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हमारे कॉलेज और यूनिवर्सिटी हमारे उदार लोकतंत्र के लिए अत्यावश्यक हैं : जस्टिस बीवी नागरत्ना
हमारे कॉलेज और यूनिवर्सिटी हमारे उदार लोकतंत्र के लिए अत्यावश्यक हैं : जस्टिस बीवी नागरत्ना

सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के 12वें दीक्षांत समारोह और संस्थापक दिवस पर अपना भाषण दिया, जिसका शीर्षक: 'हमारी संवैधानिक संस्कृति का पोषण, विश्वविद्यालयों के लिए एक उच्च आह्वान था।' उन्होंने ग्रैजुएट स्टूडेंट्स को शैक्षणिक कठोरता से गुजरने के लिए बधाई दी। उन्होंने अपना संबोधन यह कहते हुए शुरू किया: “हमारे मूल लोकतांत्रिक संस्थान नागरिकों और सरकारों के बीच महत्वपूर्ण मध्यस्थ हैं; हमारे पास विधानमंडलों में राजनीतिक संस्थाएं हैं, हमारे पास...

किसी व्यक्ति को शिकायत/ एफआईआर वापस लेने या विवाद सुलझाने के लिए धमकी देने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 195ए नहीं लगेगी : सुप्रीम कोर्ट
किसी व्यक्ति को शिकायत/ एफआईआर वापस लेने या विवाद सुलझाने के लिए धमकी देने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 195ए नहीं लगेगी : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति को शिकायत या एफआईआर वापस लेने या विवाद सुलझाने के लिए धमकी देने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 195ए नहीं लगेगी।जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस जे बी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि धारा 195ए का बाद वाला हिस्सा यह स्पष्ट करता है कि झूठे साक्ष्य का मतलब अदालत के समक्ष झूठा साक्ष्य देना है।इस मामले में, एफआईआर में आरोप यह है कि आरोपी व्यक्तियों ने आईपीसी की धारा 376 डी, 323, 120 बी, 354 ए और 452 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दर्ज की गई पहली एफआईआर को वापस लेने के लिए पहली...

अपर्याप्त मुद्रांकित समझौते में मध्यस्थता खंड पर कार्रवाई नहीं की जा सकती, सुप्रीम कोर्ट अपने इस फैसले के खिलाफ सुनवाई करेगा
अपर्याप्त मुद्रांकित समझौते में मध्यस्थता खंड पर कार्रवाई नहीं की जा सकती, सुप्रीम कोर्ट अपने इस फैसले के खिलाफ सुनवाई करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने 2020 के एक फैसले के खिलाफ एक क्यूरेटिव पीटिशन (उपचारात्मक याचिका) सूचीबद्ध की। शीर्ष अदालत ने 2020 के अपने फैसले में कहा था कि अपर्याप्त रूप से मुद्रांकित समझौते में मध्यस्थता खंड पर अदालत कार्रवाई नहीं कर सकती है। याचिका पर 24 अगस्त 2023 को सुनवाई होगी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने मामले में नोटिस जारी किया। उक्त फैसले के खिलाफ एक पुनर्व‌िचार याचिका को जस्टिस एन वी...

अगर अभियुक्तों को पहले ही पुलिस स्टेशन में गवाहों के दिखाया गया है तो परीक्षण पहचान परेड की पवित्रता संदिग्ध: सुप्रीम कोर्ट
अगर अभियुक्तों को पहले ही पुलिस स्टेशन में गवाहों के दिखाया गया है तो परीक्षण पहचान परेड की पवित्रता संदिग्ध: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर किसी मामले को साबित करने के सिद्धांतों को दोहराया। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि परिस्थितयों को स्‍थापित "अवश्य होना चाहिए/होना चाहिए" न कि "शायद" स्थापित होना चाहिए। इन्हीं टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा हत्या के आरोपी 3 व्यक्तियों को दी गई दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया गया। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सजा के खिलाफ अपील पर...

बीमा कंपनियों को प्रामाणिक और उचित तरीके से व्यवहार करना चाहिए, केवल अपने फायदे की परवाह नहीं करनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
बीमा कंपनियों को प्रामाणिक और उचित तरीके से व्यवहार करना चाहिए, केवल अपने फायदे की परवाह नहीं करनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बीमा कंपनी से यह उम्मीद की जाती है कि वह बीमाधारक के साथ वास्तविक और निष्पक्ष व्यवहार करेगा, न कि केवल अपने मुनाफे की परवाह करेगा। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा, "बीमा कंपनी का यह कर्तव्य है कि वह अपनी जानकारी में मौजूद सभी भौतिक तथ्यों का खुलासा करे, क्योंकि सद्भावना का दायित्व दोनों पर समान रूप से लागू होता है।"मामले में शिकायतकर्त ने 100 एकड़ क्षेत्र में झींगा उत्पादन किया था। उन्होंने एक बीमा कंपनी से बीमा कवरेज लिया...

राष्ट्रीयकृत बैंक कर्मचारी लोक सेवक, लेकिन सीआरपीसी की धारा 197 के तहत सुरक्षा उसे उपलब्ध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
राष्ट्रीयकृत बैंक कर्मचारी 'लोक सेवक', लेकिन सीआरपीसी की धारा 197 के तहत सुरक्षा उसे उपलब्ध नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीयकृत बैंक में कार्यरत व्यक्ति को सीआरपीसी की धारा 197 की सुरक्षा उपलब्ध नहीं है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस जे बी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 197 केवल उन मामलों में लागू होती है, जहां लोक सेवक ऐसा होता है, जिसे सरकार की अनुमति के बिना सेवा से हटाया नहीं जा सकता है।मौजूदा मामले में आरोपी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ओवरसीज बैंक, हैदराबाद में सहायक महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर मेसर्स स्वेन...

धारा 482 सीआरपीसी -एफआईआर रद्द करने की याचिका पर विचार करते समय हाईकोर्ट गूढ़ अर्थ निकालने की कोशिश करें
धारा 482 सीआरपीसी -एफआईआर रद्द करने की याचिका पर विचार करते समय हाईकोर्ट गूढ़ अर्थ निकालने की कोशिश करें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एफआईआर/आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर विचार करते समय हाईकोर्ट को मामले की शुरुआत/रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री की समग्र परिस्थितियों को ध्यान में रखने का अधिकार है।जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस जे बी पारदीवाला की पीठ ने कहा, "तुच्छ या परेशान करने वाली कार्यवाहियों में न्यायालय का कर्तव्य है कि वह मामले के रिकॉर्ड से निकली कई अन्य परिस्थितियों पर गौर करे और यदि आवश्यक हो, तो उचित देखभाल और...

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस पीके मिश्रा ने दिल्ली दंगों के बड़े षडयंत्र मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस पीके मिश्रा ने दिल्ली दंगों के बड़े षडयंत्र मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा के सुनवाई से हटने के बाद दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में पूर्व जेएनयू स्कॉलर और एक्टिविस्ट उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी।जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ के समक्ष यह मामला सूचीबद्ध किया गया था।जस्टिस बोपन्ना ने मामले की सुनवाई शुरू होते ही कहा, "यह किसी अन्य खंडपीठ के सामने आएगा। मेरे भाई की ओर से कुछ कठिनाई है।"खंडपीठ ने निर्देश दिया कि मामले को 17 अगस्त को किसी अन्य पीठ के समक्ष...

कुनो में चीतों की मौत का मामला| सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों पर गंभीरता से विचार करने को कहा
कुनो में चीतों की मौत का मामला| सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों पर 'गंभीरता से' विचार करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अफ्रीकी महाद्वीप से मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित किए गए चीतों की मौत के संबंध में दायर याचिका को केंद्र की इस दलील को रिकॉर्ड में लेते हुए बंद कर दिया कि चीता परियोजना संचालन समिति के परामर्श पैनल के सभी सदस्यों से परामर्श किया जा रहा है। परियोजना को उचित तरीके से आगे बढ़ाएं और यह सुनिश्चित करें कि आगे होने वाली मौतों को रोका जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि अब तक दर्ज की गई मौतों की संख्या कम नहीं है।जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस...

आर्टिकल 370 पर सुनवाई - संविधान पूरे राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने की अनुमति नहीं देता : सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
आर्टिकल 370 पर सुनवाई - संविधान पूरे राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने की अनुमति नहीं देता : सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार की सुनवाई में सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने जम्मू और कश्मीर राज्य (J&K) को एक केंद्र शासित प्रदेश (UT) में परिवर्तित करने की संवैधानिकता पर सवाल उठाया। सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल इस मामले में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद मोहम्मद अकबर लोन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को खत्म करने वाले राष्ट्रपति के आदेश...

बिलकिस बानो केस - जेल से बाहर आए परिवार के किसी सदस्य को माला पहनाने में क्या गलत है?  : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने पूछा
बिलकिस बानो केस - 'जेल से बाहर आए परिवार के किसी सदस्य को माला पहनाने में क्या गलत है?' : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने पूछा

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को बिलकिस बानो मामले की सुनवाई के दौरान भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पूछा, जेल से बाहर आने वाले परिवार के सदस्य को माला पहनाने में क्या गलत है?जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ बिलकिस बानो द्वारा दायर याचिका और कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें गुजरात सरकार द्वारा 11 दोषियों को छूट देने के फैसले को चुनौती दी गई, जिन्हें 2002 के गुजरात दंगे में बानो के परिवार के सदस्यों के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा...

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा: प्रमाणपत्र में त्रुटि के कारण ईडब्ल्यूएस आरक्षण से वंचित किए गए 3 उम्मीदवारों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा: प्रमाणपत्र में त्रुटि के कारण ईडब्ल्यूएस आरक्षण से वंचित किए गए 3 उम्मीदवारों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 3 सिविल सेवा उम्मीदवारों की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिन्होंने दलील दी थी कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र में की गई लिपिकीय त्रुटि के कारण उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी के तहत आरक्षण से वंचित कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ईडब्ल्यूएस कटऑफ अंक से अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद 2022 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में उनका चयन नहीं किया गया था। 23 मई 2023 को परिणाम घोषित होने के बाद, उनकी श्रेणी...

सुप्रीम कोर्ट में याचिका, मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार के आह्वान के खिलाफ कार्रवाई की मांग
सुप्रीम कोर्ट में याचिका, मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार के आह्वान के खिलाफ कार्रवाई की मांग

नूंह-गुरुग्राम सांप्रदायिक हिंसा के बाद मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार के लिए कई समूहों द्वारा किए गए आह्वान के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष मामले का उल्लेख किया, जब अनुच्छेद 370 मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ दोपहर के भोजन के लिए ब्रेक लेने वाली थी।मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए सिब्बल ने कहा-"गुरुग्राम में एक बहुत ही गंभीर बात हुई है, जहां...

कपिल सिब्बल ने अनुच्छेद 370 पर सुनवाई के दौरान बुनियादी संरचना सिद्धांत पर रंजन गोगोई के बयान का उल्लेख किया
कपिल सिब्बल ने अनुच्छेद 370 पर सुनवाई के दौरान 'बुनियादी संरचना सिद्धांत' पर रंजन गोगोई के बयान का उल्लेख किया

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अनुच्छेद 370 मामले की सुनवाई के दौरान भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा कल राज्यसभा में बुनियादी संरचना सिद्धांत पर संदेह जताते हुए दिया गया बयान सुप्रीम कोर्ट में चर्चा में आया। संविधान पीठ को संबोधित करते हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस करते हुए तर्क दिया कि जिस तरह से केंद्र ने जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द कर दिया, उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता जब तक कि कोई नया न्यायशास्त्र सामने नहीं आता कि वे जो चाहें कर सकते...

15 दिनों की पुलिस हिरासत का अर्थ पूरी जांच अवधि में उसे समग्र रूप से लागू करना है: सुप्रीम कोर्ट ने 1992 मिसाल पर संदेह जताया
15 दिनों की पुलिस हिरासत का अर्थ पूरी जांच अवधि में उसे समग्र रूप से लागू करना है: सुप्रीम कोर्ट ने 1992 मिसाल पर संदेह जताया

सेंथिल बालाजी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के सीबीआई बनाम अनुपम जे कुलकर्णी मामले में दिए गए फैसले की व्याख्या पर सवाल उठाया है कि पुलिस या जांच एजेंसी गिरफ्तारी के पहले 15 दिनों के बाद आरोपी की हिरासत की मांग नहीं कर सकती?इस साल की शुरुआत में, अप्रैल में, सीबीआई बनाम विकास मिश्रा मामले में सुप्रीम कोर्ट की एक और 2-न्यायाधीशों की पीठ ने भी अनुपम कुलकर्णी के फैसले पर संदेह जताया था और राय दी थी कि क्या किसी आरोपी को गिरफ़्तारी की आरंभिक तारीख से 15 साल की अवधि से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में...

मोरबी ब्रिज हादसा: सुप्रीम कोर्ट ने टिकट जारी करने वाले व्यक्ति को दी गई जमानत में हस्तक्षेप करने से इनकार किया
मोरबी ब्रिज हादसा: सुप्रीम कोर्ट ने टिकट जारी करने वाले व्यक्ति को दी गई जमानत में हस्तक्षेप करने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मनसुखभाई वालजीभाई टोपिया को गुजरात हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जो पिछले साल 30 अक्टूबर को मोरबी पुल के ढहने के दिन टिकट जारी करने वाला व्यक्ति है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 135 लोगों की मौत हो गई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की 3 जजों की बेंच ट्रेजेडी विक्टिम एसोसिएशन, मोरबी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।खंडपीठ ने कहा,"हम संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत विशेष...

सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या शरणार्थियों की हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या शरणार्थियों की हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के हिरासत केंद्र में अनिश्चितकालीन हिरासत से रोहिंग्या शरणार्थी को रिहा करने के लिए दायर रिट याचिका पर नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए याचिका की प्रति केंद्र सरकार को देने की भी छूट दी। याचिकाकर्ता के वकील ने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता और बंदी दोनों के पास यूएनएचसीआर द्वारा जारी शरणार्थी कार्ड हैं।याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता की छोटी बहन रोहिंग्या...

धारा 19 पीएमएलए का अनुपालन न करना गिरफ्तारी को निष्फल कर देगा; मजिस्ट्रेट सुनिश्चित करे कि ईडी गिरफ्तारी प्रक्रिया का पालन करे
धारा 19 पीएमएलए का अनुपालन न करना गिरफ्तारी को निष्फल कर देगा; मजिस्ट्रेट सुनिश्चित करे कि ईडी गिरफ्तारी प्रक्रिया का पालन करे

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 19 (गिरफ्तारी की शक्ति) के आदेश का अनुपालन न करने पर गिरफ्तारी ही निष्फल हो जाएगी।जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा हिरासत को चुनौती देने वाली तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि: “पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के आदेश का कोई भी गैर-अनुपालन गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के लाभ के लिए होगा। ऐसे गैर-अनुपालन के लिए, सक्षम न्यायालय के पास...

सीआरपीसी की धारा 167 के तहत हिरासत में सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि ईडी जैसी अन्य जांच एजेंसियों की हिरासत भी शामिल : सुप्रीम कोर्ट
सीआरपीसी की धारा 167 के तहत 'हिरासत' में सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि ईडी जैसी अन्य जांच एजेंसियों की हिरासत भी शामिल : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 167 के तहत 'हिरासत' में केवल पुलिस ही नहीं बल्कि प्रवर्तन निदेशालय जैसी अन्य जांच एजेंसियों की हिरासत भी शामिल है। जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की खंडपीठ ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा हिरासत को चुनौती देने वाली तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।सीआरपीसी की धारा 167(1) के तहत यदि जांच 24 घंटे के भीतर पूरी नहीं हो पाती है तो एक सक्षम अधिकारी को...