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Lakhimpur Kheri Case : सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की गवाही न होने पर निराशा जताई, ट्रायल जज से उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा
Lakhimpur Kheri Case : सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों की गवाही न होने पर निराशा जताई, ट्रायल जज से उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में ट्रायल की धीमी गति पर निराशा जताई, खासकर पिछले दो महीनों से गवाहों को गवाही के लिए पेश न किए जाने पर। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कदम उठाए और साथ ही गवाह सुरक्षा योजना का भी पालन सुनिश्चित करे।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आशीष मिश्रा पर...

गुजरात यूनिट के Instagram और Facebook अकाउंट सस्पेंड किए जाने को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने AAP की याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब
गुजरात यूनिट के Instagram और Facebook अकाउंट सस्पेंड किए जाने को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने AAP की याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब

आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुजरात यूनिट के Instagram हैंडल "@aapgujarat" और उसके Facebook पेज को सस्पेंड किए जाने को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया और इसे इसी तरह के मुद्दों से जुड़ी दूसरी याचिकाओं के साथ जोड़ दिया।कोर्ट ने इसे "सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर, इंडिया बनाम भारत संघ" मामले के साथ जोड़ा। यह जनहित याचिका (PIL) है, जिसमें यूज़र को बिना नोटिस दिए सोशल मीडिया अकाउंट या पोस्ट ब्लॉक...

S.294 CrPC | आरोपी चार्जशीट का हिस्सा बन चुके दस्तावेज़ों को बिना हस्ताक्षर के औपचारिक सबूत के भी पेश कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
S.294 CrPC | आरोपी चार्जशीट का हिस्सा बन चुके दस्तावेज़ों को बिना हस्ताक्षर के औपचारिक सबूत के भी पेश कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जब कोई आरोपी बचाव पक्ष की ओर से कुछ ऐसे दस्तावेज़ पेश करना चाहता है, जो पहले से ही चार्जशीट और अभियोजन पक्ष के रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, तो उन्हें औपचारिक रूप से साबित करने की ज़रूरत नहीं होती। ऐसे दस्तावेज़ों को उन पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर साबित किए बिना भी सबूत के तौर पर पढ़ा जा सकता है।कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 294(3) का हवाला दिया। इस धारा के अनुसार, यदि किसी दस्तावेज़ की प्रामाणिकता पर कोई विवाद नहीं है तो उसे सबूत के तौर...

गोमचू येकर आत्महत्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के IAS अधिकारी तालो पोटॉम की ज़मानत बरकरार रखी
गोमचू येकर आत्महत्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के IAS अधिकारी तालो पोटॉम की ज़मानत बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट का आदेश पलट दिया, जिसमें 19 साल के गोमचू येकर की आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अरुणाचल प्रदेश के IAS अधिकारी तालो पोटॉम को दी गई ज़मानत रद्द कर दी गई थी।आरोपों के अनुसार, गोमचू येकर राज्य लोक निर्माण विभाग में कार्यरत थे। यह नौकरी उन्हें पोटॉम ने ही दी थी। अपने सुसाइड नोट में येकर ने पोटॉम और एक अन्य व्यक्ति (ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर) पर उनके साथ यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया, जिसके कारण उन्हें HIV/AIDS संक्रमण हो गया।जस्टिस जेके माहेश्वरी और...

फ़ैसले में यह नहीं कहा गया कि चुनाव आयुक्तों पर कानून किसी खास तरीके से ही बनाया जाना चाहिए: सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट
फ़ैसले में यह नहीं कहा गया कि चुनाव आयुक्तों पर कानून किसी खास तरीके से ही बनाया जाना चाहिए: सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने के आधार पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि 'अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ' मामले में दिया गया फ़ैसला सिर्फ़ तब तक के लिए एक खाली जगह भरने के लिए था, जब तक संसद कोई कानून नहीं बना लेती; इस फ़ैसले में ऐसे किसी कानून के लिए कोई खास ढांचा तय नहीं किया गया।जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा,"अनूप बरनवाल फ़ैसला सिर्फ़ तब तक के लिए खाली जगह भरने के लिए था, जब तक कानून नहीं बन जाता। फ़ैसले में ऐसा कोई ज़िक्र नहीं है कि कानून किसी खास तरीके से ही...

पैरा-टीचर्स का रेगुलराइज़ेशन का दावा राज्य द्वारा तय किए गए शैक्षिक मानकों के अधीन: सुप्रीम कोर्ट
पैरा-टीचर्स का रेगुलराइज़ेशन का दावा राज्य द्वारा तय किए गए शैक्षिक मानकों के अधीन: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए टीचर सिर्फ़ अपनी लंबी सेवा के आधार पर किसी न्यायिक आदेश के ज़रिए रेगुलराइज़ेशन का दावा अपने अधिकार के तौर पर नहीं कर सकते; क्योंकि इससे वैधानिक नियमों के बाहर सार्वजनिक भर्ती का एक समानांतर तरीका बन जाता है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस SVN भट्टी की बेंच ने कहा कि जहां एक तरफ़ एड-हॉक टीचर का सरकारी टीचर बनने की "इच्छा" रखना उचित है, वहीं दूसरी तरफ़ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए उम्मीदवारों की "उपयुक्तता" का आकलन करना भी राज्य का कर्तव्य...

कोर्ट को बहिष्कार पर रोक लगाने वाले कानून को पूरी तरह से रद्द नहीं करना चाहिए था: सबरीमाला रेफरेंस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट को बहिष्कार पर रोक लगाने वाले कानून को पूरी तरह से रद्द नहीं करना चाहिए था: सबरीमाला रेफरेंस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट

सबरीमाला रेफरेंस की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मौखिक रूप से टिप्पणी की कि 'सरदार सैयदना ताहेर सैफुद्दीन साहब बनाम बॉम्बे राज्य' मामले में 1962 का फैसला गलत था, क्योंकि उसने बहिष्कार पर रोक लगाने वाले बॉम्बे कानून को पूरी तरह से रद्द कर दिया था।कोर्ट ने राय दी कि फैसले में 'विच्छेद के सिद्धांत' (Doctrine of Severance) को लागू किया जाना चाहिए था, या 'रीडिंग डाउन' (Reading Down) की विधि अपनाई जानी चाहिए थी ताकि यह माना जा सके कि धार्मिक कारणों के अलावा अन्य कारणों से किसी सदस्य का...

Sabarimala Reference Case: सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा समुदाय के कुछ वर्गों में महिला जननांग विकृति की प्रथा पर जताई चिंता
Sabarimala Reference Case: सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा समुदाय के कुछ वर्गों में महिला जननांग विकृति की प्रथा पर जताई चिंता

सबरीमाला रेफरेंस की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मौखिक रूप से दाऊदी बोहरा समुदाय के कुछ वर्गों में महिला जननांग विकृति (FGM) की प्रथा को लेकर चिंता जताई।FGM को चुनौती देने वाली याचिकाएं सबरीमाला रेफरेंस के साथ ही जोड़ी गई हैं, क्योंकि 9 जजों की बेंच द्वारा विचार किए जा रहे अनुच्छेद 25 और 26 से संबंधित संवैधानिक मुद्दों का इस मामले पर भी असर पड़ता है।FGM का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने बेंच को बताया कि यह प्रथा 7 साल की छोटी बच्चियों पर...

दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम के पालन के मामले में केंद्र सरकार की स्थिति का आकलन करे: सुप्रीम कोर्ट ने NLU दिल्ली को दिया निर्देश
'दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम' के पालन के मामले में केंद्र सरकार की स्थिति का आकलन करे: सुप्रीम कोर्ट ने NLU दिल्ली को दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली को यह ज़िम्मेदारी सौंपी कि वह 'दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016' के प्रावधानों के पालन के मामले में भारत सरकार की स्थिति का आकलन करे।उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने इससे पहले 8 NLU को निर्देश दिया था कि वे पूरे देश में उन देखभाल संस्थानों का आकलन करें, जहां संज्ञानात्मक दिव्यांगता वाले लोग रहते हैं। साथ ही वे इस अधिनियम के पालन की स्थिति का भी जायज़ा लें। इस परियोजना को 'प्रोजेक्ट एबिलिटी एम्पावरमेंट' (Project Ability Empowerment) नाम...

सुप्रीम कोर्ट ने कम अटेंडेंस के कारण लॉ स्टूडेंट्स को रोकने के फैसले पर उठाया सवाल, BCI से पूछा- इसे चुनौती क्यों नहीं दी गई?
सुप्रीम कोर्ट ने कम अटेंडेंस के कारण लॉ स्टूडेंट्स को रोकने के फैसले पर उठाया सवाल, BCI से पूछा- इसे चुनौती क्यों नहीं दी गई?

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर असहमति जताई। इस फैसले में कुछ लॉ स्टूडेंट्स के मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि अटेंडेंस की कमी उनके आगे की पढ़ाई जारी रखने में रुकावट नहीं बनेगी।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच NALSAR यूनिवर्सिटी के दो फाइनल ईयर के लॉ स्टूडेंट्स द्वारा दायर PIL पर सुनवाई कर रही थी। इन स्टूडेंट्स ने सितंबर 2024 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा जारी सर्कुलरों को चुनौती दी थी। इन सर्कुलरों में कानूनी शिक्षा या प्रैक्टिस के लिए...

हर धार्मिक प्रथा को अदालत में चुनौती दी जाएगी तो भारतीय सभ्यता का क्या होगा?: सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट
हर धार्मिक प्रथा को अदालत में चुनौती दी जाएगी तो भारतीय सभ्यता का क्या होगा?: सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट

सबरीमाला संदर्भ मामले की सुनवाई के 13वें दिन सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप को लेकर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यदि हर धार्मिक प्रथा और विवाद को संवैधानिक अदालतों में चुनौती दी जाने लगे, तो भारत की सभ्यता और सामाजिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ दाऊदी बोहरा समुदाय के धार्मिक प्रमुख 'दाई' की बहिष्कार (Excommunication) की शक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने दलील दी कि इस शक्ति का मनमाने ढंग से...

अनुशासनात्मक प्राधिकारी बिना नए कारण बताओ नोटिस के कर्मचारी को ऐसे आरोप के लिए दंडित नहीं कर सकता, जो मूल रूप से तय नहीं किया गया: सुप्रीम कोर्ट
अनुशासनात्मक प्राधिकारी बिना नए कारण बताओ नोटिस के कर्मचारी को ऐसे आरोप के लिए दंडित नहीं कर सकता, जो मूल रूप से तय नहीं किया गया: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (6 मई) को फैसला सुनाया कि कोई भी दोषी कर्मचारी, जिसने अपने ऊपर लगे आरोप का सफलतापूर्वक बचाव किया, उसे किसी ऐसे नए आरोप के आधार पर सेवामुक्त नहीं किया जा सकता, जिसके बचाव का उसे अवसर ही न दिया गया हो।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने रिटायर बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा दायर अपील पर सुनवाई की। इस विशेषज्ञ को, पटना मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के निरीक्षण के दौरान जमा किए गए एक घोषणा पत्र में यह जानकारी छिपाने के कारण तीन महीने के लिए...

S.28 Specific Relief Act | खरीदार की चूक के कारण बिक्री समझौता रद्द करने के लिए अलग से आवेदन की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
S.28 Specific Relief Act | खरीदार की चूक के कारण बिक्री समझौता रद्द करने के लिए अलग से आवेदन की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (6 मई) को यह टिप्पणी की कि यदि कोई डिक्री-धारक (जिसके पक्ष में फैसला आया हो) तय समय सीमा के भीतर बिक्री की शेष राशि जमा करने में विफल रहता है तो बिक्री समझौते के 'विशिष्ट पालन' (specific performance) के लिए जारी डिक्री को लागू नहीं किया जा सकता, जिसके परिणामस्वरूप वह अनुबंध (contract) रद्द हो जाता है।कोर्ट ने यह फैसला दिया कि खरीदार की चूक के कारण अनुबंध रद्द करने के लिए 'निर्णय-ऋणी' (जिसके खिलाफ फैसला आया हो) द्वारा अलग से आवेदन देना अनिवार्य नहीं है।जस्टिस पंकज मित्तल...

मौजूदा कानून यह पक्का करता है कि प्रधानमंत्री का आदमी ही मुख्य चुनाव आयुक्त बने: CEC कानून को चुनौती देने वालों की दलील
मौजूदा कानून यह पक्का करता है कि 'प्रधानमंत्री का आदमी' ही मुख्य चुनाव आयुक्त बने: CEC कानून को चुनौती देने वालों की दलील

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील दी कि चुनाव आयुक्त कानून, 2023 यह पक्का करता है कि प्रधानमंत्री द्वारा सुझाए गए लोगों को ही चुनाव आयुक्त के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। इससे किसी भी दूसरे उम्मीदवार का चुना जाना नामुमकिन हो जाता है और चुनाव आयोग की आज़ादी कमज़ोर होती है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच 2023 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के समूह की सुनवाई कर रही थी। इस कानून में यह प्रावधान है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दूसरे चुनाव...

सुप्रीम कोर्ट ने ज़िला कलेक्टरों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू करने का अधिकार दिया, जारी किए दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने ज़िला कलेक्टरों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू करने का अधिकार दिया, जारी किए दिशा-निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत वैधानिक शक्तियाँ सौंपकर, पूरे देश के ज़िला कलेक्टरों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 लागू करने का अधिकार दिया।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को निर्देश दिया कि वह पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 23 के तहत एक अधिसूचना जारी करे, जिसमें धारा 5 के तहत शक्तियाँ एक वर्ष की अवधि के लिए ज़िला कलेक्टरों को सौंपी जाएं। इन शक्तियों में बाध्यकारी निर्देश जारी करने...