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दोस्त को डूबते देखकर भागना निंदनीय, लेकिन इससे अकेले हत्या साबित नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी दोस्त को नदी में डूबते हुए देखने के बाद मौके से भाग जाना और उसके परिवार को घटना की जानकारी नहीं देना निंदनीय आचरण हो सकता है, लेकिन केवल इस आधार पर इसे हत्या का आपराधिक सबूत नहीं माना जा सकता।अदालत ने कहा कि ऐसे आचरण से अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि व्यक्ति ने हत्या की।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने नदी में डूबने से हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में हत्या के दोषी ठहराए गए दो लोगों को बरी कर दिया।अदालत ने पाया कि मामले में...

कॉलेजियम की दोहराई सिफारिशों पर रोक न लगाए केंद्र, ठोस कारण के बिना नियुक्ति रोकी न जाए: जस्टिस केएम जोसेफ

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस केएम जोसेफ ने केंद्र सरकार से अपील की कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से दोहराई गई न्यायिक नियुक्तियों की सिफारिशों को लंबित न रखा जाए।उन्होंने कहा कि ऐसी सिफारिशों पर तब तक कार्रवाई होनी चाहिए जब तक नियुक्ति के खिलाफ कोई वास्तव में ठोस और नियुक्ति से संबंधित कारण मौजूद न हो। केरल हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित व्याख्यान में जस्टिस जोसेफ ने न्यायिक नियुक्तियों को लेकर सरकार और न्यायपालिका के बीच...

लोकतंत्र में सुप्रीम कोर्ट और CJI भी जायज़ जांच-पड़ताल से ऊपर नहीं: NALSAR स्टूडेंट काउंसिल ने BCI के कदम की निंदा की

NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ की स्टूडेंट बार काउंसिल ने बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के उस पत्र की निंदा करते हुए बयान जारी किया, जिसमें यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स के एनरोलमेंट पर रोक लगाने की बात कही गई। यह रोक इसलिए लगाई गई, क्योंकि उन्होंने CJI सूर्य कांत को दीक्षांत समारोह में अतिथि के तौर पर बुलाए जाने का विरोध किया।स्टूडेंट बॉडी का कहना है कि BCI प्रमुख के तौर पर मिश्रा का पत्र बार काउंसिल के कानूनी कामों के अनुरूप नहीं था और उनका यह कदम "उनके पद के...

CJI सूर्य कांत ने आज़ादी की लड़ाई में वकीलों की भूमिका पर ज़ोर दिया, कहा- कानूनी बिरादरी को संवैधानिक वादे को ज़िंदा रखना चाहिए

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने 15 अगस्त, 2026 को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कानूनी पेशे की बड़ी संवैधानिक और सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बार की मौजूदा ज़िम्मेदारियों और भारत की आज़ादी की लड़ाई में वकीलों की भूमिका के बीच सीधा संबंध बताया।अपने संबोधन में CJI सूर्य कांत ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का "कानून के साथ गहरा और स्थायी संबंध" था। उन्होंने बताया कि देश के कुछ प्रमुख नेता और आधुनिक भारत के निर्माता, जिनमें महात्मा...

इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: अवध बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए 30% आरक्षण; 2028 से रोटेशन के आधार पर अध्यक्ष का पद आरक्षित

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि अवध बार एसोसिएशन, हाईकोर्ट, लखनऊ की गवर्निंग/एग्जीक्यूटिव काउंसिल में 30% पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएं।हाईकोर्ट ने पद-वार आरक्षण और रोटेशन का शेड्यूल भी तय किया, जिसके तहत 2028 से हर 3 साल में अध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की बेंच ने अवध बार एसोसिएशन में महिला वकीलों के लिए आरक्षण से जुड़ी दो PIL याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत...

BCI चेयरमैन के सीमाहीन कार्यकाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, काउंसिल के कामकाज की समीक्षा की भी मांग

NALSAR 2026 के ग्रेजुएट्स के खिलाफ हाल ही में जारी निर्देशों को लेकर BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई। इसमें उन प्रावधानों को चुनौती दी गई, जो बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और स्टेट बार काउंसिल्स के शीर्ष पदों पर एक ही व्यक्ति को लगातार बने रहने की अनुमति देते हैं।याचिकाकर्ता एडवोकेट एम. वरधन ने तर्क दिया कि चुने हुए प्रतिनिधियों का लंबे समय तक पद पर बने रहना, चुनाव में देरी और कुल कार्यकाल की सीमा का न होना इन...

यह सुप्रीम कोर्ट की ज़िम्मेदारी कि वह देश के लिए ज़रूरी मामलों पर जल्द फ़ैसला ले: जस्टिस के.एम. जोसेफ़ ने स्थायी संविधान पीठ बनाने का सुझाव दिया

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस के.एम. जोसेफ़ ने सुझाव दिया है कि देश के अहम मुद्दों पर फ़ैसला लेने के लिए शीर्ष अदालत में एक स्थायी और नियमित संविधान पीठ (Constitution Bench) बनाई जानी चाहिए। यह एक संस्थागत सुधार होगा।उन्होंने कहा,"मेरा हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की बुनियादी ज़िम्मेदारी और भूमिका - चाहे उसे शीर्ष अदालत, संवैधानिक अदालत, उच्च अदालत या सबसे बड़ी अदालत कहा जाए - देश के लिए सबसे अहम मामलों पर तेज़ी से फ़ैसला लेना है... इसलिए मेरा विनम्र और सम्मानजनक अनुरोध है कि...

क्या भारत को अविकसित ही रहना चाहिए? : फ़ूड पैकेज लेबलिंग पर ग्लोबल नियमों को अपनाने के केंद्र के विरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराज़गी

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र के उस रुख़ को गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि पैक्ड फ़ूड आइटम पर ज़्यादा शुगर, सोडियम या फैट की मात्रा के बारे में चेतावनी देने के मामले में वह इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स का पालन नहीं कर सकता। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या भारत को अविकसित ही रहना चाहिए, जबकि मोटापा एक बड़ी पब्लिक हेल्थ समस्या बनी हुई है।ये टिप्पणियां 'फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया' (FSSAI) द्वारा 'फ्रंट-ऑफ़-पैकेज लेबलिंग' (FOPL) को लागू न कर पाने के संदर्भ में की गईं; FOPL एक ऐसा...

BCI चेयरमैन ने NALSAR छात्रों के खिलाफ आदेश कैसे जारी किए?: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जांच की मांग

NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ के दो पूर्व छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। वे इस बात की जांच चाहते हैं कि बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने किस तरह से यूनिवर्सिटी को निर्देश देने वाले पत्र जारी किए। इन पत्रों में यूनिवर्सिटी से उन छात्रों की पहचान करने को कहा गया, जो दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को बुलाने के खिलाफ अभियान में शामिल थे। साथ ही यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों के एनरोलमेंट (पंजीकरण) पर रोक लगाने का निर्देश भी दिया...

अब शांति के बारे में सोचें: सुप्रीम कोर्ट ने कुकी और मैतेई समूहों से मणिपुर में हाईवे पर लगे ब्लॉकेड को खत्म करने का प्रस्ताव मांगा

मणिपुर में नेशनल हाईवे 2 पर लगे ब्लॉकेड को हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज कुकी और मैतेई समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले दो संगठनों से राज्य के सभी हाईवे से ब्लॉकेड हटाने के लिए प्रस्ताव देने को कहा।पक्षों से "अब शांति के बारे में सोचने" और मामले को "विरोधी मुकदमेबाजी" के तौर पर न देखने को कहते हुए कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) को भी मामले में शामिल किया, जो नेशनल हाईवे का रखरखाव करती है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य...

JJ Act | रेगुलर कोर्ट ने नाबालिग पर बालिग़ की तरह मुक़दमा चलाया तो भी सज़ा का फ़ैसला रद्द नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी नाबालिग पर रेगुलर क्रिमिनल कोर्ट में मुक़दमा चलाया गया तो सिर्फ़ इस वजह से मामले के गुण-दोष के आधार पर हुई सज़ा (कनविक्शन) रद्द करने की ज़रूरत नहीं। इसी के अनुसार, कोर्ट ने एक ऐसे आरोपी की सज़ा (कनविक्शन) को तो बरकरार रखा, जिस पर बालिग़ की तरह मुक़दमा चलाया गया था, लेकिन अपराध की तारीख़ पर उसके नाबालिग होने का पता चलने के बाद उसे सुनाई गई सज़ा रद्द कर दी।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की, जिसमें अपील करने वाले आरोपी...

तुरंत ज़ब्ती की ज़रूरत वाली स्थितियों में NDPS Act की धारा 42 का काफ़ी हद तक पालन काफ़ी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब नशीले पदार्थों से जुड़ी जानकारी ऐसी परिस्थितियों में मिलती है जहाँ चलती हुई गाड़ी को तुरंत रोकना ज़रूरी हो तो नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) की धारा 42 की ज़रूरतों को स्थिति की गंभीरता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। मामले के तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि कानूनी सुरक्षा उपायों का काफ़ी हद तक पालन किया गया और प्रक्रियात्मक कमियों के आधार पर बरामदगी को अमान्य करने से इनकार किया।कोर्ट ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए की,...

NALSAR बैच के विरोध के खिलाफ BCI की कार्रवाई पर CJI नाराज, कहा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना छात्रों का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की ओर से की गई कार्रवाई पर शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जताई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है तथा बार काउंसिल को इस मामले में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।मामला NALSAR के छात्रों द्वारा चीफ जस्टिस की दीक्षांत समारोह में भागीदारी के विरोध में चलाए गए अभियान से जुड़ा है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन मनन कुमार...

दिव्यांगों पर आपत्तिजनक मजाक मामले में समय रैना समेत 5 कॉमेडियंस के खिलाफ FIR रद्द: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर आपत्तिजनक और असंवेदनशील मजाक करने के मामले में कॉमेडियन समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दीं।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने यह आदेश जारी करते हुए कहा कि आरोपियों ने मामले के बाद सुधारात्मक कदम उठाए और दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा एवं जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए।दिव्यांगों के लिए चेस टूर्नामेंट और फंडरेजिंग कार्यक्रमकोर्ट ने...