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सुप्रीम कोर्ट ने अपील में मेडिकल लापरवाही का नया मामला गढ़ने के लिए NCDRC की आलोचना की, डॉक्टर के हक में दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपील में मेडिकल लापरवाही का नया मामला गढ़ने के लिए NCDRC की आलोचना की, डॉक्टर के हक में दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितंबर) को एक शिकायतकर्ता को प्राप्त ₹10 लाख का मुआवज़ा वापस करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि NCDRC ने डॉक्टरों के खिलाफ 'प्रसवपूर्व लापरवाही' का मामला गढ़कर गलत मुआवज़ा दिया, जबकि मूल शिकायत 'प्रसवोत्तर लापरवाही' तक ही सीमित थी।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस एससी शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए दोहराया कि ऐसा नया मामला गढ़ना अस्वीकार्य होगा, जिसका ज़िक्र याचिका/शिकायत में कभी नहीं किया गया। चूंकि, NCDRC ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर डॉक्टर को कथित...

सुप्रीम कोर्ट ने टाइगर रिज़र्व सफ़ारी पर समिति गठित की | मौजूदा टाइगर सफ़ारी को जारी रखने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने टाइगर रिज़र्व सफ़ारी पर समिति गठित की | मौजूदा टाइगर सफ़ारी को जारी रखने की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) को गोवा के महादेई वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के क्षेत्रों को बाघ अभयारण्य के रूप में अधिसूचित करने के मुद्दे की जांच करने और छह सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने गोवा राज्य को उन क्षेत्रों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया, जिन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट ने बाघ अभयारण्य के रूप में अधिसूचित करने का निर्देश...

PC-PNDT मामलों में बरी किए गए लोगों को चुनौती न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की आलोचना की
PC-PNDT मामलों में बरी किए गए लोगों को चुनौती न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि राज्य गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम के मामलों में अपराधियों को बरी किए जाने के खिलाफ अपील क्यों नहीं दायर कर रहे हैं।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) नियम, 1966 के नियम 18ए(5)(vi) का कड़ाई से पालन करने का निर्देश देने की मांग की गई। यह नियम बरी किए जाने के आदेश के मामले में हाईकोर्ट में अपील, पुनर्विचार या अन्य कार्यवाही के लिए...

राष्ट्रपति संदर्भ: कर्नाटक, केरल और पंजाब ने सुप्रीम कोर्ट में कहा– राज्यपाल को बिल अनिश्चितकाल तक रोकने का अधिकार नहीं
राष्ट्रपति संदर्भ: कर्नाटक, केरल और पंजाब ने सुप्रीम कोर्ट में कहा– राज्यपाल को बिल अनिश्चितकाल तक रोकने का अधिकार नहीं

कर्नाटक, केरल और पंजाब राज्यों ने आज राष्ट्रपति को संदर्भित मामले में अपनी दलीलें पूरी कीं, जो बिलों पर सहमति (assent) देने की समयसीमा से जुड़ा है। राज्यों ने कहा कि अनुच्छेद 200 के तहत संवैधानिक ढांचे में राज्यपाल को कोई विवेकाधिकार (discretion) नहीं दिया गया है।सीनियर एडवोकेट के.के. वेणुगोपाल (केरल की ओर से) ने जोर देकर कहा कि राज्यपाल को इस तरह विवेकाधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह मनी बिल तक को रोक दें। वहीं, कर्नाटक की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि राष्ट्रपति और...

आयु-छूट लेने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार सामान्य श्रेणी सीटों पर नहीं जा सकते: सुप्रीम कोर्ट
आयु-छूट लेने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार सामान्य श्रेणी सीटों पर नहीं जा सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 सितम्बर) को कहा कि आरक्षित वर्ग के वे उम्मीदवार, जो आरक्षण श्रेणी में आयु-छूट लेकर आवेदन करते हैं, उन्हें बाद में अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी की रिक्तियों में चयन के लिए नहीं माना जा सकता, यदि भर्ती नियम ऐसे स्थानांतरण (migration) को स्पष्ट रूप से रोकते हैं।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह मामला सुना, जो स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की कॉन्स्टेबल (GD) भर्ती से जुड़ा था। इसमें आयु सीमा 18–23 वर्ष तय थी और ओबीसी उम्मीदवारों को 3 साल की छूट दी गई...

झूठे विवाह वादे पर बने संबंधों के मामलों में आरोपी की नीयत देखना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
झूठे विवाह वादे पर बने संबंधों के मामलों में आरोपी की नीयत देखना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि शादी का वादा करने के बाद आपसी सहमति से बने यौन संबंध, और शुरुआत से ही बुरी नीयत से झूठा वादा करके बनाए गए यौन संबंध — दोनों में फर्क है।कोर्ट ने कहा, "बलात्कार और सहमति से बने यौन संबंधों में स्पष्ट अंतर है। जब मामला शादी के वादे का हो, तो अदालत को यह बहुत सावधानी से देखना होगा कि आरोपी सच में पीड़िता से शादी करना चाहता था या फिर उसकी नीयत शुरू से ही गलत थी और उसने केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए झूठा वादा किया था। बाद वाली स्थिति धोखाधड़ी या छल...

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने को कहा

नौकरशाहों को भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा तय करने की अनुमति देने वाले प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के कुछ प्रावधानों पर "पुनर्विचार" करने को कहा।अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि 1956 का अधिनियम मुआवजे का निर्णय कार्यपालिका पर छोड़ देता है, जबकि भूमि अधिग्रहण अधिनियम जैसे अन्य कानूनों के तहत अधिग्रहण के लिए न्यायिक निगरानी की आवश्यकता होती है। निष्पक्षता के महत्व पर ज़ोर देते हुए यह सुझाव दिया गया कि NHAI अधिग्रहण के मामले में मुआवजे का...

S. 482 CrPC/S.528 BNSS | सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट के लिए फॉर-स्टेप टेस्ट निर्धारित किए
S. 482 CrPC/S.528 BNSS | सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट के लिए फॉर-स्टेप टेस्ट निर्धारित किए

सुप्रीम कोर्ट ने CrPC की धारा 482 (अब BNSS की धारा 528) के तहत रद्द करने संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करते समय हाईकोर्ट द्वारा विचार किए जाने वाले चरण निर्धारित किए।निम्नलिखित चरणों से सामान्यतः किसी अभियुक्त द्वारा CrPC की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दायर की गई रद्द करने की प्रार्थना की सत्यता का निर्धारण किया जाना चाहिए: -(i) पहला चरण, क्या अभियुक्त द्वारा जिस सामग्री पर भरोसा किया गया- वह ठोस, उचित और निर्विवाद है, अर्थात, सामग्री उत्कृष्ट और त्रुटिहीन...

प्रभावी भाग सुनाए जाने के बाद निर्णयों को अपलोड करने में देरी न करें हाईकोर्ट: सुप्रीम कोर्ट
प्रभावी भाग सुनाए जाने के बाद निर्णयों को अपलोड करने में देरी न करें हाईकोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को चेतावनी दी कि वे निर्णय के प्रभावी भाग सुनाए जाने के बाद उसे अपलोड करने में देरी न करें। न्यायालय ने दोहराया कि निर्णय सुरक्षित रखे जाने की तिथि से तीन महीने के भीतर पक्षकारों को उपलब्ध करा दिए जाने चाहिए।अदालत ने कहा,"हमें उम्मीद है कि हमें ऐसा कोई मामला देखने को नहीं मिलेगा, जिसमें हाईकोर्ट द्वारा तर्कसंगत आदेश अपलोड करने में, खासकर निर्णय के प्रभावी भाग सुनाए जाने के बाद, देरी हो।"जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की, जहां...

केवल दस्तावेज़ी प्रमाण के अभाव में नकद लोन रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
केवल दस्तावेज़ी प्रमाण के अभाव में नकद लोन रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि धन का एक हिस्सा बैंक हस्तांतरण के बजाय नकद के माध्यम से किया गया, इसका मतलब यह नहीं है कि केवल बैंकिंग माध्यम से हस्तांतरित राशि को ही प्रमाणित माना जा सकता है, खासकर जब वचन पत्र में पूरे लेनदेन का उल्लेख हो।न्यायालय ने आगे कहा कि दस्तावेज़ी प्रमाण का अभाव अपने आप में नकद लेनदेन रद्द नहीं कर देता। न्यायालय ने स्वीकार किया कि ऐसी स्थितियां होंगी, जहां लेनदेन करना होगा, जिसके लिए कोई प्रमाण नहीं होगा।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस विपुल एम पंचोली की...

एलोपैथी विरोधी टिप्पणियों को लेकर स्वामी राम देव के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल
एलोपैथी विरोधी टिप्पणियों को लेकर स्वामी राम देव के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल

सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया कि छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने योग गुरु और पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक स्वामी रामदेव के खिलाफ COVID-19 महामारी के दौरान एलोपैथी दवाओं के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर दर्ज FIR के संबंध में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।यह मामला जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ के समक्ष था। खंडपीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस घटनाक्रम की जानकारी दी।सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे राम देव की ओर से पेश हुए और अनुरोध किया कि आदेश में बयान दर्ज किया जाए।खंडपीठ ने...

सुप्रीम कोर्ट ने समय पर अपील दायर करने के लिए SCLSC के सुझावों पर HCLSC और जेल अधीक्षकों से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने समय पर अपील दायर करने के लिए SCLSC के सुझावों पर HCLSC और जेल अधीक्षकों से जवाब मांगा

गरीब वादियों और कैदियों को शीघ्र कानूनी सहायता प्रदान करने से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति (SCLSC) ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रूपरेखा प्रस्तावित की, जिसने हाईकोर्ट विधिक सेवा समितियों (HCLSC) और जेल अधीक्षकों को सुझाए गए उपायों पर अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।हालांकि, यह मामला पटना हाईकोर्ट के फैसले (2014) के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका से उत्पन्न हुआ था।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने याचिका दायर करने में हुई लंबी देरी को देखते हुए SCLSC...

Electricity Act | सुप्रीम कोर्ट ने डिस्कॉम की अपीलें खारिज कीं, कहा- सभी खरीदारों को कोयले की कमी की लागत समान रूप से साझा करनी होगी
Electricity Act | सुप्रीम कोर्ट ने डिस्कॉम की अपीलें खारिज कीं, कहा- सभी खरीदारों को कोयले की कमी की लागत समान रूप से साझा करनी होगी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को डिस्कॉम द्वारा दायर अपीलों को खारिज किया और APTEL का आदेश बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि कोयले की कमी और उससे जुड़ी लागतों को किसी भी बिजली संयंत्र से बिजली खरीदने वाले सभी खरीदारों द्वारा समान रूप से साझा किया जाना चाहिए। न्यायालय ने आगे कहा कि कोयले की कमी की स्थिति में कोई भी डिस्कॉम बिजली आपूर्ति के लिए प्राथमिकता का दावा नहीं कर सकती।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने प्रतिवादी-JKEL के 1050 मेगावाट क्षमता...

नैतिक साहस एक वकील के लिए दायित्व नहीं, सबसे बड़ी संपत्ति है: NLSIU दीक्षांत समारोह में बोले जस्टिस सूर्यकांत
'नैतिक साहस एक वकील के लिए दायित्व नहीं, सबसे बड़ी संपत्ति है': NLSIU दीक्षांत समारोह में बोले जस्टिस सूर्यकांत

नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के 33वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में रविवार (7 सितंबर) को बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर अड़े रहने से रास्ते बंद नहीं होते, बल्कि उन्हें परिभाषित किया जाता है और नैतिक साहस एक वकील के लिए दायित्व नहीं, बल्कि सबसे बड़ी संपत्ति है।जज ने 2025 के ग्रेजुएट वर्ग सहित उपस्थित श्रोताओं को अध्यक्षीय भाषण देते हुए कहा कि वकील अपने पेशेवर करियर में तीन निर्णायक क्षणों का अनुभव करता है। पहला...

सहारा कर्मचारियों के बकाया वेतन भुगतान की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सहारा कर्मचारियों के बकाया वेतन भुगतान की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सहारा समूह को 16 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया वेतन के भुगतान के निर्देश देने की मांग की गई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ के समक्ष वकील ने उल्लेख किया कि SEBI बनाम सहारा मामले में सहारा कर्मचारियों के बकाया वेतन भुगतान के संबंध में निर्देश देने के लिए एक आवेदन दायर किया गया।वकील ने कहा,"हमने सहारा के कर्मचारियों के वेतन भुगतान से संबंधित आवेदन दायर किया। 16 करोड़ रुपये का वेतन भुगतान किया जाना है।...

सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार क्षेत्राधिकार के सिद्धांतों का सारांश प्रस्तुत किया, बेटी को सहदायिक अधिकार दिया
सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार क्षेत्राधिकार के सिद्धांतों का सारांश प्रस्तुत किया, बेटी को सहदायिक अधिकार दिया

हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 (HSA) के तहत बेटी के सहदायिक हिस्से का वैधानिक अधिकार बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को मद्रास हाईकोर्ट का पुनर्विचार आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश में तथ्यों की पुनर्व्याख्या की थी और उसके अधिकार पर सवाल उठाया था। न्यायालय ने कहा कि ऐसा कोई भी प्रयास हाईकोर्ट के पुनर्विचार क्षेत्राधिकार के दायरे से बाहर है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एसवीएन भट्टी की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की, जहां विवाद एक विभाजन मुकदमे...