BREAKING: चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अब बिना 25 वर्ष अनुभव के भी ट्राइब्यूनल के तकनीकी सदस्य बन सकेंगे: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

20 Nov 2025 5:20 PM IST

  • BREAKING: चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अब बिना 25 वर्ष अनुभव के भी ट्राइब्यूनल के तकनीकी सदस्य बन सकेंगे: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने आज स्पष्ट किया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) को इनकम टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल (ITAT) जैसे ट्राइब्यूनलों में टेक्निकल सदस्य नियुक्त होने के लिए न्यूनतम 25 वर्ष का अनुभव होना आवश्यक नहीं है।

    चीफ़ जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने यह स्पष्टीकरण इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के वकील द्वारा किए गए उल्लेख (mentioning) के बाद जारी किया।

    वकील ने खंडपीठ को बताया कि मद्रास बार एसोसिएशन केस में दिए गए फैसले के अनुसार, ट्राइब्यूनल सुधार अधिनियम, 2021 की वह शर्त अमान्य घोषित की जा चुकी है जिसमें अधिवक्ता (Advocate) के लिए ट्राइब्यूनल सदस्य बनने हेतु न्यूनतम 50 वर्ष आयु निर्धारित थी। इसी तर्क के आधार पर, CAs के लिए भी 25 वर्ष अनुभव की शर्त को मनमाना बताया गया।

    खंडपीठ ने इस दलील को स्वीकार करते हुए 19 नवंबर के अपने फैसले में निम्नलिखित जोड़ किया:

    “चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए 25 वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता मनमानी है। इस तरह की शर्त से कोई CA केवल तब ही पात्र होगा जब उसकी आयु 50 वर्ष पार कर जाएगी। अधिवक्ताओं के लिए ऐसी ही शर्त को यह कोर्ट पहले ही असंवैधानिक घोषित कर चुका है।”

    खंडपीठ ने कहा कि एक ही तर्क CAs पर भी लागू होना चाहिए।

    अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा:

    “हम ICAI की दलील से सहमत हैं। यदि 25 वर्ष अनुभव की शर्त को वैध माना जाए, तो CA केवल 50 वर्ष की आयु के बाद ही सेवा में प्रवेश कर सकता है। हमने अधिवक्ताओं के मामले में ऐसी शर्त को अस्थिर पाया है। इसलिए, CAs के लिए भी ऐसी शर्त असंवैधानिक है।”

    सुप्रीम कोर्ट ने अंत में कहा कि केंद्र सरकार को नया कानून बनाते समय इस व्यवस्था का ध्यान रखना होगा।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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