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सरकारी ज़मीन का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कैसे किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों से झंडे हटाने का आदेश बरकरार रखा
'सरकारी ज़मीन का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कैसे किया जा सकता है?' सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों से झंडे हटाने का आदेश बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। उक्त आदेश में सभी राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों को राष्ट्रीय राजमार्गों और सरकारी ज़मीन सहित सार्वजनिक स्थलों पर उनके द्वारा लगाए गए स्थायी झंडों को हटाने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।याचिकाकर्ता के वकील ने सार्वजनिक स्थलों से झंडों को हटाने के निर्देश की आलोचना की और तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने कई निर्देश दिए, जबकि मूल मामले में मांगी गई...

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही गेट के बाहर सीवर की मैन्युअल सफाई को गंभीरता से लिया, लोक निर्माण विभाग से स्पष्टीकरण मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही गेट के बाहर सीवर की मैन्युअल सफाई को गंभीरता से लिया, लोक निर्माण विभाग से स्पष्टीकरण मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने ही गेट एफ पर चल रही सीवर की मैन्युअल सफाई का संज्ञान लिया और इस अवैध और खतरनाक प्रथा के जारी रहने के संबंध में लोक निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा।2023 में डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ मामले में न्यायालय ने हाथ से मैला ढोने और सीवर की मैन्युअल सफाई की खतरनाक और अमानवीय प्रथा को रोकने के लिए कई निर्देश जारी किए।इसके बाद जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अरविंद कुमार की एक खंडपीठ इन निर्देशों के अनुपालन की निगरानी कर रही थी। इस वर्ष जनवरी में खंडपीठ ने...

एनरोलमेंट के दौरान बार काउंसिल ऑप्शनल फी के रूप में कोई राशि नहीं ले सकतीं: सुप्रीम कोर्ट
एनरोलमेंट के दौरान बार काउंसिल "ऑप्शनल फी" के रूप में कोई राशि नहीं ले सकतीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि इंडिया बार काउंसिल (BCI) या राज्य बार काउंसिल एनरोलमेंट के लिए लीगल फीस के अतिरिक्त "वैकल्पिक शुल्क" के रूप में कोई फीस नहीं ले सकतीं।कोर्ट ने कहा गया,"हम स्पष्ट करते हैं कि वैकल्पिक जैसा कुछ नहीं है। कोई भी राज्य बार काउंसिल या भारतीय बार काउंसिल वैकल्पिक रूप से किसी भी राशि का कोई भी शुल्क नहीं लेगी। उन्हें इस न्यायालय द्वारा मुख्य निर्णय में जारी निर्देशों के अनुसार ही शुल्क लेना होगा।"न्यायालय ने गौरव कुमार बनाम भारत संघ (2024) के अपने निर्णय की...

लंबित फैसले लिखने की अनुमति लें: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के जजों से कहा
'लंबित फैसले लिखने की अनुमति लें': सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के जजों से कहा

झारखंड हाईकोर्ट द्वारा फैसले सुनाने में लगातार हो रही देरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने जजों को सुझाव दिया कि वे अवकाश लेकर लंबित मामलों का निपटारा करें।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ राज्य में होमगार्ड की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों वाली 6 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। हाई कोर्ट 2 साल (2023 से) बीत जाने के बावजूद याचिकाकर्ताओं के मामलों में फैसला सुनाने में नाकाम रहा।याचिकाकर्ताओं को 2017 में हुई होमगार्ड की भर्ती प्रक्रिया में सफल घोषित किया गया...

बिहार SIR | ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटाने का कारण बताना जरूरी नहीं: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
बिहार SIR | ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटाने का कारण बताना जरूरी नहीं: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

मतदाता सूची के बिहार विशेष गहन संशोधन (SIR) से संबंधित चल रहे मामले में, भारत के चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि यह लागू नियमों के तहत उन व्यक्तियों की एक अलग सूची प्रकाशित करने के लिए बाध्य नहीं है, जिन्हें मतदाता सूची के मसौदे में शामिल नहीं किया गया है।चुनाव आयोग ने आगे प्रस्तुत किया कि नियम इसे ड्राफ्ट रोल में किसी भी व्यक्ति को शामिल न करने के कारणों को प्रस्तुत करने के लिए बाध्य नहीं करते हैं। इसमें कहा गया है कि उसने राजनीतिक दलों के साथ उन व्यक्तियों की बूथ-स्तरीय सूची साझा...

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व हाईकोर्ट जज को बांके बिहारी मंदिर के प्रशासन के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व हाईकोर्ट जज को बांके बिहारी मंदिर के प्रशासन के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मथुरा के वृंदावन स्थित बांके बिहारी जी महाराज मंदिर के दैनिक कार्यों की देखरेख और पर्यवेक्षण हेतु इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया।न्यायालय ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश, 2025 के तहत गठित समिति के संचालन को निलंबित करते हुए इस समिति का गठन किया। न्यायालय ने अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाला मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास भेज दिया। हाईकोर्ट द्वारा...

रजिस्टर्ड सोसाइटी के‌ खिलाफ कंस्ट्रक्टिव ट्रस्ट के रूप में S. 92 CPC का मुकदमा कब चलाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धांतों की व्याख्या की
रजिस्टर्ड सोसाइटी के‌ खिलाफ 'कंस्ट्रक्टिव ट्रस्ट' के रूप में S. 92 CPC का मुकदमा कब चलाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धांतों की व्याख्या की

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिए गए एक फैसले (ऑपरेशन आशा बनाम शैली बत्रा एवं अन्य) में सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 92 से संबंधित सिद्धांतों का सारांश प्रस्तुत किया और उन परिस्थितियों की व्याख्या की जिनमें किसी पंजीकृत सोसाइटी को 'कंस्ट्रक्टिव ट्रस्ट' माना जा सकता है ताकि उसके खिलाफ धारा 92 के अंतर्गत मुकदमा चलाया जा सके। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ की ओर से दिए गए निर्णय में निष्कर्षों का सारांश इस प्रकार है:i. CPC की धारा 92 के अंतर्गत दायर किया गया मुकदमा एक विशेष...

अगर कोई संविधान से धर्मनिरपेक्षता को हटाने की कोशिश करता है तो यह  बहुत बड़ी शरारत करना होगा: जस्टिस केएम जोसेफ
अगर कोई संविधान से धर्मनिरपेक्षता को हटाने की कोशिश करता है तो यह बहुत बड़ी शरारत करना होगा: जस्टिस केएम जोसेफ

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि अगर कोई संविधान की प्रस्तावना से धर्मनिरपेक्षता शब्द को हटाने की कोशिश करता है तो यह शरारत होगी। उन्होंने आगे कहा कि संविधान के तहत भारत वैसे भी एक धर्मनिरपेक्ष देश है।एर्नाकुलम के सरकारी लॉ कॉलेज में लेक्चर सीरीज के तहत बोलते हुए जस्टिस जोसेफ ने कहा कि समस्याएं धर्मों से नहीं, बल्कि राजनेताओं द्वारा सत्ता हासिल करने के लिए धर्म का इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति से उत्पन्न होती हैं।जस्टिस जोसेफ ने कहा,"असली समस्या यह है कि राजनेता धर्म का...

CPC की धारा 80 का नोटिस न देने पर डिक्री रद्द हो जाती है, निष्पादन न्यायालय शून्यता की दलील पर विचार करने के लिए बाध्य: सुप्रीम कोर्ट
CPC की धारा 80 का नोटिस न देने पर डिक्री रद्द हो जाती है, निष्पादन न्यायालय शून्यता की दलील पर विचार करने के लिए बाध्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि डिक्री के 'शून्य' होने का तर्क निष्पादन के चरण में उठाया जा सकता है और निष्पादन न्यायालय गुण-दोष के आधार पर उस पर निर्णय लेने के लिए बाध्य है।न्यायालय ने कहा,"CPC की धारा 47 के अनुसार, निष्पादन न्यायालय को डिक्री के निष्पादन, निर्वहन या संतुष्टि से संबंधित प्रश्नों की जाँच करने का अधिकार है। वह डिक्री से आगे नहीं जा सकता; लेकिन साथ ही, जब यह दलील दी जाती है कि डिक्री शून्य है। इसलिए लागू नहीं की जा सकती तो निष्पादन न्यायालय ऐसे आवेदन की जांच करने और उसके...

सत्ताधारी दल के क़रीबी होने की आलोचना को लेकर जस्टिस अभय एस ओक ने न्यायपालिका और मीडिया की स्वतंत्रता पर दिया जोर
सत्ताधारी दल के क़रीबी होने की आलोचना को लेकर जस्टिस अभय एस ओक ने न्यायपालिका और मीडिया की स्वतंत्रता पर दिया जोर

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस अभय ओक ने शुक्रवार को कहा कि इस आलोचना से बचने के लिए कि आजकल मीडिया और न्यायपालिका सत्ताधारी दल के प्रति झुकाव रखते हैं, लोकतंत्र के दोनों स्तंभों को निडर और स्वतंत्र होना होगा।जज ने मुंबई प्रेस क्लब में "सरकार को जवाबदेह ठहराना: एक स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र प्रेस की भूमिका" विषय पर अपने व्याख्यान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा में मीडिया और अदालतों की भूमिका के बारे में बात की और प्रेस के गिरते मानकों और न्यायपालिका की आलोचना पर भी बात की।जस्टिस ओक...

न्यायपालिका में आम आदमी का विश्वास बनाए रखने के लिए हमें अपना कर्तव्य निभाना चाहिए: जस्टिस सुधांशु धूलिया
न्यायपालिका में आम आदमी का विश्वास बनाए रखने के लिए हमें अपना कर्तव्य निभाना चाहिए: जस्टिस सुधांशु धूलिया

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित अपने विदाई समारोह में जस्टिस सुधांशु धूलिया ने आज कहा कि आम आदमी के विश्वास ने ही न्यायपालिका को जीवित रखा है और जजों के साथ-साथ वकीलों को भी उस विश्वास को बनाए रखने के लिए अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।उन्होंने कहा,"आम आदमी के विश्वास ने न्यायपालिका को जीवित रखा। वकील स्वतंत्रता संग्राम में सबसे आगे थे। वकीलों को साहस के साथ बोलना चाहिए, निडर होना चाहिए। इस देश के लोग हमारी ओर आशा भरी नज़रों से देखते हैं। हमें अपना विश्वास बनाए रखने के लिए अपना...

सुप्रीम कोर्ट ने SCLSC अध्यक्ष से SCLSC के स्थायी कर्मचारियों द्वारा एससी रजिस्ट्री कर्मचारियों के समान वेतन-समानता की मांग पर विचार करने का अनुरोध किया
सुप्रीम कोर्ट ने SCLSC अध्यक्ष से SCLSC के स्थायी कर्मचारियों द्वारा एससी रजिस्ट्री कर्मचारियों के समान वेतन-समानता की मांग पर विचार करने का अनुरोध किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक रिट याचिका का निपटारा किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति (SCLSC) के स्थायी कर्मचारियों ने अन्य कर्मचारियों के समान वेतन-समानता की मांग की थी। इस याचिका का निपटारा SCLSC के अध्यक्ष, जस्टिस विक्रम नाथ से अनुरोध के साथ किया गया कि वह ऐसे कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व पर विचार करें और इस मामले में उचित निर्णय लें।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष SCLSC के स्थायी कर्मचारी याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उन्हें अन्य आउटसोर्स या संविदा...

सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया की सुरक्षा जांच की मांग वाली याचिका खारिज की, पूछा – सिर्फ एयर इंडिया ही क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया की सुरक्षा जांच की मांग वाली याचिका खारिज की, पूछा – सिर्फ एयर इंडिया ही क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एयर इंडिया की सुरक्षा जांच, रखरखाव प्रक्रियाओं और संचालन संबंधी नियमों की स्वतंत्र जांच की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह याचिका अहमदाबाद विमान दुर्घटना के बाद दायर की गई थी, जिसमें 270 लोगों की जान चली गई थी।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने याचिका को "वापस ली गई" के रूप में खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं को उचित समय पर उपयुक्त रिट याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता दी।जस्टिस सूर्यकांत ने कहा,"थोड़ा इंतज़ार...

सैफ अली खान भोपाल नवाब वारिस मामला: सुप्रीम कोर्ट ने MP हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
सैफ अली खान भोपाल नवाब वारिस मामला: सुप्रीम कोर्ट ने MP हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता सैफ अली खान के पूर्वज और भोपाल के अंतिम शासक नवाब हमीदुल्ला खान की निजी संपत्ति से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवाद को नये सिरे से सुनवाई के लिये वापस निचली अदालत में भेजने के मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर शुक्रवार को अंतरिम रोक लगा दी।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल चंदुरकर की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30 जून, 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली दिवंगत नवाब मोहम्मद हमीदुल्ला खान के बड़े भाई के उत्तराधिकारियों उमर और राशिद अली द्वारा दायर याचिका पर...

हाईकोर्ट ने समय से पहले दखल दिया: PMLA मामले में कार्ती चिदंबरम के खिलाफ आरोप तय करने की सुनवाई टालने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
'हाईकोर्ट ने समय से पहले दखल दिया': PMLA मामले में कार्ती चिदंबरम के खिलाफ आरोप तय करने की सुनवाई टालने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने चीनी वीजा और एयरसेल मैक्सिस मामलों से संबंधित धन शोधन निवारण अधिनियम की कार्यवाही में कांग्रेस सांसद कार्ति चिदम् बरम के खिलाफ आरोपों पर दलीलें स् थगित करने के दिल्ली हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ ED की याचिका पर आज नोटिस जारी किया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने ED के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया , जिन्होंने सवाल किया कि पीएमएलए मुकदमे को विधेय अपराध में आरोप तय किए जाने का इंतजार क्यों करना चाहिए। सबसे पहले,...

सुप्रीम कोर्ट असली हिंदुस्तान है, जहां वकील देश के हर कोने से आते हैं: जस्टिस सुधांशु धूलिया का विदाई संबोधन
सुप्रीम कोर्ट असली हिंदुस्तान है, जहां वकील देश के हर कोने से आते हैं: जस्टिस सुधांशु धूलिया का विदाई संबोधन

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुधांशु धूलिया 9 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने अपने विदाई समारोह में कहा कि सुप्रीम कोर्ट असल में हिंदुस्तान है, जहां की विविधता और समावेशिता पूरे देश की पहचान को दर्शाती है।जस्टिस धूलिया ने कहा,"सुबह मेरी पत्नी ने पूछा कि आपको सबसे ज्यादा किस चीज़ की कमी महसूस होगी। मैंने कहा 'हिंदुस्तान' की। वह सोचने लगी कि शायद मैं अपनी समझ खो रहा हूं। मेरे कहने का मतलब था सुप्रीम कोर्ट बार। यह शायद दुनिया की एकमात्र अदालत है, जहां देश के हर कोने से हर राज्य से वकील आते हैं। यही...