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सुप्रीम कोर्ट ने पिस्तौल से हमला करने वाले की हत्या के मामले में आरोपी को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उत्तराखंड के एक डॉक्टर की सजा और उम्रकैद को रद्द कर दिया, जिसे एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने डॉक्टर की आत्मरक्षा की दलील को स्वीकार कर लिया।जस्टिस एम.एम. सुनेद्रेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर की खंडपीठ ने दरशन सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले में तय किए गए 10 सिद्धांतों का हवाला दिया और कहा कि आत्मरक्षा के अधिकार को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता और इसे “सोने की तराजू” में नहीं तौला जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति आरोपी के...
Sec.420 IPC| फर्जी दस्तावेज़ से कोई लाभ न मिला तो धोखाधड़ी का अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (10 सितम्बर) को एक शैक्षणिक संस्थान के प्रमुख के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का मामला रद्द कर दिया, जिन पर फर्जी फायर डिपार्टमेंट एनओसी का इस्तेमाल कर संबद्धता (affiliation) लेने का आरोप था।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि कॉलेज को मान्यता दिलाने के लिए फायर डिपार्टमेंट की नकली एनओसी जमा करना न तो धोखाधड़ी (cheating) है और न ही जालसाजी (forgery), क्योंकि यह दस्तावेज़ कानूनी तौर पर अनिवार्य नहीं था और न ही शिक्षा विभाग को संबद्धता देने के लिए इससे...
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु राज्यपाल मामले का फैसला गलत घोषित करने की मांग की
सुप्रीम कोर्ट में बिलों पर हस्ताक्षर (असेंट) से जुड़े मुद्दों पर चल रही राष्ट्रपति संदर्भ (Presidential Reference) की सुनवाई के आखिरी दिन, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से आग्रह किया कि दो-जजों वाली तमिलनाडु जजमेंट को सही कानून न माना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिन की सुनवाई पूरी करने के बाद आज इस मामले पर अपना मत सुरक्षित रख लिया। इस संदर्भ में राष्ट्रपति द्वारा 14 प्रश्न उठाए गए थे, जिनमें यह भी शामिल है कि क्या बिलों पर हस्ताक्षर के लिए कोई समयसीमा तय की जा सकती...
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने विधेयकों की स्वीकृति की समय-सीमा पर फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (11 सितंबर) को भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 143 के तहत दिए गए संदर्भ पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 200/201 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा विधेयकों को स्वीकृति देने की समय-सीमा से संबंधित प्रश्न उठाए गए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने इस मामले की दस दिनों तक सुनवाई की।राष्ट्रपति का संदर्भ मई में, तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में दो जजों की...
CrPC की धारा 197 के तहत मंजूरी का मुद्दा कार्यवाही के किसी भी चरण में निचली अदालत में उठाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में किसी लोक सेवक के विरुद्ध निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 197 के तहत मंजूरी के प्रश्न पर कार्यवाही के किसी भी चरण में विचार किया जा सकता है, क्योंकि यह मुद्दा प्रस्तुत साक्ष्य की प्रकृति पर निर्भर करता है कि क्या कृत्य आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में किए गए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जिसमें याचिकाकर्ता-लोक सेवक पर IPC की धारा...
सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार-हत्या मामले में मौत की सज़ा पाए व्यक्ति को बरी किया, कहा- 'सबूत गढ़ने का मज़बूत अनुमान'
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2014 में सात साल की बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी मौत के मामले में दोषी ठहराए गए अख्तर अली की मौत की सज़ा रद्द की। अदालत ने सह-आरोपी प्रेम पाल वर्मा को भी बरी कर दिया, जिसे अपराधी को शरण देने का दोषी ठहराया गया था।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के 18 अक्टूबर, 2019 के फैसले के खिलाफ दोनों आरोपियों द्वारा दायर आपराधिक अपीलों को स्वीकार कर लिया, जिसमें दोषसिद्धि और मौत की सज़ा बरकरार रखी गई थी।अदालत ने कहा,"कानून में...
राज्यपाल को विधेयकों को अंतहीन काल तक अपने पास रखने का अधिकार नहीं है, लेकिन समय-सीमा तय नहीं की जा सकती: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
राष्ट्रपति संदर्भ की सुनवाई के आखिरी दिन सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्यपाल विधेयकों पर अंतहीन रूप से नहीं बैठ सकते।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चूंकि अनुच्छेद 200 में "जितनी जल्दी हो सके" शब्द का प्रयोग किया गया, इसलिए राज्यपाल विधेयकों पर "सदाबहार या तीन या चार साल तक" नहीं बैठ सकते। साथ ही सॉलिसिटर जनरल ने न्यायालय द्वारा "सीधे-सादे फॉर्मूले" के रूप में निश्चित समय-सीमा निर्धारित करने का विरोध किया।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पांच जजों की पीठ के समक्ष कहा,"यद्यपि...
पुलिस को हर तरह के पूर्वाग्रह से ऊपर उठना चाहिए: अकोला दंगों में हमले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू और मुस्लिम अफसरों वाली SIT गठित की
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के अकोला दंगों के दौरान हुए हमले की निष्पक्ष जांच न करने के लिए महाराष्ट्र पुलिस की कड़ी आलोचना की। साथ ही विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि SIT में सीनियर अधिकारी होंगे, जिनमें हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के अधिकारी शामिल किए जाएंगे।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनाया, जिसे एक व्यक्ति ने दायर किया था। उसने दावा किया कि वह दंगों के दौरान हुई हत्या का प्रत्यक्षदर्शी है। याचिकाकर्ता का...
सुप्रीम कोर्ट ने भारत-पाक एशिया कप मैच रद्द करने से किया इनकार, कहा- मैच जारी रहने दें
सुप्रीम कोर्ट ने एशिया कप टी20 टूर्नामेंट के तहत 14 सितंबर को होने वाले भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को रद्द करने की मांग वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया।यह मामला जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया।जस्टिस माहेश्वरी ने उस वकील की बात सुनते हुए टिप्पणी की,"इसमें इतनी जल्दी क्या है? यह एक मैच है, इसे जारी रहने दें।"वकील ने मामले को कल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।वकील ने जब बताया कि मैच रविवार (14 सितंबर) को है। अगर मामला गुरुवार को...
पुलिस को FIR दर्ज करने के लिए सूचना की सत्यता की जांच करने की आवश्यकता नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि पुलिस को FIR दर्ज करते समय शिकायत की सत्यता या विश्वसनीयता की जांच करने की आवश्यकता नहीं है; यदि शिकायत में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो पुलिस FIR दर्ज करने के लिए बाध्य है।अदालत ने कहा,"यदि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है तो FIR दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य है, पुलिस को उक्त सूचना की सत्यता और विश्वसनीयता की जांच करने की आवश्यकता नहीं है।"अदालत ने कहा कि रमेश कुमारी बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) (2006) 2 एससीसी 677 में यह निर्धारित...
सुप्रीम कोर्ट ने 2021 बंगाल चुनाव बाद हिंसा मामले में दुष्कर्म पीड़िता की गवाही में देरी पर ट्रायल कोर्ट से सवाल किए
सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को टिप्पणी की कि पश्चिम बंगाल की एक ट्रायल कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की गवाही को अधूरा (टुकड़ों में) दर्ज करके अप्रत्यक्ष रूप से आरोपी को सबूतों से छेड़छाड़ करने का अवसर दिया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट और लोक अभियोजक से यह स्पष्टीकरण मांगा कि जब आरोपी को एक साल पहले ही जमानत मिल चुकी थी, तो अब तक पीड़िता की गवाही पूरी क्यों नहीं हुई।यह मामला 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़ा है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने आदेश...
NI Act | 'चेक अनादर की शिकायत दर्ज करने के लिए 30 दिन की समय-सीमा अनिवार्य': सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (NI Act) की धारा 142(बी) के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए निर्धारित 30 दिन की समय-सीमा अनिवार्य है, जब तक कि विलंब की क्षमा के लिए कोई औपचारिक आवेदन न हो और उसे अनुमति देने वाला न्यायिक आदेश न हो।अदालत ने कहा,"एक बार जब क़ानून शिकायत दर्ज करने के लिए अनिवार्य समय-सीमा निर्धारित कर देता है तो उसमें कोई विचलन नहीं हो सकता, सिवाय इसके कि शिकायत के साथ विलंब के कारणों का खुलासा करते हुए क्षमा की मांग करने वाला आवेदन दायर किया गया हो और तब भी...
'पड़ोस का झगड़ा आत्महत्या के लिए उकसाने के बराबर नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने महिला को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने पड़ोसी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में महिला को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पड़ोस में झगड़े सामुदायिक जीवन में आम हैं और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में उकसावे की भावना इतनी बढ़ जानी चाहिए कि पीड़ित के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प न बचे।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने कहा,"हम यह मानने को तैयार नहीं हैं कि जब अपीलकर्ता के परिवार और पीड़ित के परिवार के बीच तीखी बहस हुई तो दोनों में से किसी भी परिवार के किसी सदस्य को...
भारत-पाकिस्तान एशिया कप मैच रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, कहा- 'क्रिकेट राष्ट्रीय हित से ऊपर नहीं'
एशिया कप टी20 टूर्नामेंट के तहत 14 सितंबर को होने वाले भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई।चार याचिकाकर्ता वर्तमान में वकालत कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलना राष्ट्रीय हित के विरुद्ध है और यह सशस्त्र बलों के साथ-साथ हमले में जान गंवाने वाले नागरिकों के बलिदान को कमतर आंकता है।याचिका में कहा गया,"पाकिस्तान के साथ खेलने से यह उल्टा संदेश जाता है कि जहां...
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CBI अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश बरकरार रखा, कहा- कभी-कभी जांच करने वालों की भी जांच की जाए
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का वह निर्देश बरकरार रखा, जिसमें दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त नीरज कुमार और इंस्पेक्टर विनोद कुमार पांडे के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। यह निर्देश वर्ष 2000 में CBI में प्रतिनियुक्ति के दौरान धमकाने, अभिलेखों में हेराफेरी और जालसाजी के आरोपों के बाद दिया गया था।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ 2001 में दो व्यक्तियों द्वारा दायर रिट याचिकाओं में हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ अधिकारियों की अपीलों पर विचार कर रही थी, जिसमें...
आप कैसे कह सकते हैं कि राज्य झूठा बोल रहे हैं, जबकि विधेयक राज्यपाल के पास वर्षों से लंबित हैं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा
राष्ट्रपति संदर्भ मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से सवाल किया कि केंद्र कैसे कह सकता है कि राज्य "झूठा अलार्म" बजा रहे हैं, जबकि विधेयक राज्यपालों के पास 3-4 वर्षों से लंबित हैं। यह केंद्र द्वारा दी गई इस दलील के जवाब में था कि पिछले 55 वर्षों में, "17000" में से केवल 20 विधेयकों पर ही सहमति रोकी गई है और 90% मामलों में विधेयकों पर एक महीने के भीतर ही सहमति दे दी गई।इस संदर्भ में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा:"राज्यपाल की भूमिका संविधान के संरक्षक, भारत...
नियम न हों तो आरक्षित उम्मीदवार छूट लेकर भी सामान्य वर्ग में चयनित हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक भर्ती नियमों में स्पष्ट रूप से मना न किया गया हो, आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जिसने शारीरिक मानकों में छूट ली हो, अगर मेरिट में चयनित होता है तो उसे सामान्य श्रेणी (अनारक्षित) की पोस्ट पर भी नियुक्त किया जा सकता है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक सामान्य वर्ग के उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी, जिसने CISF असिस्टेंट कमांडेंट (एक्जीक्यूटिव) भर्ती में एक अंक से चयन चूक जाने के बाद, आरक्षित वर्ग के...
सुप्रीम कोर्ट : टेंडर नोटिस में मांगे ही नहीं गए दस्तावेज़ की गैर-प्रस्तुति पर बोली खारिज नहीं की जा सकती
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को कहा कि नोटिस इन्वाइटिंग टेंडर (NIT) के तहत मांगे ही नहीं गए किसी दस्तावेज़ की गैर-प्रस्तुति के आधार पर किसी बोली को खारिज करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि टेंडर प्राधिकरण उन शर्तों को लागू नहीं कर सकते, जो टेंडर दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से लिखी ही नहीं गई हों।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बोलीदाता की अयोग्यता केवल इसलिए बरकरार रखी गई थी कि उसने जॉइंट वेंचर...
दिल्ली दंगों की साज़िश मामले में जमानत से इनकार के खिलाफ उमर खालिद पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
जेएनयू के पूर्व शोधार्थी और सोशल एक्टिविस्ट उमर खालिद ने दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश से जुड़े मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। खालिद पिछले पांच वर्षों से UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत दर्ज इस केस में न्यायिक हिरासत में हैं।खालिद ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर को दिए गए उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की खंडपीठ ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इसी आदेश में अन्य आरोपियों शरजील इमाम, अथर...
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम ज़मानत आवेदनों पर सीधे विचार करने को अस्वीकार किया, जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सेशन कोर्ट की अवहेलना करते हुए हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम ज़मानत आवेदनों पर सीधे विचार करने की प्रथा पर असहमति व्यक्त की।न्यायालय ने इस प्रथा की उपयुक्तता पर विचार करने का निर्णय लिया और केरल हाईकोर्ट को नोटिस जारी किया। केरल हाईकोर्ट ने चुनौती दिए गए आदेश को पारित किया था। न्यायालय ने एडवोकेट जी. अरुधरा राव की सहायता से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा को इस मामले में एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्वीकार किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा...



















