I-PAC छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट में ED की याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार ने आपत्ति जताई

Praveen Mishra

2 Feb 2026 2:54 PM IST

  • I-PAC छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट में ED की याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार ने आपत्ति जताई

    प्रवर्तन निदेशालय की उस याचिका पर, जिसमें उसने आई-पैक (I-PAC) कार्यालय में की गई छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कथित हस्तक्षेप को चुनौती दी है, राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में काउंटर हलफनामा दायर किया है। राज्य ने समान मुद्दों पर कलकत्ता उच्च न्यायालय में कार्यवाही लंबित होने का हवाला देते हुए ईडी की रिट याचिका की पोषणीयता (maintainability) पर आपत्ति उठाई है।

    राज्य सरकार ने दलील दी है कि ईडी के पास ऐसे मौलिक अधिकार नहीं हैं, जिनके आधार पर वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सके। साथ ही, राज्य ने यह भी कहा कि उक्त घटनाक्रम में अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। काउंटर हलफनामे में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट—दोनों में एक साथ कार्यवाही चलने को लेकर “समांतर कार्यवाही” (parallel proceedings) पर भी सवाल उठाया गया है।

    राज्य ने यह भी तर्क दिया कि ईडी को समग्र (omnibus) तलाशी और जब्ती का अधिकार नहीं है और आई-पैक में तलाशी से पहले कोई प्रभावी नोटिस नहीं दिया गया। इसके अतिरिक्त, ईडी पर विशेषाधिकार प्राप्त संचार (privileged communications) के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए हैं।

    गौरतलब है कि ईडी ने अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में पश्चिम बंगाल राज्य, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित अन्य को पक्षकार बनाया है। पिछले महीने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने इस याचिका पर नोटिस जारी करते हुए ईडी अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज तीन एफआईआर में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

    यह याचिका 8 जनवरी को कोलकाता स्थित आई-पैक कार्यालय में कोयला घोटाला मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में ईडी द्वारा की गई तलाशी के बाद सामने आए घटनाक्रम से जुड़ी है। ईडी का आरोप है कि तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ कार्यालय पहुंचीं और ईडी अधिकारियों से सामना किया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा कुछ फाइलें परिसर से ले जाई गईं, जिससे जांच प्रभावित हुई।

    ईडी के अनुसार, तलाशी स्थल पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी और दस्तावेजों के कथित हटाए जाने से अधिकारियों पर दबाव और डर का माहौल बना तथा एजेंसी की स्वतंत्र रूप से वैधानिक कार्य करने की क्षमता प्रभावित हुई। एजेंसी ने राज्य प्रशासन द्वारा बार-बार अवरोध और असहयोग का भी आरोप लगाया है।

    इस बीच, पश्चिम बंगाल पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ एक एफआईआर भी दर्ज की है। सुप्रीम कोर्ट में दायर अनुच्छेद 32 की याचिका में ईडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो से स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश की मांग की है, यह कहते हुए कि राज्य कार्यपालिका के कथित हस्तक्षेप के चलते किसी तटस्थ केंद्रीय एजेंसी से जांच आवश्यक है।

    ईडी ने सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले इसी घटना को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय का भी रुख किया था और सुरक्षा व उचित निर्देशों की मांग की थी। 14 जनवरी को उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए ईडी के इस बयान को रिकॉर्ड किया था कि उसने आई-पैक या उसके निदेशक प्रतीक जैन के कार्यालय से कोई जब्ती नहीं की है।

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