तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच पैन्नैयार नदी विवाद के निपटारे के लिए ट्रिब्यूनल गठित करे केंद्र: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

Praveen Mishra

2 Feb 2026 1:25 PM IST

  • तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच पैन्नैयार नदी विवाद के निपटारे के लिए ट्रिब्यूनल गठित करे केंद्र: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

    आज सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों के बीच पैन्नैयार नदी के जल बंटवारे से जुड़े लंबित विवाद के समाधान के लिए जल विवाद अधिकरण (ट्रिब्यूनल) के गठन का निर्देश दिया।

    अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह एक माह के भीतर जल विवाद अधिकरण का गठन करे। यह फैसला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ ने सुनाया। खंडपीठ ने इस मामले में अपना निर्णय पिछले वर्ष दिसंबर में सुरक्षित रखा था।

    सितंबर 2025 में न्यायालय को बताया गया था कि इस विवाद के समाधान के लिए अधिकरण का गठन आवश्यक है। यह विवाद तमिलनाडु राज्य द्वारा संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत कर्नाटक राज्य और भारत संघ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर वाद के माध्यम से शीर्ष अदालत के समक्ष लाया गया था।

    सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि दोनों राज्यों के बीच बातचीत के माध्यम से कोई समाधान नहीं निकल पाया, जिसके बाद यह सुझाव दिया गया कि केंद्र सरकार इस विवाद के निपटारे के लिए ट्रिब्यूनल का गठन करे। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया कि कर्नाटक राज्य की ओर से यह अनुरोध प्राप्त हुआ है कि उसकी नवगठित सरकार तमिलनाडु के साथ बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की संभावना को फिर से तलाशना चाहती है। कर्नाटक का तर्क था कि मई 2023 में निर्वाचित नई सरकार को इस मुद्दे पर तमिलनाडु से बातचीत का अवसर नहीं मिला था।

    वहीं, तमिलनाडु की ओर से इस पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि केंद्र सरकार ने पहले अधिकरण गठन की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन बाद में उससे पीछे हट गई। कर्नाटक ने यह भी दलील दी कि केंद्रीय सरकार तभी ट्रिब्यूनल गठित कर सकती है जब वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि विवाद बातचीत से हल नहीं हो सकता।

    जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने नया वार्ता समिति (नेगोशिएशन कमेटी) गठित करने का निर्देश देते हुए कहा था कि अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 की धारा 4 के तहत ट्रिब्यूनल का गठन तभी किया जा सकता है, जब केंद्र सरकार यह माने कि बातचीत के जरिए विवाद का समाधान संभव नहीं है। अदालत ने यह भी दर्ज किया था कि अधिनियम में बातचीत की प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा एक वर्ष निर्धारित है।

    नवंबर 2024 में अदालत को सूचित किया गया कि तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच मध्यस्थता प्रक्रिया विफल हो गई है। इसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने जल विवाद अधिकरण के गठन का स्पष्ट निर्देश जारी किया है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story