लगाई
"ये अन्यथा पूरे भारत में लागू होगा " : एसजी ने सुप्रीम कोर्ट से कोविड के कारण मौत की आशंका के एकमात्र आधार पर अग्रिम जमानत के हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने की गुहार लगाई

एसजी तुषार मेहता ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द करे जिसमें एक कथित "धोखेबाज" को जनवरी, 2022 तक इस आधार पर अग्रिम जमानत दी गई थी कि कोविड महामारी के कारण मौत की आशंका थी।न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के मई के आदेश के खिलाफ यूपी राज्य द्वारा एसएलपी की सुनवाई कर रही थी, जहां एकल न्यायाधीश ने पाया कि वर्तमान परिदृश्य में जीवन की आशंका एक आरोपी को अग्रिम जमानत के अनुदान के लिए एक आधार है,...

COVID 19 की अनिश्चित ​​​स्थिति के कारण सुप्रीम कोर्ट में फिज़िकल हियरिंग के संबंध में हम कोई निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं : जस्टिस एल नागेश्वर राव
COVID 19 की अनिश्चित ​​​स्थिति के कारण सुप्रीम कोर्ट में फिज़िकल हियरिंग के संबंध में हम कोई निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं : जस्टिस एल नागेश्वर राव

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव ने मंगलवार को टिप्पणी की कि COVID 19 को लेकर अनिश्चित ​​​स्थिति के कारण सुप्रीम कोर्ट फिज़िकल हियरिंग (शारीरिक सुनवाई) कब और कैसे फिर शुरू की जाए, इस बारे में "निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है।"सुप्रीम कोर्ट परिसर में जस्टिस अनिरुद्ध बोस के साथ बैठे जस्टिस राव ने वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिम्हा से पूछा कि क्या नरसिम्हा अपने कार्यालय के दायरे में ही बहस करना पसंद करते हैं या क्या वह बेंच के सामने फिज़िकल रूप से कोर्ट रूम में रहना चाहते हैं।जब पीठ के सामने यह संकेत दिया...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
'अजीब परिस्थितियां': आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच मध्यस्थता समझौता, सुप्रीम कोर्ट ने 'बलात्कार का मामला' रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी और शिकायतकर्ता (अभियोक्ता) के बीच हुए मध्यस्थता समझौते को ध्यान में रखते हुए बलात्कार के एक मामले को खारिज कर दिया है। इस मामले में लड़की ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने उसे तलाकशुदा बताकर उसके साथ यौन संबंध बनाए।आरोपी ने बाद में समझौता विलेख के आधार पर आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए दिल्ली हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने यह भी तर्क दिया कि अभियोक्ता का उसके दूसरे पति से तलाक नहीं हुआ था और इसलिए, कोई कानूनी विवाह नहीं हो सकता था, शादी का वादा तो...